Tue. Sep 17th, 2019

येचुरी का सुप्रीमकोर्ट में हलफनामा: अवैध हिरासत,बच्चों की नज़रबंदी, संचार सेवा ठप

1 min read
येचुरी तारिगामी से उनके घर में बात करते हुए।

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी द्वारा उच्चतम न्यायालय में दाखिल हलफनामें में कश्मीर में धारा 370 हटाने के बाद की स्थिति की पोल खोलकर रख दिया है। क्या मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के बीमार विधायक यूसुफ तारिगामी को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है? क्या  उनके बच्चे तथा पोते-पोतियों को भी नजरबंद करके रखा गया है? क्या किसी को घर से बाहर जाने की इजाजत नहीं  है और न ही किसी बाहरी को घर के भीतर आने की अनुमति है? क्या  घर से संबंधित तमाम जरूरतों की आपूर्ति सुरक्षा अधिकारियों के द्वारा की जाती है? क्या उनके पास कश्मीर या भारत के बाकी हिस्सों में अपने परिजनों या दोस्तों के साथ संपर्क करने का कोई साधन नहीं है? न तो मोबाइल नेटवर्क और न ही लैंडलाइन नेटवर्क काम कर रहे हैं। यहां तक कि उनके घर में दोनों लैंडलाइन बंद हैं। ऐसे में आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना भी मुश्किल हो जाता है।

वह अपने नियमित चिकित्सक से संपर्क करने में भी असमर्थ रहे हैं। क्या अपने ही घर में नजरबंद और लॉकडाउन के मद्देनजर परिवार के पास पैसे और नकदी की भी कमी है? यह सच है क्योंकि यह दावे माकपा महासचिव सीताराम येचुरी द्वारा कश्मीर से लौटने के बाद उच्चतम न्यायालय में दाखिल हलफनामें में किये  गए हैं। उच्चतम न्यायालय के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस एसए बोबडे और अब्दुल नजीर की पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया है।

देश दुनिया की अहम खबरें अब सीधे आप के स्मार्टफोन पर Janchowk Android App

सीताराम येचुरी के हलफनामे के अनुसार 29 अगस्त 2019 को निजी सहायक के साथ उन्होंने (सीताराम येचुरी) बतायी गयी उड़ान, इंडिगो एयरलाइंस की फ्लाइट 6 बी 2136,से यात्रा की और श्रीनगर हवाई अड्डे पर पहुंचे। जहां उनके विमान से बाहर निकलते ही एरोब्रिज के भीतर ही दो पुलिस अधिकारी उसके पास पहुंचे और उन्हें हवाई अड्डे के आगमन क्षेत्र के एक कमरे में ले गए, जहां सीनियर एसपी मीर इम्तियाज हुसैन ने उनसे मुलाकात की। पुलिस अधिकारी इम्तियाज ने संकेत दिया कि वह येचुरी को उनके साथी तारिगामी से मिलाने ले जाएंगे और इसके बाद उन्हें वह एयरपोर्ट वापस लाएंगे 5 बजे के करीब दिल्ली की फ्लाइट से विदा कर देंगे। येचुरी ने इम्तियाज को बताया कि वह उसी शाम लौटेंगे या नहीं यह तारिगामी की स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर करेगा। येचुरी  और उनके निजी सहायक को एक उच्च सुरक्षा मानकों वाली कार में बैठने के लिए कहा गया था, जिसके सामने और पीछे दोनों तरफ सुरक्षाकर्मियों की एक टुकड़ी थी। कारों का यह काफिला फिर श्रीनगर शहर में गुप्कर रोड पर तारिगामी के घर के लिए रवाना हुआ।

सीताराम येचुरी और यूसुफ तारिगामी।

हलफनामे में कहा गया है कि तारिगामी के घर पर साढ़े 12 बजे पहुंचने के बाद सीताराम येचुरी ने उनसे मुलाकात की। इस दौरान तारिगामी येचुरी को देखकर बेहद खुश और राहत महसूस कर रहे थे। वह तरिगामी के ड्राइंग रूम में बैठ गए। जहां पहले घंटे के लिए संबंधित अधिकारी, एसएसपी इम्तियाज भी साक्षी और तरिगामी के साथ ड्राइंग रूम में बिन बुलाए बैठे थे, हालांकि उन्हें वहां उपस्थित होने की कोई आवश्यकता नहीं थी। इसके बाद जब येचुरी ने तारिगामी से उनके स्वास्थ्य के अलावा उन्हें नजरबंद किए जाने के घटनाक्रम और घाटी में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बातचीत शुरू करनी चाही तो उन्होंने येचुरी को वहां मौजूद पुलिस अधिकारी की ओर इशारा किया।

हलफनामें में कहा गया है कि हालांकि, तारिगामी को हिरासत का कोई आदेश नहीं दिया गया था। उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पिछले 25 दिनों से अधिकारियों द्वारा घर के अंदर बाहरी लोगों के प्रवेश और तारिगामी तथा उनके परिजनों के घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई है। तारिगामी और उनका परिवार वास्तव में ‘हाउस अरेस्ट’ था। सीताराम येचुरी को तारिगामी ने अपने स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और अस्पतालों के बारे में विस्तार से बताया। हलफनामें में कहा गया है कि येचुरी  ने यह मान लिया कि वह तारिगामी के घर पर रात भर रह सकते हैं। लेकिन, संबंधित अधिकारी इम्तियाज ने संकेत दिया कि तारिगामी के घर में कोई भी बाहरी नहीं रह सकता है, इसलिए येचुरी  अपने मित्र के घर में रात भर नहीं रह सकते हैं।

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय की अनुमति से येचुरी ने गत 29 अगस्त को माकपा की जम्मू कश्मीर इकाई के नेता और बीमार चल रहे पूर्व विधायक यूसुफ तारिगामी से मुलाकात करने के लिये वहां का दौरा किया था। येचुरी ने न्यायालय के समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर श्रीनगर एम्स में इलाज करा रहे तारिगामी से मिलने की अनुमति मांगी थी। येचुरी ने रिपोर्ट में न सिर्फ तारिगामी की सेहत का विवरण दिया है, बल्कि पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद उत्पन्न स्थिति का ब्यौरा भी पेश किया है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों की बेहतर समझ रखते हैं।)

Donate to Janchowk
प्रिय पाठक, जनचौक चलता रहे और आपको इसी तरह से खबरें मिलती रहें। इसके लिए आप से आर्थिक मदद की दरकार है। नीचे दी गयी प्रक्रिया के जरिये 100, 200 और 500 से लेकर इच्छा मुताबिक कोई भी राशि देकर इस काम को कर सकते हैं-संपादक.

Donate Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *