Wednesday, October 27, 2021

Add News

गरीबों का मुफ़्त इलाज करने वाले डॉ. प्रदीप की बिना ऑक्सीजन के तड़प-तड़प कर मौत

Janchowkhttps://janchowk.com/
Janchowk Official Journalists in Delhi

ज़रूर पढ़े

डॉ. प्रदीप बिजल्वाण की मौत अकेले उनकी मौत नहीं है। 60 वर्षीय डॉ. प्रदीप की मौत हजारों बेघर लोगों की उम्मीदों की मौत है। वह एक दशक से दिल्ली के हजारों बेघरों का मुफ़्त इलाज कर रहे थे। बेघर-मजलूम लोगों की उम्मीदों की मौत इतनी दर्दनाक नहीं होनी चाहिये थी, लेकिन हुई क्योंकि न्यू इंडिया ने गुजरात मॉडल एडॉप्ट कर लिया है। वहां गरीबों के लिए जीने वाले ऐसी ही मौतें मरने को अभिशप्त हैं।

मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने मीडिया से कहा, “एक डॉक्टर होने के नाते, वह जानते थे कि उसके साथ क्या हो रहा है। उन्होंने अस्पतालों में प्रवेश पाने की कोशिश की, लेकिन बिस्तर नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने घर पर खुद का इलाज करने का फैसला किया, लेकिन ऑक्सीजन की कमी से उनके फेफड़े खराब हो गए और उनकी मौत हो गई।”

डॉ. प्रदीप बिजल्वाण ने मंदर के साथ एक स्ट्रीट चिकित्सा कार्यक्रम में लगभग 10 वर्षों तक सहयोग किया, जिसमें वे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ राजधानी के बेघर लोगों को हर रात इलाज देने जाते थे। डॉ. प्रदीप बिजल्वाण ने सच्चे मायने में मजलूम तबके को अपना जीवन समर्पित कर दिया था।

जब डॉ. प्रदीप बिजल्वाण कोरोना संक्रमित हुए तो ऑक्सीजन की कमी के चलते उन्हें अस्पताल की ज़रूरत हुई, लेकिन मल्टीस्पेशलिटी अस्पतालों से भरी राजधानी दिल्ली डॉ. प्रदीप बिजल्वाण को एक अदद बेड तक न मुहैया करवा सकी। ऐसे में डॉ. प्रदीप बिजल्वाण को अपने घर पर ही मौजूद संसाधनों से अपना इलाज करने के लिए विवश होना पड़ा। ऑक्सीजन की कमी के चलते 24 अप्रैल को उनकी कोरोना से मौत हो गई।

एक्टिविस्ट हर्ष मंदर ने बताया कि डॉ. प्रदीप कोविड क्लिनिक में काम कर रहे थे, जो कि स्ट्रीट मेडिसिन प्रोग्राम के तहत खोले गए थे। सितंबर 2020 को काश्मीरी गेट के पास यमुना किनारे गीता घाट और जामा मस्जिद के पास मीना बाज़ार में भी उन्होंने कोविड संक्रमितों का इलाज किया था। कोविड से पहले, वह इन क्लिनिकों में टीवी (तपेदिक) पर चिकित्सा सहायता और सलाह देते आ रहे थे। इसके अलावा डॉ. प्रदीप बिजल्वाण उन 100 बेघर लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल भी कर रहे थे, जिन्हें स्ट्रीट मेडिसिन कार्यक्रम के तहत ‘बुजुर्गों के सेनेटोरियम’ के रूप में स्थापित एक केंद्र में रहने के लिए जगह प्रदान की गई थी। मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर के मुताबिक डॉ. प्रदीप बिजल्वाण संभवतः इन्ही केंद्रों में काम करते समय कोविड-19 से संक्रमित हुए होंगे।

डॉ. प्रदीप ने 1970 के दशक में सोवियत संघ में चिकित्सा का अध्ययन किया था। कोविड संक्रमित होने के बाद उनकी बेटी और पत्नी भी खुद को आइसोलेट करके रह रही हैं। हर्ष मंदर के मुताबिक डॉ. प्रदीप बिजल्वाण की मौत से स्ट्रीट मेडिसिन प्रोग्राम को बड़ा झटका लगा है, लेकिन यह समर्पित नर्सों और हेल्थकेयर वर्कर्स की मदद से जारी रहेगा।

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

नॉर्थ-ईस्ट डायरी: बांग्लादेश में हुई हिंसा के बाद त्रिपुरा में मस्जिदों और अल्पसंख्यक बस्तियों पर विहिप का हमला

बांग्लादेश में हाल ही में दुर्गा पूजा पंडालों में तोड़फोड़ के खिलाफ विहिप की एक रैली के दौरान अगरतला...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -