Sunday, October 24, 2021

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जुमलों की बारिश में योगी बहा ले जाना चाहते हैं रोटी-रोजगार और सुरक्षा के सवाल

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक बयान खासा सुर्खियों में है, जब एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने डंके की चोट पर स्वयं को उत्तर प्रदेश का दोबारा मुख्यमंत्री घोषित कर दिया। दरअसल एक निजी समाचार चैनल पर जब उनसे यह पूछा गया कि पिछले पैंतीस सालों से यूपी के चुनावी इतिहास में कोई  मुख्यमंत्री दोबारा मुख्यमंत्री नहीं चुना गया तो इसके जवाब में योगी ने कहा कि “वे वापस आ रहे हैं, इस बार रिकॉर्ड टूटेगा, पैंतीस सालों में जो नहीं हुआ अगले साल होगा” कुल मिलाकर वे ये संकेत दे रहे थे कि पैंतीस सालों का चुनावी इतिहास को वे इस बार बदलने जा रहे हैं। खैर, इस मौके पर कोई भी मुख्यमंत्री होता तो शायद उसका भी यही जवाब होता, लेकिन यहां प्रश्न उनके आत्मविश्वास या अति आत्मविश्वास से बड़ा रोजगार, महिला सुरक्षा और किसानों, मजदूरों के जायज़ मुद्दों का है। जो इन दिनों यूपी की सियासत में हलचल पैदा कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहीं भी यह कहने से नहीं चूकते कि पिछले चार दशकों में जो न हो पाया, उनकी सरकार ने चार सालों में ही कर दिखाया। उनके मुताबिक चाहे बात रोजगार की हो, महिला सुरक्षा की हो या मजदूर किसान की हो, सब का ध्यान रखते हुए उनकी सरकार ने सबके हितों की पूर्ति की है। अगर उनका यह दावा सही है तो फिर मुख्यमंत्री जी बताएं कि जो युवा सड़क पर उतर कर,  पढ़ाई छोड़ कर आंदोलन करने पर मजबूर हो रहा है और आप से यह पूछ रहा है कि रोजगार कहां है, तो वे कौन हैं?  लगातार प्रदेश में बढ़ रही बलात्कार, यौन हिंसा की घटनाओं के ख़िलाफ़ महिला सुरक्षा की मांग करते हुए कई बार महिलाएं आंदोलनरत हुईं, तो बताएं आख़िर वे महिलाएं कौन हैं? गन्ना किसान आपसे कह रहा है योगी जी पिछले चार साल से आपके राज में गन्ने का दाम नहीं बढ़ा, लागत तक का पैसा नहीं निकल पा रहा, मुनाफे की तो छोड़िए, तो आख़िर ये किसान आपके राज्य के हैं कि नहीं? कोरोना काल में अपना रोजगार गंवा कर वापस आए लाखों श्रमिकों  से आपने वादा किया था कि अब उन्हें दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत नहीं, उन्हें यहीं रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा, पर जो लाखों श्रमिक रोजगार के लिए दोबारा दूसरे राज्यों में जाने के लिए मजबूर हुए, तो पुनः पलायन करने को विवश हुए वे तमाम श्रमिक आख़िर कौन हैं?

आकंड़ों में मत उलझाओ… रोजगार कहां है ये बताओ…..

पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो बहुत वायरल हुआ जिसका सम्बन्ध यूपी के मुख्यमंत्री और  बेरोजगार युवाओं से था। दरअसल कुछ हुआ यूं कि मुख्यमंत्री गोरखपुर के सर्वोदय किसान पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज पहुंचे थे लेकिन वहां जो कुछ हुआ उसकी कल्पना खुद मुख्यमंत्री ने भी नहीं की होगी। वहां मौजूद युवाओं ने उनका विरोध शुरू कर दिया और उनसे सीधे यह सवाल किया कि मुख्यमंत्री जी नौकरियां कहां हैं यह बतलाइए।  हालांकि योगी इस पर कोई जवाब नहीं देते हैं और सीधा चले जाते हैं। पूर्व आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने ये वीडियो ट्विटर पर साझा किया ।
वीडियो में दिख रहा है कि सीएम योगी अफसरों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इसी दौरान आसपास खड़े तमाम नौजवान चिल्लाने लगते हैं। युवक योगी को देखते ही पूछने लगते हैं, ‘महाराज जी, भर्ती अभी तक नहीं आई है। आर्मी क भरतिया कहिया आई महाराज जी?’ हालांकि सीएम इन नौजवानों की बातों को अनसुनी कर आगे बढ़ जाते हैं।

वीडियो शेयर करते हुए पूर्व IAS सूर्य प्रताप सिंह लिखते हैं, ‘योगी जी का अपने गृह जनपद में ये हाल? बेरोजगार युवकों के सवाल का सामना करने में डर लगता है महाराज? शायद गोदी मीडिया के रटे-रटाए सवालों का जवाब देने की आदत हो गई है। अब क्या इन छात्रों पर केस होगा? राजद्रोह लगेगा? या इन्हें गैंगस्टर घोषित कर इनका घर गिरा दिया जाएगा? युवा समझ चुका है कि डर के आगे जीत है। युवाशक्ति जिंदाबाद।’

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ भले ये लाख दावा करें कि उन्होंने अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में साढ़े चार लाख बेरोजगार युवाओं को नौकरियां दी हैं और दिसम्बर तक और पचास हजार को नौकरियां देकर , पांच साल में पांच लाख युवाओं को नौकरियां देने का अपना वादा पूर्ण करेंगे, लेकिन भर्तियों और नौकरियों को लेकर आए दिन युवाओं द्वारा होने वाले धरना,  प्रदर्शन कुछ और ही तस्वीर पेश करती हैं।

बीते 5 जून यानी योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन के मौके पर  युवा मंच व अन्य संगठनों के संयुक्त आह्वान पर आयोजित यूपी बेरोजगार दिवस पर 10 लाख से ज्यादा ट्वीट हुए और यह ट्विटर पर घंटों ट्रेंड करता रहा। सरकारी नौकरियां कहां हैं? इसका जवाब योगी सरकार के पास नहीं है तो वहीं 22 जून को लखनऊ स्थित state council of education research training ( SCERT)  कार्यालय के सामने सैकड़ों छात्र छात्राओं ने धरना-प्रदर्शन किया। इनकी मांग थी कि शिक्षक भर्ती मे आरक्षण घोटाले तथा 1.37 लाख शिक्षक भर्ती पूरा किया जाए। धरना प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं का कहना था कि सरकारी नौकरियां ना के बराबर हैं और सरकार झूठे आंकड़े पेश कर प्रदेशवासियों को भ्रमित कर रही है।

आए दिन लखनऊ में कभी दरोगा भर्ती कभी शिक्षक भर्ती कभी भर्ती घोटालों कभी लंबित पड़े परिणामों को लेकर युवा आंदोलन कर रहे हैं बावजूद इसके सरकार अपनी पीठ थपथपाने से बाज नहीं आ रही। उधर “युवा हल्ला बोल” के संस्थापक अनुपम कहते हैं सीएम आदित्यनाथ चार साल में चार लाख सरकारी नौकरी देने का प्रचार करते हैं। जब आरटीआई से इन नौकरियों का विभागवार ब्यौरा पूछा गया तो उन्हीं की सरकार के पास कोई जवाब नहीं था।
उत्तर प्रदेश के अंदर रोजगार के सवाल पर एक संगठित आंदोलन खड़ा करने के लिए 10 युवा-छात्र संगठनों ने छात्र युवा रोजगार अधिकार मोर्चा का गठन किया है। इसमें ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन(AISA), स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI ), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF), ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन (AIDSO), इंकलाबी छात्र मोर्चा (ICM), रिवॉल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA), डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन आफ इंडिया (DYFI), ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन (AIYF), ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक यूथ ऑर्गेनाइजेशन (AIDYO), विद्यार्थी युवजन सभा शामिल हैं. तो अब छात्र-युवाओं ने ‘ आंकड़ों में मत उलझाओ, रोजग़ार कहाँ है ये बतलाओ’ नारे के साथ सभी रिक्त पदों को भरने और सभी नौजवानों को सम्मानजनक रोजगार की गारंटी के लिए प्रदेशव्यापी आंदोलन में उतरने का एलान किया है।

महिलाएं मांग रहीं सुरक्षा की गारांटी


यह हम नहीं कहते बल्कि गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट कहती है कि महिला यौन हिंसा के मामले में राजस्थान के बाद उत्तर प्रदेश दूसरे नंबर पर है।आंकड़े झूठ नहीं बोलते पर योगी जी के मुताबिक तो उनके राज में बलात्कारी, अपराधी डर के साए में है जबकि महिलाएं, छात्राएं, बच्चियां बिल्कुल महफूज हैं। आखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन यानी aipwa की राज्य अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी कहती है कि यदि ऐसा है तो हम मुख्यमंत्री जी से हम पूछना चाहते हैं कि आए दिन यूपी के विभिन्न जिलों से जो महिलाएं , बच्चियों, स्कूली छात्राओं की रेप और हत्या की घटनाएं सामने आ रही हैं तो क्या वे आपके राज्य की बेटियां नहीं?

इन तमाम घटनाओं को लेकर पिछले दिनों aipwa ने सोशल मीडिया और सड़कों पर उतर कर कई महत्वपूर्ण आंदोलन किए और महिला सुरक्षा की मांग की। तो वही संगठन की राज्य सचिव कुसुम वर्मा के मुताबिक मुख्यमंत्री के सारे दावे महज कागजी हैं। आज भी राज्य में अपराधी और बलात्कारी नहीं बल्कि महिलाएं ही डर के साए में जी रही हैं। वे कहती हैं महिलाओं के बीच मिशन शक्ति जैसे सरकारी कार्यक्रम चलाने यह स्कूली छात्राओं के लिए धनराशि वितरित करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि योगी जी अपनी राज्य की बहन बेटियों की सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित करें और तमाम बलात्कार और बलात्कार के बाद हत्या करने जैसे संगीन मामलों का निपटारा त्वरित अदालतों में करवाने की व्यवस्था करें।

मुख्यमंत्री ने जब प्रदेश की मां, बहन, बेटियों को यह विश्वास दिलाया था कि उनके शासन में उन्हें पूरी सुरक्षा प्रदान की जाएगी और बलात्कार के मामलों का निपटारा फास्ट ट्रैक कोर्ट के अंर्तगत  15 से एक महीने के भीतर निपटा दिया जाएगा तो यह एक चमत्कार होने जैसा लगा लेकिन बातें महज बातें ही रह गईं।  हाथरस बलात्कार काण्ड की पीड़िता की मौत को एक साल (29 सितम्बर)होने को आया लेकिन आज तक उसके दोषियों को सजा नहीं हुई जबकि इस बलात्कार कांड की गूंज पूरे देश में सुनाई दी। याद कीजिए, पुलिस की जल्दबाजी जब पुलिस ने मृतका अंतिम संस्कार करने में मिनट भर भी नहीं लागाया और चोरी छुपे उसका अंतिम संस्कार कर दिया लेकिन न्याय मिलने में महीनों गुजर गए।

आज भी जारी है प्रवासी मजदूरों का पलायन

पिछले लॉक डाउन में जब यूपी के करीब चालीस लाख प्रवासी मजदूर रोजगार गंवाते हुए लौटकर अपने घर आए तो  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन प्रवासी मजदूरों को भरोसा दिलाया था कि अब उन्हें दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत नहीं हर श्रमिक का रजिस्ट्रेशन कर उन्हें उनके ही क्षेत्र में रोजगार दिलाया जाएगा। इन मजदूरों के लिए के लिए प्रवासी श्रमिक आयोग भी बनाने की बात कही। हर कोई खुश था। स्वाभाविक है अगर किसी मजदूर को अपने ही घर में रोजगार मिल जाए तो भला इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है लेकिन पिछले दिनों विभिन्न जिलों के ऐसे कई प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवार वालों से मेरी बात हुई जिन्होंने बताया कि रोजगार पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा लेकिन यहां न कोई रोजगार मिला और न ही रजिस्ट्रेशन हुआ तो मजबूर होकर आख़िर उन्हें दूसरे राज्य की ओर रुख करना पड़ रहा है। मनरेगा में भी इतना काम नहीं कि जीवन अच्छे से चला सके।

लेकिन मुख्यमंत्री जी तो “ऑल इज़ वेल” की बात करते हुए शान से कहते हैं कि 40 लाख से ज्यादा प्रवासी श्रमिक उत्तर प्रदेश में आए थे जिनके भरण पोषण से लेकर रोजगार तक की व्यवस्था सरकार ने की। दुनिया के तमाम संस्थान यूपी के इस सफल मॉडल पर शोध कर रहे हैं। श्रमिकों के हितों का ख्याल रखते हुए हम कोरोना की पहली लहर से पार पा सके। तो हम मुख्यमंत्री जी से पूछना चाहते है कि हैं मजदूरों को रोजगार के अभाव में पुनः पलायान करना पड़ा या आज भी कर रहे हैं क्या वे आपके राज्य के श्रमिक नहीं ।

किसान हैं आंदोलन की राह पर

किसानों के हित में बहुत कुछ करने का दावा करने वाली योगी सरकार से हम यह भी पूछना चाहते हैं कि यदि किसानों के लिए बहुत कुछ किया गया है तो फिर आखिर किसान आंदोलन पर मजबूर क्यों है। क्यों गन्ना किसान आज सरकार से बेहद नाराज है, क्यों नहीं  चार सालों से गन्ने का रेट बढ़ाया गया। आवारा मवेशियों से परेशान किसान आपसे कह रहा है कि खुले घूम रहे ये पशु हमारी फसलों को चौपट कर रहे हैं, तो आख़िर उनकी आवाज़ों को अनसुना क्यों किया जा रहा है। बीस सितंबर को सीतापुर में हुई किसान महापंचायत में कई जिलों के हजारों किसान सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए पहुंचे।

सीतापुर जिले के पिसावा ब्लॉक से  किसान महापंचायत में आई बटोली कहती हैं हम छोटी जोत वाले किसान हैं बड़ी मेहनत से खाने भर तक का अनाज पैदा कर पाते हैं उस पर भी रात दिन आवारा मवेशियों का डर बना रहता है वह आकर हमारी फसलें नष्ट कर रहे हैं लेकिन जब हम उन्हें मारते हैं तो हम पर मुकदमे दर्ज हो जाते हैं और जब आवारा मवेशी हम पर हमला करते हैं तो उनका कुछ नहीं बिगड़ता ऐसी नाइंसाफी योगी काल में ही देखी जा रही है। बटोली कहती हैं चाहे कोई छोटा किसान हो या बड़ी जोत वाला किसान सबकी एक ही लड़ाई बन चुकी है। तो वहीं लखीमपुर खीरी से आए किसान बलजिंदर सिंह कहते हैं शुरू में सरकार ने कहा था कि हम किसानों की आय दोगुनी कर देंगे किसान बहुत खुश हुआ उसने सोचा गेहूं की कीमत 2000 से बढ़कर 4000 हो जाएगी गन्ना 325 से बढ़कर साढ़े सात सौ में पहुंच जाएगा और अन्य फसलों के दाम भी दुगने हो जाएंगे लेकिन हो रहा है ठीक इसके विपरीत उल्टा सरकार ने खाद के दाम बढ़ा दिए। यूरिया भी कम कर दिया और गन्ने का दाम तो साढ़े 3 सालों से बढ़ा ही नहीं उस पर भी पेमेंट सालों साल लटक जाता है।

शाहजहांपुर जिले से आए किसान सुखविंदर सिंह कहते हैं मेरा एक बड़ा सवाल इस योगी सरकार से यह है कि राज्य भर में जितने भी गौशाला बनाई गई है जरा सरकार स्वयं उन गौशालाओं का निरीक्षण कर ले और यह जानकारी ले ले कि उन गौशालाओं में कितने आवारा मवेशी रखे गए हैं और कितने बाहर खुले घूम रहे हैं वे कहते हैं वैसे ही खेती किसानी इतनी महंगी हो गई है उसपर खुले घूम रहे ये आवारा।
पशु हमारी फसलों को नष्ट कर रहे हैं लेकिन यहां की सरकार को तो लगता है की आवारा पशुओं से किसान को कोई खतरा नहीं क्योंकि सब आवारा पशु गौशालाओं में कैद हैं। सुखविंदर कहते हैं पता नहीं सरकार को जानकारी नहीं कि वह जानकर अनजान बन रही है ।

वे कहते हैं जब प्राकृतिक आपदा हमारे साथियों को चौपट कर देती है तो सरकार की ओर से हम किसानों को मात्र 2000 रूप का भुगतान किया जाता है, तो यह कहां का न्याय है। वे कहते हैं हमारे यहां शाहजहांपुर जिले में तो जिला प्रशासन द्वारा यह फरमान जारी कर दिया गया है कि जो भी किसान आवारा पशुओं से अपनी फसल बचाने के नाम पर खेतों के इर्द-गिर्द कंटीले तारे लगाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी क्योंकि ऐसा करना पशु क्रूरता के अंतर्गत आता है, इसका मतलब यह हुआ कि किसान बे मौत मरता रहे और उल्टा दंड भी भुगते । इन्हीं सब के चलते आज किसान आंदोलन को मजबूर है।

ज़ाहिर सी बात है चुनावों को जीतने के लिए सरकारें यह जताने से चूकना नहीं चाहतीं कि उन्होंने अपनी जनता के लिए कितना कुछ किया और जीतने के बाद और वे क्या क्या करेंगी। यही हाल इन दिनों यूपी का है। मुख्यमंत्री योगी अपने साढ़े चार साल की सफलताओं को जनता के बीच गिनाने में व्यस्त हैं दूसरी तरफ युवा, छात्र, महिलाएं, किसान, मजदूर का एक बहुत बड़ा वर्ग आंदोलनों की राह पर है। तो क्या  यह विरोधाभास की हवा यूपी विधानसभा चुनाव का रुख बदल देगा, देखना दिलचस्प होगा।

(स्वतंत्र पत्रकार सरोजिनी बिष्ट की रिपोर्ट।)

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