Friday, March 1, 2024
प्रदीप सिंह
प्रदीप सिंहhttps://www.janchowk.com
दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय और जनचौक के राजनीतिक संपादक हैं।

वसुंधरा, शिवराज और रमन को मनाने की कोशिश, राज्यों में पहुंचे केंद्रीय पर्यवेक्षक

नई दिल्ली। हिंदी पट्टी के तीन महत्वपूर्ण राज्यों में कौन मुख्यमंत्री बनेगा, इस पर सबकी निगाहें लगी हैं। पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में तेलंगाना में कांग्रेस तो मिजोरम में ‘जेडपीएम’ की जीत हुई तो छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में भाजपा की जीत हुई। तेलंगाना में रेवंत रेड्डी ने गुरुवार को तो मिजोरम में लालदुहोमा ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन भाजपा द्वारा जीते गए तीनों राज्यों में किसके नेतृत्व में सरकार गठित होगी यह अनुत्तरित है। भाजपा हाईकमान चुनाव परिणाम आने के बाद से ही तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री के नामों पर विचार-विमर्श किया। लेकिन कोई हल नहीं निकला।

शुक्रवार को भाजपा हाईकमान ने तीनों राज्यों में नेता के चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय मंत्री आदिवासी मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा को राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया गया है। तीनों पर्यवेक्षक राज्यों में विधायकों से बात कर केंद्रीय नेतृत्व को रिपोर्ट सौंपेगे। इसके बाद विधायक दल के नेता का चुनाव होगा। दरअसल, केंद्रीय पर्यवेक्षक दल राज्यों में नेतृत्व परिवर्तन की दशा में विधायकों के रूख का अंदाजा लगाने गए है। क्योंकि मोदी-शाह तीनों राज्यों में नए चेहरे को आगे करना चाहते हैं। वह अटल-आडवाणी के समय के नेताओं को अब नेतृत्व नहीं देना चाह रहे हैं।

नेतृत्व परिवर्तन में सबसे अधिक समस्या राजस्थान में आने वाली है। क्योंकि वहां पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके समर्थक बगावत की मुद्रा मे हैं। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश में भी वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। प्रदेश की सत्ता पर वह अपना हक बता रहे हैं। लेकिन मध्य प्रदेश में सिंधिया, तोमर और कैलाश विजयवर्गीय जैसे कई नेताओं के होने की वजह से शिवराज बगावत नहीं कर सकते। लेकिन राजस्थान में वसुंधरा राजे भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा है। पूरे राज्य में उनके समर्थक हैं और पार्टी में उनके समर्थक विधायकों की संख्या भी कम नहीं है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अगले दो-तीन दिनों में तीनों राज्यों में नेता का चुनाव करके सरकार का गठन किया जा सकता है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सोमवार को बैठक तय की गई है। लेकिन राजस्थान में बैठक कब होगी तय नहीं है।

राजस्थान में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा उपाध्यक्ष सरोज पांडेय और महासचिव विनोद तावड़े को बतौर पर्यवेक्षक भेजा गया है। राजस्थान भाजपा में चर्चा है कि शीर्ष नेतृत्व दो बार मुख्यमंत्री रही वसुंधरा राजे के स्थान पर किसी दूसरे को मुख्यमंत्री बनाना चाहता है। इस चर्चा के बीच वसुंधरा राजे के समर्थक विधायक नाराज है।

सूत्रों का कहना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह को इसीलिए राजस्थान भेजा जा रहा है जिससे वह असंतुष्ट नेताओं को मना लेंगे और नेता का चयन आसानी से हो सकेगा। लेकिन वसुंधरा और उनके समर्थकों के तेवर को देखकर यह आशा कम है कि राजनाथ सिंह राजस्थान में पार्टी के लिए मददगार साबित होंगे।

मध्य प्रदेश में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, भाजपा ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष के. लक्ष्मण और सचिव आशा लकड़ा को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया है। छत्तीसगढ़ में अर्जुन मुंडा, सर्बानंद सोनोवाल और दुष्यंत कुमार गौतम को पर्यवेक्षक के तौर पर भेजा गया है। तीनों टीमों के ऊपर नेता का चयन करने और वहां की स्थिति को केंद्रीय नेतृत्व से अवगत कराना है।

मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान लगभग 18 साल से मुख्यमंत्री हैं। 2018 विधानसभा चुनाव के बाद लगभग 15 महीने कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी। पार्टी राज्य में चेहरा बदलना चाहती है। मध्य प्रदेश में पार्टी को बहुमत मिला है। लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब यह प्रदर्शित कर रहे हैं कि राज्य में उनके कार्यों की वजह से यह जीत हुई है। सीधे तो नहीं लेकिन वह सीएम की कुर्सी पर अपना दावा जता रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में भी भाजपा ने किसी को चुनावी चेहरा नहीं बनाया था। भाजपा को भी यह भरोसा नहीं था छत्तीसगढ़ में चुनाव जीत जायेगी। लेकिन अब वह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह की बजाय किसी ओबीसी या आदिवासी नेता को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है। पार्टी के अंदर आदिवासी नेता लता उसेंडी, गोमती साईं और रेणुका सिंह के नाम पर चर्चा चल रही है। वहीं ओबीसी चेहरों में अरुण साव और पूर्व नौकरशाह ओपी चौधरी के नाम पर भी विचार किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में बीजेपी विधायक दल के नेता का चयन करने के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक रायपुर पहुंच गए हैं। जानकारी के मुताबिक अर्जुन मुंडा, सर्बानंद सोनोवाल और दुष्यंत कुमार गौतम विधायकों से सोमवार को चर्चा करेंगे। और मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान विधायक दल की बैठक में हो सकता है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री पद के लिए कई नामों को लेकर अटकलें तेज हैं, जिनमें विष्णुदेव साय, गोमती साय, रेणुका सिंह, डॉ. रमन सिंह, ओपी चौधरी और अरुण साव शामिल हैं।

(प्रदीप सिंह जनचौक के राजनीतिक संपादक हैं।)

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