रक्षामंत्री राजनाथ ने सीधे कहा- चीनी घुसपैठ के पूरे हल की नहीं है गारंटी

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दो दिन के लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के दौर पर गए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह पहले वरिष्ठ नेता हैं जिन्होंने इस बात का संकेत दिया है कि चीन लद्दाख में जारी संकट को पूरी तरह से हल करने के लिए शायद सहमत न हो, उस स्थिति में भारत ताकत का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकेगा।

खूबसूरत पैंगांग त्सो झील के किनारे जो इस समय भारत-चीन संकट के केंद्र में है, लुकिंग में सैनिकों को संबोधित करते हुए भारतीय रक्षा मंत्री ने चेतावनी के लहजे में कहा कि “जहां तक बातचीत की प्रगति (भारत-चीन) है उसके हिसाब से संकट हल हो जाना चाहिए। लेकिन यह किस स्तर तक हल होगा मैं उसकी गारंटी नहीं दे सकता। फिर भी मैं आप को इस बात का भरोसा दिला सकता हूं कि धरती पर कोई भी ताकत भारतीय भूभाग का एक इंच भी छूने या फिर उस पर कब्जा करने की हिम्मत कर सकती है।”

बगैर किसी लाग-लपेट के चीन को चेतावनी देते हुए रक्षामंत्री ने आगे कहा कि “हम शांति चाहते हैं कोई विवाद नहीं। किसी भी देश के आत्मसम्मान को चोट न पहुंचाना हमारा स्वभाव रहा है। लेकिन अगर कोई भारत के आत्मसम्मान को चोट पहुंचाने की कोशिश करता है तो हम लोग उसको किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे और फिर उसका पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा।”

रक्षामंत्री के चेतावनी वाले इस भाषण स्थल की लोकेशन: लुकुंग फिंगर 4 से महज 40 किमी दूरी पर स्थित है। और फिंगर 4 पर ही मई की शुरुआत में चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच तीखी झड़प हुई थी और यहां अभी भी दोनों पक्षों के बीच आमने-सामने गतिरोध की स्थिति बनी हुई है।

अपने दौरे से पहले राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया कि वह, “सीमाओं की स्थितियों की समीक्षा के लिहाज से फारवर्ड इलाके का दौरा कर रहे हैं और उन इलाकों में तैनात सेना के जवानों से बातचीत भी करेंगे”।

राजनाथ सिंह एक ऐसे समय में दौरा कर रहे हैं जब पांच तनाव ग्रस्त इलाकों में से तीन पर बातचीत में डिसएनगेजमेंट मामले में सीमित प्रगति हुई है। और जहां पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के 1962 से मौजूद परंपरागत वास्तविक नियंत्रण रेखा के पार करने के चलते तनाव की स्थिति बनी हुई है।

इसके पहले मंगलवार को 14 घंटे की बैठक चली जिसमें वरिष्ठ भारतीय और चीनी मिलिट्री कमांडरों ने गलवान घाटी (पीपी-14), हॉट स्प्रिंग-गोगरा सेक्टर (पीपी-15 और 17A) और पैंगांग त्सो झील (फिंगर 4) में डिसइनगेजमेंट को लेकर बातचीत की।

अभी तक केवल एक सेक्टर में डिसएनगेजमेंट पूरा हो पाया है वह है गलवान घाटी। जैसा कि बिजनेस स्टैंडर्ड ने 9 जुलाई को ही रिपोर्ट किया था यहां डिसएनगेजमेंट की शर्तों ने चीन को लाभ दिलाते हुए एलएसी को भारतीय क्षेत्र में एक किलोमीटर भीतर धकेल दिया है। परंपरागत एलएसी जो पीपी-14 से होकर गुजरती थी अब प्रभावी रूप से वाई-नल्लाह जंक्शन से होकर गुजरेगी।

इस सप्ताह हॉट स्प्रिंग-गोगरा इलाके में भी कुछ डिसएनगेजमेंट की बात हुई है। पीपी-15 के पास एलएसी पार कर 3-4 किमी भीतर घुस आए तकरीबन 1000 पीएलए सैनिकों में से कुछ को भारतीय दावे वाले इलाके में छोड़कर बाकी वापस चले गए हैं।

पीपी-17A पर भी एलएसी को पार कर घुसने वाले 1500 चीनी सैनिकों में से ढेर सारे सैनिक वापस चले गए हैं लेकिन सैकड़ों सैनिक अभी भी भारतीय दावे वाले क्षेत्र में एक किमी भीतर मौजूद हैं।

पैंगांग त्सो झील के उत्तरी किनारे पर स्थित फिंगर 4 जहां भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तीखी झड़प हुई थी, से सभी वापस जा चुके हैं। यहां चीनी सैनिक फिंगर 5 तक पीछे चले गए हैं। जबकि भारतीय सैनिक तथाकथित धन सिंह पोस्ट तक लौट गए हैं। धनसिंह पोस्ट फिंगर 3 और 2 के बीच स्थित है। अब भारतीय सैनिक उस फिंगर 8 से 10 किमी की दूर चले गए हैं जहां वे पहले अप्रैल में पेट्रोल किया करते थे। उन्होंने फिंगर 3 के पास स्थित भारत-तिब्बत बार्डर पुलिस प्रशासनिक बेस को भी खाली कर दिया है।

इस बीच, कुछ चीनी सैनिक जो ग्रीन टॉप्स इलाके- पैंगांग त्सो के उत्तर का सबसे ऊंचा स्थान- में बंकर बना लिए थे अब वहां से पीछे हट रहे हैं।

फिर भी उत्तर में स्थित देप्सांग सेक्टर में पीएलए की स्थिति में किसी भी तरह का बदलाव नहीं हुआ है। यहां पीएलए के सैनिक एलएसी पार कर भारतीय क्षेत्र में 16-18 किमी भीतर घुस आए हैं। इस सेक्टर में भारतीय सैनिक अब एलएसी पर स्थित पांच पेट्रोलिंग प्वाइंट- पीपी 10, 11, 11A, 12 और 13 तक नहीं पहुंच सकते हैं। अब तक हुई कमांडरों की चार बैठक में चीन ने देप्सांग से पीछे जाने से सीधी-सीधे इंकार कर दिया है।

इसके साथ ही एलएसी से जुड़े अपने सीमा क्षेत्र में भारी चीनी सैनिकों की तैनाती के अपने फैसले को भी वह बदलने के लिए तैयार नहीं है। सेना के एक आकलन के मुताबिक देप्सांग में एलएसी के उस पार 3000-4000 पीएलए सैनिक मौजूद हैं। गलवान से जुड़े एलएसी के उस पार 3000, पीपी-15 और पीपी-17A की दूसरी तरफ 1000-1000 और तकरीबन 3000 खुर्नक फोर्ट और तकरीबन 4000 के आस-पास पैंगांग झील से जुड़ी एलएसी के पार चीनी सैनिक तैनात हैं। इसी तरह से डेमचोक और फुकचे की दूसरी तरफ 4000 चीनी सैनिक मौजूद हैं। इसमें और जोड़ दिया जाए तो पांच अलग से पीएलए के ब्रिगेड समूह भी हैं।

सेना के योजनाकारों का आकलन है कि भारतीय सैनिकों की सीमा पर भारी तैनाती के दबाव के अलावा चीनी डिसएनगेज होने और पीछे जाने को लेकर इसलिए खुला रुख अपनाए हुए हैं क्योंकि वो भारतीय सीमा क्षेत्र के भीतर नो मेंस लैंड बनवाने में सफल हो गए हैं। यानी वह इलाका जो अब तक भारतीय नियंत्रण में हुआ करता था।

मौजूदा समय में डिसएनगेजमेंट की स्थिति: 

(लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) अजय शुक्ला का यह लेख उनके ब्लॉग पर अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ था। इसका यहां हिंदी अनुवाद दिया गया है।)

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