अहमदाबाद : क्या बीजेपी अपने लतीफ़ का सूरज अस्त करने वाली है?

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 अहमदाबाद।1995 से गुजरात में बीजेपी की सत्ता है। पिछले 28 वर्षों से बीजेपी के पास गुजरात की सत्ता है और बीजेपी का सबसे मजबूत गढ़ भी है। गुजरात की सत्ता हथियाने में डॉन अब्दुल लतीफ़ के नाम से की गई राजनीति ने बीजेपी को फर्श से अर्श पर पहुंचा दिया। आज भी बीजेपी हर चुनाव में गुजरात के हिन्दुओं को अब्दुल लतीफ़ का डर दिखा कर वोट मांगती है। 1987 में अब्दुल लतीफ़ अहमदाबाद नगर निगम चुनाव में 5 वार्ड से चुनाव लड़ा था और सभी 5 वार्ड से चुनाव जीता भी था। लेकिन लतीफ़ के 5 वार्ड से चुनाव लड़ने से पूरे अहमदाबाद के हिन्दू बीजेपी के पक्ष में गोलबंद हो गए थे। लतीफ़ ने जिस 4 वार्ड से इस्तीफा दिया था। उन सभी 4 वार्डों में दूसरे नंबर पर बीजेपी थी। नियम के अनुसार इस्तीफे के बाद दूसरे नंबर के उम्मीदवार को विजयी घोषित कर दिया गया था।

बीजेपी पहली बार किसी महानगर पालिका पर काबिज़ हुई थी। उस समय बीजेपी नेता हरेन पंड्या ने कहा था हमने गुजरात की राजनीति में एक जंगली जानवर छोड़ दिया है जो कांग्रेस की राजनीति को खा जायेगा। सभी 5 सीटों पर लतीफ़ का चुनाव चिन्ह शेर था जो एक जंगली जानवर है। लतीफ़ और उसके गैंग पर 64 हत्या और 14 अपहरण सहित 234 केस थे। नवम्बर 1997 में लतीफ़ को गुजरात पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार गिराया था। लतीफ़ को सत्ता और सरकार का समर्थन हासिल था। सत्ता परिवर्तन होते ही उसी लतीफ़ के बहुबल को पुलिस ने ठिकाने लगा दिया। लतीफ़ पर रईस फिल्म भी बनी थी जिसमें लतीफ़ की भूमिका शाहरुख़ खान ने निभाई थी।

पिछले एक वर्ष से अहमदाबाद में एक और लतीफ़ चर्चा में है। इस लतीफ़ का नाम अल्ताफ खान पठान उर्फ़ अल्ताफ बासी है। अल्ताफ को बीजेपी सरकार का संरक्षण हासिल है। अल्ताफ बासी पिछले एक वर्ष अहमदाबाद स्थित चार तोड़ा कब्रिस्तान में बनी एक बस्ती को अपने बहुबल से खाली कराने में लगा है। चार तोड़ा कब्रिस्तान की इस ज़मीन की कीमत सैकड़ों करोड़ रुपये है। पिछले एक साल में अल्ताफ और उसके गुर्गे इस बस्ती के लोगों से कई बार मार-पीट कर चुके हैं। बस्ती के लोगों को फेसबुक लाइव पर खुले आम धमकी देता था। लेकिन पुलिस उसी तरह लाचार दिख रही थी जिस प्रकार कांग्रेस के शासन में लतीफ़ के सामने पुलिस लाचार दिख रही थी। उसे बीजेपी या कहें गुजरात सरकार का संरक्षण हासिल था। शायद इसीलिए अल्ताफ बासी की सोशल मीडिया पर खुले आम दी गई धमकियों को पुलिस अनदेखा कर रही थी। अल्ताफ के खिलाफ 17 से अधिक मुक़दमे दर्ज हैं। 14 में गिरफ़्तारी के बाद ज़मानत भी हो चुकी है। अल्ताफ को पुलिस कब अरेस्ट करती और कब ज़मानत पर रिहा हो जाता है यह बात किसी आम आदमी को पता ही नहीं चलता। बहुत से मामले दर्ज ही नहीं होते थे। अहमदबाद के रखियाल में अल्ताफ का दरबार लगता था जहां क्राइम ब्रांच के कुछ पुलिस वाले भी बैठते थे जिससे आम लोगों में अल्ताफ का और खौफ बैठ गया था।

2024 लोकसभा चुनाव में अल्ताफ पर आरोप लगा कि उसने अहमदाबाद पूर्व , पश्चिम और गांधीनगर में बूथों पर गुंडागर्दी कर चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया। अल्ताफ गैंग द्वारा गोमतीपुर , बहरामपुरा , जुहापुरा के कई बूथ पर कांग्रेस पार्टी के टेबल पर तोड़-फोड़ की गई थी ताकि मुस्लिमों की वोटिंग कम हो और बीजेपी को लाभ मिले। चुनाव से एक दिन पहले अल्ताफ ने फेसबुक लाइव पर नरेंद्र मोदी और अमित शाह की तारीफ कर मुसलमानों से बीजेपी के पक्ष में वोट करने की अपील की थी। अल्ताफ ने गांधी नगर लोकसभा सीट पर अमित शाह को 8 लाख वोटों से जिताने को कहा था| बीजेपी ने गांधी नगर सीट को 8 लाख वोटों से जीतने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पुलिस और गुजरात के माफिया ही नहीं कांग्रेस पार्टी के कई बड़े नेता काम कर रहे थे। 

चुनाव के बाद 10 मई को पुलिस ने अल्ताफ बासी और उसके साथियों के विरुद्ध लूट, धमकी, मार-पीट जैसी गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। अल्ताफ और उसके साथियों पर चार तोड़ा के अकबर अली और कांग्रेस पार्षद रुखसाना घांची ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जिसके बाद अल्ताफ सहित कई लोग भूमिगत हो गए थे। इससे पहले भी मकान खाली कराने की प्रक्रिया में अल्ताफ गैंग और लोकल लोगों में कई बार टकराव हो चुका है। चार तोड़ा कब्रस्तान में मकान खाली कराने के नाम पर बासी के लोगों ने कई बार लोकल रेसिडेंट्स की पिटाई का मामला आ चुका है। अकबर अली शेख से हुई मार-पीट से पहले आर.जे. गुल्नाज़ ने भी बासी और उसके लोगों पर मार-पीट का आरोप लगाया था। गुल्नाज़ से हुई मार-पीट में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी लेकिन वह सक्रियता नहीं दिखाई जो पुलिस इस समय दिखा रही है।

क्यों अचानक क्राइम ब्रांच ने बासी से आंख फेर ली

यह पहली बार नहीं था जब चार तोड़ा मामले में अल्ताफ के लोगों ने मार-पीट की हो या धमकी दी हो, इससे पहले भी RJ गुलनाज़ से मार-पीट के मामले में भी अल्ताफ के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज हुई थी। उस समय सोशल मीडिया से पुलिस पर दबाव बना था। इस बार प्रशांत दयाल संचालित नवजीवन न्यूज़ ने मामले को उठाया और सीधे गृह राज्य मंत्री से सवाल किया क्या अल्ताफ बासी को शहर का दूसरा लतीफ़ बनाने की तैयारी चल रही है। प्रशांत दयाल वरिष्ठ पत्रकार हैं जिन्होंने एक लंबा समय क्राइम रिपोर्टिंग में गुज़ारा है। लतीफ़ के समय क्राइम रिपोर्टिंग करने वाले दयाल ने लतीफ़ के जीवन पर एक  किताब भी लिखी है। सरकार और पुलिस में एक अच्छी छवि है। अपनी पत्रकारिता से सोहराबुद्दीन शेख और हरेन पंड्या मर्डर केस की कई परतें दयाल ने ही खोली थी।

तुषार बसिया की अल्ताफ बासी पर रिपोर्ट वायरल होते ही कई अन्य न्यूज़ चैनलों ने खबर को लपक लिया। जिसके बाद पुलिस पर दबाव बना और पुलिस कमिश्नर चार तोड़ा कब्रिस्तान मामले की सीधी मॉनिटरिंग करने लगे। क्राइम ब्रांच को अपनी छवि सुधारने का मौका था क्योंकि शहर में यह आम धारणा थी कि अल्ताफ बासी क्राइम ब्रांच के कई अधिकारियों का चहेता है। इसी धौंस के चलते अच्छे-अच्छे लोग अल्ताफ से डरते थे। पुलिस के साथ-साथ बासी ने बीजेपी में भी अच्छी पकड़ बना ली थी। डबल कॉकटेल से कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता भी अपने आप को असहाय महसूस कर रहे थे। समय-समय पर राजनैतिक दलों की रणनीति बदलती है। श्मशान और कब्रिस्तान की राजनीति करने वाली बीजेपी ने मुंह मोड़ लिया। तो दूसरी तरफ क्राइम ब्रांच ने अपनी छवि बदलने और आम लोगों का भरोसा जीतने के लिए क्राइम ब्रांच ने अल्ताफ के साथ किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती यहां तक कि अल्ताफ बासी ने कोर्ट में आरोप लगाए कि पुलिस ने उसे पीटा और करंट दिया। कोर्ट के आदेश पर अल्ताफ का इलाज सिविल अस्पताल करवाकर सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। 

अल्ताफ की गिरफ़्तारी के बाद विधानसभा में कांग्रेस पार्टी के उपनेता शैलेश परमार, अहमदाबाद नगर निगम में विरोध पक्ष के नेता शहजाद खान पठान और पूर्व विधायक और अहमदाबाद लोकसभा कांग्रेस उम्मीदवार हिम्मत सिंह पटेल माफियागिरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की पुलिस से मांग की थी। कार्रवाई न होने पर आन्दोलन की धमकी भी दी थी। जिसके बाद पुलिस पर और दबाव बना लेकिन कांग्रेस अभी तक इस मुद्दे का सही ढंग से राजनीतिकरण नहीं कर पाई है।

अहमदाबाद स्थित चार तोड़ा कब्रिस्तान में बने मकानों को गुंडा तत्त्वों की मदद से खाली कराने के मामले में मंगलवार और बुधवार की रात को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने अल्ताफ खान उर्फ़ बासी को सूरत के आस-पास इंटरसेप्ट कर नवसारी से धर दबोचा है। अल्ताफ बासी की गिरफ़्तारी के बाद उसे अहमदाबाद लाया गया है। अल्ताफ, रफीक गद्दी और अल्ताफ भांजो पर गोमतीपुर पुलिस स्टेशन में लूट, दंगा, मारा-मारी, धाक-धमकी जैसे अपराध में तीन FIR दर्ज हुई थी। जिसके बाद अल्ताफ, गद्दी इत्यादि भूमिगत हो गए थे। क्राइम ब्रांच ने अल्ताफ की गिरफ़्तारी करने के बाद उसे मीडिया के समक्ष प्रस्तुत किया। क्राइम ब्रांच के डीसीपी ने मीडिया को बताया।

बासी की गिरफ़्तारी के बाद जॉइंट सीपी (क्राइम) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा

नवजीवन ट्रस्ट द्वारा संचालित नवजीवन न्यूज़ यूट्यूब चैनल ने चार तोड़ा कब्रिस्तान में सफाई अभियान के नाम पर मकान खाली कराने और अल्ताफ बासी और उसकी गैंग की बढ़ती गुंडागर्दी पर एक रिपोर्ट जारी की जिसके बाद गांधीनगर से अहमदाबाद क्राइम ब्रांच हरकत में आ गई। रिपोर्ट में अल्ताफ बासी को नया लतीफ़ बताया गया और कहा गया सरकार और पुलिस नया लतीफ़ बनने का इंतज़ार कर रही है। रिपोर्ट वायरल हुई तो अल्ताफ और उसके बहुत से साथी भूमिगत हो गए। लेकिन क्राइम ब्रांच ने अल्ताफ को सूरत से सटे नवसारी से दबोच लिया। अल्ताफ को अहमदाबाद लाने के बाद क्राइम ब्रांच के जॉइंट कमिश्नर शरद सिंघल ने प्रेसवार्ता कर इस संबंध में मीडिया को जानकारी दी।

शरद सिंघल ने कहा “दस और ग्यारह मई को अल्ताफ, रफीक और अल्ताफ के भांजों के विरुद्ध गोमतीपुर पुलिस स्टेशन में तीन अफेंस दाखिल हुए थे जिसमें लूट, रायटिंग, धाक-धमकी के कॉम्पोनेन्ट शामिल हैं। अल्ताफ एक वीडियो में धमकाते हुए वायरल हुआ था।”

जॉइंट सीपी सिंघल ने चार तोड़ा के मकान खाली कराए जाने की घटना के बारे बताते हैं। “अल्ताफ, रफीक और उसके तीन चार भांजों के साथ लोहे की पाइप इत्यादि हथियार लेकर जाता है और लोकल पब्लिक को धमकी देता है, मोबाइल स्नैच करता है और वहां से चला जाता है। उसके बाद वह अंडरग्राउंड हो जाता है। सीपी सर की सूचना से क्राइम ब्रांच को यह टास्क दिया गया था कि अल्ताफ को जल्द से जल्द पकड़ें। हमें ह्यूमन इंटेलिजेंस मिली थी कि वह गुजरात छोड़कर बॉम्बे के रस्ते बाहर जा रहा है। हमारी क्राइम ब्रांच ने उसे कल सूरत के आस-पास इंटरसेप्ट कर गिरफ्तार अहमदाबाद ले आया है।”
सिंघल के अनुसार अल्ताफ़ के खिलाफ 17 जितने गुनाह अलग-अलग धाराओं में विभिन्न पुलिस स्टेशन में दर्ज हैं। उसका दबदबा रखियाल, गोमतीपुर या कहें अहमदाबाद का पूर्व विस्तार में था।

सुपारी एंगल पर क्या कहा जॉइंट सीपी सिंघल ने

“ज़मीन खाली कराने की सुपारी किसने अल्ताफ को दी थी सुपारी देने वाला माथा कौन है इसका खुलासा रिमांड के बाद होगा।”
क्या अल्ताफ बासी को सुन्नी वक्फ कमिटी ने इन्क्रोच्मेंट खाली कराने की सुपारी दी थी।

1969 में अहमदाबाद में हिन्दू मुस्लिम दंगा हुआ था उस समय चार तोड़ा कब्रिस्तान में पहली बार राहत कैंप बनाया गया था। 1969 के बाद से चार तोड़ा में इन्क्रोचमेंट होना शुरू हुआ जो बढ़ता गया। अहमदाबाद सुन्नी वक्फ कमिटी और कई मुस्लिम संगठनों ने इन्क्रोचमेंट हटाने का प्रयत्न किया। लेकिन किसी को सफलता नहीं मिली। कहा जा रहा है कि सुन्नी वक्फ कमिटी ने पुलिस मुखबिर अल्ताफ बासी को चार तोड़ा कब्रिस्तान से इन्क्रोचमेंट हटाने का ठेका दिया है। पिछले एक वर्ष से अल्ताफ और उसके गुर्गे चार तोड़ा कब्रिस्तान से मकानों को खाली करा रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार अल्ताफ बासी ने 70 से 75 मकान खाली करवाए हैं।

10–11 मई को अल्ताफ और उसके गुर्गों ने अकबर अली शेख और अन्य कई लोगों से मार-पीट कर उनके मकान/दूकान खाली करवाने का प्रयत्न किया था। इसी घटना के बाद अल्ताफ बासी और उसका दाहिना हाथ कहे जाने वाले रफीक गद्दी तथा अन्य के विरुद्ध तीन प्राथमिकी दर्ज हुई है। अल्ताफ के कई वीडियो वायरल हुए थे जिसमें वह लोकल रेसिडेंट्स को धमकाता दिख रहा है। एक वीडियो में पार्षद रुखसाना घांची के घर के बाहर अल्ताफ और उसके गुर्गे पाइप सरिया के साथ दिख रहा है। अल्ताफ पर आरोप है कि “हाई कोर्ट से स्टे होने के बावजूद अल्ताफ वक्फ कमिटी और कुछ बिल्डरों के साथ मिलकर 30 हज़ार से 50 हज़ार रूपए में मकान खाली करवा रहा है।” चार तोड़ा सफाई अभियान की पीड़िता शमशाद बानो ने अल्ताफ और अहमदाबाद सुन्नी वक्फ कमिटी पर आरोप लग़ाते हुए कहती हैं।

“इन लोगों को हमारे छपरे का कब्ज़ा चाहिए। 30 हज़ार रुपया देकर खाली करने को बोल रहे हैं। इन्हें यहां फ़्लैट बनाना है। हमने इनसे कहा भी है कि हमें खाली मत करवाओ जब फ़्लैट बनेगा तो हमें एक फ़्लैट दे देना तो यह कहते हैं एक तीस चालीस लाख का होगा। इतने पैसे हैं तो लाओ फ़्लैट मिल जायेगा। हम इतने पैसे नहीं दे सकते तो यह लोग हमें परेशान कर रहे हैं।”
इन पीड़ितों के आरोप को वक्फ कमेटी के चेयरमैन रिजवान कादरी निराधार बताते हुए कहते हैं कि यह अफ़वाह है कि अल्ताफ चार तोड़ा मकान खाली कराकर वहां फ़्लैट बनवाकर मोटी रक़म में बेचेगा। वक्फ़ की जगह पर विशेष कर कब्रिस्तान में नगर निगम फ़्लैट बनाने का प्लान ही पास नहीं कर सकता है तो फ़्लैट बनेगा कैसे।”

अल्ताफ बासी की गिरफ़्तारी के बाद पुलिस सभी दिशा में जांच कर रही है। इस सन्दर्भ में रखियाल के दर्जनों लोगों से पुलिस ने पूछताछ की है। कई पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि अहमदाबाद सुन्नी वक्फ कमिटी ने अल्ताफ बासी को चार तोड़ा कब्रिस्तान में बने मकानों को खाली करने के लिए सुपारी दी है। पुलिस ने प्रेसवार्ता में इस आरोप के जांच की बात कही है। रिज़वान कादरी ने अपना पक्ष रखते हुए कहते हैं। कुछ लोगों ने ऐसे आरोप लगाए हैं जो निराधार है।

कैसे शुरू हुआ चार तोड़ा कब्रिस्तान में इन्क्रोचमेंट

“1969 के दंगे के बाद चार तोड़ा कब्रिस्तान के एक हिस्से में 114 दंगा पीड़ित परिवारों को रहने की अनुमति दे दी गई थी। ये लोग समय बेहतर होने के बाद भी चार तोड़ा कब्रस्तान छोड़ कर नहीं गए तो अहमदाबाद सुन्नी वक्फ कमिटी ने तय किया था कि इनसे किराया लिया जाये। 1999 तक कमिटी ने किराया लिया भी उसके बाद कमिटी ने किराया वसूलना भी बंद कर दिया क्योंकि कमिटी कब्रिस्तान की जगह वापस चाहती थी। 1999 में चार तोड़ा कब्रस्तान में कब्ज़ेदारों की संख्या 114 से बढ़ कर 300 से अधिक हो गई थी। समय के साथ इन्क्रोचमेंट भी बढ़ता गया। 2008 में मौलाना हबीब और फारुक दिल्लीवाला ने चार तोड़ा से इन्क्रोचमेंट हटाने की मुहिम चलाई थी। उस समय इन लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था देकर मकान खाली करने को कहा था। वैकल्पिक व्यवस्था देने के लिए अहमदाबाद सुन्नी वक्फ कमिटी ने 26 लाख रुपये भी दिए थे। इस कोशिश में 45 परिवार के लोग चार तोड़ा से वटवा चले गए थे। लेकिन कुछ समय बाद बहुत से लोग वापस आ गए और कुछ के पड़ोसियों ने खाली मकान पर कब्ज़ा कर लिया था।”

अहमदाबाद सुन्नी वक्फ कमिटी के चेयरमैन रिजवान कादरी कहते हैं “ चार तोड़ा कब्रिस्तान में रह रहे 210 परिवारों को वक्फ एक्ट के तहत मकान खाली करने के लिए वक्फ बोर्ड ने नोटिस भी दिया है लेकिन यह लोग कब्ज़ा छोड़ने को तैयार नहीं हैं। इन्क्रोचमेंट को लेकर वक्फ ट्रिब्यूनल कोर्ट में मामला भी चल रहा है।”

कैसे शुरू हुआ अल्ताफ की गुंडागर्दी से कब्ज़ा छुडाने का अभियान

पिछले साल अल्ताफ ने चार तोड़ा कब्रिस्तान में साफ़-सफाई का अभियान शुरू किया। इस अभियान को सामाजिक दृष्टिकोण से देखा गया। हर रविवार को अल्ताफ और उसके गुर्गे कब्रिस्तान की सफाई करते। इस काम में पूर्व विस्तार के कई नेता , सामाजिक आगेवन और उलेमा भी जुड़ गए। सबसे अधिक साथ कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अल्ताफ का साथ दिया। अल्ताफ द्वारा शुरू सफाई अभियान कुछ समय बाद ज़मीन छुड़ाओ अभियान बन गया। इस काम के लिए उसके कुछ साथियों ने ज़कात और चंदा वसूलने का काम भी शुरू कर दिया। 100 करोड़ से अधिक कीमत की ज़मीन अब तक छुड़ाई जा चुकी है।

कौन है अल्ताफ बासी?

एक सामान्य परिचय की बात करें तो अहमदाबाद का मशहूर क्रिमिनल है जिसे लोग पुलिस का एक बड़ा मुखबिर मानते हैं। उसका परिवार एक क्रिमिनल परिवार है। बड़ा भाई मशहूर शराब माफिया रह चुका है। अल्ताफ की दो पत्नी हैं। एक पत्नी जूनी चाल रहती है तो दूसरी शाहपुर। कभी गैंगस्टर वहाब खान को चुनौती देने वाली ज़रीना की बेटी अल्ताफ की दूसरी पत्नी है। अल्ताफ माफिया टर्न्ड पॉलिटिशियन है।


एक समय में पूर्व अहमदाबाद की जूनी चाल में रहने वाला ज़फर खान जब्बारखान पठान उर्फ़ ज़फर बाटली को लोग शराब कारोबार के लिए जानते थे। अहमदाबाद में ज़फर एक बड़ा शराब माफिया था। यह समय 2000 के आस-पास और उसके बाद का था ज़फर का छोटा भाई अल्ताफ खान जब्बार खान पठान रखियाल में ही एक गराज में काम सीखता था। मेकैनिक का काम सीखने के साथ साथ अल्ताफ अपने भाई ज़फर के दारु के धंधे में हाथ बटाने लगा।

इसी धंधे में अल्ताफ क्राइम ब्रांच के कुछ पुलिस वालों के संपर्क में आया। उस समय क्राइम ब्रांच के एक बड़े मुखबिर जावेद हीरो से अल्ताफ की मित्रता हुई। अल्ताफ भी धीरे-धीरे मुखबिरी का काम करने लगा तो क्राइम ब्रांच के एक पुलिस इंस्पेक्टर का ख़ास बन गया। 2002 दंगों के बाद कई फेक मुठभेड़ में कई मुस्लिमों को पुलिस ने आतंकी बताकर मारा था। जिस कारण डी.जी. बंजारा सहित कई पुलिस वाले जेल भी गए थे। जावेद हीरो जो सुभाष त्रिवेदी का इनफॉर्मर था। बाद में डीजी बंजारा सहित कई पुलिस अधिकारियों का मुखबिर बन गया था। सोहराबुद्दीन शेख केस में जावेद के पास पुलिस के कई राज़ थे। सोहराबुद्दीन के बारे में भी कहा जाता है कि वह भी एक पुलिस इनफॉर्मर था। सोहराबुद्दीन के मुठभेड़ में मारे जाने की घटना को हम सब जानते हैं लेकिन जावेद हीरो की मौत की गुत्थी अब तक उलझी हुई है।

जावेद हीरो की लाश रेलवे ट्रैक पर मिली थी। जावेद ने ही अल्ताफ बासी को पहली बार डीजी बंजारा से भेंट करवाई थी। सोहराबुद्दीन शेख और जावेद हीरो की मौत के बाद पुलिस को अहमदाबाद में नए ढंग से मुखबिरों का नेटवर्क खड़ा करना था। रिप्लेसमेंट पालिसी के तहत पुलिस को भी अल्ताफ जैसे लोगों को ज़रूरत थी। आज भी अल्ताफ बासी की पहचान एक बड़े पुलिस इनफॉर्मर की है। जिस प्रकार से पुलिस ने अल्ताफ से आंख फेरा है और अल्ताफ पर पुलिस GUJCITOC (संगठित अपराध की धारा) के तहत कार्रवाई कर सकती है। ऐसे में जावेद हीरो और सोहराबुद्दीन के अंजाम को याद कर अहमदाबाद के लोग कह रहे हैं शायद अब पुलिस को अल्ताफ का रिप्लेसमेंट मिल गया है। कुछ लोगों का मानना है कि बीजेपी वह गलती नहीं करना चाहती है जो लतीफ़ के समय कांग्रेस ने की थी। जिस प्रकार मुस्लिम माफिया होते हुए अल्ताफ बीजेपी के लिए काम कर रहा था और कांग्रेस अल्ताफ को मुद्दा बना कर आन्दोलन की धमकी दे रही थी उससे बीजेपी को राजनैतिक नुकसान हो सकता है। शायद इसीलिए अब बीजेपी अल्ताफ से अपना पिंड छुड़ाना चाहती है।

अल्ताफ कैसे बना भाजपा का दुलारा और फिर बीजेपी ने किया किनारा

2010 अहमदाबाद नगर निगम चुनाव में ज़फर बाटली रखियाल वार्ड से निर्दलीय चुनाव मैदान में था। मुस्लिम बहुल वार्ड से तौफीक खान पठान की पैनल के सामने बीजेपी की पैनल थी। बीजेपी पैनल से वर्तमान विधायक दिनेश कुशवाहा उम्मीदवार थे। ज़फर के चुनाव में उतरने से त्रिकोणीय मुकाबला हो गया था जिसने बीजेपी को एक जीत की आशा दे दी थी। इस चुनाव में तौफीक खान की पैनल जीत तो गई थी लेकिन ज़फर को अच्छे वोट मिले जिससे बीजेपी पैनल की हार का मार्जिन कम रहा। कुशवाहा ने राजनैतिक ही नहीं ज़फर और अल्ताफ से व्यक्तिगत मित्रता कर ली। 2010 में नगर निगम चुनाव के बाद अल्ताफ बीजेपी के नेताओं के संपर्क में आया। माफिया की फितरत होती है जो पार्टी सत्ता में हो उसके करीब हो जाओ।

अल्ताफ ने जब ओवैसी के लिए भीड़ जुटाई

2020 में आल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुसलमीन का जब गुजरात में प्रवेश हुआ और असदुद्दीन ओवैसी अहमदाबाद पहली बार आए तो बीजेपी ने अल्ताफ को 2000 वाहनों से ओवैसी के स्वागत का टास्क दिया था। जिसे अल्ताफ ने बखूबी निभाया था। अल्ताफ सीटीएम एक्सप्रेस वे पर 1000 दुपहिया वाहनों को एकत्र किया और बड़ी रैली के साथ ओवैसी को रिवर फ्रंट ले गया। 2021 नगर निगम चुनाव में अल्ताफ को बीजेपी सरसपुर रखियाल वार्ड से निर्दलीय उम्मीदवार बनाना चाहती थी लेकिन ओवैसी की हवा देख कर उसे गोमतीपुर वार्ड से पतंग के चुनाव चिन्ह पर लड़ाया। अल्ताफ गोमतीपुर वार्ड से दो हज़ार से कम वोटो से हार गया था।

अल्ताफ ने जब लगवाए थे “हर मुसलमान का नारा है केजरीवाल हमारा है”

2022 विधानसभा चुनाव से पहले अरविन्द केजरीवाल और भगवंत मान अहमदाबाद आए थे। पाटीदार बहुल निकोल में दोनों मुख्यमंत्रियों का एक किलोमीटर का रोड शो था। अल्ताफ को बीजेपी की तरफ से टास्क दिया गया था कि बुर्के वाली महिलाओं और टोपी वाले मुस्लिमों को केजरीवाल की रैली में भेजे और उन्हें रैली में केजरीवाल के रथ के आसपास तक पहुंचाए। जहां कुछ लोगों को एक नारा सिखाया गया था। जो केजरीवाल के रथ के आस पास लगाना था। बाकी का काम मीडिया को करना था। वह नारा यही था। “हर मुसलमान का नारा है। केजरीवाल हमारा है।” इंटेलिजेंस के माध्यम से इस षड्यंत्र की जानकारी अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और पंजाब पुलिस को पहले से हो गई थी। क्राइम ब्रांच ने बुर्के वाली महिलाओं को रैली से बहुत पहले ही रोक दिया था। कुछ टोपी वाले रथ तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। उन्हें पंजाब पुलिस और क्राइम ब्रांच ने पहुंचने नहीं दिया था। फिर भी कुछ विसुवल के सहारे से गुजराती चैनल्स ने यह खबर चलाई ही थी कि केजरीवाल का मुस्लिमों ने ज़बरदस्त स्वागत किया। अल्ताफ ने 1500 टोपियां बांटी थी और किराये की भीड़ अकबर नगर छपरा और जनरल हॉस्पिटल के छपरे से जुटाई थी। बीजेपी अल्ताफ का उपयोग कर लोकसभा चुनाव हो या अन्य कोई भी चुनाव हो बाधित करने की कोशिश करती ही है।

अतीक अहमद से भी थे अल्ताफ के संबंध

2018 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पूर्व सांसद अतीक अहमद को उत्तर प्रदेश से अहमदाबाद की सेंट्रल जेल लाया गया तो अल्ताफ बासी ने एअरपोर्ट पर अपने सैकड़ों साथियों के साथ अतीक अहमद का स्वागत किया था। अल्ताफ बिना रोक-टोक साबरमती जेल में अतीक अहमद से मिलता था।

अल्ताफ बासी की मदद से बीजेपी नी जीता था बापूनगर

2022 विधान सभा चुनाव अल्ताफ समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह से बापूनगर विधान सभा चुनाव लड़ा और 3600 वोट मिले जिसका लाभ बीजेपी उम्मीदवार दिनेश कुशवाहा को मिला। विधानसभा चुनाव में अल्ताफ की गुंडागर्दी के चलते कांग्रेस के बहुत से कार्यकर्त्ता निष्क्रिय हो गए थे। अल्ताफ के लोगों ने हिम्मत सिंह की एक रैली पर हमला भी किया था लेकिन कांग्रेस ने हमले को न तो मुद्दा बनाया और न ही पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई। जिस कारण कांग्रेस के बहुत से कार्यकर्ताओं ने चुनाव से अपने आप को दूर कर लिया था। विवादों से अपने आप को दूर रखने वाले तत्कालीन विधायक और कांग्रेस उम्मीदवार हिम्मत सिंह पटेल को अल्ताफ से बड़ा नुक्सान हुआ।

अल्ताफ बासी का सफ़ेद चिठ्ठा

अल्ताफ बासी के काले चिठ्ठे के साथ सफ़ेद चिठ्ठे भी हैं।अल्ताफ का अड्डा मच्छी मार्किट रखियाल है जहां वह रोज़ाना शाम छ बजे से सुबह छ बजे तक बैठता है। अल्ताफ ने अपनी छवि एक रोबिन हुड वाली भी बनाई है। अल्ताफ के बारे में कहा जाता है। वह भीख मांगने वालों को एक एक हज़ार रूपए भीख में दे देता है मूड सही न हो तो भीख मांगने वाले को गाली देकर भी भगा देता है। गरीब लड़कियों की शादी ब्याह में भी मदद करता है। तलाक और घरेलू झगड़े भी आसानी से सुलझा लेता है। लॉकडाउन के समय परदेशियों की मदद करने के अलावा ट्रेन से प्रदेश भेजने में अल्ताफ ने प्रशासन की भी बहुत मदद की थी। जिस कारण अल्ताफ से तत्कालीन डीसीपी ज़ोन 5 रवि तेजा बहुत प्रभावित भी हुए थे।

(अहमदाबाद से कलीम सिद्दीक़ी की रिपोर्ट)

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