Monday, August 15, 2022

फर्जी टीआरपी केस में कभी भी हो सकती है अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी

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फर्जी टीआरपी केस में रिपब्लिक न्यूज चैनल के सम्पादक अर्णब गोस्वामी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। मुंबई पुलिस ने टीआरपी स्कैम मामले में एक कोर्ट में 28 दिसंबर को रेटिंग एजेंसी बार्क के पूर्व सीईओ पार्थो दासगुप्ता की रिमांड रिपोर्ट दाखिल की। इस रिपोर्ट में पुलिस ने बताया कि ‘रिपब्लिक टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी ने कथित तौर पर दासगुप्ता को दो रिपब्लिक न्यूज चैनल की टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स (टीआरपी) ‘बढ़ाने के लिए लाखों रुपये दिए थे। इस खुलासे से फर्जी टीआरपी केस में ‘रिपब्लिक टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।

पुलिस ने मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट को बताया कि जब दासगुप्ता ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) के सीईओ थे तो अर्णब गोस्वामी और मामले के अन्य आरोपियों ने ‘रिपब्लिक भारत’ हिंदी न्यूज चैनल और ‘रिपब्लिक टीवी’ अंग्रेजी न्यूज चैनल की टीआरपी को अवैध तरीके से बढ़ाने की साजिश की। जांच में सामने आया है कि इसके लिए गोस्वामी ने कई मौकों पर दासगुप्ता को लाखों रुपये दिए। गोस्वामी कथित तौर पर दासगुप्ता से अपने चैनलों की रेटिंग पर बातचीत करने के लिए कई बार मिले।

सोमवार को इस केस में इन्वेस्टिगेशन कर रही क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (सीआईयू) ने किला कोर्ट में उन पर रिश्वत देने का लिखित में आरोप लगाया है। पिछले सप्ताह सीआईयू ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) के पूर्व सीईओ पार्थ दासगुप्ता को गिरफ्तार किया था। उन्हें सोमवार को नई रिमांड के लिए मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। उस दौरान सीआईयू की तरफ से दायर रिमांड एप्लिकेशन में लिखा गया कि पार्थदास गुप्ता ने ‘रिपब्लिक भारत’ हिंदी चैनल और ‘रिपब्लिक टीवी’ अंग्रेजी न्यूज चैनल की टीआरपी में हेरफेर के लिए अर्णब गोस्वामी व अन्य संबंधित आरोपियों के साथ मिलकर साजिश की और गैरकानूनी काम किया। इसके बदले में अर्णब गोस्वामी ने पार्थ दासगुप्ता को वक्त-वक्त पर लाखों रुपये दिए, ऐसा सीआईयू की जांच में सामने आया है।

इन रुपयों से पार्थदास गुप्ता ने मूल्यवान वस्तुएं, महंगे गहने खरीदे। सीआईयू ने रिमांड एप्लिकेशन में जानकारी दी कि पार्थ दासगुप्ता की गिरफ्तारी के बाद जांच टीम ने उनके घर से खोजबीन की। वहां से एक लाख रुपये कीमत की हाथ की घड़ी व सिल्वर कलर की धातु के तीन किलो 300 ग्राम गहने मिले हैं।

सीआईयू ने कोर्ट से कहा कि अर्णब के दिए गए रुपयों से पार्थ दासगुप्ता ने क्या कुछ और खरीदा, इसकी जांच करनी है और वह सामान भी जब्त करना है, इसलिए सीआईयू ने कोर्ट से पार्थ दासगुप्ता की और कस्टडी मांगी। कोर्ट ने 30 दिसंबर तक दासगुप्ता को सीआईयू की कस्टडी में भेज दिया। सीआईयू ने कोर्ट को यह भी बताया कि उसने दासगुप्ता के पास से दो मोबाइल फोन, एक लैपटॉप व आईपैड भी जब्त किया है। इनकी भी जांच की जा रही है। फर्जी टीआरपी केस में एफआईआर 6 अक्तूबर को दर्ज की गई थी। तब से रिपब्लिक व कई अन्य टीवी चैनल जांच के घेरे में हैं, लेकिन इस केस में अधिकृत रूप से मुंबई क्राइम ब्रांच ने अर्णब गोस्वामी का नाम पहली बार लिया है।

शुक्रवार को मुंबई क्राइम ब्रांच चीफ मिलिंद भारंबे ने कहा था कि कोई किसी का फेवर तभी करता है, जब बदले में उसे कोई फायदा भी मिले। मुंबई क्राइम ब्रांच ने पार्थ दासगुप्ता को फर्जी टीआरपी केस का मास्टरमाइंड भी बताया है। दासगुप्ता बार्क में साल 2013 से 2019 तक सीईओ के पद पर रहे। बार्क में लगभग इतना ही लंबा कार्यकाल पूर्व सीओओ रोमिल रामगढ़िया का रहा, जिन्हें करीब एक पखवाड़े पहले अरेस्ट किया गया था। आरोप है कि इन आरोपियों ने कुछ अन्य आरोपियों की मदद से साजिशन टाइम्स नाऊ को नंबर 1 से नंबर 2 किया और ‘रिपब्लिक टीवी’ को अवैध तरीके से नंबर वन बनाया।

गौरतलब है कि बार्क के वर्तमान मैनेजमेंट ने थर्ड पार्टी फॉरेंसिक ऑडिट करवाई जिसकी रिपोर्ट बार्क को इस साल जुलाई में और मुंबई क्राइम ब्रांच को पिछले सप्ताह मिली। इस ऑडिट में ई-मेल, चैट और इसी तरह के कई ऐसे इलेक्ट्रानिक्स ऐविडेंस मिले, जिससे यह साबित होता है कि टीआरपी में हेरफेर की गई।

अपने रिमांड नोट में पुलिस ने आरोप लगाया कि दासगुप्ता अपने पद का फायदा उठाकर ‘रिपब्लिक भारत’ हिंदी और ‘रिपब्लिक टीवी’ अंग्रेजी जैसे एआरजी आउटलेयर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रसारित कुछ चुनिंदा न्यूज चैनलों की टीआरपी में फेरबदल किया। पुलिस ने कहा कि दासगुप्ता से अभी और पूछताछ की जानी बाकी है क्या उन्हें अन्य न्यूज चैनलों की टीआरपी में भी बदलाव के लिए भुगतान किया गया। उन पर यह भी आरोप लगाया गया है बार्क का सीईओ रहते उनके पास सभी चैनलों की टीआरपी रेटिंग पर गोपनीय जानकारी उनके पास थी और जांच में यह पता लगाना है कि क्या उन्होंने इसकी जानकारी अन्य को भी दी थी। टीआरपी घोटाले में अब तक 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

इस केस में अब तक 15 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। सोमवार को पार्थ दासगुप्ता को रिमांड एप्लिकेशन में सीआईयू ने 11 लोगों को पाहिजे आारोपी यानी वॉन्टेड आरोपी बताया है। 11 वें नंबर पर मराठी में माजी सहकारी यानी पूर्व सरकारी कर्मचारी लिखा है, लेकिन इस सरकारी कर्मचारी के नाम का सस्पेंस भी सीआईयू ने बरकरार रखा। ‘रिपब्लिक टीवी’ से अब तक डिस्ट्रीब्यूशन हेड घनश्याम सिंह और विकास खानचंदानी गिरफ्तार हो चुके हैं। सोमवार की रिमांड एप्लिकेशन में ‘रिपब्लिक टीवी’ से ही बतौर पाहिजे आरोपी प्रिया मुखर्जी, एस.सुंदरम, शिवेंदु मुल्हेरकर और रणजीत वॉल्टर के नाम हैं। सीआईयू ने इसके अलावा महामूवी चैनल के अमित दवे और संजय वर्मा व डब्ल्यूओडब्ल्यू म्यूजिक चैनल से भी कुछ को वॉन्टेड बताया है।

इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक और उनकी मां कुमुद को आत्महत्या के लिए कथित रूप से उकसाने के मामले में पिछले महीने अर्णब गोस्वामी को दो अन्य आरोपियों फिरोज शेख और नीतीश शारदा के साथ गिरफ्तार किया गया था। बाद में तीनों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जमानत पर छोड़ दिया गया था।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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