Sunday, October 17, 2021

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“क्या करेंगे हम कहीं और जाकर, यहीं पैदा हुए हैं तो यहीं दफन होंगे”

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नई दिल्ली। जो 1947 में पाकिस्तान नहीं गए। जिन्होंने अपनी और अपनी पुश्तों की जान और विश्वास इस मुल्क़ के हवाले किया था। यही थी उनकी जन्मभूमि, कर्म भूमि और यहीं बा-हक़ उनकी खाक़ दफ़न है। भारत के उन्हीं सपूतों की वंशज हैं ये शाहीन बाग़ की औरतें जिन्होनें भारत की सर ज़मीन को अपना मुल्क़े-इबादत माना। यहां के धर्मनिरपेक्ष संविधान के आगे सिर झुकाया। हिंदू-मुसलमान बंटवारे को ठुकराया। आज फिर बंटवारे पर आमादा हुक्मरानों अगर इस देश से मोहब्बत है तो सुनो, क्या कह रही हैं ये शाहीन बाग़ की औरतें… जो सिर्फ़ मुसलमानों के लिए नहीं हर उस ग़रीब-मज़लूम के लिए लड़ रही हैं जो जाति-धर्म से परे आपके इन ‘‘काले’’ कानूनों का शिकार होने वाले हैं।

मैं जब शाहीन बाग़ पहुंची तो लोगों में हलचल थी। नहीं हटेंगे हम यहां से क्यों हटें। क्या मामला है पूछने पर पता चला कि कुछ लोगों को दो दिन के लिए धरना हटाने के लिए राज़ी करने भेजा गया है। हटाने के लिए कहने वाले और भेजने वाले कौन हैं? इस सवाल का सबसे एक ही जवाब मिला सबको मालूम है कौन हैं। पर हम किसी भी कीमत पर नहीं हटेंगे।
हर उम्र की आरतें यहां नज़र आ रही हैं। किसी की गोद में बच्चा, किसी की उंगली थामें। जिससे भी बात करो हर किसी से आंदोलन को ताकत देने का जज़्बा छलक आता है।

हमारे हक़ की लड़ाई है

गुलाबी स्कॉर्फ बांधे फिरदौस धरना छोड़ने की सलाह देने वालों के लिए कहती हैं -घूसखोरी खाने वाले होंगे। क्यों हटें भई हम लोग, ये बताईये? हम लोग इतने दिन से प्रोटेस्ट कर रहे हैं। सब छोड़कर, हिजाब छोड़कर जब हम लोग बाहर आ गए हैं अपने संविधान के लिए तो हम क्यों हटे यहां से? 15 तारीख़ से शुरु हुआ है धरना। मैं रोज़ आ रही हूं। हम सुबह 11-12 बजे आते हैं रात में 3 बजे करीब वापस जाते हैं घर। 15 साल का बच्चा, पति हम सब लोग पूरा-पूरा दिन यहीं रहते हैं।
मैं (वीना)- आपको कैसे पता चला इस धरने के बारे में?
फिरदौस – औरतें जुलूस निकाल रही थीं। मैं अपने फ्लैट से देख रही थी। मैं बिना कुछ सोचे समझे आ गई उस वक़्त बाहर। लेकिन जब पता चला कि सीएए, एनआरसी के बारे में है,ज़ाहिर सी बात है हमारे हक़ की लड़ाई है। तब से मैं लगातार यहां आ रही हूं। हालांकि इससे पहले मैं घर से बाहर नहीं निकलती थी। अभी नहीं निकलेंगे तो फिर कब निकलेंगे?
मैं (वीना)- ऐसा क्या ख़तरा है कि सोचा अब निकलना ही चाहिये?
फिरदौस- ख़तरा तो देखिये कुछ नहीं है। क्या कोई बिगाड़ सकता है। हमारे पास तो सारे डॉक्यूमेंट्स हैं। लेकिन जिसके पास नहीं हैं वो कहां से लाकर देंगे। सिर्फ़ हमारी मुस्लिमों की बात नहीं है।


मेरे पति का वोटर कार्ड बना था। उसमें नाम शफीक़ की जगह शकीक हो गया था सिर्फ़ स्पेलिंग मिस्टेक हो जा रही है। तो भी जान लीजिये, 6 महीने चक्कर लगाना पड़ा ठीक करवाने को।
फोटो में मेरे जेठ का नाम लक्ष्मण प्रसाद लिखा था। मेरा नाम वोटर लिस्ट में नहीं था। आए थे जनगणना वाले नाम लेने, पर ज़्यादातर मुस्लिमों का नाम काट दिया था। बिहार में बाढ़ आती रहती है। वो कागज़ कहां से लाएंगे?
पीछे खड़ी उम्र दराज़ शमीम बानो ने फिरदौस की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा-मेरी बेटी के वोटर कार्ड में बाप का नाम आ गया पति के नाम की जगह।
मैं (वीना)- आप रोज़ आती हैं?
शमीम बानो –रोज़ आती हूं। बहुत ख़राब लग रहा है देख कर कि लोग ठंड में बैठे हैं। ये जो मोदी करवा रहा है ठीक नहीं है।

हिंदू-मुसलमान की लड़ाई नहीं है ये

23 साल की रीना बेटी को गोद में लेकर रोज़ धरने में अपनी हिस्सेदारी निभाने आती हैं।
मैं (वीना)-तो यहां रोज़ आना आपको अपनी ड्यूटी लगती है।
रीना –(हंसकर) जब तक सीएए, एनआरसी वापस न हो जाएंये ड्यूटी ही है।
मैं (वीना)- आपको इससे क्या फर्क़ पड़ेगा?
ये अगर लागू हो जाएगा तो हमारी क्या लाइफ है? क्या फ्यूचर है? कुछ भी नहीं।
मैं (वीना)-कैसे?
रीना- ये लागू हो गया तो डिटेंशन कैंप में डाल दिया जाएगा।
मैं (वीना)- अमित शाह कह रहे हैं यहां के नागरिकों को डरने की जरूरत नहीं है।
रीना- वो तो झूठ बोलते हैं। बोलने दीजिये। झूठे हैं वो दोनों।
मैं (वीना)- मोदी जी कह रहे हैं बस मुसलमान इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं।
कई आवाजें एक साथ -हिंदू-मुसलमान में कोई प्रॉब्लम नहीं है। सब एक साथ हैं। अगर कोई इसको कहेगा तो ये बनाया जाएगा।
कोई हिंदू-मुसलमान की लड़ाई भी नहीं है इसमें। इसमें सब शामिल हैं।
मैं (वीना)- मोदी कहते हैं कि तीन तलाक कानून पर मुसलमान औरतों ने उन्हें वोट दिया था।
कई फिर एक साथ बोल पड़ती हैं – ये सब गुमराह कर रहे हैं। औरतें जो बुर्का लगा-लगाकर आती थीं ये सब हमारी मुस्लिम महिलाएं नहीं थी। झूठ बोल रहे हैं।


ऐसा प्रधानमंत्री न कभी चुनना, न बनना

अपनी बेटी के साथ आईं सुम्बुल बीच में सवाल करती हैं
सुम्बुल – मोदी जी, अमितशाह जी अपने आप को भगवान से भी बढ़कर समझ रहे हैं क्या?मतलब ये पागलपंथी है ना, हम तो इंडिया में पैदा हुए हैं, यहां की नागरिकता मांग रहे हैं। यहां का ही हमें डेथ सर्टिफिकेट भी चाहिये और यहां का ही बर्थ सर्टिफिकेट भी। कोई इंग्लैंड, अमरीका का नहीं मांग रहे हैं।
मैं (वीना)-आप क्या करती हैं?
सम्बुल – हाउस वाइफ हैं। घर का काम धंधा छोड़कर यहां आकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं। अब रोड वाईफ हो रहे हैं। अपने बच्चों का फ्यूचर तो हमें सोचना है। मोदी-अमित शाह तो अपना पेट भर लिए हैं। और दूसरे को रोड पर लाकर खड़ा कर दिया है। चाहे वो हिंदू हों चाहे मुसलमान कोई भी कौम हो। सारे परेशान हैं। जबसे ये सरकार बनी है तब से सारे परेशान हैं। पहले नोटबंदी कर दी रातों-रात तो लोग परेशान थे। क्यों? वो नोट तो चल ही रहा था ना। कौन सा ब्लैक मनी आ गया उनके पास? हम लोगों को दिखा दें।
मैं (वीना)- अमित शाह कह रहे हैं कि लोगों को बिल समझ नहीं आ रहा है।
मेरा सवाल पूरा हो ने से पहले सब ने हंसकर एक साथ कहा – उनको समझ नहीं आ रहा। उनको पढ़ने की ज़रूरत है।
मैं (वीना)- कैसे समझ नहीं आ रहा उनको?
फिरदौस-पढ़े-लिखे नहीं हैं इसलिए नहीं समझ में आ रहा है। उनको खुद फुलफॉर्म नहीं पता है।
सम्बुल- ये बताएं जहां इंसान पैदा हुआ है वहां की नागरिकता तो देंगें ना?
मैं -वो कह रहे हैं आपको साबित करना पड़ेगा।
सम्बुल- क्यों साबित करना पड़ेगा? ऊपर चले जाएं.. वहां बोलें कि आप हमको क्यों यहां भेजे?
मैं- कुछ लोग कहते हैं आप तो बाबार के साथ आए थे।

सब हंसने लगती हैं।
मैं- आप बाबर के वंशज हैं और वो भारत के।
फिरदौस – अच्छा वो अपनी 7 पुश्तें बता दें। हमारी दादी (शाहीन बाग़ की तीन दादिया आज दुनिया भर में मशहूर हैं) ने तो अपनी नौ पुश्तें बता दीं। वो अपनी तीन पुश्तें ही बता दें। सब औरतें गा रही हैं – इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमज़ोर हो ना…
यूपी में जो हो रहा है। उनका तो बयान भी है। मैं तो बदला ले रहा हूं। किस चीज़ का बदला ले रहे हैं? गुंडई कर रहे हैं योगी?
रौशन मिज़ान – मैं क्या बोलूं वो बच्चे तो नहीं हैं ना। बच्चे-बच्चे को समझ में आ रहा है कि क्या हो रहा है।
सम्बुल अपनी बेटी सारा के साथ आईं हैं कहती हैं मोदी ने ऐसा कर दिया है कि उनके गुनाह कहीं नहीं छुपने वाले अब। बच्चा-बच्चा जानता है। यहां तो जामिया की वजह से प्रोटेस्ट शुरू हो गया। पूरी दुनिया में जो हो रहा है वो तो इन्हीं की वजह से हो रहा है ना।
किसी ने कहा पहले वो अपना सबूत दिखा दें।
मैं- उन्होंने दिखा दिया तो?
फिरदौस- तो वो तो दिखा देंगे। जैसे डिग्री बनवा ली। वैसे ही पैसा देकर बनवा लेंगे। नोटबंदी में गरीब आदमी लाइन में खड़ा हुआ किसी बड़े आदमी को लाइन में खड़े देखा आपने? मोदी को तो कभी नहीं देखा लाईन में कि वो अपना नोट बदल रहे हैं।
मैं- बच्चों को क्या समझाते हैं आप लोग?
सम्बुल – ऐसा प्रधानमंत्री न कभी चुनना, न बनना। बच्चों को पता है मोदी ने आग फैला दी है उसको बुझाने के लिए हम लोग यहां खड़े हैं। हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सब खड़े हैं एक साथ इसे बुझाने के लिए। हम यहां से कहीं नहीं जाने वाले। ना हम लोग सिटिजनशिप प्रूफ देंगे।
मैं- दिल्ली इलेक्शन में आचार संहिता लागू होगी तो हटा देंगे यहां से
फिरदौस – हम हटेंगें ही नहीं। गोली मारेंगे न, मार दें। ऐसे भी तो मर रहे हैं। ज़िल्लत से मरने से बेहतर होगा कि गोली खाकर मर जाएं।  जब तक इंसाफ नहीं मिलेगा नहीं हटेंगे। मोदी पहले कह दें कि ये ख़त्म कर दिया है तो हटेंगे।

जिस जनता ने चढ़ाया है वही नीचे गिराएगी

भीड़ में से एक- जिस जनता ने चढ़ाया है वही जनता इनको नीचे उठाकर फेंकेगी। जो ज़्यादा ऊंचा चढ़ जाते हैं वो गिरते भी हैं।
भीड़ से दूसरी – मोदी बेईमानी से जीता है।
मैं- कैसे पता कि बेईमानी से जीता है?
क्योंकि हर इंसान उससे खि़लाफ़ है तो कैसे जीत सकता है? आप मानिये।
मैं- वो कहते हैं हमने औरतों की कितनी भलाई की है। उन्हें गैस दिया है।
औरतों की भलाई के लिए करते हैं तो अंधे हैं क्या, उन्हें दिख नहीं रहा? न्यूज़ नहीं देखते कि औरतें यहां पर सर्दी में बैठी हैं।
औरतों की भलाई कर रहे हैं, परिवार को भगा रहे हैं। परिवार के साथ भगाएंगे कि परिवार को छोड़ देंगे यहां।
मुसैयदा- वो जो कै़द में रखेंगे उससे अच्छा तो यही है यहीं मर जाएंगे। बहुत से आदमी तो ये कह रहे हैं। अपने बच्चों को गोली मारेंगे खुद को गोली मारेंगे। हमारे बाप-दादे यहां पैदा हुए यहां मरे। क्या करेंगे हम कहीं और जाकर, यहीं दफन होंगे। जब यहीं पैदा हुए हैं तो। जब से मोदी सरकार आई है उसने क्या किया हमारे लिए? कुछ भी नहीं किया? देश की आर्थिक स्थिति ख़राब हो रही है।

झूठी सरकार है भई

मैं- वो कह रहे हैं उन्होनें 5 लाख का बीमा दे दिया है।
पीछे भीड़ से कोई – किसके पास है बीमा? किसी के पास 5 पैसे का बीमा नहीं है। वो तो देश-विदेश घूमते रहे बस। झूठी सरकार है भई साफ सी बात है।
मोदी झूठा है। ज़रा सी देर में संसद में कुछ बोलता है बाहर कुछ बोलता है झूठा।
रुकैया- उनके वायदे झूठे हैं। मुसलमानों की औरतों की ज़िम्मेदारी लेता है अपनी औरत को तो देख ले पहले। हमारे नबी ने जो कहा है वो होकर रहेगा। तेरे पास जो शिकायत लेकर जा रही हैं वो बावली हैं। आज़ादी के लिए सभी ने कुर्बानी दी थी। हिंदू-मुसलमान सभी थे।  आते ही सारे कानून बदल दिए मोदी ने। बिगाड़ने में क्या है। मिनट लगता है।
जब से ये आया है लोग परेशान हैं। परेशानी लोगों की बढ़ती जा रही है घटती नहीं है। जहां हम पैदा हुए हैं वहां नहीं रहेंगे कहीं और जाकर रहेंगे। ये ग़ल़त है।

तमाशा कितना देखियेगा?

एमए उर्दू और टीचर रह चुकीं 36 साल की नफीस फातिमा अब हाउसवाइफ हैं। अपनी बहन के साथ धरने में शामिल होने आईं हैं।
मैं- यहां क्यों आई हैं?
नफीस फातिमा – हम लोग तो अपना संविधान ही बचाने के लिए आए हैं। हमारा जो राइट है वो तो मिलना ही चाहिये।
जब से मैं पैदा हुई हूं मैंने बहुत कुछ देखा है। 1992 के दंगे भी देखें हैं हमने। इतना बड़ा मूवमेंट पहली बार देखा है। यहां मैंने पहली बार सबको एक साथ देखा है। औरतें ख़ासकर। ये चीज़ मुझे अच्छी लगी। तभी मैंने ज्वाइन किया है। वरना मुझे राजनीति से कोई मतलब नहीं है।
मुझे फैमिनिज़्म से मतलब है। लगता है कि औरतों को ज़रूर आगे आना चाहिए। मैंने पहली बार देखा है कि औरत जो है वो मर्द को प्रोटेक्ट कर रही है। आजकल के इंडिया में औरत कहां सेफ है। फ्रीडम, ये वो सब किताबी बातें हैं। जो हम किताबों में पढ़ते हैं या मीडिया में देखते हैं। और कहीं कुछ नहीं दिखता। लेकिन यहां पहली बार मैंने देखा है कि औरतें बैठ कर मर्द को प्रोटेक्ट कर रही हैं।
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने जो संविधान बनाया था सारे लोगों को ध्यान में रखकर बनाया था। बहुत मुश्किलों से बना था। और फिर हम ग़लत बात पर नहीं हैं। हम तो सही बात पर हैं ना। अपना राइट कभी नहीं छोड़ना चाहिये।
मैं- क्या ग़लत लग रहा है आपको?
नफीस फातिमा – सबको लाइन में खड़ा होना पड़ेगा। मेरे पास अगर खोजियेगा तो मेरे घर में फ्रीडम फाइटर भी रह चुके हैं। काग़ज की कोई बात नहीं है। हमारे पास सब डॉक्यूमेंट्स हैं। हमारा घर 1905 का है भागलपुर में। लेकिन जिसके पास नहीं है वो कहां जाएंगे।? उनके पीछे कौन है? तमाशा कितना देखियेगा?

(वीना जनचौक की दिल्ली हेड हैं।)

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