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मुजफ्फरनगर से ‘किसान न्याय यात्रा’ का आगाज, ट्रैक्टर चलाकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने शुरू की यात्रा

लखनऊ। अभी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की पंजाब और हरियाणा में ‘खेती बचाओ यात्रा’ जारी है इस बीच कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने भी यूपी में एक यात्रा शुरू कर दी है। मुजफ्फरनगर से निकली यह यात्रा आज एक सभा के साथ शुरू हुई। इस मौके पर बोलते हुए प्रदेश अध्यक्ष लल्लू ने केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा लाये गये तीन कृषि कानूनों को किसानों के हितों पर कुठाराघात करने और पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाला करार दिया।

उन्होंने केन्द्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मौजूदा तीनों कृषि कानूनों से किसानों का नहीं बल्कि देश के बड़े औद्योगिक घरानों को लाभ होगा। यह कानून किसानों की जमीनें छीनने वाला काला कानून है जिसे हम किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे। उनका कहना था कि पूरे देश में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष श्री राहुल गांधी जी के नेतृत्व में इस काले कानून के खिलाफ संघर्ष का बिगुल बज चुका है। कांग्रेस पार्टी जब तक इस काले कानून को वापस नहीं करा लेगी तब तक सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आज मुजफ्फरनगर बुढ़ाना मोड़ से इन काले कृषि कानूनों के खिलाफ किसान न्याय यात्रा की शुरुआत की। इसके तहत मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना मोड़ से सैंकड़ों की संख्या में टैक्टरों की रैली निकाली गयी और इन काले कानूनों का विरोध किया गया। फिर एक बड़ी सभा हुई जिसको कांग्रेस के आला नेताओं ने संबोधित किया।

लल्लू ने कहा कि इन तीनों कृषि कानूनों में एमएसपी का कहीं जिक्र तक नहीं है- 1.कृषि उपज, व्यापार और वाणिज्य कानून 2.मूल्य आश्वासन एवं कृषि सेवाओं पर किसान समझौता 3.आवश्यक वस्तु संशोधन कानून के तहत सब बाजार के हवाले करना किसानों के हितों के खिलाफ सबसे बड़ा विश्वासघात है। जिससे हमारे देश और प्रदेश का किसान सिर्फ मजदूर बनकर रह जायेगा। यह किसानों के साथ अब तक का सबसे बड़ा विश्वासघात है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा कृषि व्यवस्था को नष्ट कर नये कानूनों को देश के किसानों पर थोपे जाने से हमारे देश की सारी कृषि व्यवस्था ही नष्ट हो जायेगी।

नये कानून में कृषि उत्पाद का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने का जिक्र न होना इस बात की तरफ इशारा करता है कि सरकार ने कृषि व्यवस्था को पूरी तरह से कार्पोरेट और पूंजीपतियों के हवाले कर दिया है। इससे देश की कृषि व्यवस्था जिसमें 86.4 प्रतिशत किसान जिसकी जोत 2 एकड़ से कम है वह नई प्रतिस्पर्धात्मक व्यवस्था से बाहर हो जायेगा और किसान अधिकार विहीन हो जाएगा उसकी हैसियत मात्र एक मजदूर की हो जाएगी।(केवल मेहनत और उत्पादन करे)

आवश्यक वस्तु अधिनियम की सूची से अनाज, दालें, खाद्य तेल, आलू, प्याज आदि बुनियादी चीजों को बाहर करने से कारोबारी जमा खोरी करना  शुरू कर देंगे, कीमतों में अस्थिरता आ जायेगी और देश में कालाबाजारी बढ़ जाएगी जिसका खामियाजा देश की बेहाल परेशान जनता को भुगतना पड़ेगा।

किसान न्याय यात्रा का आयोजन उप्र कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक पंकज मलिक, पूर्व सांसद हरेन्द्र मलिक द्वारा किया गया।

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This post was last modified on October 6, 2020 11:56 pm

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