Wednesday, October 20, 2021

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अनिल अंबानी के पास विदेशों में 1.3 अरब डॉलर की कंपनियां, सचिन तेंदुलकर समेत 300 भारतीयों का नाम पेंडोरा पेपर्स जांच में शामिल

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नई दिल्ली। पेंडोरा पेपर्स जांच में खुलासा हुआ है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खासमखास और रिलायंस एडीए ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी और उनके प्रतिनिधियों के पास जर्सी, ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड्स और साइप्रस जैसी जगहों पर 1.3 अरब डॉलर की 18 विदेशी कंपनियां हैं। जबकि फरवरी 2020 में लंदन की एक अदालत को अनिल अंबानी ने बताया था कि उनकी कुल आय जीरो है। गौरतलब है कि चीन के तीन सरकारी बैंकों ने उन के ख़िलाफ़ लंदन की अदालत में मुक़दमा किया था, जिसकी सुनवाई के दौरान अदालत ने अनिल अंबानी को यह आदेश दिया था कि वो बैंकों को 716 मिलियन डॉलर की रकम का भुगतान करें। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और कहा कि उनके पास विदेशों में न तो कोई संपत्ति है और न ही कहीं से कोई फायदा हो रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस द्वारा पेंडोरा पेपर्स की जांच में यह खुलासा हुआ है कि रिलायंस एडीए ग्रुप के चेयरमैन और उनके प्रतिनिधियों के पास जर्सी, ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड्स और साइप्रस जैसी जगहों पर कम से कम 18 विदेशी कंपनियां हैं।

अनिल अंबानी और उनके क़रीबियों की सभी 18 कंपनियों का लेखा जोखा

जर्सी में Batiste Unlimited (500 मिलियन डॉलर) , Radium Unlimited0 (220 मिलियन डॉलर ), Hui investment Unlimited, Summerhill Ltd, Dulwich Ltd, (33 मिलियन डॉलर), Laurence Mutual ( formerly Divertment Ltd), Richard Equity Ltd ( formerly Airtight Ltd), German Equity Limited (formerly Clef Ltd) (तीनों का 547.5 मिलियन डॉलर) नाम से कंपनियां हैं।

ब्रिटिश वर्जिन में Reinders Holdings Ltd, Northern Atlantic Consultancy service Group Unlimited, Northern Atlantic Investments Unlimited , Trans-Pacific Holdings Pvt Ltd, Trans-Atlantic Holdings Pvt Ltd, (500 मिलियन डॉलर) Trans American Holdings Pvt Ltd कंपनियां रजिस्टर्ड हैं।

साइप्रस में AAA Enterprises And Ventures Pvt Ltd, AAA telecom Holdings Pvt Ltd, AAA infrastructure investments Pvt Ltd नाम से कंपनियां रजिस्टर्ड हैं।

उपरोक्त सभी कंपनियों की स्थापना साल 2007 से 2010 के बीच हुई थी और इनमें से सात कंपनियों ने कम से कम 1.3 बिलियन डॉलर का निवेश और ऋण प्राप्त किया था। जर्सी में अनिल अंबानी के नाम पर तीन कंपनियां– बैटिस्ट अनलिमिटेड, रेडियम अनलिमिटेड और ह्यूई इनवेस्टमेंट अनलिमिटेड रजिस्टर्ड हैं। और इन कंपनियों को दिसंबर 2007 और जनवरी 2008 में बनाया गया था।

किस कंपनी के पास किसका मालिकाना हक़

बैटिस्ट अनलिमिटेड का मालिकाना हक रिलायंस इनोवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के पास है, जिसकी कमान अनिल अंबानी के मालिकाना हक वाली एडीए ग्रुप कंपनी के पास है। ह्यूई इनवेस्टमेंट अनलिमिटेड के मालिक का नाम एएए एंटरप्राइस लिमिटेड है (जिसे 2014 से रिलायंस इंसेप्टम प्राइवेट लिमिटेड कहा जाता है) जिसकी प्रमोटर कंपनी रिलायंस कैपिटल है।

इंडियन एक्सप्रेस की जांच में पता चला है कि जनवरी 2008 में जर्सी में ही दो और कंपनियां गठित की गईं जिनके नाम- समरहिल लिमिटेड और डलविच लिमिटेड हैं। इनके मालिक का नाम अनूप दलाल है, जो कि अनिल अंबानी के प्रतिनिधि हैं। इनके नाम पर एक और बीवीआई कंपनी है, जिसका नाम रींडियर होल्डिंग्स लिमिटेड है। यह कंपनी इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट का काम करती है।

लॉरेंस म्यूचुअल, रिचर्ड इक्विटी लिमिटेड और जर्मन इक्विटी लिमिटेड नाम की तीन कंपनियां भी जर्सी में ही हैं और जेनेवा का एक वकील इनका मालिक है। रिकॉर्ड की जांच से खुलासा हुआ है कि इन कंपनियों को सर्विस देने वाली सात फर्म्स को रिलायसं/अनिल अंबानी की गारंटी पर निवेश के लिए ऋण भी मिला था। इस निवेश के पैसे को दूसरी कंपनियों को बतौर ऋण देकर घुमाया गया था।

इंडियन एक्सप्रेस की जांच में हुये कुछ प्रमुख लेन-देन का खुलासा

बैटिस्ट अनलिमिटेड और रेडियम अनलिमिटेड के रिकॉर्ड्स से पता चला है कि इन कंपनियों ने 500 मिलियन डॉलर और 220 मिलियन डॉलर का कर्ज आईसीआईसीआई से लिया था। इस रकम से एएए कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड के लिए सीसीपीएस (कंपलसरी कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर्स) लेना था। यह अनिल अंबानी से जुड़ी मुंबई की एक रियल एस्टेट कंपनी है। जबकि डलविच ने यूनाइटेड किंगडम के रॉकक्लिफ ग्रुप से 33 मिलियन डॉलर लिए थे। इस रकम को सब्सक्रिप्शन एग्रीमेंट के जरिए मॉरीशस के एक प्राइवेट फंड के साथ लिया गया था। इस फंड ने पिपावाव शिपयार्ड में अपना तीन फीसदी हिस्सा बेचा था। 2009-10 से यह अनिल अंबानी द्वारा प्रमोटेड रिलायंस नेवल के पास है।

पेंडोरा पेपर्स में 300 भारतीयों के नाम का खुलासा, सचिन तेंदुलकर भी लिस्ट में

पेंडोरा पेपर्स में 300 भारतीयों के नाम शामिल हैं। जिनमें 60 प्रमुख हस्तियों और कंपनियों के ऑफसोर होल्डिंग्स की जांच की गई है। पेंडोरा पेपर्स में 11.9 मिलियन यानी 1.19 करोड़ फाइलों के इस लीक में पनामा, दुबई, मोनाको, स्विटजरलैंड और केमन आइलैंड जैसी टैक्स हेवन माने जाने वाले स्थानों पर ट्रस्ट और कंपनियां बनाने के दस्तावेज हैं। इसमें दुनिया के 35 राजनेताओं तथा इनके अलावा उद्योगपतियों और कई अन्य हस्तियों के नाम शामिल हैं।

सचिन तेंदुलकर का नाम भी पेंडोरा पेपर्स में सामने आया है। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार इन पेपर्स में सचिन के साथ उनकी पत्नी अंजली तेंदुलकर, ससुर आनंद मेहता का भी नाम है।

पेंडोरा पेपर्स में मैक्कलुम मार्शल शॉ एक ब्रिटिश सिटिजन हैं और 7630 करोड़ की बायोटेक्नोलॉजी इंटरप्राइज बायोकॉन लिमिटेट की एग्जिक्यूटिव चेयरपर्सन किरन मजूमदार शॉ के पति हैं। इसी साल जुलाई में सेबी ने एलेर्गो कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड और इसके सबसे ज्यादा शेयरधारक कुनाल अशोक कश्यप पर अगले एक साल तक शेयर मार्केट में ट्रेडिंग करने से रोक लगाई थी। हालांकि उस समय सेबी को यह जानकारी नहीं थी कि कुनाल कश्यप जुलाई 2015 में मॉरिशस में बनी ग्लेनटेक इंटरनेशनल द्वारा बनाए गए डीनस्टोन ट्रस्ट के सेटलर हैं। ग्लेनटेक के 99 फीसद शेयर मैक्कलुम मार्शल शॉ के पास हैं और इस कंपनी के पास बायोकॉन के शेयर हैं।

नरेंद्र मोदी के राज में बैकों के करोड़ों रुपये लेकर देश से फरार हुए हीरा व्यापारी नीरव मोदी का नाम भी पेंडोरा पेपर में दर्ज है। जनवरी 2018 में देश छोड़कर भागने से एक महीने पहले ही नीरव मोदी की बहन पूर्वी मोदी ने ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड्स में एक कंपनी बनाई थी। इस कंपनी को ट्राइडेंट ट्रस्ट कंपनी, सिंगापुर के जरिए बनाई गई थी। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार ब्रुकटोन मैनेजमेंट लिमिटेड को दिसंबर 2017 में बनाया गया था।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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