भारत-चीन सीमा विवाद: सैनिकों की मौत पर कांग्रेस ने जतायी गहरी चिंता, सरकार से पूछे चार सवाल

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नई दिल्ली। कांग्रेस ने भारत-चीन सीमा से आ रही सूचनाओं पर गहरी चिंता जाहिर की है। उसने कहा है कि लद्दाख से सटी सीमा पर एक अफसर समेत दो सैनिकों की शहादत की खबरें आ रही हैं। इसके साथ ही उसने कहा है कि दो महीनों से सीमा के तीन स्थानों पर चीनी घुसपैठ की सच्चाई क्या है इसको देश को बताया जाना चाहिए। उसने इस पूरे मसले पर पीएम मोदी की चुप्पी पर अचरज जाहिर किया है। ये बातें कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिये कही।

उन्होंने सरकार से चार सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा कि क्या यह सच है कि चीनी सेना ने गलवान घाटी में भारतीय सेना के एक अधिकारी और सैनिकों को मार डाला है? क्या यह सही है कि अन्य भारतीय सैनिक भी इस हमले में गंभीर रूप से घायल हुए हैं? यदि हां, तो पीएम मोदी और रक्षामंत्री पूरी तरह चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?

अपने दूसरे सवाल में उन्होंने कहा है कि भारतीय सेना के कथित बयान के मुताबिक हमारी सेना के उच्च अधिकारी और सैनिक कल रात उस समय शहीद हुए थे, जब डी-एस्केलेशन की प्रक्रिया गलवान घाटी में चल रही थी।

सुरजेवाला का तीसरा सवाल यह था कि प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री ने अप्रैल/मई, 2020 से चीनी सेना द्वारा हमारे क्षेत्र पर कब्जे बारे में क्यों चुप्पी बनाए रखी है और सार्वजनिक पटल पर किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार क्यों कर रहे हैं।

अपने चौथे सवाल में सुरजेवाला ने कहा कि क्या प्रधानमंत्री बताएंगे कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के लिए पैदा हुई इस चुनौतीपूर्ण व गंभीर स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार की नीति क्या है?

इसके पहले सुरजेवाला ने कहा कि भारत की ‘सुरक्षा व क्षेत्रीय अखंडता’ से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। खबरों की मानें तो चीनी सेना के हजारों सैनिकों ने गलवान वैली और पैंगोंग सो लेक एरिया (लद्दाख) में घुसपैठ कर हमारी ‘भूभागीय अखंडता’ पर अतिक्रमण का दुस्साहस किया है। कथित तौर से ये घुसपैठ लद्दाख में गलवान नदी वैली, हाॅट स्प्रिंग्स और पैंगोंग सो झील के इलाके में हुई। 

भारत की ‘सुरक्षा व क्षेत्रीय अखंडता’ से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। खबरों की मानें तो चीनी सेना के हजारों सैनिकों ने गलवान वैली और पैंगोंग सो लेक एरिया (लद्दाख) में घुसपैठ कर हमारी ‘भूभागीय अखंडता’ पर अतिक्रमण का दुस्साहस किया है।

उन्होंने कहा कि पिछले पांच दशकों में, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर एक भी दुर्घटना या हमारे सैनिक की शहादत भारत-चीन सीमा पर नहीं हुई है। गहरी चिंता व स्तब्ध करने वाली बात यह है कि आज दोपहर के बाद से, सभी समाचार चैनलों/समाचार पत्रों ने चीनी सेना द्वारा भारतीय सेना के एक अधिकारी और दो सैनिकों के मारे जाने की पूरी तरह से अप्रत्याशित और अस्वीकार्य खबर दी है।

इन खबरों को सुन कर पूरा देश क्षुब्ध है, रोष में है, परंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूरी तरह से चुप्पी साध ली है। प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री को आगे आकर देश को जवाब देना चाहिए। 

क्या प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री इस बात पर राष्ट्र को विश्वास में लेंगे कि हमारे अधिकारी और सैनिक ऐसे समय में कैसे शहीद हो सकते हैं जबकि चीनी सेना कथित तौर पर गलवान घाटी के हमारे क्षेत्र से कब्जा छोड़ वापस जा रही थी? केंद्रीय सरकार बताए कि हमारे उच्च सेना अधिकारी और सैनिक कैसे और किन परिस्थितियों में शहीद हुए? 

अगर हमारे अधिकारी और सैनिकों के शहीद होने का यह वाकया कल रात हुआ था, तो आज 12.52 बजे दोपहर बयान क्यों जारी किया गया और 16 मिनट बाद ही यानि 1.08 बजे दोपहर बयान क्यों बदला गया?


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