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क्या फेक वेंटिलेटर्स के चलते राष्ट्रीय दर से दोगुना है गुजरात में कोविड-19 मुत्युदर

यदि कोई कोविड-19 संक्रमित है और गुजरात में है तो उसके मरने की आशंका दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों की तुलना में कई गुना ज्यादा है ये हम नहीं आंकड़े बोल रह हैं।

गुजरात में पिछले 24 घंटों में 24 कोरोना मरीजों की मौत के बाद गुजरात में कोविड-19 मृतकों की संख्या 802 हो गई है। गुजरात में कोरोना से मौत की दर 6.04 प्रतिशत हो गई है, जो देशभर में मौत की दर 3.1% का ठीक दोगुना है।

तमिलनाड़ु में कोविड-19 संक्रमितों की संख्या 14 हजार के पार है जो कि गुजरात की तुलना में थोड़ा ज़्यादा है लेकिन तमिलनाड़ु अब तक कोरोना से सिर्फ़ 101 लोगों की ही मौत हुई है। यानि तमिलनाड़ु में कोविड-19 मृत्युदर .70 है। तमिलनाड़ु की तुलना में गुजरात में कोरोना मृत्युदर 8.5 प्रतिशत ज़्यादा है।

वहीं राजधानी दिल्ली में कोविड-19 संक्रमितों की संख्या 12910 है। जो कि गुजरात में संक्रमितों की संख्या 13,273 के लगभग बराबर ही है। लेकिन मृत्युदर की बात करें तो दिल्ली में 212 लोगों की मृत्यु कोविड-19 से हुई है यानि 1.61 प्रतिशत। एक समान संक्रमितों की संख्या होने के बावजूद दिल्ली की तुलना में गुजरात में कोरोना मुत्युदर 3.75 गुना ज़्यादा है।

अब देश के सबसे ज़्यादा कोविड-19 प्रभावित राज्य महाराष्ट्र की बात करें तो महाराष्ट्र में करीब 44 हजार कोविड-19 मरीज हैं जबकि महाराष्ट्र में अब तक 1518 लोगों की मृत्यु कोरोना से हुई है। यानि महाराष्ट्र में कोविड-19 मृत्युदर 3.45 प्रतिशत है। जो कि गुजरात की तुलना में 1.75 गुना कम है।

किस राज्य में अब तक कितनी मौतें?

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, महाराष्ट्र में कोरोना से अब तक 1518 लोगों की जान गई है। इसके बाद गुजरात में 802, मध्य प्रदेश में 273, पश्चिम बंगाल में 265, राजस्थान में 155, दिल्ली में 212, उत्तर प्रदेश में 149, बिहार में 120, तमिलनाडु में 101, आंध्र प्रदेश में 53, तेलंगाना में 50, कर्नाटक में 41, पंजाब में 40, जम्मू-कश्मीर में 22, हरियाणा में 16, , केरल में 4, झारखंड में 3, ओडिशा में 7, चंडीगढ़ में 3, हिमाचल प्रदेश में 3, असम में 4, और मेघालय में एक मौत हुई है।

क्या फेक वेंटिलेटर्स के चलते हुई गुजरात में कोरोना मृत्यु दर दोगुना?

गुजरात में फेक वेंटिलेटर मसले को लेकर कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में 300 से ज्यादा कोविड-19 मरीजों की जान गई है और ये मौतें फेक वेंटिलेटरों के चलते हुई हैं। गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने सरकार से सवाल किए हैं कि जब बीजेपी की सरकार को पता था कि ये मशीनें कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज नहीं कर सकतीं तो उन्हें सरकारी अस्पतालों में क्यों लगाया गया? इन स्वदेशी वेंटिलेटरों पर मरीजों की जान ताक पर रखी गई। साथ ही उन्होंने सरकार से पूछा है कि गुजरात के कितने अस्पतालों में ये फेक वेंटिलेटरों का प्रयोग हो रहा है। गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा है कि सरकार कोविड-19 के उन मरीजों का आंकड़ा बताए, जिन्हें इन मशीनों पर रखा गया था और उनकी जान चली गई।

कांग्रेस का कहना है कि कोविड-19 के मरीजों की जान ताक पर रखकर इन मशीनों पर उन्हें रखा गया और उनकी मौत हो गई। अमित चावड़ा ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में अंबू बैग लगे हैं और उन्हें वेंटिलेटर्स कहा जा रहा है। इस मामले में न्यायिक जांच होनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं फेक वेंटिलेटर्स के कारण अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में 300 से ज्यादा कोरोना वायरस के मरीजों की जान चली गई।

गुजरात सरकार का फोकस कोरोना संक्रमितों के इलाज से ज़्यादा ‘मित्रों’ को फायदा पहुँचाने पर है

‘फेक वेंटिलेटर’ कांड के बाद स्पष्ट हो गया है कि मौजूदा गुजरात सरकार ने आपदा को भी अवसर में तब्दील कर दिया। इसी के तहत करीबी उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए गुजरात में हजारों लोगों की जान जोखिम में डाल दी गई। कोविड-19 संक्रमितों का इलाज करने वाले राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों को वेंटिलेटर के बजाय फेक वेंटिलेटर यानि ‘अम्बू बैग’ पकड़ा दिया गया। प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस का आरोप है कि गुजरात में 300 कोरोना संक्रमितों की जान ‘फेक वेंटिलेटर’ के चलते हुई है। यदि हम राष्ट्रीय मृत्यु दर और अन्य राज्यों की कोविड-19 मृत्यु दर के बरअरक्श गुजरात में कोरोना मृत्यु दर को रखकर देखें तो इस आरोप में दम नज़र आता है।

बता दें कि गुजरात की भाजपा सरकार ने मुख्यमंत्री विजय रुपानी की अगुआई में सरकारी अस्पतालों में फेक वेंटिलेटर्स लगवाए थे। खुद मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने 4 अप्रैल को अहमदाबाद के सिटी अस्पताल में फेक वेंटिलेटर सेटअप का उद्घाटन करते हुए इसे ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बना वेंटिलेटर बताया था।

फेक वेंटिलेटर धामन-1 (Dhaman-1) राजकोट की एक ज्योति सीएनसी कंपनी में बने हैं। इस कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर पराक्रम सिंह जडेजा सीएम रुपानी के मित्र हैं। इस तरह के 900 फेक वेंटिलेटर्स गुजरात के अलग-अलग अस्पतालों में लगाए गए, जिनमें 230 अकेले अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में लगे हैं। अहमदाबाद मिरर ने धमन-1 के बारे में खबर छापी थी कि इसे ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से लाइसेंस नहीं मिला है। इसे 4 अप्रैल को मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया था, लेकिन लॉन्चिंग से पहले सिर्फ एक ही मरीज पर टेस्टिंग की गई थी।


(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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