Tuesday, December 7, 2021

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कॉलेजियम द्वारा दोहराए गए 11 नामों को केंद्र ने लटकाया, सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई अवमानना याचिका

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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए दोहराए गए ग्यारह नामों को मंजूरी देने में देरी के लिए केंद्र सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक अवमानना याचिका दायर की गई। एडवोकेट्स एसोसिएशन बेंगलुरु द्वारा दायर अवमानना याचिका में तर्क दिया गया है कि केंद्र द्वारा पीएलआर प्रोजेक्ट्स लिमिटेड बनाम महानदी कोलफील्ड्स प्राइवेट लिमिटेड में दिए गए निर्देशों का उल्लंघन किया गया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि कॉलेजियम द्वारा दोहराए गए नामों को केंद्र द्वारा 3-4 सप्ताह के भीतर मंजूरी दी जानी चाहिए।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों के कॉलेजियम ने पिछले पांच महीने के दौरान यानी मई से अब तक कई हाईकोर्ट में नियुक्ति के लिए वकीलों और न्यायिक अधिकारियों में से सबसे उपयुक्त 106 नाम की सिफारिश की है । केंद्र सरकार ने उनकी सिफारिश को कई किस्तों में मंजूर किया है, जबकि दर्जनभर नाम अभी तक लंबित सूची में हैं ।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट ने एक सख्त समय सीमा निर्धारित की थी, जिसमें एक बार सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा नामों को दोहराए जाने के बाद, केंद्र को इस तरह के दोहराव के 3-4 सप्ताह के भीतर नियुक्ति करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि केंद्र को एक समय सीमा का पालन करके नियुक्तियों को मंजूरी देनी होगी।

तय नियम के मुताबिक हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस की अगुवाई वाला कॉलेजियम न्यायिक अधिकारियों और वकीलों में से सभी मानदंडों पर खरे उतर रहे योग्य लोगों की सूची बनाकर सरकार को भेजता है। सरकार खुफिया एजेंसियों के जरिए उनके बारे में सब कुछ पता लगाकर रिपोर्ट नत्थी कर भेजती है। फिर पूरी फाइल सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में विचार के लिए आती है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के अनुमोदन के बाद फाइलें न्याय मंत्रालय को भेजी जाती हैं ताकि वो उन्हें प्रधानमंत्री तक पहुंचाएं। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति को सलाह देते हैं कि इनकी नियुक्ति जज के तौर पर कर दी जाए। इसके बाद राष्ट्रपति नियुक्ति का वारंट जारी करते हैं और जज के रूप में शपथ ग्रहण हो जाता है।सरकार की भूमिका पहले उनके बारे में जांच पड़ताल की खुफिया रिपोर्ट देने और फिर वारंट का अनुपालन करने की होती है।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि नियुक्ति के लिए नामों को मंजूरी देने में इस तरह की अत्यधिक देरी ‘न्यायपालिका की स्वतंत्रता के पोषित सिद्धांत’ के लिए हानिकारक है। भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम की सिफारिशों के संदर्भ में प्रतिवादी/कथित अवमानना करने वालों की कार्रवाई, कानून के शासन पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है, जिसे संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा बनने के लिए आयोजित किया गया है।

याचिका में लिखित ग्यारह नाम इस प्रकार हैं; 1. जयतोष मजूमदार (एडवोकेट) कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए प्रस्तावित किया गया है। पहली बार 24 जुलाई, 2019 को सिफारिश की गई थी और 1 सितंबर, 2021 को नाम दोहराया गया। 2. अमितेश बनर्जी (एडवोकेट) कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए प्रस्तावित किया गया है। पहली बार 24 जुलाई, 2019 को सिफारिश की गई थी और 1 सितंबर, 2021 को नाम दोहराया गया। 3. राजा बसु चौधरी (एडवोकेट) कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए प्रस्तावित किया गया है। पहली बार 24 जुलाई, 2019 को सिफारिश की गई थी और 1 सितंबर, 2021 को नाम दोहराया गया। 4. लपिता बनर्जी (एडवोकेट) कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए प्रस्तावित किया गया है। पहली बार 24 जुलाई, 2019 को सिफारिश की गई थी और 1 सितंबर, 2021 को नाम दोहराया गया। 5. मोक्ष काज़मी (खजुरिया) (एडवोकेट) जम्मू एंड कश्मीर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए प्रस्तावित किया गया है।

पहली बार 15 अक्टूबर, 2019 को सिफारिश की गई थी और 9 सितंबर, 2021 को दोहराया गया। 6. राहुल भारती (एडवोकेट) जम्मू एंड कश्मीर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए प्रस्तावित किया गया है। पहली बार 2 मार्च, 2021 को सिफारिश की गई थी और 1 सितंबर, 2021 को नाम दोहराया गया। 7. नागेंद्र रामचंद्र नाइक (एडवोकेट) कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए प्रस्तावित किया गया है। पहली बार 3 अक्टूबर, 2019 को सिफारिश की गई थी और नाम पहली बार 2 मार्च, 2021 को दोहराया गया। 1 सितंबर, 2021 को दूसरी बार नाम दोहराया गया। 8. आदित्य सोंधी (एडवोकेट) कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए प्रस्तावित किया गया है। पहली बार 4 फरवरी, 2021 को सिफारिश की गई और 1 सितंबर, 2021 को नाम दोहराया गया। 9. जे उमेश चंद्र शर्मा (न्यायिक अधिकारी) इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए प्रस्तावित किया गया है। पहली बार 4 फरवरी, 2021 को सिफारिश की गई थी और 24 अगस्त, 2021 को दोहराया गया। 10. सैयद वाइज़ मियां (न्यायिक अधिकारी) इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए प्रस्तावित किया गया है। पहली बार 4 फरवरी, 2021 को सिफारिश की गई थी और 24 अगस्त, 2021 को दोहराया गया। 11. शाक्य सेन (एडवोकेट) कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए प्रस्तावित किया गया है। पहली बार 24 जुलाई, 2019 की सिफारिश की गई और 8 अक्टूबर, 2021 को दोहराया गया।

यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार का आचरण सुभाष शर्मा, द्वितीय न्यायाधीशों के मामले, तीसरे न्यायाधीशों के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के सीधे उल्लंघन करता है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिश नामों की शीघ्र नियुक्ति के लिए बार-बार वकालत की है। केस का शीर्षक: एडवोकेट्स एसोसिएशन बेंगलुरु बनाम बरुन मित्रा, सचिव

इस बीच केंद्र सरकार ने न्यायिक अधिकारी उमा शंकर व्यास की राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति की अधिसूचना जारी की दी। यह नियुक्ति पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के अनुसार की गई। व्यास के साथ राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए सात अन्य लोगों की भी सिफारिश की गई थी। यह नियुक्ति उनके कार्यालय का प्रभार संभालने की तिथि से प्रभावी होगी।”

केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट से कलकत्ता हाईकोर्ट में वापस स्थानांतरित करने की अधिसूचना जारी कर दी। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची वर्तमान में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में सेवारत हैं।

केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति विक्रम चौहान को इलाहाबाद हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त करने की अधिसूचना जारी कर दी। इस साल 24 अगस्त को हुई बैठक के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के अनुसार यह नियुक्ति की गई। कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति विक्रम चौहान के साथ 12 अन्य वकीलों को हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की थी। इनमें से नौ को अब मंजूरी मिल गई है।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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