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अब मथुरा में उमड़ा किसानों का सैलाब, जयंत ने लिया लखनऊ से लेकर दिल्ली तक संघर्ष का संकल्प

नई दिल्ली। मुज़फ़्फ़रनगर और मथुरा में किसानों की बड़ी हाजिरी का हवाला देते हुए जयंत चौधरी ने किसानों को कहा कि आपने उनके गुंड़ों से लाठी छीन ली है। लाठी अब किसान के हाथ में है जिसे हाथ में लेकर वह समाज की लड़ाई लड़ता है और सीमा से लेकर खलिहान तक क़ुर्बानी देता है, उस लाठी के सामने कोई सरकार, कोई ज़ालिम-अत्याचारी, भ्रष्टाचारी टिक नहीं सकता है। सरकारें बनाना-बिगाड़ना आपके लिए चुटकी का काम है।

उन्होंने कहा कि बहुत हो चुका, पानी सिर से ऊपर जा चुका है। बाजरा, धान सारी फसलें पिट रही हैं। हरियाणा की मंडियों में भी यही हाल है। नए कृषि कानून को लेकर मोदी के दावे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी मंडी में फसल बेचने के दावे की हरियाणा के सीएम ने दो दिन बाद ही यह कहकर पोल खोल दी कि सिर्फ हरियाणा के किसानों का धान खरीदा जाएगा।

जयंत चौधरी ने मथुरा जिले के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन को याद करते हुए कहा कि किसानों को अपने अधिकारों के लिए लाठी, गोली खानी ही पड़ती है। आंदोलन करने पड़ते हैं। दिल्ली में हुक्मरान मीठी बातें करते हैं पर उनके दिल में आपके लिए जगह नहीं है। आपने जिन्हें इतनी ताकत दे दी है, आपकी लड़ाई उन्हीं ज़ालिमों से है। देश में कोरोना की आपातकालीन स्थिति में ही फैसला ले लिया कि एक्सप्रेस-वे के दोनों तरफ़ किसानों की ज़मीन का अधिग्रहण करने का कानून आसान बनाया जाएगा और इसके लिए उद्योग लगाने का बहाना बनाया।

रालोद नेता ने प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर पैकेज के दावे पर सवाल किया कि जो उद्योग चल रहे थे, उनमें से ही जब नौकरियां छूट जाने से लाचार होकर गरीब लोग हजारों किलोमीटर पैदल गांवों की तरफ लौट रहे थे, तब न उनके लिए कोई सुरक्षा कवच था, न मुफ्त अनाज, न पैकेज। किसानों को भी कोई पैकेज नहीं मिला। उन्होंने कहा कि ऐसे मौके पर कृषि कानूनों की तरह ही भूमि अधिग्रहण कानून को बदलने की बात किन के फायदे के लिए की जा रही है, किसान समझ रहे हैं।

नए कृषि कानून के नाम पर सरकार मंडी को तबाह करना चाहती है। दावा किया जा रहा है कि ये कानून किसानों के फायदे में हैं। लंबे समय में बनी चीज़ों को ख़त्म करने में समय नहीं लगता। ये लोग एलआईसी, रेलवे, सब कुछ बेचना चाहते हैं। इन लोगों ने लक्ष्मण रेखा पार कर दी है। किसान नहीं जागा तो कुछ नहीं बचेगा। पार्टियां, सिंबल भले ही अलग हों, सब को मिलकर यहाँ से दिल्ली तक राजनीतिक संघर्ष करना होगा, ईंट से ईंट बजानी होगी। लोहिया कहा करते थे, सड़कें सुनसान हो जाएंगी तो संसद आवारा हो जाएगी। आज आवारा पशु सड़कों पर हैं और संसद में कौन लोग हैं आप जानते ही हैं।

जयंत चौधरी ने कहा यह वक़्त संघर्ष करने का है। अगर किसानों की आँख मुझे लाठी खाने से ही खुली है तो वे चार लाठियां और खाएंगे। उन्होंने कहा कि हाथरस में कार्यकर्ता उन्हें खींचकर न ले जाते और अपने ऊपर लाठियां न खाते तो बहुत चोट लग सकती थी। उन्होंने धैर्य के साथ राजनीतिक संघर्ष का आह्वान करते हुए कहा कि किसानों-गरीबों और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने 17 अक्तूबर को बुलंदशहर में महापंचायत करने का ऐलान भी किया और इस तरह बुलंदशहर उपचुनाव को लेकर भी ताल ठोंक दी।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि जयंत चौधरी पर हुए हमले के बदले और किसानों को बचाने की लड़ाई मिलकर लड़ी जाएगी। उन्होंने चौ. चरण सिंह को याद करते हुए कहा कि सपा और रालोद एक ही धारा की पार्टियां हैं। उपचुनाव से लेकर भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने के संघर्ष में आपस में विश्वास की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि हाथरस में हत्यारों के पक्ष में बाबा की पूरी सरकार खड़ी रही।

इस अन्याय के ख़िलाफ़ निर्णायक लड़ाई ज़रूरी है। नए कृषि कानूनों को खतरनाक बताते हुए उन्होंने भाजपा सरकार के 2014, 2017 और 2019 में किसानों के साथ किए गए आय दोगुना करने जैसे वादों के छल को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि न धान का मूल्य मिल पा रहा है, न मक्का का। सरकार बनने के 14 दिनों के भीतर गन्ना किसानों का भुगतान कर देने के वादे का हाल यह है कि गन्ना किसानों का बकाया 14 हजार करोड़ रुपये हो चुका है। यादव ने आईएनएलडी नेता अभय चौटाला की बात दोहराते हुए किसानों को जाति-धर्म के झगड़ों की साजिशों से भी आगाह किया।

हरियाणा से आए इंडियन नेशनल लोकदल के वरिष्ठ नेता अभय चौटाला ने पानीपत से शुरू किए गए `बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ` अभियान में प्रधानमंत्री के ऐलान को याद दिलाते हुए कहा कि जहाँ भी भाजपा सत्ता में है, हाथरस की तरह बेटियां सुरक्षित नहीं हैं। हाथरस में गरीब दलित की बेटी को उठाकर किए गए रेप और हत्या के मामले में सरकार ने अपराधियों को संरक्षण दिया है।

उन्होंने जयंत चौधरी के दादा चौ. चरण सिंह और अपने दादा चौ. देवीलाल के संघर्षों की याद दिलाते हुए किसानों को एकजुट होकर संघर्ष का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसानों को जाति और धर्म के नाम पर लड़ाकर सत्ता में आए लोगों से आगे सावधान रहना होगा। उन्होंने कहा कि एक ज़माना था कि आरएसएस-जनसंघ का कोई आदमी झंड़ा लेकर किसी गाँव में आ जाता था तो उसे गाँव के बाहर धकेल दिया जाता था। पंजाब से आए शिरोमणि अकाली दल के जगजीत सिंह भराल ने यूपी की योगी और केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ अभियान छेड़ देने का आह्नान किया।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)      

This post was last modified on October 12, 2020 10:33 pm

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Published by
Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi