Tuesday, September 27, 2022

प्रयागराज: ईपीएफ कटौती, बकाया मानदेय व सुरक्षा के मसले पर रोज़गार सेवकों का प्रदर्शन

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प्रयागराज। ‘मुख्यमंत्री होश में आओ’, ‘अपने वादे पूरे करो’, ‘मनरेगा कर्मियों का हक़ देना होगा’, जैसे नारों के साथ इलाहाबाद जिले के 8 तहसीलों के 100 से अधिक ग्राम सभाओं के रोज़गार सेवकों ने विकास भवन से जिलाधिकारी कार्यालय तक विरोध रैली निकाला। लेकिन जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर रोज़गार सेवकों के नारे बदल गये और ‘डीएम तेरी तानाशाही; नहीं चलेगी, नहीं चलेगी’ के नारे डीएम कार्यालय परिसर में गूंजने लगे। इलाहाबाद जैसे छोटे शहर में यह देखना सुखकर है कि रोज़गार सेवकों के प्रदर्शन का नेतृत्व स्त्रियों ने किया।

बता दें कि उत्तर प्रदेश ग्राम रोज़गार सेवक संघ व उत्तर प्रदेश मनरेगा कर्मचारी महासंघ के बैनर तले इलाहाबाद जिले के 8 तहसीलों के विभिन्न ग्राम सभाओं के रोज़गार सेवक कल अपनी 10 सूत्रीय मांग लेकर विकास भवन में इकट्ठा हुए। प्रदर्शनकारी रोज़गार सेवक डीएम से मिलकर उनके हाथों सरकार तक अपनी 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन पहुंचाने के इरादे से ही जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे थे लेकिन गेट बंद कर लिये जाने और रोज़गार सेवकों से जिलाधिकारी के न मिलने के चलते रोज़गार सेवक जिलाधिकारी के ख़िलाफ़ नारेबाजी करने लगे। हालांकि बाद में जिलाधिकारी ने अपना प्रतिनिधि भेजकर ज्ञापन स्वीकार किया। जिसके बाद रोज़गार सेवक वापस अपने काम पर लौट गये।

रोज़गार सेवकों की प्रतिक्रियायें

ब्लॉक बहादुर पुर के रिंठैया गांव की रोज़गार सेवक राधा गौतम जनचौक से बात करते हुये रोज़गार सेवकों का मानदेय बढ़ाकर 35 हजार किये जाने की मांग करती हैं। वो कहती हैं इस महंगाई में 5-7 हजार रुपये क्या है।

बता दें कि मुख्यमंत्री योगी ने रोज़गार सेवकों को लखनऊ बुलाया था, और घोषणा भी किया था 10 हजार रुपये मानदेय देने का। राधा गौतम बताती हैं कि फिलहाल उन्हें केवल 7888 रुपये मानदेय मिलता है। मानदेय लगातार नहीं दिया जाता है। कई बार तो 5-6 महीने लगातार वेतन नहीं मिलता है। जिससे उन लोगों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों की फीस है, घर व रसोईं के दूसरे ख़र्च हैं 5-6 माह वेतन ही न मिले तो ये सब कैसे चलायें। 

टिकरी तालुका कंजासा की ग्राम सेवक तारा सिंह पटेल जनचौक को बताती हैं कि सरकार जो पारिश्रमिक दे रही है वो ठीक नहीं है। दूसरी ओर सरकार ने ग्राम पंचायत सहायक की भर्ती की और उन्हें हमारे बराबर लाकर खड़ा कर दिया। सरकार हमारी दस सूत्रीय मांगों को स्वीकार करे।

सैदाबाद ब्लॉक के ज़लालपुर क़स्बे के रोज़गार सेवक मोहम्मद मुदस्सर सामंतवादी ढर्रे पर चल रहे गांवों में रोज़गार सेवक होने के ख़तरे को चिन्हित करते हुये कहते हैं रोज़गार सेवक जान हथेली पर लेकर काम करते हैं। एक ओर गांव में काम करवाने का प्रशासन का प्रेशर और दूसरी ओर गांव के दबंग लोगों का प्रेशर रहता है। लोग मार पीट के लिये उतारू हो जाते हैं। जिसमें कई रोज़गार सेवकों की जान जा चुकी है।

कोरांव ब्लॉक रोज़गार सेवक संघ अध्यक्ष व रत्योरा करपिया गांव के रोज़गार सेवक प्रवीण कुमार पांडेय बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं – “रोज़गार सेवक अपनी जान जोखिम में डालकर काम करवा रहे हैं ग्राम पंचायत स्तर पर। जबकि मनरेगा का पूरा काम करवाने की ज़िम्मेदारी ग्राम प्रधान व ग्राम सचिव के पास है। जिनके माध्यम से पेमेंट होना है। रिस्क के स्तर पर वो बताते हैं कि रोज़गार सेवक को सिर्फ़ मोहरा बनाये हैं लोग। मान लीजिये ग्राम पंचायत में कहीं काम चल रहा है तो वहां रोज़गार सेवक जाएगा, मजदूरों को बुलाकर, फिर गांव के लोग कहेंगे कि प्रधान नहीं चाह रहा कि यहां पर काम हो लेकिन रोज़गार सेवक ज़बरदस्ती काम करवा रहा है। चूंकि दोनों एक ही गांव के हैं तो ऐसे में यदि रोज़गार सेवक कमज़ोर वर्ग का है तो उसे मारते पीटते भी हैं। कहीं कहीं तो रोज़गार सेवक की हत्या तक कर दी गई है। कई बार उसके ख़िलाफ़ साजिश रची जाती है, लोगों से उसके ख़िलाफ़ शिक़ायत पत्र लिखवाकर परेशान किया जाता है। लिहाजा रोज़गार सेवकों का हस्तांतरण दूसरे ग्राम पंचायतों में किया जाये।

ग्राम रोज़गार सेवकों के मौजूदा मानदेय को नाकाफ़ी बताते हुए प्रवीण कुमार पांडेय आगे कहते हैं कि हमारा बढ़ाया जाये और समय से मानदेय दिया जाये। मान लीजिए दो जगह काम चल रहा है तो एनएमएस में हाजिरी लगाना है, कार्य देखने जाना है, विकास खंड मस्टर रोल फिलअप करने, एमडी कराने डिमांड देने के लिए जाना है। जितना मानदेय मिलता है वो या तो मनरेगा के कार्य करवाने में ख़र्च कर लीजिये। इसके बाद अपने परिवार पर ख़र्च करने के लिये कुछ नहीं बचना है। आर्थिक मामलों को लेकर कई रोज़गार सेवक आत्महत्या भी कर चुके हैं। और सरकार को सब पता है। ऐसा नहीं है कि सरकार इन बातों से अनभिज्ञ है लेकिन सरकार हमारे लिये कुछ करना नहीं चाहती है।

कोरांव ब्लॉक सैम्हा के रोजगार सेवक अनिल कुमार सिंह ग्राम रोज़गार सेवक को ग्राम पंचायत की और ग्राम विकास विभाग की रीढ़ की हड्डी बताते हैं और सरकार पर आरोप लगाते हुए कहते हैं कि ग्राम रोज़गार सेवक ही एक ग्राम पंचायत का विकास कर सकता है। इसकी देखरेख सरकार को करना होता है लेकिन सरकार नहीं कर पाती है। सरकार न सही से वेतन दे पा रही है। न सही से कार्य कराने में सहयोग कर पा रही है।

मऊ आइमा के करचंपा गांव के रोज़गार सेवक राम नरेश बताते हैं कि रोज़गार सेवक ढोल हैं जिसे एक ओर से सरकार बजा रही है दूसरी ओर से गांव के दबंग।

रोज़गार सेवकों की 10 सूत्रीय मांग

रोज़गार सेवकों की 10 सूत्रीय मांगें निम्नवत हैं –

1- दिनांक 4 अक्टूबर 2021 को डिफेंस एक्सपो के मैदान में आयोजित सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा रोज़गार सेवकों व मनरेगा कार्मिक के सम्बंध में कई गयी घोषणाओं पर आदेश निर्गत कराया जाये।

2- ग्राम रोज़गार सेवकों से मूल पंचायत के साथ-साथ रिक्त ग्राम पंचायतों में भी कार्य लिया जाये।

3- कोविड के अतिरिक्त /दुर्घटना से मृत्यु होने पर उसके आश्रित को सेवा समायोजित किया जाये।

4- राज्य वित्त, केंद्रीय वित्त एवं अन्य निधियों में श्रमिकों की मजदूरी का भुगतान मनरेगा से किया जाये। इस संम्बंध में भारत सरकार द्वारा अभिसरण हेतु 12-04-2016 व 16-05-2017 को शासनादेश भी ज़ारी किया गया है।

5- ईपीएफ कटौती की धनराशि कर्मचारियों के यूएएन खाते में भेजी जाये।

6- अनुमोदन से रिक्त ग्राम सभा रोज़गार सेवकों का अनुमोदन करवाते हुये ग्राम पंचायतों में योगदान दिया जाये।

7- ग्राम रोज़गार सेवकों को नियमित करते हुए राज्य कर्मचारी का दर्ज़ा दिया जाये।

8- पूर्व वित्तीय वर्षों में बकाया मानदेय भुगतान हेतु निर्देश ज़ारी किया जाये।

9- बिल बाउचर, मस्टर रोल पर अनिवार्य हस्ताक्षर व श्रमिकों की डिमांड ग्राम रोज़गार सेवक से ही लिया जाये।

10- प्रत्येक माह प्रदेश स्तर/जनपद स्तर पर समस्याओं के निस्तारण हेतु बैठक की तिथि निर्धारित किया जाये।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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