Sun. Jun 7th, 2020

ग्राउंड रिपोर्ट- 4ः देश गुजरात नहीं है, बता रही हैं शाहीन बाग़ की औरतें

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क्या जामिया मिल्लिया इस्लामिया के शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बर्बर पुलिसिया हमला मोदी सरकार की भारी भूल साबित होने जा रहा है? और इसका नतीजा उनकी दमन की लत छुड़ा देगा? वो लत, जो वो गुजरात से लाए हैं।

मुसलमानों से एकतरफ़ा नफ़रत से भरे घड़े में आखिर जामिया पर फेंके गए पत्थर से सब्र का घड़ा छलक पड़ा, और यही वो पल थे जब आंखों के आंसू और दिल के घावों को शाहीन बाग़ की औरतों ने दुनिया के सामने रखना ज़रूरी समझा और हुक्मरानों से कहा, बस, अब और नहीं। देश गुजरात नहीं है।

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शाहीन बाग़ के धरने की शुरुआत को अंजाम देने वालों में से एक नाम है मरियम खान। धरने को अंजाम तक पहुंचाने के लिए मरियम कहती हैं, ‘‘अन्याय के खिलाफ़ हम सबसे आगे हैं। जान भी देनी पड़ी तो हम देंगे।’

वीना- दुनिया में मशहूर हो चुके इस धरने की शुरुआत आखि़र हुई कैसे?

मरियम ख़ान- जामिया में जो हुआ वहीं से शुरुआत थी हमारे अंदर। वही टर्निंग प्वाइंट था। आज जब हमारे पढ़ने वाले बच्चों पर लाठी चार्ज, ये सब कर रहे हैं तो फिर आने वाले बच्चों पर क्या होगा। उनका भविष्य तो बिलकुल ही गया फिर। इसलिए आज नहीं तो कभी नहीं फिर।

वीना- यूं धरना देकर विरोध करना है ये कैसे तय हुआ?

मरियम ख़ान- हमने मार्किट में, रोड पर बात शुरू की। जैसे मार्केट जाते हैं… एक रुकी… फिर दो रुकी… तीन रुकीं… इस तरह से कई रुकीं। फिर हमने आपस में फै़सला किया कि हमें ऐसी जगह ढूंढनी चाहिए जहां हमें बैठना है जाकर। फिर हम सबने सोचा कि कहीं तो हमें एक ग्रुप बनाना होगा, जिससे जो घरों में लेडीज हैं उनके अंदर भी जज़्बा पैदा हो। वो भी अपने बच्चों के साथ आएं।  

हम किसी हिंदू-मुस्लिम, बौद्ध या पारसी के लिए नहीं, हिंदुस्तान में जितने बच्चे हैं सब हमारे बच्चे हैं। हम उन सारे बच्चों के लिए खड़े हैं। इसलिए हमारे अंदर जज़्बा पैदा हुआ। 

आप जितने अत्याचार कर रहे थे करते रहिए। किए हैं आपने, लेकिन अब ये बच्चों का मसला है। हम तो अपनी ज़िन्दगी जी चुके, लेकिन आने वाले बच्चों के साथ ग़लत नहीं होने दिया जाएगा। 

वीना- धरना उठाने की धमकियां मिल रही हैं?

मरियम ख़ान- हिंदू-मुसलमान सब साथ हैं। पुलिस आए तो सही। गिरफ्तार करके लेके तो जाए हमें। हमारी सारी दुनिया में आवाज़ पहुंच गई। हम डरने के लिए थोड़े ही बैठे हैं। जब हम ठंडी हवाएं झेल गए तो तुम्हारी धमकियों से डरेंगे? 

वीना- आपने पढ़ाई की है?

मरियम ख़ान- मेरी अंग्रेज़ी की पढ़ाई है। अगर मुझे न भी बोलना आता होगा तो भी मैं इतना बोल दूंगी कि ये काला कानून है। ये ग़लत कर रहे हैं। हम इसको नहीं लागू होने देंगे। जितना जु़ल्म उनको करना था कर चुके। 

वीना- वो कह रहे हैं आपको कानून समझ में नहीं आ रहा, आप ज़बरदस्ती विरोध कर रहे हैं।

मरियम ख़ान- कानून तो उन्होंने कौन सा पढ़ा है। हमने तो बीए किया है। वो तो नकली डिग्रियां लिए बैठे हैं। हमें अपने देश के बारे में तो पता है। हमें अपनी सारे धर्मों की, हिंदुस्तान की मोहब्बत के बारे में तो पता है, उन्हें तो वो भी नहीं मालूम। उनको तो ये बताया जाए। हमने बचपन से अपने मोहब्बतें सीखी हैं। नफ़रत तो वो सिखा रहे हैं।

वो पीएम भले ही बने बैठे हैं, लेकिन अगर उन्हें आम जनता के साथ बिठा दिया जाए तो मेरे ख़्याल से उनसे बड़ा जाहिल कोई नहीं मिलेगा दुनिया में। दूसरा, जब वो हम में नफ़रतें फैला रहे हैं तो वो क्या पढ़े-लिखे हैं? आप किसी जाहिल को भी उठा लाइए वो भी बता देगा कि हिंदू-मुसलमान-सिख-ईसाई हम सारे भाई-भाई हैं। 

वो ये सोच रहे होंगे कि हम महिलाएं हट जाएंगे। अगर हमें हटना होता न, तो पहले दिन से हट जाते। 20 दिन क्या हम तो कह रहे हैं हम तो 20 साल यहीं बैठेंगे। हटाकर तो दिखाएं वो। अगर उनके अंदर हिम्मत हो तो वो महिलाओं का सामना कर लें। 

तीन तलाक के मुददे पर उन्होंने किसी की राय नहीं ली। बीजेपी की टुच्ची औरतें लाकर उन्हें नकाब पहना-पहनाकर उनसे ग़लत बयान ले लिए। किसी मुस्लिम महिला से नहीं लिए हैं उन्होंने। एक दो जो पैसा खाकर कुछ भी बोल दें उन्हें बिठा लिया। 

वीना- मतलब मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक कानून के खि़लाफ़ हैं?

मरियम ख़ान- बिल्कुल खि़लाफ़ हैं। ये हमारे इस्लाम के खिलाफ़ हैं। हमें ये मालूम है कि अगर किसी औरत के साथ तीन तलाक का मसला हो भी जाए तो तलाक देने वाला ही तो पैसा देगा… कि मोदी भेजेगा उसे पैसा। अगर आप उन्हें जेल में डलवाएंगे तो वो हमें पैसे कैसे देंगे फिर? जो ग़रीब हैं उनके हालात तो ऐसे नहीं होते हैं कि वो पैसे भी दे दें और जेल की हवा भी खा कर आएं। तो आपने हम मुस्लिम महिलाओं से पूछा, हमारी राय ली? जो आपका दिल करेगा आप वो करोगे। 

ये तो मुल्क़ का मसला है। संविधान बचाने का मसला है। इसलिए हम यहां पर बैठे हैं। आज अगर ये मसला नहीं होता… बाबरी मस्जिद का था, कोई नहीं आया। चलो हमारे मुल्क़ की मोहब्बत है। चलो कोई बात नहीं। 

अगर हम मुस्लिम महिलाओं से राय ली जाती तो बाबरी मस्जिद में हम ना मंदिर बनने देते ना मस्जिद। हम हॉस्पिटल बनवाते, जिसमें सारे धर्म आते हों। न हिंदू आएं न मुस्लिम आएं। इन दोनों को हटाइये बिल्कुल। सिख भी आएं, बौद्ध भी आएं, जितने भी धर्मों के हैं सारे आएं। 

कोई पार्क बनवाते। जिसमें ग़रीब बच्चे आएं। रोज़गार तो छीन लिए तुमने, बेरोज़गारी ला दी। बेरोज़गारी में पेट पकड़ कर लेटने के लिए पार्क ही बनवा देते। जो सड़कों पर सो रहे हैं अच्छा सा पार्क बन जाता तो वहां सो जाते। कोई तो नेक काम कर लेते अपनी लाइफ में। खाली ऊंचे-ऊंचे भाषण देने से, विदेशों में अपनी तारीफ़ करने से या करोड़ों की ड्रेस पहनने से अगर ये ऐसे मुल्क़ चला रहे हैं तो बहुत ग़लत चला रहे हैं। 

इन्हें अगर समझदारी नहीं है तो किसी ग़रीब को बिठाएं। उससे राय लें कि मुल्क़ कैसे चलाना है। शायद इनसे बेहतर वो बता दे। सबसे बड़ी बात तो ये है कि ये हैं जाहिल। हमारे अंदर ऐसे जज़्बात इतने हैं इस वक़्त कि अगर हमें अपने देश के लिए कुर्बानी भी देनी पड़े न तो सबसे पहली गोली मेरे मारें। मैं हटूंगी नहीं यहां से। 

वीना- इलेक्शन, 26 जनवरी के बहाने से हटाएंगे, धारा 144 लगाएंगे, तब क्या करेंगे आप लोग? 

मरियम ख़ान- हम यहीं खड़े रहेंगे। वो लाठी बरसाएंगे। जेल में डालेंगे, डालें। सारी दुनिया तो हमारी आवाज़ सुनेगी। हम बिलकुल नहीं डर रहे हैं। कोई सी भी धारा लागू कर दें हम यहां से हटेंगे नहीं। हम ये ज़ज्बा लेकर आए हैं कि हमें हटना नहीं है। हर हाल में इंसाफ़ हमें यहीं से मिलेगा। आज हमें देखकर सारी महिलाओं में जज़्बा पैदा हो रहा है। हम उनके हौसले बढ़ाने के बजाय घर में छुप कर बैठ जाएं। नहीं बैठना है हमें घर में। 

हम तो यही कहना चाहते हैं, अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है। ये सारे कानून वापस ले लें, हमें इंसाफ़ दे दें। लिखकर दे दें हम फौरन चले जाएंगे। 

वीना- क्या लिखकर दे दें?

मरियम ख़ान- यही कि ये काले कानून सीएए, एनआरसी वापस ले लें।

वीना- एनआरसी की तो कह रहे हैं हमने अभी बात ही नहीं की?

मरियम ख़ान- ये झूठ बोलते हैं। अमित शाह बयान कुछ देता है। मोदी कुछ कहते हैं। 

वीना- ये कह रहे हैं कि सीएए में तो हम नागरिकता दे रहे हैं, किसी की छीन थोड़े ही रहे हैं। 

मरियम ख़ान- ये झूठे है…ये झूठे है… झूठ बोलते है… बिल्कुल झूठ बोलते हैं। स्टेज से कुछ बोल रहे हैं। बाहर कुछ बोल रहे हैं। कपड़ों का लेकर बैठ गए कि हम कपड़ों से पहचानते हैं। तो आपको तो ज़्यादा पता होगा कपड़ों से पहचान। आप तो हिंदू महिलाओं को बुरका पहना कर बिठा देते हैं तलाक के मसले पर। तो आपके लिए कपड़ों की कोई बड़ी बात नहीं है। आपने ही तो ये शुरू किया था। इसलिए आपको कपड़ों की भी नॉलेज ज़्यादा है। कपड़ों से पहचान हो जाती है मुस्लिम कौन हैं। तो ये तो आपके नाटक पुराने हैं। अन्याय के खि़लाफ़ हम सबसे आगे हैं। अन्याय के खि़लाफ़ जान भी देनी पड़ी तो हम देंगे।

सीएए एनपीआर, एनआरसी का विरोध करने वाले लोगों की समझ और जानकारी पर सवाल उठाने वाले मोदी-शाह को शाहीन बाग़ की पाठशाला में ज़रूर आना चाहिए। यहां कि जागरूक औरतें इन्हें इनका कानून तो समझाएंगी ही साथ ही देश-दुनिया में इनकी ये करतूतें क्या रंग ला रही हैं, वो भी तफ़सील से बताएंगी। धरने में सबसे आगे बैठी 55 साल की जन्नती बेगम से जब मैंने पूछा आप यहां क्यों बैठी हैं तो बड़ी अकड़ से बोलीं,

जन्नती बेगम- मोदी से देश को आज़ाद करवाने बैठे हैं और क्या…!

वीना- क्या किया है मोदी ने?

जन्नती बेगम- क्या कर रहा है… देख ही रहे हो… क्या कहर मचा रहा है…

वीना- आपको लगता है मोदी इन कानूनों से आपको गुलाम बना लेगा?

जन्नती बेगम- वो गुलाम दूसरे का है… वो किसको बना लेगा गुलाम…

वीना- किसका गुलाम है?

जन्नती बेगम- पब्लिक का है… और किसका।

वीना- आपको लगता है यहां बैठ कर आप रोक लेंगे उसको?

जन्नती बेगम- दुनिया ही रुक जाएगा तो रुकेगा नहीं। सब रोकेगा न। हिंदू-मुसलमान तो सब रोक ही रहा है। सारी दुनिया में तो हो रहा है विरोध।

(ग्राउंड जीरो से जनचौक दिल्ली की हेड वीना की रिपोर्ट।)

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