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Categories: बीच बहस

विश्व भर ने महसूस की जॉर्ज की पीड़ा

जॉर्ज फ्लायड की हत्या ने दुनिया भर की पीड़ित कौमों को उनकी पीड़ा का अहसास करा दिया है। नतीजतन फ्लायड की हत्या के बाद शुरू हुआ विरोध-प्रदर्शनों का दायरा अमेरिका की सरहदों को तोड़कर विश्वव्यापी होता जा रहा है। दुनिया के तमाम देशों में लोग ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ आंदोलन को आगे बढ़ाने में जुट गए हैं। इसके तहत कई देशों में स्थित अमेरिकी दूतावासों के सामने विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं।

अमेरिकी दूतावासों पर विरोध-प्रदर्शन

भारत को छोड़कर दुनिया के कई देशों में स्थित अमेरिकी राजनीतिक व वाणिज्यिक दूतावासों पर इस समय प्रदर्शनकारियों द्वारा जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या का विरोध दर्ज कराया जा रहा है।

कई जगह तो ये प्रदर्शन हमले तक में बदल गए हैं।

कल बुधवार को ग्रीक स्थित एथेंस ग्रीक में अमेरिकी दूतावास के सामने ग्रीक कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थकों ने जुट कर ‘आई कैन नॉट ब्रीथ” स्लोगन लगाया। बता दें कि जॉर्ज फ्लायड अपने आखिरी समय में यही वाक्य दोहरा रहे थे जब उनकी गर्दन पुलिस ऑफिसर डेरेक चाउविन के घुटनों के नीचे दबी हुई थी।

इंग्लैंड में टेम्स नदी से लंदन स्थित अमेरिकी दूतावास तक के विरोध मार्च में प्रदर्शनकारियों ने “ब्लैक लाइव्स मैटर”  और “नस्लवाद एक वैश्विक मुद्दा है,” “आपकी चुप्पी खतरनाक है” और “कितने और?” जैसे नारों के साथ मार्च किया।

रविवार को सैंकड़ों लोगों ने बर्लिन स्थित अमेरिकी दूतावास के सामने प्रदर्शन किया। इसके अलावा तकरीबन इतने ही लोगों ने लंदन स्थित Trafalgar Square से अमेरिकी दूतावास तक विरोध मार्च निकाला।

जर्मनी के बर्लिन स्थित अमेरिकी दूतावास के आगे रविवार को लोगों ने प्रदर्शन किया।

बार्सिलोना स्पेन में एक औरत ‘आई कैन नॉट ब्रीथ’ का मास्क पहनकर अमेरिकी वाणिज्यिक दूतावास के सामने प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने आई।

कोपेनहेगन डेनमार्क में अमेरिकी दूतावास के सामने लोगों ने प्रोटेस्ट मार्च निकालकर विरोध दर्ज कराया।

मैक्सिको स्थित अमेरिकी दूतावास के सामने सैकड़ों की संख्या में लोग इकट्ठा हुए तथा फूल और ‘आई कैन नॉट ब्रीथ’ के बैनर वहां लाइन से रखकर विरोध दर्ज करवाया।

फ्रांस में भी अमेरिकी दूतावास के सामने लोग ‘आई कैन नाट ब्रीथ’ का बैनर लेकर विरोध जताने पहुँचे।

जर्मनी में लोग अमेरिकी दूतावास के सामने इकट्टा हुए और ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ और ‘जस्टिस कैन नाट वेट’ के स्लोगन दोहराए।

आयरलैंड अमेरिकी दूतावास पर भी भारी संख्या में पहुंचकर लोगों ने अपना विरोध दर्ज करवाया और ब्लैक लाइव्स मैटर के नारे दोहराए।

फ्रांस में जॉर्ज फ्लायड की हत्या में लोगों ने एडम ट्रॉरे की हत्या का अक्स देखा, विरोध पर उतरे

मंगलवार को फ्रांस की राजधानी पेरिस में 20 हजार के करीब प्रदर्शनकारी जुटे। जॉर्ज फ्लॉयड की कस्टोडियल हत्या के बाद फ्रांस के लोगों में भी आक्रोश है। दरअसल वर्ष 2016 में 24 साल के एडम ट्रॉरे (Adama Traoré) की हत्या भी बिल्कुल जॉर्ज फ्लॉयड जैसी हुई थी। जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या की तस्वीरों और वीडियो में वहां के लोगों ने फिर से Adama Traoré, की हत्या होते देखा।

हालांकि पेरिस में कोविड-19 के चलते प्रोटेस्ट और भीड़ इकट्ठा होने पर पर बैन लगा हुआ है। बावजूद इसके 20 हजार लोग जुटे। प्रोटेस्ट शांति पूर्वक चल ही रहा था कि दिल्ली, जामिया, सीलमपुर की तर्ज पर वहां भी पत्थर फेंकने की घटना घटी और बदले में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस, रबर बुलेट और लाठियों से हमला कर दिया।

पेरिस के अलावा मार्सिले (Marseille), नान्टे (Nantes), लियोन (Lyon) और लिली (Lille) में भी “ब्लैक लाइव्स मैटर” आंदोलन का आयोजन किया गया। जहां हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और ‘नो जस्टिस, नो पीस’ (न्याय नहीं तो शांति नहीं) का नारा बुलंद किया।

मिलान में लोग अमेरिकी दूतावास के सामने घुटने पर बैठकर अपने हाथों से गर्दन को पकड़कर जॉर्ज फ्लायड की कस्टोडियल मर्डर के लिए विरोध दर्ज करवाया।

आस्ट्रेलिया में विरोध-प्रदर्शन

पर्थ के सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट (CBD) में सोमवार को ब्लैक लाइव्स मैटर प्रोटेस्ट का आयोजन किया गया। साथ ही अमेरिका के प्रदर्शनकारियों के प्रति सॉलिडैरिटी का प्रदर्शन हुआ। आस्ट्रेलिया के मूलनिवासियों और अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति होने वाले दुर्व्यवहार को लेकर भी लोगों ने रोष जाहिर किया। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के तीन और शहरों में भी विरोध प्रदर्शन हुआ।

आस्ट्रेलिया के सिडनी में लोग जुटे और ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ प्रदर्शन का हिस्सा बने।

बता दें कि आस्ट्रेलिया के पर्थ में बड़ी संख्या में मूलनिवासी समुदाय के लोग पुलिस कस्टडी में मारे गए हैं। यही कारण है कि हर पृष्ठभूमि के लोगों ने जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के लिए न्याय की मांग के साथ आस्ट्रेलिया के काले नागरिकों के लिए समानता की माँग दोहराई।

न्यूजीलैंड , आयरलैंड, कनाडा में विरोध-प्रदर्शन

सोमवार को दस हजार से अधिक लोगों ने न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में विरोध मार्च निकाला। आयोजकों ने सोशल डिस्टेंस को मेंटेन करते हुए विरोध रैली निकाली। लेकिन भीड़ बढ़ने के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ गईं। प्रदर्शनकारियों ने प्रोटेस्ट मार्च के दौरान “नो जस्टिस, नो पीस” और “ब्लैक लाइफ़ मैटर” के नारे लगाए।

न्यूजीलैंड के वेलिंगटन, क्राइस्टचर्च और डुनेडिन जैसे छोटे शहरों में भी लोग एकत्रित हुए।

आयरलैंड डबलिन में अटलाटिंक सागर के आस पास लोगों ने जबलिन स्ट्रीट से मार्च निकाला और इस दौरान वो लगातार “ आई कैन नॉट ब्रीथ”के नारे लगाते रहे।

ये प्रोटेस्ट अमेरिकी प्रदर्शनकारियों की सॉलिडैरिटी में निकाला गया था। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नस्लवाद महामारी है जो कि पूरी दुनिया के लिए खतरा है।

‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ का समर्थन करते हुए कनाडा मॉन्ट्रियल, हैलिफ़ैक्स, टोरंटो और रेजिना, सास्काचेवान आदि कई शहरों में जॉर्ज फ्लायड की हत्या के विरोध में प्रदर्शन हुए।

ग्रीक में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा 7 लोग हिरासत में

ग्रीक पुलिस ने मिनियापोलिस में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के विरोध में बुधवार को एथेंस में अमेरिकी दूतावास के लिए निकले प्रोटेस्ट मार्च में अमेरिकी दूतावास के सामने फायर बम्ब से आग लगाने की कोशिश की गई। आगजनी और हिंसा करने वाले प्रदर्शनकारियों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए ग्रीक पुलिस द्वारा आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।

पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने दूतावास पर फायरबम्ब, और वहां स्थित अधिकारियों पर पत्थरों और अन्य वस्तुओं के साथ हमला किया। उन लोगों ने बेकार डिब्बे में भी आग लगा दिया।

ग्रीक पुलिस ने सात प्रदर्शनकारियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। बता दें कि कुछ 3,000 लोगों ने एथेंस शहर में सिंटगमा स्क्वायर से अमेरिकी दूतावास तक शांतिपूर्वक मार्च निकाला था। इस नस्लवाद-विरोधी और फासीवाद-विरोधी रैली में फ़्लॉइड के अंतिम शब्द “आई कैन नॉट ब्रीथ” और “ब्लैक लाइव्स मैटर” मुख्य नारे के तौर पर दोहराए गए।

ईरान, इराक, तुर्की, फिलिस्तीन, सीरिया में विरोध-प्रदर्शन

इस्तांबुल तुर्की में लोग जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के खिलाफ़ एकजुट होकर प्रदर्शन करने उतरे।

पत्रकार एलेक्स मौकडोनल्ड के मुताबिक जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे अमेरिकी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में और पुलिस क्रूरता के खिलाफ कल तुर्की की राजधानी इंस्ताम्बुल में विरोध प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद 29 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 

इराक के कुर्दिस्तान में भी लोगों ने अमेरिकी प्रदर्शनकारियों की सॉलिडैरिटी में विरोध प्रदर्शन करके जॉर्ज फ्लॉयड के लिए न्याय की माँग की गयी।

फिलिस्तीनियों ने अपने दर्द में जॉर्ज फ्लायड की हत्या के गम को भी समावेशित करते हुए फिलिस्तीन की राजधानी जेरुसलम में कल रात लाइट रेल ट्रेन को रोककर विरोध दर्ज किया। बता दें कि जेरुसलम में पिछले सप्ताह ही पुलिस द्वारा फिलिस्तीनी मूल के ऑटिज्म के शिकार इयाद हलाक़ की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी।


सीरिया के इडलिब में कलाकार अजीज असमर औक अनीस हैमडन ने जॉर्ज फ्लॉयड का भित्तिचित्र बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

ईरान के शहर मशहद में, फ्लॉयड के सम्मान में एक कैंडिल मार्च निकाला गया। मार्च में ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ के पोस्टर और फ्लॉयड के चित्र प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर के रूप में थे।

नीदरलैंड में जॉर्ज फ्लॉयड के लिए उमड़ा जनसैलाब

हेज नीदरलैंड में, नीदरलैंड एम्सटर्डम नीदरलैंड में जनसैलाब उतरा।

ब्रिटेन के कई शहरों विरोध-प्रदर्शन

लॉकडाउन के बावजूद ब्रिटेन के Trafalgar Square में सैंकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी पोस्टर बैनर लेकर एकजुट हुए और जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिसिया हत्या का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथ में “ब्लैक लाइव्स मैटर”और  “Say his name, George Floyd” का प्लेकार्ड थामे हुए थे।

मैनचेस्टर ब्रिटेन में कलाकारों द्वारा जॉर्ज फ्लायड का भित्तिचित्र बनाकार विरोध दर्ज किया गया। लीवरपूल ब्रिटेन में लोगों ने इकट्ठा होकर प्रोटेस्ट किया। सेंट जॉर्ज हॉल में लगातार विरोध प्रदर्शन चल रहा है।

मिनियापोलिस में पुलिस हिरासत में मारे गए जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद “ब्लैक लाइव्स मैटर” विरोध के दौरान लंदन में डाउनिंग स्ट्रीट के पास एक प्रदर्शनकारी पर एक पुलिस अधिकारी कुछ यूं टूट पड़ा ।

सेंट जॉर्ज हॉल के ऑफिसियल ट्विटर हैंडल से जानकारी दी गई कि जॉर्ज फ्लॉयड को श्रद्धांजलि देने के लिए हॉल को बैंगनी लाइट से सराबोर कर दिया गया।

हैमेल हैम्पस्टेड ब्रिटेन में लोगों ने एक जुट होकर प्रदर्शन किया। मेट्रोपोलिटन पुलिस के अनुसार, रविवार को मध्य लंदन में 23 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया।वहीं यूके में कहीं और, मैनचेस्टर और कार्डिफ़ में भी प्रदर्शन हुए।

जर्मनी में विरोध, बर्लिन की वाल पर जॉर्ज फ्लॉयड

सप्ताहांत में राजधानी में हजारों लोगों के विरोध प्रदर्शनों से परे, जर्मनी के बुंडेसलीगा लीग में चार फुटबॉल खिलाड़ियों ने गेम्स के लिए फ्लॉयड की हत्या को अभिव्यक्त किया। एक खिलाड़ी मैदान पर घुटने टेक कर बैठा। वहीं एक अन्य ने अपने टी शर्ट में लिखा था “जस्टिस फॉर जॉर्ज फ्लॉयड।”

बर्लिन की दीवार पर जॉर्ज फ्लॉयड का भित्तिचित्र बनाकर श्रद्धांजलि दी गई।

स्पेन में ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ आंदोलन

बर्सिलोना स्पेन में एक औरत आई कैन नॉट ब्रीथ का मास्क पहनकर अमेरिकी वाणिज्यिक दूतावास के सामने प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने आई। वहीं प्रोटेस्ट के दौरान लोग लूटपाट करते भी देखे गए।

एक जून को सोल प्लाजा और दूसरे मॉन्यूमेंट्स तथा मैड्रिड में ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ आंदोलन के साथ सॉलिडैरिटी दिखाई।

बार्सिलोना स्पेन

कनाडा में लोग सड़कों पर उतरे

कनाडा के कई शहरों में जॉर्ज फ्लायड की हत्या के विरोध में प्रोटेस्ट का आयोजन किया गया। टोरंटो कनाडा में लोग सड़कों पर उतरे और टोरंटो पुलिस हेडक्वार्टर तक मार्च निकाला।

प्रोटेस्ट के दौरान पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई।

ब्राजील में एंटी फासिस्ट और फासिस्ट आमने-सामने

सोमवार को ब्राजील में गवर्नमेंट हेडक्वार्टर के बाहर प्रदर्शनकारियों की भीड़ एकजुट हुई और उनके हाथों में “Vidas Negras Importan: ब्लैक लाइव्स मैटर” का बैनर था।

श्वेत वर्चस्ववादियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की एक पूरी भीड़ पर हमला करने का प्रयास किया।

Marielle Franco, 38 वर्ष, साल 2018, João Pedro, 14 वर्ष 2020 और Agatha Felix, 8 वर्ष साल 2019 में मार दिए गए थे। ब्राजील के काले नागरिकों के लिए जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या ने उनकी पीड़ा को फिर से उभार दिया है। वो जॉर्ज फ्लॉयड के साथ-साथ ब्राजील में काले नस्ल के लोगों के साथ होने वाली बर्बरता के लिए भी सड़कों पर हैं।

फिलहाल ब्राजील में भी प्रो-फासिस्ट और एंटी-फासिस्ट यानि दो प्रोटेस्ट चल रहे हैं। ऐसा हमने भारत में भी देखा है, सीएए, एनआरसी प्रोटेस्ट के दौरान। जो दिल्ली में जनसंहार में बदल दी गई थी फासीवादी सत्ता, दिल्ली पुलिस और भगवा गैंग द्वारा।

संयुक्त राज्य अमेरिका के बाहर इन शहरों में प्रदर्शन हुआ

शहर (अमेरिका के बाहर) जहां विरोध-प्रदर्शन हुए हैं:

ब्यूनोस आयर्स, (अर्जेंटीना)

पर्थ, ऑस्ट्रेलिया; सिडनी (ऑस्ट्रेलिया)

ब्रुसेल्स, (बेल्जियम)

रियो डी जनेरो,( ब्राज़ील)

कैलगरी, फ्रेडेरिक्टन, हैलिफ़ैक्स, मॉन्कटन, मॉट्रियल, ओटावा, पीटरबरो, सास्काटून, टोरंटो वैन्कूवर,( कनाडा)

कोपेनहेगन, (डेनमार्क)

बोर्डो, पेरिस,( फ्रांस)

बर्लिन, म्यूनिख, (जर्मनी)

एथेंस, थेसालोनिकी, (ग्रीस)

मशहद, (ईरान)

डबलिन, (आयरलैंड)

तेल अवीव, हाइफा,( इज़राइल)

पूर्वी यरूशलेम,( फिलिस्तीन)

मिलान, रोम, (इटली)

टोक्यो, (जापान)

नैरोबी, (केन्या)

मेक्सिको सिटी (मेक्सिको)

एमस्टर्डम, ग्रोनिंगन, हेग, (नीदरलैंड)

ऑकलैंड, वेलिंगटन, क्राइस्टचर्च, डुनेडिन, तोरंगा,( न्यूजीलैंड)

अबूजा, लागोस, (नाइजीरिया)

ब्रातिस्लावा, (स्लोवाकिया)

बार्सिलोना, (स्पेन)

जिनेवा, ज़्यूरिख,( स्विट्ज़रलैंड)

इस्तांबुल (तुर्की)

लिवरपूल, लंदन, मैनचेस्टर, डेरी, बेलफास्ट (इंग्लैंड), कार्डिफ ( वेल्स)।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on June 17, 2020 2:01 am

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