Subscribe for notification

अरुंधति रॉय को शांति के लिए कोरिया का साहित्यिक ग्रैंड लॉरेट पुरस्कार

शांति के लिए ली हो छ साहित्यिक पुरस्कार की चयन समिति (एलएलपीपी) और युनपिंयोंग जू डिस्ट्रिक्ट ऑफिस ने अरुंधति रॉय को इस साल के ग्रैंड लॉरेट के रूप में चुना है।

एलएलपीपी एक अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक पुरस्कार है जो कोरिया गणराज्य में शांति को बढ़ावा देने के लिए पहचान करके सालाना दिया जाता है। इसमें दो तरह के पुरस्कार हैं: मुख्य ली हो छ शांति के लिए साहित्यिक पुरस्कार, और एक विशेष पुरस्कार जो एक युवा और भावी कोरियाई लेखक को दिया जाता है।

एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि बीते 10 नवंबर को कोरिया प्रेस सेंटर, स्‍योल में अरुंधति रॉय के साथ एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में इस आशय की घोषणा की गयी थी। वास्‍तविक पुरस्‍कार समारोह को कोविड के चलते अगले साल के लिए टाल दिया गया है। समारोह के वक्‍त ही रॉय को पुरस्‍कार राशि के रूप में 50 मिलियन केआरडब्‍ल्यू (करीब तीन करोड़ 32 लाख रुपये) प्रदान किया जाएगा।

ली हो छ लिटरेरी प्राइज़ फॉर पीस की स्थापना साल 2017 में लेखक ली हो छ (Lee Ho-chul) के सम्मान में दक्षिण कोरिया के सियोल के जिला कार्यालय में सिओल के डिस्ट्रिक्ट ऑफिस यूपाइपॉन्ग-गार्ड द्वारा किया गया। Lee Ho-chul एक प्रतीकात्मक हस्ती है जिसका साहित्यिक कार्य दो कोरियाई लोगों के शांति और सद्भाव के लिए एक गहरी लालसा को दर्शाता है।

इस साल का कोरियाई ग्रैंड लॉरेट पुरस्कार जीतेन वाली अरुंधति रॉय ने अपने पहले उपन्यास ‘द गॉड ऑफ स्माल थिंग’ के लिए साल 1997 में बुकर पुरस्कार जीता था।

उन्होंने तब से धार्मिक भेदभाव और वर्ग संघर्ष और दुनिया भर में सत्ता और पूंजी के आतंक के खिलाफ़ नागरिक आंदोलनों और नॉन फिक्शन लेखन पर ध्यान केंद्रित किया है। उनका दूसरा उपन्यास लगभग 20 साल बाद ‘द मिनिस्ट्री ऑफ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ आया था। डेब्यू के 20 साल बाद प्रकाशित, हैप्पीनेस ने रॉय ने भेदभाव की आलोचना की है। एलएलपीपी की चयन समिति ने चयन का कारण बताते हुए कहा, “रॉय की साहित्यिक भावना लेखक ली होचुल के अनुरूप है, वो भारत की समस्याग्रस्त चेतना के इतिहास में लगातार शांति के लिए प्रयास करती आ रही हैं। “

Eunpyeong-gu (Gu Mayor Kim Mi-kyung) ने अरुंधति के साथ मंगलवार 10 नवंबर को 14:00 बजे एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया। वास्तविक पुरस्कार समारोह को कोविड-19 के चलते अगले साल के लिए स्थगित कर दिया गया है। अगले वर्ष समारोह के बाद अरुंधित रॉय को ग्रैंड लॉरेट को सम्मानित किया जाएगा।

ऑनलाइन साक्षात्कार में, ज़ूम के माध्यम से कोरियाई संवाददाताओं से रॉय ने कहा, “साहित्यकार की भूमिका उस दुनिया के बारे में लिखना है जिसमें वो रहता है। “उन्होंने आगे कहा,” पश्चिमी उदारवादी विमर्श ने अतीत में कला और राजनीति को बहुत ही कृत्रिम तरीके से अलग किया है; वहाँ कहा गया है इस तरह का संदेह कि कला और साहित्य को राजनीति से अलग किया जाना चाहिए, और यह एक तरीका है यथास्थिति को बनाए रखना।” साथ ही, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वह उपन्यासों का राजनीतिक संदेश के साधन के इस्तेमाल करने का विरोध करती हैं।

उनके अनुसार, एक उपन्यास दुनिया में मौजूद जटिलताओं को देखने और लिखने में है, चाहे वह राजनीति हो या लैंगिक और उपन्यासों में अपने विश्वासों को यह कहते हुए व्यक्त किया जाना चाहिए कि, “कल्पना (कथा) सत्य है।”

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on November 20, 2020 3:52 pm

Share