ट्रंप ने अमेरिका में सेना उतारने की धमकी दी

बंकर में छिपे अमेरिकी राष्ट्रपति अभी कुछ देर पहले मीडिया से मुखातिब हुए। और सूचना मिली है कि उन्होंने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए राज्यों में नेशनल गार्ड की जगह सीधे 1807 के राजद्रोह एक्ट को लागू करने की तरफ बढ़ चले हैं।

जबकि अभी तक किसी भी राज्य के गवर्नर ने इसके लिए ट्रम्प से अनुरोध नहीं किया था। ऐसा होने से पूरे देश को सेना के हवाले कर दिया जाएगा। और पूरी व्यवस्था सैनिक अपने हाथे में ले लेंगे।

अमेरिकी पूंजीवाद का सबसे घृणित नमूना आज अपने आप को बचाने के लिए अमेरिका की ही बलि लेने को तैयार है। जबकि अफ्रीकी अमेरिकी ब्लैक और साधारण गोरे लोगों के बीच की सॉलिडेरिटी ने ट्रम्प और उसके लगुओ-भगुओं को भयभीत कर दिया है।

करीब एक घंटे पहले की पोस्ट जिसमें मिलिटरी ट्रक के काफिले को दर्शाते हुए प्रदर्शनाकरियों को आगाह किया गया है कि वे अपनी सुरक्षा का ध्यान रखें, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प देश में मार्शल लॉ जैसी चीज लगा सकते हैं। और इस सम्बन्ध में प्रेस को बुलाया गया है।

नीचे की तस्वीर 11 घंटे पहले की वाशिंगटन के चौराहे की है, जब करीब 2000 से अधिक अमेरिकी नागरिक अपने साथी की याद में 3 मिनट के मौन के साथ श्रद्धांजलि दे रहे हैं। यह सॉलिडेरिटी सारे अमेरिका में अभूतपूर्व है। सिवाय कुछ हिंसक प्रदर्शनों के जिसमें आगजनी और लूट की जा रही है, जिसके बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं, कि ये शरारती तत्व जबरन प्रदर्शनों में घुसेड़े जा रहे हैं। इसके अलावा गोरे और काले अमेरिकियों की इस एकता को देखकर अमेरिकी सत्ता का हिल जाना स्वाभाविक है।

अमेरिका में पिछले हफ्ते पुलिस ज्यादती में जोर्ज फ्लॉयड की मौत के खिलाफ उमड़ा देशभर का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले कुछ समय से अमेरिका में कोरोना वायरस से लड़ाई के नाम पर जिस तरह की अंधेरगर्दी मचा रखी थी, और अपने सभी बयानों और कार्यक्रमों की दिशा को नवम्बर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिहाज से मोड़ने तोड़ने की कोशिशें की थीं, वह आज नतीजे के तौर पर आम नागरिकों के गुस्से के रूप में फूटना शुरू हो चुका है।

कई जानकारों का मानना है कि विरोध प्रदर्शन की ऐसी लहर पिछले 50 वर्षों से नहीं देखी गई थी। पिछली बार इस प्रचंड मात्रा में विरोध प्रदर्शन मल्कोम एक्स की तथाकथित हत्या के विरोध में उपजे थे। इस बीच भी नस्लीय भेदभाव और पुलिसिया हिरासत में अफ़्रीकी अमेरिकी समुदाय के युवाओं को हिंसा या मौत का शिकार होना पड़ा है, लेकिन इस बार यह लावे के रूप में फूटा है, जिसकी आंच सीधे इस समय ट्रम्प को भुगतनी पड़ सकती है।

इस बाबत पिछले 24 घंटों में कुछ प्रमुख हलचल इस प्रकार हैं:-

अभी अभी एऍफ़पी के हवाले से सूचना मिली है कि जार्ज फ्लॉयड के परिवार ने सरकारी जाँच रिपोर्ट के अलावा भी ऑटोप्सी कराई थी, जिसमें मौत की वजह गर्दन और पीठ पर कई मिनट तक पड़े अत्यधिक दबाव की वजह से सांस घुटने को बताया गया है। इस सम्बन्ध में मिनियापोलिस के पुलिस अधिकारी को सीधे तौर पर जिम्मेदार पाया गया था। इस बीच…

करीब 40 अमेरिकी शहरों में कर्फ्यू घोषित कर दिया गया है।

हजारों प्रदर्शनकारियों को इस बीच गिरफ्तार किया गया है। 

अटलांटा के दो पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है। उन पर जरूरत से अधिक सख्ती का आरोप तय पाया गया है।

ट्रम्प ने राज्यों के गवर्नरों को प्रदर्शनकारियों से निपटने में कमजोर कहा है, और अपेक्षा की है कि वे अपने यहाँ इन प्रदर्शनों से सख्ती से निबटेंगे। जबकि खुद कुछ घंटों के लिए बंकर के भीतर छुपे बैठे रहे।

न्यू यॉर्क टाइम्स ने अपनी हेडलाइंस लगाई है “अमेरिका में नस्लीय भेदभाव और पुलिसिया ज्यादती के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन इस बीच कम से कम 140 शहरों में फ़ैल चुके हैं। इनमें से कुछ प्रदर्शन हिंसक भी हुए हैं, जिसकी वजह से कम से कम 21 राज्यों में नेशनल गार्ड को सक्रिय होना पड़ा है।

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वाशिंगटन – राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सोमवार की रात को घोषणा कर सकते हैं कि वह एक 213 साल पुराने संघीय कानून का आह्वान कर रहे हैं, जो उन्हें देश भर के शहरों में विरोध प्रदर्शन का जवाब देने के लिए सक्रिय-अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने की अनुमति देगा।

इन लोगों ने कहा कि सैन्य पुलिस बल उत्तरी कैरोलिना में फोर्ट ब्रैग और संभवतः वर्जीनिया में फोर्ट बेल्विर से आएंगे और कुछ घंटों में वाशिंगटन पहुंच सकते हैं।

सैनिकों को तैनात करने के लिए 1807 में अपनाए गए विद्रोह अधिनियम को लागू करने के ट्रम्प के निर्णय को उनकी कुंठा के रूप में देखा जा रहा है। विरोध प्रदर्शनों की उस समय  शुरुआत हुई जब पिछले हफ्ते मिनियापोलिस में फ्लायड जार्ज की पुलिस की बर्बरता के चलते मौत हो गयी थी। उनके फैसले से परिचित लोगों ने कहा कि वह रविवार रात वाशिंगटन में हुए विनाशकारी प्रदर्शनों, विशेष रूप से राष्ट्रीय स्मारकों के साथ होने वाली बर्बरता पर नाराज थे।

राष्ट्रपति के कुछ सहयोगी उन्हें इस अधिनियम को लागू करने के लिए दिनों से प्रोत्साहित कर रहे हैं, क्योंकि वे संकट को दूर करने के लिए कार्यकारी शक्तियों का प्रयोग करने के विकल्प चुनते हैं। इस अधिनियम को अंतिम बार लॉस एंजिल्स में 1992 के रॉडने किंग दंगों के दौरान लागू किया गया था।

व्हाइट हाउस ने इस लेख के लिए टिप्पणी के अनुरोध का कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन सोमवार को पत्रकारों के साथ एक ब्रीफिंग में, व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव कायले मैकनी ने इस संभावना को छोड़ दिया कि राष्ट्रपति अधिनियम को लागू कर सकते हैं।

“बीमा अधिनियम, यह उपलब्ध उपकरणों में से एक है, चाहे राष्ट्रपति इसका पीछा करने का फैसला करता है, कि उसका विशेषाधिकार है,” मैकइन्नी ने कहा।

गवर्नर पूछ सकते हैं कि संघीय सरकार पिछले कई दिनों से अमेरिकी शहरों में व्यापक विरोध प्रदर्शनों जैसे नागरिक अशांति के मामलों में मदद करने के लिए सक्रिय ड्यूटी सैनिकों को भेज सकती या नहीं। लेकिन, अब तक, किसी भी राज्यपाल ने सक्रिय ड्यूटी सैनिकों को सहायता के लिए अनुरोध नहीं किया है। और इसके बजाय वे स्थानीय कानून प्रवर्तन और राज्य सक्रिय ड्यूटी पर नेशनल गार्ड सैनिकों और एयरमैन पर निर्भर हैं।

गवर्नर अक्सर इन मामलों में राष्ट्रीय रक्षक बलों को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि वे कानूनी रूप से अमेरिका में कानून प्रवर्तन कर्तव्यों का पालन कर सकते हैं, जबकि सक्रिय कर्तव्य पर सैनिकों को पॉज़ कॉमिटेटस अधिनियम, 1878 के कानून का उल्लंघन किए बिना नहीं कर सकते हैं जो सरकार को सैन्य बलों का उपयोग करने से प्रतिबंधित करता है। अमेरिकी सीमाओं के भीतर पुलिस बल।

लेकिन राष्ट्रपति एक गवर्नर के अनुरोध के बिना सक्रिय-ड्यूटी सैनिकों को तैनात करने के लिए विद्रोह अधिनियम को लागू कर सकते थे। उन सैनिकों को कानून प्रवर्तन मिशन संचालित करने की अनुमति दी जाएगी। इस अधिनियम को लागू करने के लिए, ट्रम्प को पहले कानून के अनुसार “विद्रोहियों को तुरंत एक सीमित समय के भीतर अपने निवास स्थान पर पहुंचाने और रिटायर करने के लिए विद्रोहियों को तुरंत आदेश देने की घोषणा करनी होगी।”

अतीत में न्याय विभाग ने ऐसी घोषणाओं का मसौदा तैयार किया है। और कांग्रेस के अनुसंधान सेवा के अनुसार, इस अधिनियम को पूरे अमेरिकी इतिहास में कई बार लागू किया गया है, हालांकि 1960 के नागरिक अधिकारों के युग के बाद से शायद ही कभी। जब 1992 में लॉस एंजिल्स के दंगों के दौरान इसे लागू किया गया था, तो इस कदम का अनुरोध तत्कालीन कैलिफोर्निया सरकार द्वारा किया गया था। पीट विल्सन, केवल राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू द्वारा आमंत्रित नहीं किया गया था।

रक्षा विभाग ने इस संभावना पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि राष्ट्रपति अधिनियम को लागू कर सकते हैं।

व्हाइट हाउस के बाहर ट्रम्प के सहयोगियों में से एक, सेन टॉम कॉटन, आर-आर्क, ने ट्रम्प से आग्रह किया कि वे बीमाकरण अधिनियम को “यदि आवश्यक हो” तो अमेरिकी सैनिकों को “हमारे स्थानीय कानून प्रवर्तन का समर्थन कर सकते हैं और सुनिश्चित करें कि यह हिंसा पूरी तरह से समाप्त हो जाए।”

(रविंद्र सिंह पटवाल लेखक और टिप्पणीकार हैं। आप आजकल दिल्ली में रहते हैं।)

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