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Thursday, August 5, 2021

केंद्र की कायरतापूर्ण कार्रवाई! संसद में महुआ के हमले का जवाब घर के बाहर बीएसफ की तैनाती से दिया

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तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने ट्वीट करके बताया है कि उनके आवास के बाहर कल रात से ही तीन बीएसएफ सिपाही, जिनके पास असाल्ट राइफल हैं वो तैनात किए गए हैं। महुआ मोइत्रा आगे बताती हैं कि वे उनकी सुरक्षा के लिए बाराखंभा रोड पुलिस स्टेशन से आए हैं। इस ट्वीट को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और गृह मंत्रालय दफ़्तर को टैग करते हुए महुआ मोइत्रा कहती हैं, “भारत की एक स्वतंत्र नागरिक हूं- लोग मेरी रक्षा करेंगे।”

इसके अलावा दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव को लिखा एक लेटर भी ट्वीट किया, जिसे उन्होंने बाराखंभा पुलिस और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को टैग भी किया है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के लेटर हेड पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर को लिखे पत्र में कहा है कि कल शाम 6:30 बजे बाराखंभा एसएचओ मुझसे मिलने आए और फिर रात में दस बजे मेरे आवास पर तीन शस्त्रधारी बीएसएफ जवान तैनात कर दिए गए।

पत्र में आगे कहा गया है कि मेरे घर के बाहर तैनात बीएसएफ कर्मियों का जो बिहैव है, उससे लगता है कि वो घर के अंदर और बाहर मेरी मूवमेंट पर नज़र रख रहे हैं। मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें मुझ पर  निगरानी रखने के लिए तैनात किया गया है।

महुआ माझी आगे दिल्ली पुलिस कमिश्नर से कहती हैं कि मैं आपको याद दिला दूं कि भारत की नागरिक होने के नाते भारतीय संविधान 1950 के तहत निजता का अधिकार की गारंटी मौलिक अधिकार के रूप में मिला हुआ है। पत्र में आगे टीएमसी सांसद महुआ माझी कहती हैं, “पता करने पर मुझे बताया गया कि ये बीएसएफ जवान बाराखंभा पुलिस स्टेशन से मेरी सुरक्षा के लिए तैनात किए गए हैं, जबकि इस देश की एक सामान्य नागरिक होते हुए न तो मैंने इस तरह की किसी सुरक्षा की मांग की है, न ही मुझे चाहिए, इसलिए मैं आपसे प्रार्थना करती हूं कि कृपा करके इन ऑफिसर्स को तुरंत मेरे आवास से हटाया जाए।”

इससे पहले 10 फरवरी को भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे और पीपी चौधरी ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव के लिए नोटिस दिया था। सदन के अध्यक्ष को लिखे एक पत्र में भाजपा के दोनों नेताओं ने कहा था कि 8 फरवरी, 2021 को AITC पार्टी की संसद सदस्य महुआ मोइत्रा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने भाषण में एक प्रतिकूल बयान दिया है। उन्होंने कर्तव्यों के निर्वहन में भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के आचरण के संबंध में सदन में टिप्पणी की।

महुआ मोइत्रा ने पलटवार करते हुए कहा था कि सच को कभी हटाया नहीं जा सकता है। मोइत्रा ने ट्वीट किया, ‘अगर सच बोलने के लिए मेरे खिलाफ विशेषाधिकार हनन लाया जाता है, तो यह वास्तव में मेरे लिए प्रिव्लेज होगा।’

बता दें कि 8 फरवरी को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकार पर कायरता को साहस के रूप में परिभाषित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि नागरिकता संशोधन कानून लाना, अर्थव्यवस्था की स्थिति, बहुमत के बल पर तीन कृषि कानून लाना, इसके उदाहरण हैं। सांसद महुआ मोइत्रा ने पूर्व सीजेआई पर टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायपालिका अब पवित्र नहीं रह गई है।

न्यायपालिका और मीडिया ने भी देश को फेल किया है। मोइत्रा ने आरोप लगाया कि भारत इस वक्त अघोषित इमर्जेंसी झेल रहा है और सरकार पर छात्रों से लेकर किसानों और शाहीन बाग की बुजुर्ग महिलाओं के आंदोलनकारी आवाज को दबाने का आरोप लगाया। मोइत्रा ने कहा कि सरकार अपने खिलाफ आवाज उठाने वालों को आतंकवादी बता देती है।

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भारत के पूर्व चीफ जस्टिस के संदर्भ में टिप्पणी की जिसे लेकर सदन में हंगामा मच गया. सत्तापक्ष के सदस्यों ने उन पर संसदीय नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। काफी हंगामे के बाद महुआ की टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया था।

सांसद मोइत्रा ने सीजेआई पर आरोप लगाते हुए कहा था कि पूर्व सीजेआई ने राम मंदिर का फैसला सरकार के दबाव में किया। न्यायपालिका अब पवित्र नहीं रह गई। इसकी पवित्रता उसी दिन ख़त्म हो गई जब यौन उत्पीड़न के आरोपी तत्कालीन सीजेआई ने ख़ुद के केस की सुनवाई की और ख़ुद को क्लीन चिट दे दी। इतना ही नहीं उन्होंने रिटायरमेंट के तीन महीने बाद ही राज्यसभा की सदस्यता ज़ेड प्लस सिक्योरिटी के साथ कबूल कर ली।

बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर 2019 को रिटायर हुए थे। इसके बाद उन्होंने 19 मार्च राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने अपने रिटायमेंट से पहले राम मंदिर मामले में फैसला दिया था।

अपने चर्चित लोकसभा भाषण के बाद महुआ मोइत्रा भाजपा ट्रोल्स के निशाने पर आ गईं थीं, लेकिन अब इस तरह से गृह मंत्रालय द्वारा बीएसएफ के जवान उनके आवास पर तैनात करके उन्हें डराना एक बेहद ही शर्मनाक कदम है।

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