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“किसी आत्महंता आवेग ने हमें मृत्यु-पाश में तो नहीं जकड़ लिया?”

लाल बहादुर सिंह

(राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त और देश में ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में ऊंचा मुकाम रखने वाले अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की मौजूदा स्थिति को देखकर समाज का एक बड़ा तबका बेहद व्यथित है। इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संस्थान के खिलाफ अपनाये जा रहे शत्रुतापूर्ण रवैये ने लोगों को खासा परेशान कर दिया है। इससे न केवल एक प्रतिष्ठित और स्थापित संस्था को क्षति पहुंच रही है बल्कि देश और समाज को उससे भविष्य में मिलने वाले लाभ पर भी सवालिया निशान खड़ा हो गया है। इसी अंदेशे को देखते हुए लोगों ने अपने-अपने तरीके से प्रतिरोध शुरू कर दिया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष रहे और एक दौर में रोजगार आंदोलन समेत तमाम सवालों पर जुझारू आंदोलन संचालित करने के लिए जाने जाने वाले लाल बहादुर सिंह इसको लेकर बेहद चिंतित हैं। एएमयू से उनका खासा नाता रहा है। संकट की इस घड़ी में उन्होंने न केवल एएमयू के छात्रों के साथ एकजुटता जाहिर की है बल्कि देश, समाज और राजनीति के हर हिस्से से एएमयू को बचाने के लिए आगे आने की अपील की है। जनचौक यहां उनकी पूरी अपील दे रहा है-संपादक)

आखिर क्यों आज हम अपनी जो सबसे खूबसूरत चीजें हैं, उन्हें एक-एक कर बरबाद कर देने पर आमादा हैं ?

जैसे किसी आत्महंता आवेग ने हमें मृत्यु-पाश में जकड़ लिया है !

बेहद व्यथित मन से आज यह पोस्ट लिख रहा हूं !

उस दौर में, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में रात के 10 बजे लाइब्रेरी हॉल में सैकड़ों छात्रों को पढ़ते देख कर लौटने के बाद हमने अपने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में लाइब्रेरी रिफार्म को मुद्दा बनाया था।

तब, आइसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी यूनियन के अध्यक्ष के बतौर देश-विदेश के तमाम संस्थानों में जाते हुए मैंने हमेशा यह महसूस किया कि एएमयू हमारे देश के सर्वोत्कृष्ट और सबसे आधुनिक शिक्षण संस्थाओं में एक है, इसने हमारी अनगिनत पीढ़ियों को आधुनिकतम ज्ञान-विज्ञान में दीक्षित किया है !

मिथ्या अभियान के इस दौर में यह याद दिलाना अप्रासंगिक न होगा कि इनमें मुसलमानों से कहीं अधिक हिन्दू हैं !

आखिर क्यों एक ऐसे दौर में जब हमने अपनी गलत नीतियों से देश में शिक्षा की गुणवत्ता को पहले ही रसातल में पहुंचा दिया है, हम अपने बचे-खुचे अच्छे संस्थानों को भी तबाह कर देने पर तुले हुए हैं ?

क्या यह राष्ट्रीय क्षति नहीं है ? क्या इसे शह देनेवाले राष्ट्रविरोधी कृत्य नहीं कर रहे ?

आजादी के 70 साल में (जिसमें भाजपा के दो प्रधानमंत्रियों का कार्यकाल शामिल है) जिस मुद्दे की किसी को याद न आयी, उसे आज अगर settle कर लेना इतना जरूरी हो गया था तब भी,  जबकि केंद्र में और राज्य में भी आपकी सरकार है, केंद्रीय विश्वविद्यालय के विज़िटर महामहिम राष्ट्रपति आपके बनाये हुए हैं, क्या फोटो विवाद को हल करने का hooliganism के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था, जिसका निशाना देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर चंद महीने पहले तक रहे पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी थे?

याद आता है, 25 साल पहले वहीं वीसी आवास पर तत्कालीन बीएचयू छात्र संघ अध्यक्ष आनंद प्रधान और मेरी हामिद अंसारी साहेब से मुलाकात हुई थी। तब वे वहां कुलपति थे। बेहद शालीन शख्सियत !

याद आता है, जब छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर वहां गोली चली थी, एक नौजवान की मौत हुई थी, तत्कालीन सीपीआईएमएल सांसद जयंत रोंगपी के साथ तत्कालीन गृह राज्यमंत्री राजेश पायलट से मिलकर हम लोगों ने सीबीआई जांच की मांग की थी, जिसे छात्र आंदोलन के दबाव में सरकार को मानना पड़ा था । उस दौर में वहां नौजवानों से जो बेपनाह मुहब्बत मिली, वह अविस्मरणीय है !

उन सबसे जो अपने देश, अपनी संस्कृति, अपनी शिक्षा को बचाना चाहते हैं, हार्दिक अपील है कि अपने सबसे प्रिय शिक्षा केंद्रों में से एक एएमयू को बचाने के लिए आगे आइये !

छात्रों पर हमला करने वालों और अपराधियों को सजा दिलाइये !!

मुल्क को तबाह करने के मंसूबों को चकनाचूर कीजिये !!!

लाल बहादुर सिंह

पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष

इलाहबाद विश्वविद्यालय

This post was last modified on December 3, 2018 5:34 am

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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