Fri. Jan 22nd, 2021

माहेश्वरी का मत

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भारत के वर्तमान किसान आंदोलन ने अपनी जो खास गति पकड़ ली है उससे आज लगता है जैसे भारत का...

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भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ पूंजीवाद का संबंध उपनिवेश और औपनिवेशिक शक्ति के बीच के संबंध का रूप ले...

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भारत का किसान लगता है जैसे अपनी कुंभकर्णी नींद से जाग गया है। अपने इतने विशाल संख्या-बल के बावजूद संसदीय...

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जिस सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक नोटबंदी पर चुप्पी साधे रखी, जीएसटी के आधे-अधूरेपन पर कुछ भी कहने से गुरेज़ किया,...

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तीनों कृषि क़ानून कृषि क्षेत्र के बलात् पूंजीवादीकरण के क़ानून हैं। इनमें किसानों के हित का लेश मात्र नहीं है...

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जो भी बिहार के चुनाव को मोदी की लोकप्रियता का प्रमाण मानता है, वैसे, कवि कैलाश वाजपेयी के शब्दों में,...

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मोदी का आत्म-निर्भर कैसे आत्म-विनाश का कार्यक्रम है, इसे विश्व अर्थ-व्यवस्था के एक तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले 15...

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पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी की चंद रोज पहले ही किताब आई है- ‘आर.एस.एस. (संघ का सफर: 100 वर्ष)। पैंतीस छोटे-छोटे...