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Monday, September 27, 2021

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सीएजी ने पकड़ी केंद्र की चोरी, राज्यों को मिलने वाले जीएसटी कंपेनसेशन फंड का कहीं और हुआ इस्तेमाल

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नई दिल्ली। एटार्नी जनरल की राय का हवाला देते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले हफ्ते संसद को बताया था कि जीएसटी रेवेन्यू के घाटे की भरपाई देश के कंसालिडेटेड फंड से करने का कोई प्रावधान नहीं है।

लेकिन सीएजी को पता चला है कि सरकार ने 47,272 करोड़ रुपये जीएसटी कंपेनसेशन सेश को 2017 और 2018-19 में सीएफआई में बनाए रखने के साथ ही उसे किसी दूसरे मद में खर्च करके खुद कानूनों का उल्लंघन किया है। इसकी वजह से रेवेन्यू रिसीप्ट बहुत बढ़ गया है और उस साल का वित्तीय घाटा कम हो गया है।

सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि “सेश के कलेक्शन और उसके जीएसटी कंपेनसेशन सेश फंड में ट्रांसफर संबंधी स्टेटमेंट 8, 9 और 13 में सूचनाओं का आडिट परीक्षण दिखाता है कि 2017-18 और 2018-19 के दौरान जीएसटी कंपेनसेशन सेश कलेक्शन के फंड में शार्ट क्रेडिट के तौर पर 47,272 करोड़ रुपये आए हैं।”

बुधवार को संसद में सौंपी गयी रिपोर्ट में सीएजी ने कहा कि यह शार्ट क्रेडिटिंग जीएसटी कंपेनसेशन सेश एक्ट, 2017 का उल्लंघन है।

जीएसटी कंपेनसेशन सेश एक्ट के प्रावधानों के मुताबिक एक साल के भीतर इकट्ठा किया गया पूरा सेश किसी भी रूप में खत्म नहीं होने वाले फंड के तौर पर जीएसटी कंपेनसेशन सेश फंड में क्रेडिट होगा। इसका मतलब यह है कि रेवेन्यू के नुकसान की स्थिति में विशेष रूप से राज्यों के घाटे को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जाना है।

लेकिन सरकार ने पूरे जीएसटी सेश की राशि को जीएसटी कंपेनसेशन फंड में ट्रांसफर करने की जगह उसे कंसालिडेटेड फंड ऑफ इंडिया (सीएसआई) में बनाए रखा और उसका दूसरे मदद में इस्तेमाल किया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि “शार्ट क्रेडिटेड सेश राशि को भी सीएफआई में बनाए रखा गया और वह दूसरे उद्देश्यों में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध था बनिस्बत जैसा कि एक्ट में उसके लिए प्रावधान है।” और इसके चलते उस साल रेवेन्यू रिसीप्ट बहुत बढ़ गया और वित्तीय घाटा कम हो गया।

रिपोर्ट को और विस्तार से व्याख्यायित करते हुए सीएजी ने कहा कि “2018-19 के दौरान बजट के प्रावधान के तहत 90000 करोड़ फंड में ट्रांसफर किया जाना था और उतनी ही राशि कंपेनसेशन के तौर पर राज्यों को रिलीज की जानी थी। हालांकि जीएसटी कंपेनसेशन सेश के तौर पर उस साल 95,081 करोड़ इकट्ठा हुआ। लेकिन रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने फंड में केवल 54275 करोड़ ही ट्रांसफर किए।”

सीएजी ने कहा कि “फंड से इसने केवल 69275 करोड़ रुपये (15,000 करोड़ का बैलेंस था) राज्यों को कंपेनसेशन के तौर पर दिया। 90-90 हजार करोड़ रुपये राज्यों को ट्रांसफर किए जाने वाले एमाउंट तथा कंपेनसेशन राशि के मुकाबले फंड में कम ट्रांसफर करने के चलते केंद्र की 35,725 करोड़ की बचत हो गयी और राज्यों को कंपेनसेशन के मद में अदायगी में यह बचत 20,725 करोड़ की थी।”

18 सितंबर को लोकसभा में बोलते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि “सेश के द्वारा जितना कंपेनसेशन कलेक्ट होता है, वो होता है कंपेनसेशन जिसे स्टेट को देना होता है……अगर सेश कलेक्शन में कुछ नहीं है, तो नहीं है।”

सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक वित्तमंत्रालय ने आडिट के परीक्षण को स्वीकार कर लिया है और कहा है कि “इकट्ठा किया गया जो सेश पब्लिक एकाउंट में ट्रांसफर नहीं किया गया उसे आने वाले साल में ट्रांसफर कर दिया जाएगा”।

इसके साथ ही एक और दिलचस्प प्रगति हुई राज्यों को मिलने वाले कंपेनसेशन सेश को केंद्र ने सहायता राशि में बदल दिया था। जिस पर सीएजी ने कड़ा एतराज जाहिर किया और कहा कि वह राज्यों का अधिकार है और उसे किसी भी रूप में सहायता राशि के तौर पर नहीं पेश किया जा सकता है। सीएजी ने वित्त मंत्रालय से इससे संबंधित विवरणों को दुरुस्त करने के लिए कहा।

जीएसटी कंपेनसेशन सेश के अलावा सीएजी ने दूसरे मदों में इकट्ठा होने वाले सेश को उनके संबंधित रिजर्व फंड में नहीं भेजा इसमें रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेश, सेश ऑन क्रूड आयल, यूनिवर्सल सर्विस लेवी और नेशनल मिनरल ट्रस्ट लेवी शामिल हैं।

सीएजी ने बताया कि “आडिट को जांच में पता चला है कि 2018-19 में 35 सेश, लेवी और दूसरे चार्जेज के जरिये हासिल किए गए कुल 2,74,592 करोड़ में केवल 164322 ही रिजर्व फंड में ट्रांसफर किया गया। और बाकी कंसालिडेटेड फंड ऑफ इंडिया में बनाए रखा गया।”

(इनपुट इंडियन एक्सप्रेस से लिए गए हैं।)

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