Monday, February 6, 2023

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ दिल्ली सचिवालय पर विरोध-प्रदर्शन

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दिल्ली। 17 मई को मुंडका में फैक्टरी अग्निकांड में 27 से अधिक मजदूरों की मौत के खिलाफ शहर में मजदूरों मेहनतकशों के बीच काम करने वाले मजदूर संगठनों, जनपक्षधर संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रुप से विरोध प्रदर्शन किया एवं मजदूर हितों से संबंधित मांगों वाला ज्ञापन दिल्ली सरकार के श्रम मंत्री मनीष सिसोदिया को सौंपा। 13 मई को दिल्ली के मुंडका में सीसीटीवी कैमरे एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली फैक्ट्री में लगी भयंकर आग में जलकर 27 से अधिक मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई तथा अनेकों मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं । 

बहुत से मजदूर लापता हैं, उनका पता नहीं चल रहा है। खबरों के अनुसार कारखानों को, अग्नि सुरक्षा मानकों सहित सभी फैक्ट्री कानूनों एवं श्रम कानूनों की पूर्णतया अवहेलना कर मालिकों द्वारा चलाया जा रहा था। फैक्ट्री में लगभग 250 मजदूर काम करते थे, जिनमें ज्यादातर महिला मजदूर थीं। 

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प्रदर्शन में आए प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कम्पनी में मजदूरों का कोई रिकार्ड नहीं रखा जाता था। उन्हें ईएसआई व पीएफ आदि की सुविधा भी नहीं मिलती थी। उक्त कंपनी में सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन तक नहीं दिया जाता था। मजदूरों को 12-12 घंटा काम के बदले बतौर मासिक वेतन ₹ 6000 से ₹ 9500 के बीच मिलता था । 

नेताओं ने दिल्ली सरकार को अतीत की याद दिलाते हुए कहा कि मुंडका अग्निकांड से पहले पीरागढ़ी उद्योग नगर, नांगलोई, मंगोलपुरी, फिल्मिस्तान, बवाना, नरेला इत्यादि इंडस्ट्रियल एरिया में भी भयंकर अग्निकांड में अनेकों मजदूरों ने तड़प-तड़प कर अपनी जान गंवाई है। किन्तु दिल्ली सरकार की अनदेखी के कारण फैक्ट्री मालिकों एवं सम्बंधित अधिकारियों के खिलाफ सबक सिखाने वाली कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई । निरन्तर हो रहे अग्निकांडों को रोकने के लिए किसी भी तरह का कोई भी गम्भीर प्रयास अब तक नहीं किया गया है। यह सब मजदूरों के प्रति असंवेदनशील होकर उनकी बेशकीमती जान से खेलने जैसा आपराधिक एवं घृणित कृत्य है ।

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प्रदर्शनकारियों ने बताया कि आग जैसी दुर्घटनाओं को रोकने वाले सुरक्षा मानकों की अवहेलना तथा मजदूरों का निर्मम शोषण के लिए फैक्ट्री मालिकों के अलावा फैक्ट्री व श्रम कानूनों से संबंधित सभी अधिकारी भी मुंडका जैसे अग्निकांड के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने मांग रखी कि दोषी मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो तथा सभी मृतकों के आश्रितों एवं घायलों को उचित मुआवजा के साथ सभी श्रमिकों के बकाया वेतन का तत्काल भुगतान  कराया जाए।

ज्ञापन में निम्न मांगें रखी गईं:

1. मुंडका फैक्ट्री अग्निकांड एवं इस फैक्ट्री में सभी कानूनों के उल्लंघन के दोषी फैक्ट्री मालिकों के साथ सभी संबंधित अधिकारियों पर धारा 307 के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए ।

2. उक्त भीषण अग्निकांड में ड्यूटी के समय मजदूरों की मौत हुई है। मजदूर देश के सिपाही से किसी भी तरह कम नहीं हैं। दिल्ली सरकार मृतक मजदूरों के आश्रितों को कम से कम 50 लाख रुपये एवं घायलों को मुफ्त इलाज के साथ 5 लाख रुपये का मुआवजा तत्काल भुगतान करे।

3. बहुत से मजदूर लापता हैं। सरकार स्पष्ट बताए कि उनका इलाज चल रहा है या मौत हो चुकी है । सरकार बताए, लापता मजदूर कहाँ हैं?

4. उक्त फैक्ट्री मालिकों ने कम्पनी में कार्यरत लगभग 250 मजदूरों का अप्रैल माह का वेतन नहीं दिया है। दिल्ली सरकार अस्थाई ऑफिस बनाकर सभी मजदूरों का रिकार्ड बनाए एवं उनका सभी बकाया वेतन व अन्य राशि का भुगतान करे।

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5.उक्त भीषण अग्निकांड की निष्पक्ष जांच के लिए श्रमिक प्रतिनिधियों को मिलाकर  एक जाँच कमेटी बनाई जाएl

6. दिल्ली की सभी कंपनियों में भयानक आग्निकांड रोकने वाले सभी सुरक्षा मानकों सहित फैक्ट्री एवं श्रम कानूनों का पालन कराने के लिए सरकार सख्त कदम उठाए।

7. न्यूनतम मजदूरी दर को बढ़ाया जाये और दिल्ली के सभी  कारखानों में काम करने वाले मजदूरों को सरकार द्वारा  कम से कम तय न्यूनतम मजदूरी देने की गारंटी की जाये।   

विरोध-प्रदर्शन संगठित करने की पहल एफ्टू(न्यू),मजदूर एकता कमेटी, इफ्टू, इंकलाबी मजदूर केन्द्र, मजदूर एकता केन्द्र, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र, आईएमएस, डीपीएफ, लोकपक्ष, इफ्टू(सर्वहारा) एवं मजदूर सहयोग केन्द्र आदि संगठनों ने किया।

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