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चुनाव आयोग बताए हिमंत बिस्वा सरमा पर अपने ही फैसले को क्यों पलटा: कांग्रेस

नई दिल्ली। कांग्रेस ने असम में बीजेपी के मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के प्रचार पर लगाए गए 48 घंटे के प्रतिबंध को कम करके 24 घंटे किए जाने पर कड़ा एतराज जाहिर किया है। इस सिलसिले में पार्टी ने पूछा है कि कांग्रेस की शिकायत पर लिए गए फैसले को पलटने से पहले चुनाव आयोग ने पार्टी को क्यों सूचित करना जरूरी नहीं समझा? इसके साथ ही उसने यह भी कहा है कि फैसला सीधे-सीधे साबित करता है कि आयोग पर सरकार का जबर्दस्त दबाव है।

आज इस सिलसिले में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अश्विनी कुमार ने कहा कि कल इलेक्शन कमीशन ने अपने फैसले में मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर 48 घंटे के प्रचार पर प्रतिबंध लगाया था। गौरतलब है कि आयोग ने यह फैसला इंडियन नेशनल कांग्रेस और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट की शिकायत पर लिया था। और ऐसा मंत्री के खिलाफ सबूतों और तथ्यों के आधार पर किया गया था। कांग्रेस नेता का कहना था कि “आज यकायक हमें ये मालूम हुआ कि इलेक्शन कमीशन ने खुद, बिना कोई इंडियन नेशनल कांग्रेस को नोटिस दिए, अपना फैसला बदल कर 48 घंटे के बैन को 24 घंटे पर तब्दील कर दिया। क्या इसलिए तब्दीली हुई क्योंकि कल होम मिनिस्टर साहब के साथ हिमंत बिस्वा सरमा की पब्लिक रैली है या फिर हिमंत बिस्वा सरमा को पहले ही पता लग गया था कि बैन का समय कम हो जाएगा, इसीलिए आज ट्विटर पर उन्होंने उस रोड़ शो का इनविटेशन दिया है जिसमें वो खुद शामिल होंगे”। 

उन्होंने कहा कि देश की जनता ये जानना चाहती है कि जिस देश की मूल प्रतिष्ठा प्रजातंत्र और लोकतंत्र के साथ जुड़ी है, उस प्रजातंत्र और लोकतंत्र को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी जिस इलेक्शन कमीशन पर है, क्या ये संवैधानिक संस्था अपना रोल पूरी तरह से अदा कर रही है या नहीं?

उनका कहना था कि आज बुनियादी सवाल यह है कि ये केवल एक मंत्री या एक इलेक्शन रैली या एक असेंबली कांस्टीट्यूंसी का नहीं है, सवाल सैद्धांतिक है। क्या इस सिद्धांत को हम मानकर चल रहे हैं कि प्योरिटी ऑफ इलेक्टोरल प्रोसेस हमारे लोकतंत्र के लिए एक अनिवार्य कंडीशन है और अगर ये बात सही है तो इलेक्शन कमीशन का जो ऑर्डर है वो उसकी मर्यादा को कायम रखता है या नहीं? और अगर इलेक्शन कमीशन चूक कर रहा है, तो क्यों चूक कर रहा है? क्या सरकार के दबाव के तहत चूक कर रहा है? क्या कारण है? देश की जनता को ये बात जानने का अधिकार है और इंडियन नेशनल कांग्रेस आपके माध्यम से ये सवाल इलेक्शन कमीशन से कर रही है। 

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसका जवाब उनको देना होगा, नहीं तो आने वाली जो जनरेशन है, जो पीढ़ियां हैं, कहीं उनका लोकतंत्र से और लोकतंत्र की व्यवस्था से विश्वास ना उठ जाए। ये बड़ी चुनौती है। 

उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले पंजाब में राहुल गांधी ने ये कहा था कि हम फ्री और फेयर इलेक्शन में बीजेपी को हरा सकते हैं, पर जब मीडिया और संस्थाएं अपना काम पूरी तरह से नहीं कर रही हों, तो हम अपनी बात लोगों तक कैसे पहुंचाएं। जो-जो बात उन्होंने उस वक्त कही थी, मैं भी ये मानता हूं और कांग्रेस पार्टी ये मानती है कि असली बात आज देश में लोकतंत्र, Freedom of media, freedom of the people, freedom of institutions, ये एक हकीकत है कि नहीं? अगर हमारी institutions of democracy, जो लोकतांत्रिक संस्थाएं हैं, वो खोखली हो गईं, तो फिर हम इस देश में लोकतंत्र को नहीं बचा पाएंगे।

This post was last modified on April 3, 2021 9:25 pm

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