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Categories: बीच बहस

ट्वीट पर हैरानी कैसी : बबीता फोगाट अब भाजपा की कार्यकर्ता हैं

`गित्ता-बबित्ता`। हरियाणा के आम जन में पहलवान बहनें गीता और बबीता इसी डाइलेक्ट में फेमस हैं। लगता है कि पदक के उनके दिन चले गए हैं और पद की दरकार उनसे विवादास्पद ट्वीट करा रही है। भारतीय जनता पार्टी की सियासत में इसे तरक़्क़ी का रास्ता समझा ही जाता है। फोगाट बहनों के ट्वीट्स पर हैरान-परेशान होने से पहले यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि यह परिवार भाजपा से जुड़ चुका है और बबीता फूल निशान पर विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं।

रेसलिंग की दुनिया की फेमस फोगाट बहनों का परिचय है कि वे बलाली गाँव की रहने वाली हैं जो चरखी दादरी जिले में पड़ता है। पहलवान और कोच महावीर फोगाट की बेटियों गीता, बबीता, ऋतु और संगीता में से गीता और बबीता कॉमनेवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक हासिल कर चुकी हैं। ऋतु महिला रेसलिंग की नैशनल चैम्पियन हैं और संगीता भी ईनामी कुश्तियां जीतती रही हैं। गीता-बबीता की चचेरी बहन विनेश भी कॉमनवेल्थ खेलों में सोना उठा चुकी हैं और उनके भविष्य को लेकर अभी उम्मीदें बरकरार हैं। विनेश की बहन प्रियंका एशियन चैम्पियनशिप में रेसलिंग का रजत पदक जीत चुकी हैं।

गीता-बबीता परिवार के लिए इस परिचय से बड़ा परिचय आमिर खान प्रोडक्शन्स की फिल्म `दंगल गर्ल` है। आमिर खान ने इस फिल्म में गीता-बबीता के पिता महावीर पहलवान की भूमिका निभाई है। बबीता के ट्वीट में जिन वसीम जायरा का जिक्र उनकी हीनता का उदाहरण देते हुए किया गया है, वे इस फिल्म में गीता बनी हैं। हिन्दुस्तान में रेसलिंग जैसे खेलों के नायक-नायिका क्रिकेट की चमक-दमक के बीच उपेक्षा के अंधेरों में खो जाया करते हैं लेकिन आमिर खान की लगन और मेहनत से बनी इस फिल्म ने गीता-बबीता, उनके पिता और उनके परिवार को रेसलिंग की दुनिया की हदबंदी से निकालकर दुनियाभर में मशहूर कर दिया था। गीता-बबीता के बयानों से आहत बहुत से लोग फ़िलहाल इस बात का हवाला दे रहे हैं। गीता फोगाट की एक पुरानी वीडियो क्लिप भी वायरल हो रही है जिसमें वे शुक्रगुज़ार होते हुए कह रही हैं कि उन्हें बड़ी पहचान आमिर की फिल्म की वजह से ही मिली है।

पहलवान पावर स्ट्रक्चर के आसपास, उसके सहायक और उसके लाभार्थी रहते आए हैं। फिर, सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस तक रिटायर्ड होकर एमपी बनने का मोह न संवार पाते हों तो अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता पहलवान फैमिली की इस चाह पर क्या हैरानी कीजिएगा? महावीर फोगाट का राजनीतिक लगाव हरियाणा के चौटाला परिवार से रहा है। इस सियासी परिवार में टूट के बाद वे दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के साथ गए। भाजपा में शामिल होने से पहले वे जजपा के खेल प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष थे।

उनके भाई सज्जन बलाली इंडियन नेशनल लोकदल के जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। अब वे भी अपनी भतीजी के साथ भाजपा में हैं। बताया जाता है कि बबीता बाढड़ा से विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छुक थीं लेकिन उन्हें भाजपा से चरखी-दादरी विधानसभा से टिकट मिल गया। इस फैमिली के भाजपा में शामिल होने से पहले खेल नीति वगैरह को लेकर गीता के बयानों के निशाने पर खट्टर सरकार रहा करती थी।

विधानसभा चुनाव में फोगाट सिस्टर का सारा स्टारडम धरा रह गया था। भाजपा से बग़ावत कर निर्दलीय चुनाव लड़े सोमवीर सांगवान चुनाव जीत गए थे और बबीता तीसरे नंबर पर ठहरी थीं। इस हलके का सांगवान जाट सोमवीर के साथ गया था। भाजपा के सहारे नॉन जाट वोट एकमुश्त मिलने की बबीता की उम्मीद को विपक्ष के `पहलवान बाहुबली फैमिली` को लेकर किए गए प्रचार ने तोड़ कर रख दिया था। कोरोना जैसी महामारी को लेकर जमातियों को ज़िम्मेदार ठहराने वाले बबीता के साम्प्रदायिक ट्वीट को इस फैमिली के सियासी बियाबान से बाहर निकलने के लिए आजमाया गया दाँव ही माना जा रहा है।

इसके बाद एक और वीडियो बयान और समर्थन में गीता के भी मैदान में आने के बाद जिस तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, उसे भी इसी तरह देखा जा रहा है। भाजपा की हिन्दुत्ववादी राजनीति के समर्थकों द्वारा बबीता के बयानों को हाथों-हाथ लिए जाने और कंगना रानौत जैसी सेलिब्रेटीज के समर्थन के बावजूद इस बात को लेकर हरियाणा से ही उनकी आलोचनाओं के स्वर भी कम नहीं हैं। ऐसे लोगों का कहना है कि वे देश के प्रतिनिधि के तौर पर खेलती थीं और पदक हासिल करती थीं तो पूरा देश तालियां बजाता था। वे इन एकजुट तालियों की गरिमा को भूलकर एक विभाजनकारी राजनीति का टूल बनकर नफ़रत फैलाने वाले बयान देंगी तो कैसे समर्थन किया जा सकता है?

लेकिन, अगर यह निज़ी तौर पर कुछ हासिल करने के लिए भी किया जा रहा है तो भी भयानक ही कहा जाएगा। हरियाणा की नब्ज़ पहचानने वाले पत्रकार मनदीप पुनिया लिखते हैं, “बबीता में एंटी मुस्लिम सेंटीमेंट है। बबीता ने दादरी के रहमान को लेकर फेक न्यूज़ फैलाई। रोहतक पीजीआई में जांच हुई तो रहमान निगेटिव (कोरोना) पाया गया। बेचारा रहमान पिछले 12 दिनों से छुपकर गुजारा कर रहा है।“ गौरतलब है कि कोरोना के साथ जोड़कर मुसलमानों के ख़िलाफ़ किए गए दुष्प्रचार के बीच हरियाणा में मुसलमानों पर हमले की कई वारदातें हुई हैं।

पत्रकार मनदीप पुनिया ने फोगाट सिस्टर्स के स्टारडम में आमिर खान की फिल्म के योगदान का भी ज़िक्र किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर आमिर खान की फिल्म से आए बदलाव के बारे में गीता फोगाट के पुराने वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है,“गीता फोगाट देखिए, क्या कह रही हैं। शायद गीता फोगाट ने देशद्रोहियों की आईटी सेल जॉइन कर ली है। एक बात कहूँ, मेडल 2010 के कॉमन्वेल्थ गेम्स में आए थे, फ़िल्म 2016 में आई।

2010 से 2016 के बीच छह सालों में फोगाट फैमिली को `इन लोगों` ने कितना सम्मान दिया? साल 2011 की आँखों देखी बात है। महावीर फोगाट एक टुच्चे से नेता को मिलने के लिए झज्जर में एक ऑफिस के बाहर एक से डेढ़ घंटा वेट करते हैं। जब वो नेता मिलता है तो महावीर जी उस नेता को गीता के कुछ कागज़ देते हैं। कागज़ देखने के बाद वो नेता कहता है कि अभी हमारी सरकार नहीं है। आप हलके में हमारी थोड़ी मदद भी करो। बाकी, मैं खेल अधिकारियों से बात करता हूँ।

2016 से पहले फोगाट फैमिली का जीवन अत्यन्त साधारण सा था। ये चमक दमक, रेंज रोवर गाड़ी वगैरह सब बाद की बातें हैं। फोगाट फैमिली ने बहुत मेहनत की है, इसमें कोई शक नहीं। 2016 से पहले उनको उनकी मेहनत का असली फल नहीं मिला था। फल मिला तो अब वो लोग अगर हरियाणा के कपिल मिश्रा बनना चाहें तो उनकी मर्जी। बबीता को सपोर्ट करने वाले लोगों की चाह यही है।“

बबीता ने जायरा वसीम का भी ज़िक्र किया कि  “मैं कोई जायरा वसीम नहीं हूं, जो तुम्हारी धमकियां सुनकर घर बैठ जाऊंगी“। जायरा वसीम कश्मीर से तआल्लुक़ रखती हैं। विमान में छेड़खानी की घटना को लेकर एक तबके ने उलटे उन्हें ही ट्रोल किया था। एक महिला होने के के बावजूद जायरा वसीम का उनके उत्पीड़न को कमज़ोरी के उदाहरण के तौर पर रखकर ज़िक्र और उससे तुलना करते हुए अपनी बहादुरी का दावा किस तरह की मानसिकता है, यह भी बबीता को शायद ही ख़याल हो।

मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा और फिल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने भी बबीता फोगाट के बयान पर अफ़सोस जताया है। ज्वाला गुट्टा ने लिखा है, “यह वायरस (कोरोना) नस्ल और धर्म नहीं देखता है। मैं अनुरोध करती हूँ कि आप अपना बयान वापस ले लें। हम स्पोर्ट्सपर्सन हैं जिन्होंने उस महान राष्ट्र का प्रतिनिधित्व किया है जो सेकुलर है और बहुत ख़ूबसूरत है। जब हमने जीत हासिल की थी तो इन सब लोगों ने हमारी जीत को अपनी जीत की तरह सेलिब्रेट किया था।“ कहने को कई लोग तो यह भी लिख रहे हैं कि जितनी बड़ी शख़्सियत बबीता के बयान को रेस्पॉन्ड करेगी, बबीता अपने उद्देश्य को उतना ही सफल महसूस करेंगी।

(धीरेश सैनी जनचौक के रोविंग एडिटर हैं।)

This post was last modified on April 19, 2020 8:57 am

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