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दिल्ली हाईकोर्ट ने आरकॉम के विरुद्ध कारवाई पर 13 जनवरी तक लगायी रोक

अनिल अंबानी को एक बार फिर न्यायपालिका से फौरी राहत मिली है। अनिल अंबानी की रिलायंस कम्युनिकेशन लिमिटेड (आर.कॉम) और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल) द्वारा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) और इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) में अपने खातों को धोखाधड़ी के रूप में घोषित करने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट ने बैंकों को आदेश दिया है कि वे सुनवाई की अगली तारीख यानी 13 जनवरी, 2021 तक यथास्थिति बनाए रखें।

इसके पहले 17 सितम्बर, 20 को उच्चतम न्यायालय ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसके तहत वह अनिल अंबानी के विरुद्ध बैंकरप्सी प्रक्रिया पर दिल्ली हाईकोर्ट की तरफ से लगाए स्टे ऑर्डर हटाने की वह मांग कर रहा था। दिल्ली हाईकोर्ट ने 27 अगस्त, 20 को अनिल अंबानी के खिलाफ जारी इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) प्रक्रिया पर रोक लगा दिया था।

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की एकल पीठ ने आर.कॉम के पूर्व कार्यकारी निदेशक पुनीत गर्ग के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि केंद्र अपनी जांच एजेंसियों के माध्यम से दोनों कंपनियों के खिलाफ कोई भी कदम उठाने/जांच करने/किसी भी शिकायत को दर्ज करने के लिए स्वतंत्र होगा।

एकल पीठ ने कहा है कि बैंक कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के लिए स्वतंत्र हैं और उसके बाद मामले में आवश्यक सुनवाई की जाएगी। जबकि आर.कॉम के खिलाफ कार्रवाई एसबीआई, यूबीआई और आईओबी द्वारा की गई है। आर.कॉम की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी आरटीएल को एसबीआई और यूबीआई द्वारा रडार पर रखा गया है। अनिल अंबानी की कंपनियों के समूह का विवाद कुछ समय से एक अन्य सहायक कंपनी रिलायंस इंफ्राटेल के साथ चल रहा है, जो दिवालिया होने की कार्यवाही से गुजर रही है और धोखाधड़ी के रूप में भी चिह्नित किया गया है।

आरकॉम और आरटीएल ने इन खातों को धोखाधड़ी के रूप में चिह्नित करने के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक के हालिया कदम को चुनौती दी थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए, एकल पीठ ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे सुनवाई की अगली तारीख तक यथास्थिति बनाए रखें और कोई ठोस कार्रवाई न करें। सुनवाई की अगली तारीख 13 जनवरी 2021 है।

रिपोर्टों के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक ने आरकॉम खाते को धोखाधड़ी के रूप में चिह्नित किया था। इसके अलावा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने आरटीएल खाते को धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत किया है। आरटीएल आरकॉम की 100 फीसद सहायक कंपनी है। एक अन्य आरकॉम सहायक कंपनी, रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड के खाते को भी एसबीआई द्वारा धोखाधड़ी के रूप में चिह्नित किया गया है।

दिसंबर के पहले सप्ताह में एनसीएलटी मुंबई ने रिलायंस इंफ्राटेल के रिज़ॉल्यूशन प्लान को मंजूरी देने के कुछ हफ़्ते बाद बैंकों द्वारा यह कदम उठाया है। अनिल अंबानी के ग्रुप की कंपनी रिलायंस इंफ्राटेल के रिजोल्यूशन प्लान को एनसीएलटी ने कुछ दिन पहले ही मंजूरी दी है। अनिल अंबानी के बड़े भाई मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो ने रिलायंस इन्फ्राटेल के लिए रिजोल्यूशन प्लान दिया था, जिसे एनसीएलटी ने मंजूरी दे दी है। रिलायंस जियो की ओर से दिए गए रिजोल्यूशन प्लान के तहत रिलायंस जियो एक तरह से रिलायंस इन्फ्राटेल का अधिग्रहण कर लेगी, और रिलायंस इन्फ्राटेल के देश भर में 43,000 टावर और 1,72000 किलोमीटर तक बिछी फाइबर लाइन जियो को मिल जाएंगे।

रिलायंस कम्यूनिकेशंस (आर काम) के रिजोल्यूशन प्लान को मंजूरी का इंतजार है। लेंडर्स ने आरकॉम और टेलिकम्युनिकेशन लिमिटेड (आरटीएल) के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दे दी है।अब इन रिजोल्यूशन प्लान को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की मंजूरी का इंतजार है।इन दोनों कंपनियों की बिक्री से बैंकों को 18000 करोड़ रुपए मिलेंगे।

इसके पहले 17सितम्बर 20 को सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की वह याचिका खारिज कर दी थी, जिसके तहत वह अनिल अंबानी के विरुद्ध बैंकरप्सी प्रक्रिया पर दिल्ली हाईकोर्ट की तरफ से लगाए स्टे ऑर्डर हटाने की मांग कर रहा था। अंबानी पहले भी एसबीआई की इस बात का विरोध कर चुके हैं कि वह कॉरपोरेट डेटर्स रेगुलेशंस, 2019 के तहत पर्सनल गारंटी वाली रकम नहीं ले सकता है।

अगस्त में दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में अनिल अंबानी के खिलाफ इनसॉल्वेंसी रेज्योलूशन प्रोसेस पर रोक लगा दी थी। यह मामला 1200 करोड़ रुपए के लोन से जुड़ा है। एसबीआई ने अंबानी की दो कंपनियों को यह लोन दिया था जो नहीं लौटा पाईं। अनिल अंबानी ने अगस्त 2016 में आरकॉम के लिए 565 करोड़ रुपए और रिलायंस इंफ्राटेल के लिए 635 करोड़ रुपए की पर्सनल गारंटी दी थी।

हालांकि अब प्रमोटर की तरफ से 1000 करोड़ रुपए या इससे ज्यादा की पर्सनल गारंटी पर नया नियम लागू हो गया है। नवंबर तक आईबीसी के दायरे में सिर्फ भारतीय कंपनियां आती थीं प्रमोटर नहीं। सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में एसबीआई ने कहा था कि पर्सनल गारंटी जब्त करने के बाद कई प्रमोटर दिल्ली हाई कोर्ट का रुख कर चुके हैं।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on December 30, 2020 11:39 am

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