Sunday, April 21, 2024

जंतर-मंतर: पुलिस बैरिकेड्स तोड़कर किसानों ने शुरू की पहलवानों के नए चरण की लड़ाई

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर पहलवानों के धरना-प्रदर्शन का आज 16वां दिन है। रविवार को किसान संगठनों और खाप पंचायतों ने प्रेस कांफ्रेंस करके पहलवानों को समर्थन दिया और मोदी सरकार से अपील की कि आरोपी बृजभूषण शरण सिंह को 15 दिन के अंदर गिरफ्तार करे नहीं तो किसान संगठन और खाप पंचायत आंदोलन करेंगे। इस दौरान जंतर-मंतर पर भारी संख्या में पंजाब और हरियाणा के किसान उपस्थित थे। लेकिन सोमवार को पंजाब से आए किसानों का एक जत्था धरना-स्थल पर लगे बैरिकेड्स को तोड़ दिया।

जंतर-मंतर पर पहलवानों के धरना स्थल पर पुलिस ने ठीक उसी तरह बैरिकेड़्स लगाएं हैं जैसे किसान आंदोलन के समय सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और यूपी गेट पर लगाए गए थे। यह बैरिकेड्स पहलवानों की सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि पुलिस-प्रशासन का खौफ पैदा करने के लिए लगाया गया है। जिससे पहलवानों को समर्थन देने आ रहे लोग पुलिस की तैयारी देख कर डर जाएं।

जंतर-मंतर पर पहलवानों के धरना का आज 16वां दिन है। पहलवान 23 अप्रैल से धरने पर बैठे हैं। पहलवानों ने डब्ल्यूएफआई प्रमुख और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है, और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने बृजभूषण सिंह की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए पहलवानों के समर्थन में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। किसान नेताओं का कहना है कि 15 दिन तक हम इंतजार करेंगे, आंदोलन का रोडमैप तैयार हो रहा है, उसके अनुसार आंदोलन को आगे बढ़ाया जायेगा।

भारतीय किसान यूनियन (उग्राहा) से जुड़ी महिलाएं रविवार को जंतर-मंतर पर भी आई। पहले उन्हें सिंघु बॉर्डर पर रोक लिया गया। जंतर-मंतर पर पुलिस ने दोनों तरफ से बैरिकेड्स लगाने के साथ ही पहलवानों को भी एक बैरिकेड्स में घेर दिया है। सोमवार को किसानों ने जंतर-मंतर पर पहलवानों के चारों चतरफ लगे बैरिकेड्स को तोड़ दिया।

सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकारी भूपेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि “किसान संगठनों के आह्वान पर पहलवानों को समर्थन देने के लिए भारी संख्या में किसान आ रहे हैं। धरना स्थल पर पुलिस द्वारा लगाए गए बाड़ की वजह से बहुत कम जगह है। ऐसे में किसानों ने बाड़ को हटा दिया तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है।”

बृजभूषण ने एक दिन पहले किसान नेताओं से पहलवानों के विरोध का समर्थन करने की ‘गलती’ नहीं करने और इसके बजाय जांच के नतीजे का इंतजार करने का आग्रह किया था। उन्होंने दावा किया कि वह निर्दोष हैं और आरोप लगाया कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने पहलवानों के लिए चयन प्रक्रिया में सुधार किए थे।

(जनचौक की रिपोर्ट।)

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