Saturday, February 24, 2024

असम में भाजपा प्रत्याशी की गाड़ी में मिली ईवीएम

असम के करीमगंज में भाजपा उम्मीदवार की कार से ईवीएम मिला है। इस मामले में चुनाव आयोग ने वहां के जिला निर्वाचन अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है। जिस गाड़ी में ईवीएम मिली थी वह कार पाथरकांडी से भाजपा उम्मीदवार कृष्णेंदु पाल की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, ईवीएम लावारिस बोलेरो में मिली थी। चुनाव आयोग की गाड़ी में खराबी आ गई थी, जिसके बाद ईसी के अधिकारियों ने वहां से गुजरने वाली एक कार में ईवीएम मशीन को रख दिया। जिसके बाद पता चला कि जिस कार में ईवीएम रखी गई थी, वो गाड़ी बीजेपी उम्मीदवार की निकली।

एक बात और इस तरह ईवीएम मिलने पर विरोध करने वालों पर प्रशासन ने हमला करने का मुकदमा भी दर्ज़ कर लिया है।

इस संदर्भ में लगातार सोशल मीडिया पर लोग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण घटना का वीडियो रिट्वीट करते हुए लिखते हैं, ” हम जानते थे कि चुनाव आयोग बीजेपी की जेब में है, लेकिन ईवीएम भी उनके पाले में है और निश्चित रूप से नई और बहुत चिंताजनक है! लोकतंत्र कहां है?

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अपने ट्विटर पर इस पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि “क्या स्क्रिप्ट है?

चुनाव आयोग की गाड़ी खराब हुई, तभी वहां एक गाड़ी प्रकट हुई। गाड़ी भाजपा के प्रत्याशी की निकली। मासूम चुनाव आयोग उसमें बैठ कर सवारी करता रहा। प्रिय EC, माजरा क्या है? आप देश को इस पर कुछ सफाई दे सकते हैं? या हम सब मिलकर बोलें EC की निष्पक्षता को वनक्कम?”

पत्रकार रोहिणी सिंह लिखती हैं, “कहानी सुनिए: चुनाव आयोग की गाड़ी अचानक ख़राब हो जाती है, फिर वहाँ किसी मसीहे की तरह देवता का रूप लेकर भाजपा प्रत्याशी की गाड़ी आ जाती है और सकुशल EVM अपनी जगह पहुँचाने में मदद करता है पर अचानक जनता इस पर सवाल खड़े कर देती है? क्या हो गया है इस देश की जनता को? थोड़ी मर्यादा रखिए।”

रोहिणी सिंह के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए विनोद नामक ट्विटर हैंडल ने लिखा है, ” लेकिन पोलिंग बूथ से स्ट्रांग रूम तक ले जाने की जवाबदारी तो पोलिंग स्टॉफ व सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स की है तो यह कैसे संभव हो सकता है, सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स EVM को अकेले नहीं ले जाने देगी, यह नहीं हो सकता, कुछ तो है ?” 

नदीम अहमद नामक ट्विटर हैंडल ने तंज कसते हुए कहा है, “जनता देशद्रोही है

विपक्ष को भाजपा का धन्यवाद करना चाहिए जो सकुशल EVM को गंतव्य तक पहुंचाया।”

अनुज तोमर नामक ट्विटर हैंडल ने एक कदम और बढ़ते हुए लिखा है, ”इतनी गन्दी स्टोरी की स्क्रिप्ट तो विवेक अग्निहोत्री भी डायरेक्ट नहीं करता।” 

सेकंड ओपिनियन ट्विटर हैंडल ने लिखा है, ”ईवीएम के हर लोचे में हमेशा बीजेपी ही क्यों मिलती है। ईवीएम से किसी और का बटन दबाने पर गलती से पर्ची बीजेपी की निकल आना। बीजेपी के गाड़ियों में/घरों में ईवीएम मिलना, सब लोचा है।”

जाट समाज नामक ट्विटर हैंडल से लिखा गया है, “अगर उस भाजपाई नेता की गाड़ी समय पर नहीं पहुंची होती तो बेचारी ईवीएम सकुशल घर नहीं लौट पाती। थैंक्स मोदी जी”। 

वहीं शाहिद ख़ान नामक ट्विटर हैंडल ने निर्वाचन आयोग और भाजपा के मधुर संबंध पर टिप्पणी करते हुए कहा है, “ये कोई इतनी सीरियस बात नहीं है, भाजपा अध्यक्ष की कार की डिक्की में तो इलेक्शन कमिश्नर भी मिल सकता है।” 

जयवर्धने सिंह सरसी लिखते हैं, “पूरे देश से बीजेपी के कार्यकर्ता और नेता इसीलिए असम और बंगाल गए हुए हैं ताकि अगर चुनाव आयोग की गाड़ियां खराब हों तो उनको सही जगह पहुंचाया जा सके!”

मुकेश शर्मा लिखते हैं, “विवेक अग्निहोत्री और अशोक पंडित के लिए अच्छी कहानी है मूवी बनाई जा सकती है। अक्षय और विवेक ओबेरॉय आजकल फ्री भी हैं।”

वहीं विक्रम नामक ट्विटर हैंडल ने लिखा है, ”इतनी घटिया कहानी तो सिर्फ दीनदयाल मार्ग में लिखी जा सकती है।” 

नीतेश लिखते हैं, “झूठ बोलने में अब तो झूठ का भी लिहाज़ नहीं रखते। आँखों में बची रहे ज़रा सी शर्म, अब तो इसका भी ख्याल नहीं करते।”

वहीं प्रमेश कुमार फर्शोया तंज करके लिखते हैं, “पुलिस रेड डालती है। लेकिन नोट 2000 के असली थे। इसलिए छोड़ दिया।”

वहीं देवेंद्र मिश्रा नामक हैंडलर ने कहा है कि “लोकतंत्र का आठवां अजूबा है भारतीय चुनाव आयोग!”

नौशाद आलम पूछते हैं, ”1 अप्रैल कल था। फिर आज क्यों मूर्ख बना रहे हैं ये लोग।” 

संदीप सिंह राजदान कहते हैं -” असम के बीजेपी नेता के कार में इ वी एम मशीन मिला अगर शाहजी के कार के डिग्गी खोल लें तो मुख्य चु ### अंदर बैठा मिलेगा।”

ईवीएम पर जब भी सवाल उठा निर्वाचन आयोग बचाव में खड़ी रही 

पिछले 7 साल में तमाम मौकों पर ईवीएम से मतदान कराने पर सवाल उठता आया है। लगभग सभी विपक्षी दलों ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है। जन सामान्य के बात भी ईवीएम के बारे में यही धारणा है कि ईवीएम के रहते भाजपा को कोई हरा नहीं सकता।

इतना ही नहीं कई मौकों पर ये भी पाया गया है कि किसी ईवीएम में कोई भी बटन दबाने पर वोट भाजपा को पड़ता है। लेकिन हर बार जब भी ईवीएम टेंपरिंग की बात हुई है निर्वाचन आयोग ने सवाल उठाने वाले को ही टेंपरिंग करके दिखाने को कहा है।

वहीं निर्वाचन आयोग ने ईवीएम पर उठने वाले सवालों को रोकने के लिए नये नियम बनाये। चुनाव नियमों की धारा 49 एमए के अनुसार यदि कोई व्यक्ति ईवीएम में विसंगति के संबंध में शिकायत (किसी विशेष पार्टी लिए वोट किया लेकिन किसी अन्य को चला गया) करता है और जांच के बाद यह गलत पाया जाता है तो शिकायतकर्ता पर ‘गलत जानकारी देने के लिए’आईपीसी की धारा 177 के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। इस धारा के तहत छह महीने की जेल या 1,000 रुपये जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।) 

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