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संजीव भट्ट के समर्थन में सड़क पर उतरे लोग, एक सुर में कहा- निर्दोष संजीव को रिहा करो

अहमदाबाद। सोमवार को शाम 7 बजे बड़ी संख्या में देश भर से सामाजिक कार्यकर्ता संजीव भट्ट के अहमदाबाद स्थित घर पर इकट्ठा हुए। इन लोगों के एक हाथ में संजीव भट्ट के समर्थन में तख्ती तो दूसरे हाथ में जलती हुई मोमबत्ती थी। ये सामाजिक कार्यकर्ता मांग कर रहे थे कि संजीव भट्ट को रिहा किया जाए क्योंकि इनका मानना है भट्ट निर्दोष हैं और उन्हें राजनीतिक करणों से फंसाया गया है।

एकत्र लोगों ने मोदी सरकार के खिलाफ नारे भी लगाए। इस मौक़े पर उपस्थित फादर सेड्रिक प्रकाश ने कहा, “संजीव ने 2002 पर एक स्टैंड लिया जिस कारण 30 वर्ष पुराने मामले में उम्र क़ैद की सज़ा दी गई। यह घटना लोकतंत्र में कलंक है। न्याय नहीं अन्याय है।” मैग्सेसे अवार्ड विजेता संदीप पांडे ने कहा, ” संजीव भट्ट की गिरफ़्तारी और 30 साल पुराने केस में सज़ा राजनीति से प्रेरित है। इस राज्य में और भी पुलिस अधिकारी जेल जा चुके हैं। अमित शाह खुद तीन महीने जेल काट चुके हैं। इनका फिर से फेयर ट्रायल होना चाहिए।”

मार्च में शामिल संदीप पांडेय।

मुदिता विद्रोही का कहना था, ” उन्हें गलत जांच और राजनीतिक कारणों से फंसाया गया है। इसका तुरंत समाधान आना चाहिए जांच सही ढंग से हो।” मजलिस-मशावरत के इकराम बेग मिर्ज़ा ने कहा, ” सरकार द्वारा अन्याय हो रहा है हम लोग न्याय की स्थापना के लिए इकठ्ठा हुए हैं।”

संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट ने एकत्र लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, ” 1990 में 133 लोगों को लोकल पुलिस ने गिरफ्तार किया था। ये लोग जुडिशियल कस्टडी में थे और वह व्यक्त जिसके कस्टोडियल मौत के आरोप में सज़ा दी गई है वह कस्टडी से छूटने के 18 दिन बाद प्राकृतिक मौत से मरा है। इस राज्य में 180 और कस्टोडियल मौत के केस हैं। सज़ा केवल संजीव को ऐसा क्यों ? जान बूझ कर संजीव पर केस थोपा गया है। हमारा घर नगर निगम वाले तोड़ गए, एक आईपीएस को घर से पकड़ कर ले जाते हैं ऐसे में कोई पुलिस अधिकारी काम कैसे कर पाएगा। आरोपी पकड़ो तो समस्या, नहीं पकड़ो तो भी समस्या, दंगा रोको तो भी समस्या, नहीं रोको तो भी। खाकी का रंग उतर गया है। मैं संजीव को वापस लाऊंगी मुझे विश्वास है। मेरी देश वालों से अपील है कि वो आगे आएं।” मार्च के लिए पुलिस अनुमति मांगी गई थी लेकिन अनुमति न मिलने के कारण घर के बाहर ही प्रदर्शन सीमित रहा। बड़ी संख्या में पुलिस बंदोबस्त था और पुलिस डिटेन करने की पूरी तैयारी से आई थी।

यह पहला मौका है जब अमित शाह के मंत्री बनने के बाद उनकी ही लोकसभा में उनके खिलाफ प्रदर्शन हुआ है। संजीव भट्ट एक 23 साल पुराने मामले में 5 सितंबर 2018 से पालनपुर जेल में बंद हैं। हाल ही में जाम नगर सत्र न्यायालय द्वारा 30 वर्ष पहले एक विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता की पुलिस कस्टडी में मौत के लिए उम्र कैद की सज़ा दी गई। सोमवार शाम सात बजे 500-600 लोग भट्ट के लिए एकजुटता दिखाते हुए एकत्र हुए जिसमें न केवल सिविल सोसाइटी के लोग बल्कि प्रोफेसर, वकील ,पत्रकार, करोबारी, छात्र, महिलाएं, पुरुष और युवा सभी शामिल थे।

श्वेता भट्ट ने आगे कहा, “जाम नगर कोर्ट के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती देंगी। कानूनी लड़ाई जारी रखी जाएगी। सरकार भट्ट परिवार को दी गई सुरक्षा भी वापस ले ली है। जिसको श्वेता भट्ट ने कोर्ट में चुनौती दी है जिसकी सुनवाई 19 अगस्त को होगी। भट्ट के समर्थन में पूरे देश से श्वेता भट्ट को फोन रहे हैं। 21 जुलाई को श्वेता भट्ट मुंबई के एक कार्यक्रम में जा रही हैं जिसमें नसीरुद्दीन शाह डॉक्टर राम पुनियनी सहित बहुत सी हस्तियां शामिल होंगी।

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)

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Janchowk Official Journalists in Delhi

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