Sunday, October 17, 2021

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लीक ख़बर ने तो नहीं फेर दिया रिटायरमेंट की उम्र घटाने के मंसूबों पर पानी

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देश में सभी सांसदों के वेतन में 30 फीसद कटौती और दो साल के लिए सांसद निधि पर रोक के बाद सभी केन्द्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते को स्थगित किये जाने के बाद पूरे देश में सरकारी कर्मचारियों में भी अनिश्चितता का माहौल है। ऐसे में भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं या ऐसी ख़बरें सूत्रों के हवाले से सामने आ रही हैं जिनसे अफरातफरी फैलने की आशंका इस कोरोना काल में बढ़ती जा रही है। अब खबर फैली है कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से सरकार अब रिटायरमेंट की उम्र को घटाकर 50 साल कर सकती है। 

हालांकि सरकारी मशीनरी तुरंत इसका खंडन करके डैमेज कंट्रोल कर रही है।सर्विस सेक्टर में यह भी चर्चा है कि अवकाश प्राप्त नौकरशाहों की ओर से संचालित ‘द सेन टाइम्स’ द्वारा इस खबर के लीक कर दिए जाने के कारण सरकार की मंशा पर पानी फिर गया है।

इसके बावजूद जिस तरह देश की जीडीपी के एक फीसद से नीचे चले जाने का अनुमान अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा लगाया जा रहा है उससे सरकारी सर्विस सेक्टर में यह आशंका बढ़ती जा रही है कि यदि कोरोना में पूरी तरह ठप अर्थव्यवस्था को जल्दी से पटरी पर नहीं लाया गया तो चालू वित्त वर्ष के तीसरे तिमाही से वेतन भुगतान का संकट शुरू हो सकता है।

हालांकि प्रधानमन्त्री मोदी इस खतरे से अवगत हैं और उन्होंने सरकार में विश्वास बनाये रखने के लिए मुख्यमंत्रियों से बातचीत में आश्वस्त किया कि अर्थव्यवस्था को लेकर टेंशन न लें, हमारी अर्थव्यवस्था अच्छी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हमें कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के साथ ही अर्थव्यवस्था को भी महत्व देना होगा।

दरअसल सूत्रों के हवाले से खबर के बीच वैसा ही दावा भाजपा को कोई वरिष्ठ नेता, सांसद या विधायक करता है तो मामला गम्भीर लगने लगता है। ‘द सेन टाइम्स’ नाम की एक वेबसाइट ने भी 25 अप्रैल को एक आर्टिकल छापा जिसमें दावा किया गया कि कोरोना वायरस महामारी की वजह से सरकार अब रिटायरमेंट की उम्र को घटाकर 50 साल कर सकती है। लेकिन इसके साथ ही भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने महंगाई भत्ता यानी डीए घटाने को लेकर सरकार पर निशाना साधा। इसी ट्वीट में सुब्रमण्यम स्वामी ने यह भी दावा किया कि सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र को घटाकर 50 साल करने का फैसला किया है।

इस खबर के फैलते ही पीआईबी फैक्ट चेक ने अपने वेरिफाइड हैंडल से ‘द सेन टाइम्स’ के आर्टिकल का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए इस खबर का खंडन किया है।खंडन में कहा गया है कि एक वेब न्यूज़ पोर्टल ने दावा किया है कि कोरोना वायरस जैसे संकट के समय में केंद्र सरकार के कर्मचारियों की रिटायरमेंट की उम्र घटाकर 50 साल की जा सकती है। इस रिपोर्ट में किया गया दावा गलत है। केंद्र सरकार न तो ऐसी कोई योजना बना रही है और न ही ऐसी किसी योजना पर चर्चा की गई है।

लेकिन सुब्रमण्यम स्वामी के ट्वीट से हुए डैमेज को कंट्रोल करने के लिए केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि न तो सेवानिवृत्ति की उम्र घटाने की कोई पहल की गई है और न ही सरकार के स्तर पर ऐसे किसी प्रस्ताव पर चर्चा की गई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि पिछले सप्ताह ही ऐसा फर्जी समाचार था कि सरकार ने पेंशन में 30 फीसदी कटौती और 80 वर्ष से ज्यादा उम्र वालों की पेंशन बंद करने का फैसला किया है। हालांकि, इसके विपरीत हकीकत यह थी कि 31 मार्च को ऐसा कोई पेंशनर नहीं था जिसकी पेंशन उनके खाते में जमा नहीं की गई हो। इसके साथ ही डाक विभाग की सेवाओं के माध्यम से जरूरत पड़ने पर पेंशनरों के घर पर पेंशन की धनराशि पहुंचाई गई।

इसके बाद इस समय यह खबर सुर्खियां बन रही है कि पिछले गुरुवार को ही केंद्र सरकार ने करीब 48 लाख कर्मचारियों का महंगाई भत्ता फ्रीज किया था।अब इसके बाद ऐसे कयास लगाये जा रहे हैं की सरकार ट्रांसपोर्ट अलाउंस में भी कटौती कर सकती है। इस समय लगभग हर सरकारी कर्मचारी को इसी की चिंता है और वे जगह चाहे वॉट्सऐप ग्रुप हों या सोशल मीडिया, इन्हीं सब बातों पर चर्चा कर रहा है।

हालांकि वित्त मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि अभी इस तरह का कोई फैसला नहीं हुआ है। लेकिन वहीं अन्य अधिकारी का कहना है कि यदि ऐसा होता है तो सरकार को एक महीने में ही इससे करीब 3500 करोड़ रुपये की बचत होगी। यदि किसी महीने देश के सभी केंद्रीय कर्मचारियों और अधिकारियों का ट्रांसपोर्ट अलाउंस रोक दिया जाए तो सरकार को इस मद में करीब 3500 करोड़ रुपये की बचत होगी।

रिटायरमेंट की उम्र को घटाकर 50 साल करने की खबर बेवजह नहीं फैली है।दरअसल सितम्बर 19 में ही यह खबर ब्रेक हुई थी कि केंद्र सरकार अपने अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु को कम करने जा रही है। खबर में कहा गया था कि जो प्रस्ताव तैयार हुआ है, उसके तहत सेवानिवृत्ति की आयु दो तरीके से तय होगी। पहला कर्मचारी ने अगर 33 साल की सेवा पूरी कर ली हो या उसकी खुद की आयु 60 साल हो गई हो। कहा गया था कि सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर सुरक्षा बलों पर पड़ेगा। चूंकि सैन्य एवं दूसरे सुरक्षा बलों में औसतन 22 साल के आस पास ज्वाइनिंग हो जाती है, इसलिए इनकी 33 साल की सर्विस 55 साल में ही पूरी हो जाएगी।

इस फैसले पर सरकार ने तब भी दलील दी थी कि यह कोई नई पहल नहीं है, सातवें वेतन आयोग में भी इसका जिक्र किया गया है। अगर सेवानिवृत्ति की इस योजना को लागू किया जाता है, तो बैकलॉग की समस्या दूर हो जाएगी। नई भर्तियों का रास्ता खुलेगा और जिन कर्मियों को समय पर प्रमोशन न मिलने की शिकायत रहती थी, वह भी दूर हो सकेगी। डीओपीटी सूत्रों का दावा था कि इस प्रपोजल पर काम शुरु हो चुका है। तकरीबन हर विभाग में अधिकारियों और कर्मियों की सूची तैयार हो रही है और योजना को कई चरणों में लागू किया जाएगा। इसके वित्तीय प्रावधानों को लेकर भी रिपोर्ट बनाई जा रही है और वित्त मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद अगले वित्तीय वर्ष से सेवानिवृत्ति के नए नियम क्रियान्वित कर दिए जाएंगे।

हालांकि दिसम्बर-19 में सरकार ने लोकसभा में इन सभी आशंकाओं पर विराम लगा दिया था। लोकसभा की कार्रवाई के दौरान कार्मिक कार्य राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा था कि सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से कम करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इससे पहले एक लिखित प्रश्न में सरकार से प्रश्न किया गया था क्या वह कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु को 60 वर्ष अथवा 33 साल की सेवा अवधि पूरी होने, इनमें से जो भी कम हो करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

फिर भी जिस तरह से सरकार ने डीए पर रोक लगायी है उससे इस आशंका को बल मिला है कोरोना संकट के नाम पर कि सरकार अवकाश ग्रहण करने की उम्र घटा सकती है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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