Monday, February 6, 2023

भारत जोड़ो यात्रा: मोदी सरकार की ‘कमजोर नस’ पर राहुल गांधी ने रखा ‘कांग्रेस का हाथ’

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प्रदीप सिंह
प्रदीप सिंहhttps://janchowk.com
दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय और जनचौक के राजनीतिक संपादक हैं।

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नई दिल्ली। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा 108वें दिन शनिवार को देश की राजधानी दिल्ली पहुंची। दिल्ली की जनता राहुल गांधी के काफिले का इंतजार कर रही थी। बदरपुर से लाल किला तक भारी भीड़ थी। दिल्ली बार्डर पर प्रवेश करते ही भारत जोड़ो यात्रा का सामना घने कोहरे और कंपकंपाती ठंड से हुआ। लंबी यात्रा के दौरान चेहरे पर बढ़ी डाढ़ी लिए टीशर्ट और जींस पहने राहुल गांधी सुबह 6:45 बजे सर्द हवाओं के बीच दिल्ली में दाखिल हुए। लेकिन दिल्ली में यात्रा के प्रवेश करते ही राजधानी का सियासी पारा अचानक बढ़ गया। सत्तारूढ़ भाजपा नेताओं के बोल एकाएक विपक्षी नेताओं जैसे हो गए। सड़क किनारे झुंड में खड़े लोगों के जोशीले नारों और ढोल-नगाड़ों की थाप और फूलों की बौछार तले सर्दी जैसे दब सी गई थी। बदरपुर बार्डर से लाल किले के 22 किमी की दूरी तय करने में उन्हें करीब दस घंटे लगे। इस बीच यात्रा चार घंटे रूकी और काफिला छह घंटे तक सड़कों पर रहा। 

भारत जोड़ो यात्रा के सरिता विहार पहुंचने पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी वहां पहुंचीं। राहुल का काफिला न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी पहुंचने और करीब 50 मिनट तक यहां विश्राम के बाद फिर से आगे बढ़ा। इस बीच बहन प्रियंका गांधी पति राबर्ट वाड्रा और दोनों बच्चे भी उनसे आकर मिले।

लाल किले पर पहुंचने के बाद राहुल गांधी यात्रा में लोगों के मिले सहयोग और प्यार के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जब हम यात्रा शुरू कर रहे थे तो हमें लगा कि देश में एक दूसरे संप्रदाय के प्रति लोगों में नफरत बहुत बढ़ गया है। लेकिन 2800 किमी यात्रा में कहीं भी मुझे ऐसा नहीं दिखा। लेकिन एक बात जो हर जगह दिखी वह डर है। मोदी सरकार ने सबके दिल में डर भर दिया है। यह डर भविष्य को लेकर है, रोजगार को लेकर है, महिलाओं को अपनी सुरक्षा का डर है। कई महिलाओं ने कहा कि भाजपा सरकार आने के बाद सड़क पर निकलने में डर लगता है।

शनिवार शाम को लाल किला पर लोगों की भारी भीड़ को संबोधित करते हुए राहुल ने एक बार फिर चीन को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला। राहुल ने पीएम मोदी पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि हमारी जमीन पर कोई नहीं आया है। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि अगर कोई नहीं आया है तो फिर 21 बार उससे बातचीत क्यों की गई।

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राहुल गांधी ने कहा कि मीडिया ठंड में मेरे टीशर्ट पहनने पर सवाल उठा रहा है। लेकिन उसको देश के लाखों लोग नहीं दिखते जो ठंड के मौसम में भी गर्म कपड़े नहीं पहन पा रहे हैं। देश में बहुत सारे लोग हैं जो इस मौसम में भी कम कपड़े पहनकर गुजारा कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने मीडिया और वर्तमान सरकार के संबंधों पर सवाल उठाते हुए कहा कि दोनों पर लगाम है। ये लगाम कुछ पूंजीपतियों की है। राहुल ने कहा कि ये सरकार प्रधानमंत्री नहीं चला रहे हैं। उनके कंट्रोल में कुछ नहीं है। ना उनकी गलती है। सरकार कोई और चला रहा है। उन्होंने आगे कहा कि हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री पर लगाम लगी है। उनकी गलती नहीं है। वो संभाल नहीं पा रहे हैं। उनको कंट्रोल कर लिया गया है। सारे पब्लिक सेक्टर भी उनके (अडानी-अंबानी की तरफ इशारा) हैं। एग्रीकल्चर स्टोरेज डिपो, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन उनके हैं। लाल किला तक उनका हो गया है। ताजमहल भी चला जाएगा। सब कुछ उनका है। ये देश की सच्चाई है। एक तरह से राहुल गांधी ने मोदी सरकार की कमजोर नस कॉरपोरेट के मिलीभगत पर हाथ रख दिया।

राहुल गांधी ने कहा कि यहां देखिए! सामने जैन मंदिर है, गुरुद्वारा है, मस्जिद और मंदिर हैं। कहीं कोई टकराव नहीं है। सब मिलकर रहते हैं। लेकिन मीडिया 24 घंटे हिंदू-मुस्लिम लगाए रहता है। दरअसल, जेब काटने वाले लोगों का ध्यान दूसरी तरफ कर देते हैं और लोगों की जेब काट लेते हैं। उनकी भरसक कोशिश रहती है कि आपका ध्यान जेब की तरफ न जाए। इसी तरह मोदी सरकार मीडिया के माध्यम से लोगों का ध्यान बांट रही है और सारे सार्वजनिक उपक्रम बेच रही है।

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राहुल गांधी मोदी सरकार की हर नीति पर हमलावर तरीके से कहा कि मोदी सरकार कानून नहीं बनाती बल्कि किसान, युवा, व्यापारी सबको मारने का हथियार लाती है। नोटबंदी, जीएसटी, तीनों कृषि कानून मोदी सरकार के हथियार हैं। देश की अर्थव्य़वस्था पर कटाक्ष करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सच्चा मुकाबला दुनिया में चीन और हिंदुस्तान के बीच में है। कंपटीशन आर्थिक है। ये सेलफोन, शर्ट और जूते हैं- इसके पीछे लिखा है- मेड इन चाइना। हमें शर्ट-जूतों और सेलफोन के पीछे मेड इन इंडिया लिखना है।

एक ऐसा दिन आना चाहिए जब शंघाई में कोई युवा नए जूते खरीदे और उसके पीछे देखे- मेड इन नई दिल्ली, इंडिया। ये हिंदुस्तान चाहिए। इसी से युवाओं को रोजगार मिलेगा। ये करना ही पड़ेगा। ये हम करके दिखा देंगे। ये देश कर सकता है और करके दिखा सकता है।

राहुल गांधी ने कृषि और छोटे व्यवसाय में भारी रोजगार के असर की बात कहते हुए इस सेक्टर को बढ़ाने का वादा किया। देश के हर क्षेत्र में बढ़ते कॉरपोरेट दखल पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि 2004 में जब राजनीति में आया, तब हमारी सरकार थी। ये प्रेस वाले प्रशंसा करते थे। 24 घंटा राहुल गांधी करते थे। फिर मैं चला गया भट्टा परसोल। वहां किसानों का जमीन का मामला छेड़ दिया। उसके बाद से पीछे पड़ गए। जमीन अधिग्रहण बिल लाया। जिसके बाद मीडिया 24 घंटे मेरे पीछे पड़ गयी।

पीएम और बीजेपी ने हजारों करोड़ रुपए खर्च कर दिए मेरी छवि खराब करने में। लेकिन मैंने एक शब्द नहीं बोला। ना सफाई दी। एकदम चुप रहा। मैंने सोचा कि चलो देखता हूं कि कितना दम है। वॉटसएप, फेसबुक पर चलाया। पूरे देश में दुष्प्रचार किया। अब एक महीने में मैंने सच्चाई दिखा दी। पूरा का पूरा खत्म। सच्चाई को छिपाया नहीं जा सकता है। कहीं ना कहीं से सच्चाई बाहर आ जाती है। नफरत और डर से प्यारे देश को नुकसान हो रहा है। ये सच्चाई है। इसलिए हमने ये यात्रा कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक शुरू की है। तिरंगा को हम अब श्रीनगर में लहराएंगे। आप में से हजारों लोग मेरे साथ चलोगे।

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भारत जोड़ो यात्रा में दिग्विजय सिंह

भारत जोड़ो यात्रा के साथ चल रहे लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक बदलाव का वाहक भी बन सकता है। यात्रा में शामिल किराड़ी के रहने वाले रहमान परवेज का कहना है कि, “ पिछले आठ साल में महंगाई और बेरोजगारी से लोगों की कमर टूट चुकी है। अभी तक कोई जनता के सवालों को नहीं उठा रहा था। अब राहुल गांधी सीधे तौर पर बुनियादी मुद्दों को उठा रहे हैं। इसलिए वह आम युवाओं को आकर्षित करने लगे है।”

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रहमान परवेज एमबीए की पढ़ाई किए हैं। उनका मानना है कि नोटबंदी और कोरोना के कारण महंगाई और बेरोजगारी में भारी बृद्धि हुई। लेकिन सरकार ने भी महंगाई और बेरोजगारी को कम करने में कोई काम नहीं किया।

इसी तरह बदरपुर के रहने वाले शमशाद अहमद कहते हैं कि भीड़ और उत्साह देखकर तो लगता है कि आने वाले दिनों में देश की राजनीति में बदलाव होगा।

केरल से यात्रा में शामिल टीआर रमेश का कहना है कि देश में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पार्टियों की कमी नहीं है, लेकिन बुनियादी मुद्दों पर बात करने वाले राजनीतिक दलों का घोर अभाव है। अब राहुल गांधी इस कमी को पूरा कर रहे हैं। देर ही सही लेकिन वो कामयाब होंगे।

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