Monday, October 18, 2021

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पनामा पेपर लीक्स के बाद टैक्स हेवंस वाली संपत्ति बेचने में जुट गए थे भारत रत्न सचिन तेंदुलकर, पेंडोरा पेपर्स में खुलासा

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पांच साल पहले पनामा पेपर लीक ने सारी दुनिया में तहलका मचा दिया था। बड़ी-बड़ी हस्तियों की फर्जी कंपनियों और टैक्स चोरी की सच्चाई सामने आई थी। अब एक बार फिर आईसीआईजे (इंटरनैशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स) ने अब तक का सबसे बड़ा खुलासा किया है। इसमें बताया गया है कि कैसे पूरे खेल का पर्दाफाश होने के बाद भारतीय हस्तियों ने इसका तोड़ निकालना शुरू कर दिया था।अब इस खुलासे पर विश्वास करें तो भारत रत्न की उपाधि से विभूषित और क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर पनामा पेपर के खुलासे केबाद टैक्स हेवंस वाली अपनी संपत्ति बेचने में जुट गए थे।

आईसीआईजे ने ट्वीट किया कि वह रविवार को दुनिया के हर कोने को कवर करने वाले 11.9 मिलियन दस्तावेजों के रिसाव के आधार पर आर्थिक गोपनीयता के लिए अब तक का सबसे विस्तृत जोखिम जारी करेगा।

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि पेंडोरा पेपर्स की जांच में पांच अलग-अलग पैटर्न सामने आये हैं। भारत में भी कई अपतटीय इकाई मालिकों ने पनामा पेपर्स के बाद के परिदृश्य के अनुकूल होने के साधन ढूंढे हैं, जब अपतटीय दुनिया हिल गई थी, जब कई देशों ने नियमों को कड़ा किया था और भारत में, टैक्समैन ने2021 की शुरुआत तक 20,000 करोड़ रुपये से अधिक अघोषित विदेशी और घरेलू संपत्ति का पता लगाया था।

उदाहरण के लिए, स्पोर्ट्स आइकन सचिन तेंदुलकर ने पनामा पेपर्स का पर्दाफाश होने के तीन महीने बाद ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में अपनी इकाई के परिसमापन के लिए कहा। अन्य प्रमुख भारतीय और एनआरआई भी हैं, जिन्होंने 2016 के डेटा लीक के बाद, अपनी अपतटीय संपत्तियों के पुनर्गठन या पुनर्गठन का विकल्प चुना है। जाहिर है, भारतीय व्यवसायी अपनी संपत्ति से कुछ हद तक अलग होने और अपनी संपत्ति को लेनदारों से अलग करने के लिए अपतटीय ट्रस्टों के ढेरों की स्थापना कर रहे हैं।

दुनियाभर के 1.19 करोड़ दस्तावेजों को खंगालने के बाद इन ‘वित्तीय रहस्यों’ को दुनिया के सामने लाया गया है। आईसीआईजे ने बताया था कि पैंडोरा पेपर की जांच में 117 देशों के 600 रिपोर्टर जुटे रहे। अब इसे क्या कहेंगे कि अनिल अंबानी जो खुद को ब्रिटेन की कोर्ट में दिवालिया बताते हैं, उनके पास भी विदेश में 18 कंपनियां हैं।

वहीं, पंजाब नैशनल बैंक से हजारों करोड़ का घोटाला करने वाले हीरा व्यापारी नीरव मोदी की बहन ने उसके भागने के एक महीने पहले ही एक ट्रस्ट बनाया था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पनामा पेपर लीक के बाद भारतीयों ने अपनी संपत्ति को ‘रीऑर्गनाइज’ करना शुरू कर दिया। इसके मुताबिक क्रिकेट लेजेंड सचिन तेंदुलकर ने भी लीक के तीन महीने बाद ही ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में अपनी संपत्ति बेचने में जुट गए थे।

इससे पहले 2016 में डेटा लीक के साथ दुनिया के सामने टैक्स चोरी के खेल को उजागर किया गया था। इसमें बताया गया था कि कैसे विदेशों में मुखौटा कंपनियों के जरिए इसे अंजाम दिया जाता है। यह लीक पनामा की कानूनी सहायता देने वाली कंपनी के साथ जुड़ी हुई थी और इससे पनामा देश का नाम भी खराब हुआ था जबकि ज्यादातर कंपनियां बाहर की थीं।

पिछली जांच में पता चला था कि कैसे संपत्ति, कंपनियों, मुनाफे और टैक्स चोरी को छिपाया गया था और इसमें सरकारी अधिकारियों और रसूखदारों के साथ-साथ राष्ट्राध्यक्ष तक शामिल थे। खेल से लेकर कला जगत तक की हस्तियों का नाम पनामा पेपर लीक में सामने आया था। इसी साल जुलाई में भारत सरकार ने बताया था कि पनामा पेपर लीक में भारत से संबंधित लोगों के संबंध में कुल 20,078 करोड़ रूपए की अघोषित संपत्ति का पता चला है।

पनामा की स्थानीय मीडिया द्वारा जारी एक सरकारी पत्र के अनुसार, पनामा को डर है कि वैश्विक टैक्स हेवन में आर्थिक गोपनीयता पर एक नए रहस्योद्घाटन के खुलासे से एक बार फिर इसकी प्रतिष्ठा नष्ट हो सकती है, जो “पनामा पेपर्स” घोटाले से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी।आईसीआईजे को एक कानूनी फर्म के माध्यम से भेजे गए पत्र में पनामा सरकार ने कहा है कि नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती है।पत्र में चेतावनी दी गई है कि कोई भी प्रकाशन जो संभावित टैक्स हेवन के रूप में देश की झूठी धारणा को पुष्ट करता है, पनामा और उसके लोगों के लिए विनाशकारी परिणाम होंगे।
भारतीय बैंकों के हजारों करोड़ रुपये के कर्ज में डूबे लोगों ने, जैसा कि पेंडोरा पेपर्स दिखाते हैं, अपनी संपत्ति के एक बड़े हिस्से को अपतटीय कंपनियों के चक्रव्यूह में बदल दिया है। एक मामले में, प्रमुख भारतीय आर्थिक अपराधियों, जो वर्तमान में जेल में हैं, ने अपनी अपतटीय इकाई के माध्यम से एक बॉम्बार्डियर चैलेंजर विमान खरीदा है। कई प्रवर्तकों ने, जैसा कि जांच से पता चलता है, अपनी संपत्ति को अपतटीय ट्रस्टों में पार्क कर दिया, प्रभावी रूप से व्यक्तिगत गारंटी से अपने व्यवसायों द्वारा चूक किए गए ऋणों से खुद को बचाने के लिए।

लीक हुए रिकॉर्ड से पता चलता है कि कई पावर प्लेयर जो ऑफशोर सिस्टम को खत्म करने में सहायक हो सकते हैं, वे इससे लाभान्वित होते हैं- गुप्त कंपनियों और ट्रस्टों में संपत्ति को छिपाना। उदाहरण के लिए, 14 अपतटीय सेवा प्रदाताओं का गोपनीय डेटा, एक पूर्व राजस्व सेवा अधिकारी, एक पूर्व कर आयुक्त, एक पूर्व वरिष्ठ सेना अधिकारी, एक पूर्व शीर्ष कानून अधिकारी आदि द्वारा स्थापित अपतटीय संस्थाओं को दर्शाता है।जबकि अपतटीय ट्रस्टों को भारत में कानून द्वारा मान्यता प्राप्त है, जिसके कारण भारतीय उद्योगपतियों और व्यापारिक परिवारों में ट्रस्टों की स्थापना के लिए तेजी आई है, यह संपत्ति शुल्क की वापसी का डर है, जो 1985 में इसके समाप्त होने तक, 85 प्रतिशत के रूप में उच्च था।

2016 में इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स ने पनामा पेपर्स लीक किए थे। तब दुनिया को पता लगा था कि पनामा जैसे टैक्स हेवन्स देशों में अमीर लोग किस तरह अपनी काली कमाई इन्वेस्ट करते हैं। अब पनामा को ही लेकर पेंडोरा पेपर्स जांच के दस्तावेज सामने आने वाले हैं। इन्हें भी आईसीआईजे ने तैयार किया है। एक या दो दिन में पत्रकारों की पूरी जांच रिपोर्ट सामने आ जाएगी। इसमें कुछ चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

मध्य अमेरिकी देश पनामा को टैक्स हेवन्स कंट्रीज में गिना जाता है। यहां अमीर लोग पैसे देकर नागरिकता हासिल कर सकते हैं। इन्वेस्टमेंट के नियम और कानून बेहद आसान हैं। 2016 में पनामा पेपर्स लीक सामने आया था। इसे भी ICIJ ने ही लीक किया था। भारत समेत दुनिया के कई देशों के अमीरों के नाम सामने आए थे। अब पेंडोरा पेपर्स सामने आया है।

पनामा पेपर्स लीक स्कैंडल की जांच और उससे जुड़ी लगभग 3.2 लाख विदेशी कंपनियों और ट्रस्टों के पीछे के लोगों का पता लगाने की कोशिश का हिस्सा है। पनामा की लॉ फर्म मोसेक फोंसेका के डेटा सेंटर से उड़ाई गई इन गोपनीय सूचनाओं की चर्चा ‘पनामा पेपर्स’ के रूप में हुई थी। मोसेक फोंसेका की 1.15 करोड़ से ज्यादा फाइलें का डेटा लीक हुआ था। तब 1977 से 2015 के अंत तक की जानकारी दी गई थी।

आर्थिक अपराधों में आरोपी और जांच के तहत, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स या पनामा जैसे बड़े टैक्स हेवन के अलावा, समोआ, बेलीज या कुक आइलैंड्स जैसे टैक्स हेवन में एक अपतटीय नेटवर्क बनाया है। दरअसल, पेंडोरा पेपर्स में नामित कई व्यक्ति और संस्थाएं भारत में जांच एजेंसियों के लिए अजनबी नहीं हैं। कुछ जेल में हैं और इस जांच के कई विषय इस समय जमानत पर हैं। भारतीय अपराधियों की काफी लंबी सूची है जो वर्तमान में केंद्रीय जांच ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय जैसी एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं।

सात लीक्स के बाद में, दुनिया भर के नियामकों ने वैश्विक धन प्रवाह पर नकेल कसना शुरू कर दिया है, अभिजात वर्ग अंतरराष्ट्रीय वित्त में गोपनीयता उद्योग को फिर से आकार देने के लिए घर पर अपनी संपत्ति की जांच से बचने के लिए सरल नए तरीके खोज रहे हैं। कुलीन भारतीयों ने गुप्त पनाहगाहों में धन की रक्षा के नए तरीके खोजे हैं। यह पेंडोरा पेपर्स में सामने आया है, जो अपतटीय वित्तीय रिकॉर्ड का नवीनतम रिसाव है, जो अब तक का सबसे बड़ा है।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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