Friday, October 29, 2021

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सीबीटीडी के चेयरमैन की निगरानी में होगी पंडोरा पेपर्स मामले की जांच, केंद्र ने दिए आदेश

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भारत सहित दुनिया भर के अरबपतियों और ताकतवर लोगों द्वारा टैक्स चोरी करने, टैक्स से बचने के लिए अपनी संपत्तियों को टैक्स हैवेंस में छिपाने, ऑफशोर कंपनियां खोलने, अपनी कुल संपत्तियों का खुलासा न करने और कानूनी एजेंसियों द्वारा दागी करार दिए गए लोगों के साथ व्यापार करने का बहुत बड़ा मामला एक बार फिर से सामने आया है। वित्तीय दस्तावेज़ों के सबसे बड़े लीक्स में से एक में भारत सहित दुनिया भर के नेताओं और अरबपतियों की संपत्तियों और गुप्त सौदे का पर्दाफ़ाश हुआ है।इस लीक को पंडोरा पेपर्स का नाम दिया गया है। 35 से ज़्यादा मौजूदा और पूर्व नेताओं और 300 से ज़्यादा सरकारी अधिकारियों के नाम इस लीक में सामने आए हैं, जिन्होंने ऑफ़शोर कंपनियों में पैसे लगाए हैं और उसके ज़रिए दुनियाभर में संपत्तियाँ बनाईं।केंद्र सरकार ने पंडोरा पेपर्स मामले की जांच संयुक्त जांच एजेंसी से कराने का फैसला किया है। इस जांच की निगरानी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी सीबीडीटी के चेयरमैन करेंगे। इस संयुक्त जांच समिति में आयकर विभाग के अलावा प्रवर्तन निदेशालय, फाइनैंशियल इन्वेस्टिगेशन यूनिट जैसी जांच एजेंसियां भी शामिल होंगी। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के एक आला अधिकारी ने बताया कि सरकार ने यह फैसला पंडोरा पेपर लीक मामला सामने आने के बाद किया है।

केंद्र सरकार के एक आला अधिकारी ने बताया कि 3 अक्टूबर, 2021 को पत्रकारों की एक संस्था ने ऐसे अनेक जाने माने लोगों के बारे में जानकारियां सार्वजनिक की हैं, जो सार्वजनिक जीवन में तो बहुत अहम पदों पर हैं, लेकिन आरोप है कि उन लोगों ने अपने काले धन को टैक्स हैवन देशों में लगाया। इस कड़ी के तहत अनेक जाने-माने भारतीय लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जिनमें उद्योगपति खेल जगत से जुड़े लोग आदि बताए गए हैं। पत्रकारों की संस्था आईसीआईजे की वेबसाइट ने अभी तक इस बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है और कहा है कि चरणबद्ध तरीके से यह पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। इसके पहले भी आईसीआईजे, एचएसबीसी, पनामा पेपर और पैराडाइज पेपर्स के रूप में अनेक लोगों के नाम सामने आए हैं, जिन पर आरोप है कि उन्होंने अपने काले धन को सफेद में बदलने के लिए टैक्स हैवन देशों में धन लगाया और फिर शेल कंपनियां खोलकर उन पैसों को अन्य तरीकों से वापस भारत भी मंगा लिया। इन पेपरों के सामने आने के बाद भारत सरकार ने ऐसी तमाम जानकारी को अघोषित विदेशी आय और संपत्ति कर अधिनियम 2015 लागू किया था, जिसके तहत ऐसे सभी आरोपों की जांच की जाती है और तथ्य पाए जाने पर आरोपी के खिलाफ उचित प्रावधान के तहत कानूनी कार्रवाई की जाती है।

बताया जाता है कि पनामा पेपर और पैराडाइज पेपर के जरिए जो खुलासे किए गए थे, उसमें जांच के तहत इस साल अब तक 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति का पता चला है और उस बाबत उचित कार्रवाई की जा रही है। जो ताजा खुलासा हुआ है उसके मुताबिक एक भारतीय उद्योगपति जो बैंकों को हजारों करोड़ रुपये का चूना लगाकर विदेश भागा उसकी बहन ने उसके भागने के 1 महीने बाद ही विदेश में एक ट्रस्ट बना लिया और आरोप है कि भारत से जो पैसा गबन किया गया वह उस ट्रस्ट के जरिए टैक्स हैवेन देशों में लगाया गया। टैक्स हैवन देशों का मतलब है कि इन देशों में विदेशी लोगों को जो अपना पैसा वहां की बैंकों में जमा कराते हैं उन्हें अपना असली परिचय नहीं देना पड़ता और साथ ही जमा कराए गए धन पर भी मात्र कुछ फीस लेकर टैक्स नहीं लगाया जाता। ऐसे में ज्यादातर काला धन कमाने वाले लोग इन देशों में अपना खाता खुलवा लेते हैं।

अब तक की जांच के दौरान यह भी पाया गया है कि यह लोग ऐसे देशों में एक कंपनी खोल देते हैं और उस कंपनी की शाखा भारत में भी खोल देते हैं। क्योंकि कंपनी विदेशी होती है और नियम के मुताबिक विदेशी कंपनी को आयकर अपने देश में भरना होता है। ऐसे में काले धन को सफेद करने का काम बड़े आसानी से शुरू हो जाता है और वह धन यदि भारत में मौजूद किसी शख्स का है तो उसके पास पहुंच भी जाता है। ऐसे मामलों की जांच के दौरान यह भी पाया गया है कि कुछ लोगों ने अपना पैसा टैक्स हैवन देशों में जमा कराया और फिर उनके नाम पर फर्जी शेल कंपनियां भारत में खुली और काले धन को सफेद करने की कोशिश की।

सीबीडीटी के आला अधिकारी के मुताबिक पनामा, बरमूडा, मोनाको, एंडोरा, बहामास, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, कुक आइलैंड जैसे अनेक छोटे द्वीप टैक्स हैवन देशों की श्रेणी में आते हैं। सीबीडीटी के आला अधिकारी ने आधिकारिक तौर पर कहा कि पंडोरा पेपर का खुलासा होने के बाद सरकार ने इस पूरे मामले की जांच कराने का फैसला लिया है और जल्द ही इस मामले में दस्तावेज सामने आने पर अधिकारिक तौर पर पूछताछ तथा आगे की जांच शुरू कर दी जाएगी। जांच के लिए सभी जांच एजेंसियों की एक मिली जुली कमेटी बनाई जा रही है।

पंडोरा पेपर्स नामक अंतरराष्ट्रीय ख़ुलासे में बताया गया है कि सैकड़ों बड़े भारतीय नाम टैक्स से बचने के लिए अपनी संपत्तियों को टैक्स हैवेंस में छिपाने, ऑफशोर कंपनियां खोलने, कुल संपत्तियों का खुलासा न करने में शामिल हैं। इस सूची में कारोबारी अनिल अंबानी, हीरा व्यापारी नीरव मोदी, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, अभिनेता जैकी श्रॉफ, बायोकॉन की कार्यकारी अध्यक्ष किरण मजूमदार शॉ, दिवंगत कांग्रेस नेता सतीश शर्मा जैसे लोगों के नाम शामिल हैं।चार बड़े नेताओं के नाम भी भी हैं जिन्हें गोपनीय रखा गया है।
पनामा लॉ फर्म एल्कोगल के दस्तावेजों के मुताबिक तेंदुलकर, उनकी पत्नी अंजलि तेंदुलकर और उनके ससुर आनंद मेहता ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड्स, जो कि एक टैक्स हैवेन है, स्थित एक कंपनी ‘सास इंटरनेशनल लिमिटेड’ के बेनिफिशियरी ओनर (मालिक) और डायरेक्टर्स थे। जुलाई, 2016 में इस कंपनी को बंद (लिक्विडेशन) कर दिया गया था। खास बात ये है कि पनामा पेपर्स खुलासे के तीन महीने बाद ऐसा किया गया था। पंडोरा रिकॉर्ड्स में ‘सास’का पहला उल्लेख साल 2007 से दिखाई देता है, जिसके मालिकों द्वारा लाभ कमाने का विस्तृत विवरण उपलब्ध है।

कंपनी के लिक्विडेशन के वक्त शेयरधारकों द्वारा वापस खरीदे गए शेयर्स में से नौ शेयर्स सचिन तेंदुलकर के थे, जिसकी कीमत 8,56,702 डॉलर थी। इसी तरह अंजलि तेंदुलकर के 14 शेयर्स की कीमत 13,75,714 डॉलर और आनंद मेहता के पांच शेयर्स की कीमत 4,53,082 डॉलर थी।इस तरह सास इंटरनेशनल लिमिटेड कंपनी के एक शेयर की औसत कीमत 96,000 डॉलर थी। कंपनी ने 10 अगस्त 2007 को अपनी शुरुआत के वक्त 90 शेयर्स जारी किए थे। इस आधार पर ये कहा जा सकता है कि कुल शेयर्स का मूल्य करीब 60 करोड़ रुपये था।

इसी तरह भगोड़ा हीरा व्यापारी नीरव मोदी के जनवरी 2018 में भारत से भाग जाने के एक महीने पहले उनकी बहन पूर्वी मोदी ने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में ट्राइडेंट ट्रस्ट कंपनी, सिंगापुर के जरिये गठित एक ट्रस्ट के कॉरपोरेट प्रोटेक्टर (रक्षक) के रूप में कार्य करने के लिए एक फर्म की स्थापना की थी।उन्होंने द डिपोजिट ट्रस्ट का कॉरपोरेट प्रोटेक्टर बनने के लिए दिसंबर 2017 में ब्रूकटॉन मैनेजमेंट लिमिटेड नामक फर्म की स्थापना की थी। खास बात ये है कि इस फर्म में जिस कंपनी का पैसा डाला जाना था, वो पंजाब नेशनल बैंक में हजारों करोड़ रुपये का फ्रॉड करने का आरोपी है। दस्तावेजों से पता चलता है कि पूर्वी ने ऑन रिकॉर्ड ये बात कही थी कि फायस्टार कंपनी की क्रिएटिव डायरेक्टर के रूप में उनकी जो कमाई होगी उसे ब्रूकटॉन में डाला जाएगा। पीएनबी घोटाले में फायरस्टार पर ही आरोप है।नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के साथ पूर्वी को भी 13,600 करोड़ रुपये के पीएनबी घोटाला मामले में आरोपी बनाया गया था। हालांकि अभी वो सरकारी गवाह बन गई हैं। यदि वो इस मामले को लेकर सारी जानकारी सही-सही बताती हैं तो कोर्ट उन्हें माफ भी कर सकता है। बेल्जियम की नागरिक पूर्वी के खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस भी है।

रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि बायोटेक्नॉलॉजी एंटरप्राइज बायोकॉन लिमिटेड की कार्यकारी अध्यक्ष किरन मजूमदार शॉ के पति जॉन मैक्कलम मार्शल शॉ, जो ब्रिटिश नागरिक हैं, ने एक ऐसे व्यक्ति के साथ मिलकर ट्रस्ट बनाया था, जिस पर सेबी ने इनसाइडर ट्रेडिंग को लेकर प्रतिबंध लगा रखा था।इसी साल जुलाई में बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एलेग्रो कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड और उसके ज्यादातर शेयर खरीदने वाले बेंगलुरु स्थित कुणाल अशोक कश्यप को एक साल के लिए शेयर बाजार में व्यापार करने से रोक दिया था।उन पर गलत तरीके से 24.68 लाख रुपये कमाने का आरोप था। इसके अलावा सेबी ने बायोकॉन लिमिटेड के शेयर्स में इनसाइडर ट्रेडिंग करने के लिए 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।हालांकि अब पंडोरा पेपर्स के दस्तावेजों से पता चला है कि कुणाल कश्यप पहले से ही बायोकॉन से जुड़े हुए थे।

कुणाल कश्यप मॉरीशस स्थित ग्लेनटेक इंटरनेशनल द्वारा जुलाई 2015 में न्यूजीलैंड में स्थापित डीनस्टोन ट्रस्ट के ‘संरक्षक’हैं। ग्लेनटेक, जिसके पास बायोकॉन लिमिटेड के शेयर हैं, का 99 प्रतिशत स्वामित्व जॉन मैक्कलम मार्शल शॉ के पास है।

इसी तरह के ऐसे कई नाम और सामने आने वाले हैं, जहां कानूनों की कमियों को पकड़कर धनी वर्ग ने अपने पैसे छिपाने के रास्ते निकाल लिए हैं।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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