चौधरी अजित सिंहः एक सरल व्यक्तित्व जो प्रौद्योगिकी का ज्यादा था राजनीति का कम!

राष्ट्रीय लोकदल नेता चौधरी अजित सिंह का आज निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से कोरोना-संक्रमित थे और उऩका एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। वह 82 वर्ष के थे। चौधरी अजित सिंह कई बार लोकसभा के लिए चुने गये। कुछ साल वह राज्यसभा में भी रहे। वीपी सिंह, पी वी नरसिंहराव और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकारों में वह कैबिनेट मंत्री रहे। राजनीति मे दाखिल होने से पहले वह एक प्रौद्योगिकी-प्रोफेशनल थे। आईआईटी से उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। अपने पिता और देश के पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह की अस्वस्थता के दौरान उन्होंने अपना प्रोफेशनल काम छोड़कर राजनीति में दाखिल होने का फैसला किया। उऩके निधन के बाद पूरी तरह पार्टी की कमान संभाल ली। हाल के वर्षों में वह राजनीतिक तौर पर बहुत सक्रिय नही थे। पर चुनाव लड़ना उन्होंने बंद नहीं किया था। 2019 का संसदीय चुनाव वह मुजफ्फरनगर से हार गये थे। भाजपा के एक अपेक्षाकृत नये और विवादास्पद नेता संजीव बालियान ने उन्हें हराया।

अजित सिंह ने पिछले दिनों किसान आंदोलन का समर्थन करके पश्चिम उत्तर प्रदेश के अपने विभाजित-जनाधार में कुछ प्रशंसा बटोरी। एक पत्रकार होने के नाते उनसे कुछेक बार मिलने का मुझे मौका मिला। जब वह सांसद या मंत्री थे तो कभी-कभी संसद-भवन या किसी सभा-बैठक के पहले या बाद में मुलाकात होती रहती थी। एक बार कुछ देर की यात्रा के दौरान उनकी गाड़ी में ही उनसे अच्छी गपशप हुई। गाड़ी की खिड़की से दिल्ली-एनसीआर के वसुंधरा और इंदिरापुरम के इलाके को दिखाते हुए उन्होंने मुझसे कहा: ‘उर्मिलेश, आप जानते हो, ये सारे इलाके हमारे किसानों के खेत थे। इसका ज्यादातर हिस्सा हमारे क्षेत्र में आता था।’ फिर भारत में बड़े महानगरों के इर्द-गिर्द होने वाले अंधाधुंध शहरीकरण पर हम लोग चर्चा करते रहे। सूचना और समझ के स्तर पर वह हिंदी-भाषी क्षेत्र के ज्यादातर नेताओं से ज्यादा समृद्ध थे। आमतौर पर वह सहज और सरल व्यक्ति थे। पढ़े-लिखे थे। देश-दुनिया की अच्छी जानकारी थी। पर वह बहुत व्यावहारिक और लोगों के बीच घुल-मिल कर काम करने वाले नेता नहीं बन सके। राजनीति में वह प्रौद्योगिकी और तकनीकी क्षेत्र से आये थे इसलिए उनके राजनेता पर प्रौद्योगिकी हावी रही। इससे समाज और सियासत के रसायन शास्त्र को समझने में संभवतः उन्हें दिक्कत होती रही।

इधर कई वर्षों से हमारी मुलाक़ात नहीं थी। पर उनकी कुछेक खूबियाँ मुझे आज भी याद हैं। एक बार मुझे उनका इंटरव्यू करना था। संभवतः तब मैं ‘हिन्दुस्तान’ अखबार में काम करता था। फोन पर बात हुई तो उन्होंने अपने घर पर बुलाया। उन्होंने फोन पर ही बोल दिया था कि लंच उनके साथ करना है। बहुत घनिष्ठता नहीं होने के बावजूद वह मुझे जानते-पहचानते थे। मेरी गाजीपुर (पूर्वी उत्तर प्रदेश) की पृष्ठभूमि से भी अवगत थे। उन्हें यह भी मालूम था कि उनके दिवंगत पिता चौधरी चरण सिंह से मेरा यदा-कदा मिलना-जुलना था। उनके साथ पहली बार लंच पर मिलना हो रहा था। मुझे बड़ा अच्छा लगा, जो भोजन आया वह पूरी तरह हमारे गांव-घर जैसा था। पूरी थाली थी, किसी किसान-परिवार जैसी। खाना बहुत स्वादिष्ट, पौष्टिक पर बहुत सादा था।

एक पत्रकार के तौर पर उनके साथ मेरा ज्यादा मिलना-जुलना भले नहीं था लेकिन उनकी राजनीति पर नजर रहती थी। जब तक मैं अपने अखबार के नेशनल पोलिटिकल ब्यूरो में रहा, उनकी पार्टी मेरे बीट का हिस्सा शायद ही कभी रही। लेकिन किसी विषय-विशेष पर लिखने के क्रम में उनसे यदा-कदा मिलना-जुलना होता रहता था। उनके व्यक्तित्व के एक पहलू ने मेरा ध्यान ज़रूर आकृष्ट किया। अपनी सही या गलत, जो भी बात, विचार या फैसला हो; उस पर वह बहुत दृढ़ रहते थे। उनके पास अपने पक्ष में बहुत से तर्क होते थे। कई बार वे तर्क बहुत कमजोर भी होते थे पर वे उन पर अडिग रहते। यह उनकी शक्ति और कमजोरी दोनो थी।

बहरहाल, एक राजनेता के रूप में उन्होंने मुझे कभी  प्रभावित नहीं किया। अगर उन्होंने अपने पिता और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के राजनैतिक मूल्यों को अपने राजनीतिक कॅरियर का हिस्सा बनाया होता तो उन्हें भारतीय राजनीति में बड़ी राजनीतिक ताक़त बनने से कोई रोक नहीं सकता था। उनके पुत्र जयंत चौधरी से मेरी कभी मुलाक़ात नहीं हुई पर उन्हें संसद और संसद के बाहर बोलते हुए कई बार सुना है। मुझे वह अपेक्षाकृत प्रखर, समझदार और सुसंगत व्यक्ति लगते हैं। पता नहीं, लोगों से घुलने-मिलने के मामले में वह कैसे हैं- अपने पिता की तरह या दादा की तरह? कुल मिलाकर जयंत संभावनाशील शख्सियत नजर आते हैं। अगर वह अपने दादा के सकारात्मक राजनीतिक मूल्यों को आगे बढ़ाते हुए आज के हिसाब से अपना रास्ता तय करें तो शायद वह उत्तर के हिंदी-भाषी क्षेत्र में एक कारगर राजनीतिक शख्सियत के रूप में उभर सकते हैं।

दिवंगत चौधरी अजित सिंह जी को सादर श्रद्धांजलि और परिवार के प्रति शोक-संवेदना।

This post was last modified on May 6, 2021 10:53 pm

Share
%%footer%%