27.1 C
Delhi
Monday, September 20, 2021

Add News

एक मरहूम खिलाड़ी के नाम एक मुल्क का माफ़ीनामा

ज़रूर पढ़े

ऐसे मौके इतिहास/तवारीख में शायद ही कभी आए हों, जब मुल्क की संसद एक सुर में एक ऐसे शख्स के नाम अपनी क्षमायाचना का इजहार करती हो जबकि उस शख्स को गुजरे छह साल बीत चुके हों। ऑस्ट्रेलिया की संसद ने आठ साल पहले यही किया था जब वहां सांसदों के एक दल ने सदन के सामने एक वक्तव्य पढ़ा, जिसके समापन पर संसद में बैठे सभी सदस्यों ने खड़े होकर अपनी सहमति का इजहार किया और इस तरह महान धावक पीटर नोर्मान को याद किया।

वही पीटर नोर्मान जिन्होंने 68 के मेक्सिको ओलम्पिक्स में 200 मीटर की दौड़ 20.06 सेकेंड में पूरी की थी और रजत पदक हासिल किया था और एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया था जिसे आज तक कोई आस्ट्रेलियाई लांघ नहीं सका है। मगर सिर्फ यही बात नहीं कि वहां की संसद ने क्षमायाचना की मांग की।

15 जून 1942 को एक धार्मिक ईसाई परिवार में जन्मे पीटर नोर्मान का शुरुआती जीवन मेलबोर्न के एक उपनगर कोबुर्ग में बीता। पहले उन्होंने तरह-तरह के काम किए, वह किसी कसाई की दुकान पर भी काम सीखने गए थे। बाद में वह अध्यापक बने तथा अपने जिन्दगी के अंतिम दौर में उन्होंने विक्टोरियन डिपार्टमेण्ट आफ स्पोर्टस में काम किया।

आखिर ऐसी क्या बात थी कि समूची संसद ने पीटर नोर्मान से क्षमायाचना की मांग की थी ?

 20 वीं सदी के उस कालजयी फोटोग्राफ को किसने नहीं देखा होगा जिसमें 1968 के मेक्सिको सिटी ओलम्पिक्स के 200 मीटर दौड़ के मेडल प्रदान किए जा रहे थे और तीनों विजेताओं – टॉमी स्मिथ, जान कार्लोस और पीटर नोर्मान – ने मिल कर अमेरिका में अश्वेतों के हालात पर अपने विरोध की आवाज़ को पोडियम से ही अनूठे ढंग से सम्प्रेषित किया था। 

बीच में पीटर नोर्मान, दांये टॉमी स्मिथ और बांये जान कार्लोस।

अफ्रीकी अमेरिकी टॉमी स्मिथ (स्वर्ण विजेता) एवं जान कार्लोस (कांस्य विजेता) ने पोडियम पर खड़े़ होकर अपनी मुठ्ठियां ताने चर्चित ब्लैक पॉवर का सैल्यूट दिया था और तीसरे विजेता पीटर नोर्मान उन दोनों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए अपने सीने पर ओलम्पिक फार हयूमन राइटस का बैज लगाया था। 

बाद के दिनों में माइक वाइज नामक खेलों पर लिखने वाले पत्रकार से बात करते हुए नोर्मान ने बताया था कि जब उसने सुना कि कार्लोस और स्मिथ विरोध प्रगट करने वाले हैं तो उसने वहीं तय किया कि वह भी साथ देगा।

 ‘‘मैं यह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर किस वजह से एक अश्वेत व्यक्ति को पानी के उसी नल से पीने से रोका जाता है, उसी बस में बैठने से प्रतिबन्धित किया जाता हो या उसी स्कूल में प्रवेश नहीं दिया जाता हो जिसमें श्वेत बच्चे पढ़ते हों। मैं इस सामाजिक अन्याय के बारे में कुछ नहीं कर सकता था, मगर निश्चित ही अपना विरोध दर्ज कर सकता था।’

यह बात भले ही अब इतिहास हो चुकी हो, मगर यह एक कड़वी सच्चाई है कि इतनी बड़ी गुस्ताखी के लिए तीनों खिलाड़ियों को अपनी वतन वापसी पर काफी कुछ झेलना पड़ा था, अमेरिका जैसी वैश्विक महाशक्ति की अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर हुई इस ‘बदनामी’ का खामियाजा उनके परिवार वालों को भी भुगतना पड़ा था।

ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने अमेरिका के प्रति अपने नजदीकी का इजहार करते हुए पीटर नोर्मान को बाद में कभी अन्तरराष्ट्रीय खेलों में खेलने नहीं दिया। 1972 की म्यूनिख ओलम्पिक में बार-बार क्लालीफाई करने के बावजूद उन्हें भेजा नहीं गया, यहां तक कि 2000 में जब ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में ओलम्पिक्स का आयोजन हुआ, उस वक्त भी महान पीटर नोर्मान को याद नहीं किया गया, वे गुमनामी में ही रहे।

गौरतलब है कि अपने इस कदम को लेकर पीटर नोर्मान ने कभी अफसोस नहीं किया, उन्हें बार-बार संकेत दिया गया कि वह 1968 की ‘गलती’ के लिए माफी मांग लें, तो उनके लिए फिर समृद्धि के दरवाजे खुल सकते हैं। मगर वह महान खिलाड़ी अन्त तक अपने उसूलों पर अडिग रहा। 2006 में उनके इंतकाल के बाद उनकी अर्थी को कंधा देने के लिए टॉमी स्मिथ और जान कार्लोस दोनों ही पहुंचे थे। पत्रकारों से बात करते हुए जान कार्लोस ने बताया कि ‘हमारे साथ गनीमत थी कि पारी पारी से हम दोनों को प्रताड़ित किया जाता था, मगर जहां तक पीटर नोर्मान की बात है, उनके खिलाफ समूचा राष्ट्र खड़ा था। जाइये, दुनिया को बताइये कि कोई पीटर नोर्मान जैसा शख्स पैदा हुआ था।’

अपनी क्षमा याचना में संसद में सर्वसम्मति से इस बात को रेखांकित किया गया कि ‘यह सदन पीटर नोर्मान से क्षमा याचना करता है कि ऑस्ट्रेलिया सरकार ने उन्हें 1972 के म्यूनिख ओलिम्पिक्स में भेजा नहीं, जबकि उन्होंने बार-बार क्वालीफाई किया था और देर से ही सही इस बात को कबूल करता है कि पीटर नोर्मान ने नस्लीय समानता को आगे बढ़ाने में महान भूमिका अदा की।’

यह सवाल उठ सकता है कि आखिर ऑस्ट्रेलिया के जन प्रतिनिधियों को पीटर नोर्मान के इन्तक़ाल के छह साल बाद अचानक उनकी याद क्यों आयी थी, जिन्होंने अपने ही मुल्क में आयोजित ओलम्पिक्स के वक्त उन्हें सम्मानित अतिथि के तौर पर भी नहीं बुलाया था। 

दरअसल आप इसे लन्दन ओलम्पिक्स में ऑस्ट्रेलियाई टीम के बेहद खराब प्रदर्शन से उभरे जनाक्रोश का नतीजा कह सकते हैं या यह कह सकते हैं कि 200 मीटर की दौड़ में ऑस्ट्रेलिया के खिलाड़ी ने जो शर्मनाक प्रदर्शन किया था और आज तक कोई ऑस्ट्रेलियाई महान पीटर नोर्मान के रेकार्ड को लांघ नहीं सका है, इसके चलते लोगों ने अपने जीते जी ही ‘लीजेण्ड’ बने पीटर नोर्मान के साथ हुई इस ज्यादती को ठीक करने के लिए अपनी सरकार पर दबाव डाला हो, वजह जो भी हो, मगर इसी बहाने लोगों ने नए सिरे से इतिहास के उस गौरवशाली पन्ने को याद किया जब ओलम्पिक की वास्तविक भावना को जिन्दा रखने के लिए खिलाड़ियों ने अपने कैरियर दांव पर लगा दिए थे।

पीटर नोर्मान भले ही गुमनामी में रहे मगर उनके अनोखे हस्तक्षेप ने अगली पीढ़ी के लोगों को भी प्रेरित किया। याद करें कनाडा में 1994 में आयोजित कामनवेल्थ गेम्स, जिसमें 200 एवं 400 मीटर की विजेता आस्ट्रेलिया की मूल निवासी समुदाय की कैथी फ्रीमैन को जिसने जीत के जश्न में दौड़ते हुए दो झण्डे थामे थे, एक ऑस्ट्रेलियाई झण्डा और दूसरा मूल निवासियों का झण्डा। शायद तब तक ऑस्ट्रेलिया सरकार ने भी परिपक्वता दिखायी और ऐसा कोई कदम नहीं उठाया कि कैथी को प्रताड़ित किया जाए।

आज जब जार्ज फ्लायड की हत्या के बाद एक जबरदस्त प्रतिरोध अमेरिका में तथा तमाम पश्चिमी मुल्कों में उठ खड़ा हुआ है, जिसमें अश्वेतों के साथ कंधे से कंधा मिला कर श्वेत भी चलते दिख रहे हैं उस वक्त ऐसे किसी सपने की उम्मीद में अपना सब कुछ दांव पर लगाने वाले पीटर नोर्मान की याद और अहमियत हासिल करती है।

(सुभाष गाताडे लेखक, चिंतक और स्तंभकार हैं। आप आजकल दिल्ली में रहते हैं।)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

सरकार चाहती है कि राफेल की तरह पेगासस जासूसी मामला भी रफा-दफा हो जाए

केंद्र सरकार ने एक तरह से यह तो मान लिया है कि उसने इजराइली प्रौद्योगिकी कंपनी एनएसओ के सॉफ्टवेयर...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -

Log In

Or with username:

Forgot password?

Forgot password?

Enter your account data and we will send you a link to reset your password.

Your password reset link appears to be invalid or expired.

Log in

Privacy Policy

Add to Collection

No Collections

Here you'll find all collections you've created before.