Thursday, October 28, 2021

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‘मोहनपुरा’ के मनोज सिन्हा बनेंगे मुख्यमंत्री?

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प्रदीप सिंह

 आज तय हो जाएगा कि यूपी का नया मुख्यमंत्री कौन होगा, हालांकि सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा का नाम मुख्यमंत्री के तौर पर सबसे आगे है। इस बीच मनोज सिन्हा ने आज सुबह बनारस में काल भैरव और बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

इस समय दिल्ली, लखनऊ के राजनीतिक गलियारे के साथ ही पूरे उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक ही चर्चा है कि प्रदेश का मुख्यमंत्री कौन होगा। यूपी में बीजेपी की महाजीत के बाद भी एक सप्ताह में इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका। इस बीच मुख्यमंत्री के एक दर्जन दावेदारों का नाम सामने आता रहा। लेकिन किसी एक नाम पर आम सहमति और पार्टी हाईकमान से हरी झंडी नहीं मिलने के कारण ऐसे नाम सिर्फ चर्चा के केंद्र बने रहे। अंततः सूत्रों के कहना है कि केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा सारे दावेदारों को किनारे करते हुए आगे निकल गए हैं।

भाजपा को दो तिहाई से भी अधिक सीट मिलने के बाद यह माना जाने लगा था जल्द ही केंद्रीय नेतृत्व विधायक दल की बैठक बुलाकर मुख्यमंत्री का चयन कर लेगा। लेकिन उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और राजनीतिक रूप से सजग राज्य के मुख्यमंत्री का नाम तय करने में केंद्रीय नेतृत्व कोई जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहता था। प्रदेश की विवधिता और जटिल राजनीतिक समीकरण को देखते हुए किसी ऐसे नाम पर विचार किया जा रहा था जो प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से सक्षम तो हो ही और मोदी और अमित शाह का भरोसेमंद भी हो।

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार पार्टी हाईकमान की नजर में केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा इन अपेक्षाओं पर खरे उतरते हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का मानना है कि सिन्हा ने रेल राज्य मंत्री और संचार मंत्री रहते हुए जिस तरह से अपनी प्रशासनिक क्षमता को दिखाया उससे वे केंद्रीय नेतृत्व की नजरों में चढ़ते गए। दूसरा मनोज सिन्हा अपेक्षाकृत प्रदेश के सारे धड़ों के बीच स्वीकार्य नाम है। प्रदेश के मुख्यमंत्री के नामों में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नाम की चर्चा सबसे ऊपर थी। पार्टी हाईकमान, प्रदेश ईकाई और आरएसएस की वे पहली पसंद थे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने स्वयं इस सिलसिले में राजनाथ सिंह के घर जाकर चर्चा की। लेकिन राजनाथ सिंह ने देश की राजनीति छोड़कर प्रदेश की राजनीति में जाने पर अनिच्छा प्रकट की। इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व ने दूसरे नामों पर विचार करना शुरू किया। पंजाबी समुदाय के सतीश महाना और सुरेश खन्ना के अलावा पिछड़ा वर्ग के केशव प्रसाद मौर्य और स्वतंत्र देव सिंह के अलावा पार्टी के नए चेहरे श्रीकांत शर्मा और सिद्धार्थनाथ सिंह जैसे नाम भी मीडिया की सुर्खियां बनते रहे।

इसी बीच राज्यपाल राम नाइक ने 19 मार्च को शपथ ग्रहण समारोह होने की जानकारी देकर लोगों की धड़कनों को बढ़ा दिया। अब सब की निगाह केंद्रीय नेतृत्व के फैसले पर टिक गया। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व इस पर किसी तरह की जल्दबाजी नहीं करना चाहता है। प्रदेश के प्रचंड जनमत को संतुष्ट करने के साथ ही वह प्रदेश के राजनीतिक-सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए निर्णय करना चाहता है।

पूर्वांचल के गाजीपुर जिले के मोहनपुरा गांव में 1 जुलाई 1959 को जन्में मनोज सिन्हा छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट मनोज 1982-83 में बीएचयू छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे। सन् 1996, 1999 और 2014 में गाजीपुर से सांसद चुने गए।

फिलहाल, आज शाम 4 बजे लखनऊ के लोकभवन में होने वाली विधायक दल की मीटिंग में इसका फैसला होगा कि यूपी का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। यहां सेंट्रल ऑब्जर्वर के तौर पर वेंकैया नायडू और पार्टी के नेशनल जनरल सेक्रेटरी भूपेंद्र यादव सीएम का नाम तय करने के लिए मौजूद रहेंगे।

शपथ ग्रहण समारोह

लखनऊ में राजभवन के अधिकारियों के मुताबिक यूपी के नए मुख्यमंत्री कैबिनेट के सहयोगियों के साथ रविवार को दो बजकर पंद्रह मिनट पर कांशीराम स्मृति उपवन में शपथ लेंगे।

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