Thursday, October 21, 2021

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अमेरिका के कई राज्यों में कोरोना बरपा रहा है कहर, ट्रम्प चुनाव में व्यस्त

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कोरोनावायरस का एक समय दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र न्यूयॉर्क अपने आप को अनलॉक करने के चौथे चरण में कल पहुंचा, वहीं अमेरिका सहित दुनिया के अन्य हिस्सों में कोरोना का कहर नई लहरों के साथ पछाड़े मार रहा है।

समाचार एजेंसी (रायटर) ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कल 20 जुलाई को न्यूयॉर्क राज्य ने सोमवार को चार महीनों में कोरोनोवायरस के सबसे कम मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की सूचना दी है। इसके साथ ही न्यूयॉर्क शहर फिर से खुलने के एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका के कई अन्य राज्यों में कोविड-19 से संक्रमित होने वाले अमेरिकियों की संख्या पहले से भी तेजी से बढ़ती जा रही है।

एक समय दुनिया का एपिकसेंटर के तौर पर मशहूर इस न्यूयॉर्क राज्य में गवर्नर एंड्रयू क्यूमो के अनुसार “रविवार को कुल आठ मौतें दर्ज हुई हैं, जबकि बीमारी के लिए अस्पताल में भर्ती लोगों की कुल संख्या 716 हो चुकी है, जोकि 18 मार्च के बाद से सबसे कम है।”

गवर्नर एंड्रयू क्यूमो ने इस आंकड़े को “अच्छी खबर” बताया, हालांकि कोविड ट्रैकिंग प्रोजेक्ट के डेटा के रायटर द्वारा विश्लेषण से पता चला है कि अप्रैल के बाद से पहली बार पिछले सप्ताह में न्यूयॉर्क में मामले 5,000 से अधिक हो चुके हैं, जिसने 13 सप्ताह की लगातार आ रही गिरावट को तोड़ दिया है।

कहीं और, देश के लिए लगभग हर मीट्रिक बढ़ती मामलों, मौतों, अस्पताल में भर्ती होने और सकारात्मक परीक्षा परिणामों की दरों सहित पूरी तरह से बदतर हो रही थी। यह वायरस 140,000 अमेरिकियों को मार चुका है और दुनिया के अग्रणी दोनों आंकड़ों में कुछ 3।7 मिलियन संक्रमित है।

लॉस एंजिल्स शहर एक नए रहने के आदेश को जारी करने के कगार पर है और जुलाई में अब तक कम से कम 14 राज्यों ने रिकॉर्ड अस्पताल में भर्ती होने की सूचना दी है, जिसमें अलबामा, एरिज़ोना, फ्लोरिडा, जॉर्जिया, नेवादा, उत्तरी कैरोलिना और टेक्सास शामिल हैं।

लेकिन अमेरिका में बाकी जगहों पर स्थिति लगातार बद से बदतर होती जा रही है। कोरोना से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या में लगातार इजाफा होने के साथ-साथ, मौतें, अस्पतालों में भर्ती होने की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अभी तक इस वायरस ने 1,40,000 अमेरिकियों को काल के गाल में ले लिया है, और तकरीबन 37 लाख लोग इसकी चपेट में हैं। ये दोनों ही संख्या विश्व भर में सबसे अधिक हैं।

पिछले दिनों दक्षिणी अमेरिका के देश ब्राजील और एशिया में भारत में कोरोनावायरस के मामलों में भारी उछाल देखने को मिल रहा था, और लगता था कि जल्द ही दुनिया को अमेरिका जैसे समृद्ध देश से निकाल बाहर करने में कामयाबी मिल जायेगी और यह वायरस हर वायरस की तरह गरीब मुल्कों के गरीब लोगों को अपनी चपेट में लेगा।

लेकिन यह अमेरिका की बदकिस्मती ही कही जा सकती है कि संसाधनों के मामले में दुनिया में आज भी सबसे सम्पन्न होने, भारी मात्रा में नागरिकों और उद्योग धंधों के लिए इस बार आर्थिक पैकेज की घोषणा के बावजूद, एक धुर दक्षिणपंथी नेतृत्व के चलते और साथ ही नवम्बर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर लगातार ऐसे फैसले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से लिए जाते रहे हैं, जिसने आज भी इस महामारी के मामले में उसे विश्व विजेता बनाकर रखा हुआ है।

आज की स्थिति को देखें तो रोज अमेरिका में अब 70,000 नए मामले आ रहे हैं। लोस एंजेल्स में लॉकडाउन एक बार फिर से लगाने की स्थिति बन चुकी है, और कम से कम 14 राज्यों में रिकॉर्डतोड़ संख्या में अस्पतालों में नए नए मरीजों के आने का सिलसिला बना हुआ है। जुलाई में ये राज्य हैं अल्बामा, एरिज़ोना, फ्लोरिडा, जॉर्जिया, नेवादा, नार्थ कैरोलिना और टेक्सास।

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन की ओर से स्कूलों को खोलने के लिए दबाव लगातार दिया जा रहा है, और डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने बयान में पहले ही लोगों को सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनने की अनिवार्यता को घोषित करने से साफ़ इंकार कर दिया था। एक चुनावी गिमिक के तौर पर ट्रम्प ने खुद को लोकतान्त्रिक दिखाने की कोशिशें इसके जरिये की हैं, और उनके धुर दक्षिणपंथी भक्तों को इसी बहाने उद्दंडता करने का नया बहाना सा मिलता रहता है।

कुल मिलाकर देखें तो अमेरिका एक ऐसे खुद के बनाये हुए जाल में फंसा हुआ है, जहां उसे दुनिया का सबसे ताकतवर देश भी बने रहते दिखना है, चीन के खिलाफ आर्थिक नाकेबंदी कर उसे किसी भी सूरत में दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत कम से कम ट्रम्प के शासनकाल में तो नहीं बनने देना है, अमेरिका का सूरज कभी नहीं डूबता है और इसलिए फ़ेडरल प्रशासन की ओर लॉकडाउन नहीं लगाया जा सकता।

अमेरिकी कॉर्पोरेट लॉबी के हितों को किसी भी कीमत पर जाया नहीं जाने दिया सकता है, और इस आपदा में अवसर के तौर पर कुछ चुनिन्दा कम्पनियों जिनमें अमेज़न सर्वप्रमुख है, के हितों की अनदेखी कत्तई नहीं की जा सकती। इसके साथ ही अमेरिका सारी दुनिया के लिए पूंजीवाद के सबसे बड़े चौधरी के तौर पर भी है, जिसके डूबने के मायने काफी असरकारक हो सकते हैं। डोनाल्ड ट्रम्प के पिछले एक महीनों के ट्वीट को देखेंगे तो लगेगा कोई सनकी इंसान सिर्फ अपने बाल नहीं नोच रहा है, बाकी सारी हरकतें जारी हैं। दूसरी तरफ जो बिडेन को इस बीच भारी बढत चुनाव आधारित रेटिंग में मिली हैं, जबकि एक महीने पहले तक इस मामले में डोनाल्ड ट्रम्प का पलड़ा लगातार भारी था।

इस बीच न्यूयॉर्क के गवर्नर देश में अभी भी पर्याप्त मात्रा में टेस्टिंग, कांटेक्ट ट्रेसिंग और पीपीई उपकरण डॉक्टरों और नर्स समुदाय के पास नहीं हैं। न्यूयॉर्क को यहां तक पहुंचने में भारी कीमत चुकानी पड़ी है, लेकिन अन्य राज्यों को अब इस स्थिति से दो चार होना पड़ रहा है।

कोमो के अनुसार “इन राज्यों की गलती ये है कि ये राष्ट्रपति की सुन रहे हैं।न” जबकि अपने राज्य में भारी संख्या में इकट्ठा होने वाले लोगों पर बरसते हुए वे उन्हें “मूर्ख और लापरवाह” इंसान करार देते हैं।

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