Thursday, October 28, 2021

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ममता की तृणमूल ख़तरे में, कई सांसद-विधायक कभी भी जा सकते हैं जेल!

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सत्येंद्र प्रताप सिंह

नारद स्टिंग ऑपरेशन : सीबीआई बनी ‘दीदी’ के गले की फांस!

कोलकाता। सीबीआई ममता बनर्जी के दल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के गले की फांस बन गई है। शारदा, रोजवैली के बाद अब नारद। हालांकि नारद स्टिंग ऑपरेशन की जांच सीबीआई को न मिले इसके लिए ‘दीदी’ ने कोलकाता हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक कोई कोर कसर नहीं छोड़ी लेकिन हुआ वही जिसका अंदेशा था कि यह जांच भी सीबीआई ही करेगी।

दीदी के तरफ से बयान भी वही आया जिसका अंदाज़ा था। भाजपा हमें जान-बूझकर फंसा रही है, बदनाम कर रही है।

आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में वर्ष 2016, विधानसभा चुनाव से पहले नारद स्टिंग ऑपरेशन सामने आया था। इसके टेप कई अख़बारों और न्यूज़ चैनलों को जारी किए गए थे, जिसमें तृणमूल के कई सांसद और विधायक कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए दिखाई दिए थे।

नारद स्टिंग ऑपरेशन की तस्वीर

कोलकाता हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने के आदेश दिए थे, जिसके खिलाफ तृणमूल नेता सुप्रीम कोर्ट गए थे, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मांग खारिज करते हुए सीबीआई जांच पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है।

अब देखना यह है की जिस तरह शारदा में सांसद कुणाल घोष, सृंजय बोस और मदन मित्रा आदि जेल गए। रोजवैली में सांसद सुदीप बंदोपाध्याय व तापस पाल आदि जेल गए, नारद में अब कौन-कौन जेल जा रहा है?

वैसे जेल जाने की संभावना तो एक दर्जन से ज्यादा लोगों की है। देखना यह भी है की पहले किसका नंबर आता है और अंत किस पर जाकर होता है। तब तक ‘दीदी’ को झटके पे झटका लगता रहेगा।

संभावित जेल यात्री

नारद स्टिंग ऑपरेशन की तस्वीर

मुकुल रॉय- तृणमूल के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद। हालांकि इन्हें स्टिंग वीडियो में रुपये लेते नहीं देखा गया लेकिन वे एजेंट को अपने किसी आदमी को रुपये देने की बात करते दिखे।

सुल्तान अहमद- तृणमूल के वरिष्ठ नेता व लोकसभा सांसद। पार्टी के प्रभावशाली अल्पसंख्यक चेहरा। वीडियो में नोटों का बन्डल लेते दिखे और वे फर्जी कंपनी को हर सम्भव सहयोग करने का वादा करते हैं।

नारद स्टिंग ऑपरेशन की तस्वीर

सौगत रॉय- तृणमूल के वरिष्ठ नेता व लोकसभा सांसद। स्टिंग वीडियो में फर्जी कम्पनी के एजेंट से नोटों का बंडल लेकर पॉकेट में रखते दिखे। साथ में यह भी कहते सुने गए की यह काफी ज्यादा रुपया है।

काकोली घोष दस्तीदार- तृणमूल की वरिष्ठ नेता व लोकसभा सांसद। वीडियो में नोटों का बंडल समेटकर रखते हुए देखी  गईं।

प्रसून बनर्जी-  राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान व तृणमूल कांग्रेस के हावड़ा से लोकसभा सांसद। फर्जी कम्पनी के एजेंट से नकद चार लाख रुपये लेते देखे गए।

शुभेंदु अधिकारी- उस वक़्त लोकसभा के सांसद फिलहाल बंगाल सरकार में परिवहन मंत्री। स्टिंग वीडियो में वे फर्जी कम्पनी के एजेंट से नोटों का बंडल लेकर टेबल के ड्रावर में रखते दिखे। नोटों के बंडल लेते दिखे लेकिन एजेंट से बातचीत में दिलचस्पी नहीं दिखाई। 

लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में गठित एथिक्स कमेटी इन सांसदों की जांच कर रही है, दिलचस्प बात तो यह है की करीब दो साल में इस कमेटी की एक भी बैठक नही हुई है

सुब्रत मुखर्जी- तृणमूल के वरिष्ठ नेता व बंगाल सरकार में मंत्री। अपने घर में वे फर्जी कंपनी के एजेंट से मुलाकत कर रहे हैं। एजेंट ने अपनी कंपनी का परिचय दिया व नकद चार लाख रूपए भेंट किये।

शोभन चटर्जी-  उस वक़्त कोलकाता के मेयर व विधायक फिलहाल मेयर और राज्य सरकार में मंत्री। स्टिंग वीडियो में इन्हें एंटी चेम्बर नोटों का बंडल तौलिये में लपटेते देखा गया था। फर्जी कंपनी के एजेंट से खुलकर बात करते दिखे व विधानसभा चुनाव 16 के बाद सहयोग का भरोसा देते हैं।

फिरहाद हकीम- बंगाल के शहरी विकास मंत्री। वीडियो में अपने घर पर फर्जी कंपनी के एजेंट से बातचीत करते दिखे। वीडियो में यह कहते सुने गए की यदि वे छोटी मोटी रकम में रूचि लेंगें तो बच्चे (पार्टी कार्यकर्ता) क्या खाएंगे?

इकबाल अहमद- सांसद सुल्तान अहमद के भाई, विधायक व कोलकाता के डिप्टी मेयर। फर्जी कंपनी के एजेंट को मेयर शोभन चटर्जी व मंत्री सुब्रत मुखर्जी के पास लेकर गए थे वीडियो में दिखे भी। इन पर आरोप है की इन्होंने सबसे मिलने मिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।

मदन मित्रा- राज्य के तत्कालीन परिवहन मंत्री को अपने आवास पर नोटों का बंडल लेते देखा गया। अपने एक सहयोगी को नोट ड्रावर में रखने की हिदायत भी देते हैं। एजेंट से राज्य में निवेश करने के लिए निवेशकों को बंगाल लाने का अनुरोध भी करते हैं।

एसएमएच  मिर्ज़ा- बर्दवान जिला के तत्कालीन एसपी। फर्जी कम्पनी के एजेंट बनकर पहुंचे नारद न्यूज़ के मैथ्यू सैम्युल से मिर्जा को पांच लाख रुपये नकद लेते देखा गया। बातचीत में मिर्जा, दावा करते हैं कि वह मुकुल रॉय के बेहद करीबी हैं व उनका काम वही संभालते हैं।

बुआ ने दिया भतीजे को दायित्व 

ममता बनर्जी का साफ़ कहना है की नोटबंदी की आलोचना करने को लेकर हमारी पार्टी को निशाना बनाया गया। जब कभी हम केंद्र की नोटबंदी जैसी जनविरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं, वह हमें गिरफ्तारी की धमकी देकर झुकाने की कोशिश करता है। केंद्र प्रतिशोध की राजनीति कर रहा है, ताकि उसकी गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने से राज्य सरकार को रोका जा सके। केंद्र अपने मंसूबे में कामयाब नहीं होगा। यदि हिम्मत है, तो हम सभी को गिरफ्तार करे। नोटबंदी सहित केंद्र के गलत कार्यों के खिलाफ आवाज उठाने से हमें कोई नहीं रोक सकता। नारद स्टिंग ऑपरेशन मामले की सीबीआई से जांच कराना राजनीतिक  बदले की घटना है और इससे भाजपा का असली चरित्र सबके सामने आया है।

कलकत्ता हाइकोर्ट द्वारा नारद स्टिंग ऑपरेशन की सीबीआइ जांच कराने के आदेश के बाद से सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस अपनी छवि सुधारने में जुट गयी है। इसके लिए पार्टी ने राज्य भर में रैली व सभा आयोजित करने का फैसला किया है।

तृणमूल कांग्रेस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह दायित्व अपने भतीजे व सांसद अभिषेक बनर्जी को सौंपा है।

इन रैली व सभाओं के माध्यम से तृणमूल कांग्रेस का पहला टार्गेट भाजपा होगी। भाजपा के खिलाफ पूरे राज्य में पार्टी द्वारा रैलियां आयोजित की जाएंगी।

ध्यान देने वाली बात यह है कि इससे पहले शारदा कांड में मदन मित्रा की गिरफ्तारी के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्वयं रैली निकाली थी। इसके बाद रोजवैली कांड में सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय की गिरफ्तारी के बाद भी तृणमूल कांग्रेस ने रास्ते पर प्रदर्शन किया था।

भाजपा के व्यंग्यबाण

तृणमूल कांग्रेस के नई दिल्ली अभियान पर कटाक्ष करते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि ममता बनर्जी दिल्ली जाने की साहस न दिखाएं। सभी को पता है कि तृणमूल कांग्रेस ने रामलीला मैदान में जो सभा बुलाई थी, उस समय की भीड़ को देख कर यही कहा जा सकता है कि उस भीड़ से ज्यादा लोग तो वहां पंडाल बनाने के लिए आये थे।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति देख कर ममता बनर्जी को दिल्ली की सत्ता पर राज करने का सपना छोड़ देना चाहिए। जिस प्रकार से तृणमूल कांग्रेस के नेता, मंत्री, विधायक व सांसद एक के बाद एक भ्रष्टाचार, घूसखोरी व अन्य मामलों में पकड़े जा रहे हैं, ऐसा लगता है कि उनके हाथों से बंगाल की सत्ता भी चली जाएगी। इसलिए उन्हें दिल्ली की बजाय बंगाल के बारे में ध्यान देना चाहिए। भाजपा केंद्र में है और वह वहां की सत्ता संभाल रही है। तृणमूल कांग्रेस बंगाल में ही अपने आप को बचा पाये, वही बहुत है।

दिलीप घोष ने कहा कि तृणमूल सांसद केडी सिंह से भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आश्चर्य जाहिर करते हुए कहा कि केडी सिंह को ममता बनर्जी ने सांसद बनाया है और अब वह कह रही हैं कि केडी सिंह का भाजपा के साथ संबंध है। एक समय था कि मुख्यमंत्री चुनाव प्रचार के लिए केडी सिंह के विमान का प्रयोग करती थी। सभी भ्रष्ट लोगों को उन्होंने पार्टी में शामिल किया, सांसद बनाया और जब सच्चाई सामने आयी तो दोष दूसरी पार्टी पर लगा रही हैं। यह मुख्यमंत्री की दोहरी राजनीति का चेहरा है।

ममता बनर्जी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस का कोई भी नेता पार्टी के किसी दूसरे नेता की बातों का विश्वास नहीं करता। जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं यह कह सकती हैं कि उनको ही पार्टी से निकालने की साजिश रची जा रही थी और इसमें पार्टी के ही कुछ नेता शामिल थे। अब ऐसे में यह साबित होता है कि मुख्यमंत्री पर भी पार्टी के नेताओं का विश्वास नहीं है और वह उनके खिलाफ भी साजिश रच रहे हैं। ऐसी पार्टी का भविष्य क्या होगा, यह आनेवाला समय ही बताएगा।

 

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