Mon. Sep 16th, 2019

रक्षा क्षेत्र के कर्मचारी कल से एक महीने की हड़ताल पर

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हड़ताल के पोस्टर।

नई दिल्ली। देश के सबसे संवेदनशील क्षेत्र रक्षा में कल से एक महीने की हड़ताल होने जा रही है। 20 अगस्त को शुरू होने वाली यह हड़ताल 19 सितंबर, 2019 तक चलेगी। रक्षा के सिविल क्षेत्र से जुड़े सारे कर्मचारी इस हड़ताल में हिस्सा लेंगे। यह हड़ताल रक्षा उत्पादन इकाइयों के निजीकरण के खिलाफ हो रही है।

दरअसल सरकार ने रक्षा उत्पादन से जुड़ी तमाम फैक्टरियों के निगमीकरण का फैसला ले लिया है और कर्मचारी इसी का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह निजीकरण की दिशा में उठाया गया पहला कदम है। लिहाजा हर कर्मचारी के सिर पर छटनी की तलवार लटक गयी है।

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आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड (ओएफबी) से जुड़े सिविल कर्मचारियों की सभी यूनियनों ने 1 अगस्त को ही इसकी सरकार को नोटिस दे दिया था। ऑल इंडिया डिफेंस इंप्ल्वाईज फेडरेशन के महासचिव सी श्रीकुमार ने उसी समय रक्षा सचिव को इसकी नोटिस दे दी थी।

यूनियनों की सिर्फ एक मांग है। वह यह कि सरकार उनके विभाग के निगमीकरण के फैसले को वापस ले।

आल इंडिया डिफेंस इंप्ल्वाईज फेडरेशन (एआईडीईएफ), आल इंडिया नेशनल डिफेंस वर्कर्स फेडरेशन (एआईएनडीडब्ल्यूएफ) और भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (बीपीएमएस) ने बताया कि 30 जुलाई को इनसे संबंधित सभी यूनियनों ने बैलेट के जरिये रायशुमारी की थी।

जिसमें 75 फीसदी कर्मचारियों ने मतदान में हिस्सा लिया था और इन मतदान करने वालों में तकरीबन तीन चौथाई लोगों ने एक महीने की हड़ताल के पक्ष में समर्थन किया।

श्रीकुमार ने बताया कि देशभर में ओएफबी से जुड़ी 41 फैक्टरियां हैं जो विभिन्न तरह के रक्षा उत्पादन में जुटी हुई हैं।

आपक बता दें कि रक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में कई कमेटियों का गठन किया था जिन्होंने अपनी रिपोर्ट में इन विभागों के निगमीकरण की सलाह दी थी।

फेडरेशन ने अपनी एक विज्ञप्ति में बताया है कि उसे दूसरे हिस्सों से भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है। इस सिलसिले में उसने केंद्रीय कर्मचारियों के एक संगठन का हवाला दिया है। फेडरेशन के प्रवक्ता एम कृष्णन ने बताया कि हड़ताल को लेकर ह्वाट्सएप पर झूठी खबरें फैलायी जा रही हैं। बहुत सारी ऐसी पोस्ट घूम रही हैं जिनमें कहा जा रहा है कि इस तरह की कोई हड़ताल नहीं है। जो न केवल पूरी तरह से झूठ है बल्कि सरकार द्वारा प्रायोजित लगता है। उन्होंने कहा कि इसमें संगठन की वेबसाइट का हवाला तक दिया जा रहा है। जबकि उनका कहना है कि इस सिलसिले में संगठन की वेबसाइट पर तीन दस्तावेज प्रकाशित किए जा चुके हैं।

आपको बता दें कि सरकार के इस फैसले से तकरीबन 40 हजार कर्मचारी प्रभावित होंगे। उनका कहना है कि जैसे बीएसएनएस के साथ हुआ अब वही प्रक्रिया रक्षा क्षेत्र में दोहरायी जा रही है। बीएसएनएल को पहले सरकार से निकाल कर निगम को दिया गया और अब वह बंदी के कगार पर है। कुछ दिनों बाद उसको किसी पूंजीपति के हाथ ढेले के भाव बेंच दिया जाएगा। नेताओं ने इस मौके पर अपनी सभी इकाइयों से बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने की अपील की है।

एक ऐसे समय में जब इस विभाग से जुड़े सैनिक कश्मीर में अपनी जान दांव पर लगाए हुए हैं। देश के बाढ़ पीड़ितों की सहायता में अपना सब कुछ कुर्बान कर देने के लिए तैयार हैं। तब सरकार उनके विभाग के साथ किस तरह से पेश आ रही है यह उसकी खुली नजीर है।

रक्षा उत्पादन इकाइयां रक्षा क्षेत्र की रीढ़ होती हैं। और जब आप उन्हें डिस्टर्ब कर रहे हैं तो समझा जा सकता है कि रक्षा क्षेत्र को कितना कमजोर कर रहे हैं। दरअसल सैनिक लड़ता ही है हथियारों से और यहां हथियारों के उत्पादन की उन इकाइयों से छेड़छाड़ की जा रही है। इस देश में अभी जब कि निजी क्षेत्र में रक्षा से संबंधित एक भी फैक्ट्री नहीं लगायी गयी है तब पूरे क्षेत्र के निजीकरण का यह फैसला इस संवेदनशील क्षेत्र से कितना बड़ा खिलवाड़ है इसको आसानी से समझा जा सकता है। बात-बात में सैनिकों और देशभक्ति का नाम लेने वाली यह सरकार किस कदर कारपोरेट मोह में देश के सबसे संवेदनशील क्षेत्र से छेड़छाड़ कर रही है यह उसका जीता-जागता नमूना है।

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