Friday, January 27, 2023

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस पर सवालों की बौछार, कातिल इंस्पेक्टर पर 302 की मांग लेकर जनवादी संगठनों का डेरा

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मनराजपुर (चंदौली)। उत्तर प्रदेश में चन्दौली जिले के मनराजपुर में पुलिसिया दबिश के दौरान हुई बेकसूर निशा यादव की मौत से जनपद अब भी सुलग रहा है। एक ओर सूबे के मुखिया योगी राज में सुराज यानी कुशल न्यायिक-कानूनी सिस्टम का दावा करते हैं। वहीं बहन-बेटियों के साथ चंदौली में घर और सीतापुर में थाने में पुलिसकर्मियों द्वारा किए गए जघन्य अपराध योगी के दावों के सच को बेनकाब करते हैं। लोग अभी भी अपने इलाके में शादी से चंद दिन पहले हुई निशा की मौत के गम से नहीं उबर सके हैं। वे इस कदर दुखी हैं कि खुले तौर पर विरोध जाहिर कर रहे हैं। अब तक आरोपी पुलिसकर्मियों को सीखचों में नहीं घसीटे जाने से नागरिकों और प्रदर्शनकारियों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है। सिस्टम की यह लापरवाही इस बात कि तस्दीक करती है कि जांच तो एक बहाना है। असली बात मामले की लीपापोती करना है। लिहाजा, दर्जन भर से अधिक राजनीतिक, सामाजिक और जनवादी संगठन निशा को न्याय दिलाने के लिए आर-पार की जंग में कूद चुके हैं। इनको ग्राउंड पर जन समर्थन भी मिलता हुआ दिख रहा है।

यही कोई दो सौ या अधिक से अधिक तीन सौ मीटर दूर चन्दौली जिला अधिकारी कार्यालय से व ठीक बनारस-कोलकाता हाईवे से सटा है धरना स्थल। हवा बंद है और सिर पर चिलचिलाती धूप। धरना स्थल पर कोई भी अचानक कहीं से नहीं जा सकता है। इसलिए कि हाईवे से गुजरा करीब चार फीट का नाला अधिकांश जगहों पर उठा हुआ है और धरना स्थल की तरफ करीब इतनी ही ऊंचाई की खाईं बनाता है। पूर्वी छोर पर एक जगह नाले को गले तक पाटकर आने-जाने का वैकल्पिक मार्ग बनाया गया है, जहां से मैं भी धरना स्थल में दाखिल हुआ। धरना स्थल पर एक विशाल पीपल के वृक्ष के ओट में टेंट लगा था। सिकुड़ी हुई एक-दो दरियां बाहर तक फैली पसरी हुई थीं और कई जोड़े जूते-चप्पल बिखरे हुए थे, जो इस बात की तस्दीक कर रहे थे टेंट में कई लोग हैं।

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दर्जन भर से अधिक लोग सावधान अवस्था में बैठे थे और अपनी रणनीति के बारे में विचार कर रहे थे कि आज यानी 28 मई 2022 को सैयदराजा थाना क्षेत्र के गांव मनराजपुर से सैयदराजा थाने तक जन आंदोलन आक्रोश मार्च निकलना है। मनराजपुर वही गांव है जहां पुलिसिया दबिश में निशा यादव (गुड़िया) की मौत और गुंजा यादव गंभीर रूप से घायल हो गई थी। कल तक सुरक्षा का भरोसा बने पुलिस वर्दी पर लगे निशा की हत्या आरोपों के धब्बे से आसपास के गांवों में तनाव पनप गया था। चंदौली पुलिस के एसपी ने ममाले की नजाकत को भांपते हुए घर में अकेली बेटियों को पाकर दबिश डालने गया सैयदराजा थाने का इंस्पेक्टर उदय प्रताप सिंह 304 का मुकदमा दर्ज कर अन्य पुलिस कर्मियों कर कार्रवाई भी की।

इधर, पुलिस को ही निशा का हत्यारा मानते हुए आरोपी इंस्पेक्टर उदय प्रताप पर 302 का मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेजने की मांग लेकर कई संगठन अड़े हैं। शनिवार यानी 28 मई 2022 को धरना स्थल चन्दौली पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेलिनवादी), भारतीय किसान मोर्चा,  भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक), अखिल भारतीय प्रगतिशील एसोसिएशन (ऐपवा) और कांग्रेस को छोड़कर सभी विपक्षी दलों का संयुक्त रूप से धरना चल रहा था। टेंट में कोने पर लगी टेबल मृतक निशा यादव की एक तस्वीर रखी हुई थी। अंदर दरी पर बैठे भूख हड़ताल पर बैठे कार्यकर्ताओं से सीपीआई (एमएल) उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव सुधाकर यादव किसी विषय पर चर्चा में मगन थे।

कॉमरेड सुधाकर यादव चन्दौली पुलिस की संदिग्ध कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुए जनचौक से कहते हैं कि “योगी सरकार बेशर्म हो गई है। यहां के पुलिस प्रशासन से न्याय की उम्मीद करना बेईमानी है। गत 14 मई से हमारे कॉमरेड भूख हड़ताल और प्रदर्शन पर बैठे हैं। इस प्रदर्शन को तमाम सामाजिक-राजनीतिक संगठनों ने समर्थन दिया है। दिन के उजाले की तरह यह स्पष्ट है कि इंस्पेक्टर ने हत्या किया है। आप उसको गिरफ्तार क्यों नहीं कर रहे हैं। पूरे मामले की लीपापोती करने में यहां का प्रशासन लगा है। इसलिए लड़ाई लंबी खिंच रही है। लोकतंत्र और न्याय-कानून की रक्षा के लिए लड़ेंगे, चाहे लड़ाई कितनी भी लंबी क्यों न चले ? प्रशासन को न्याय देना होगा। जिला प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई संदिध है। गुंडा एक्ट आप लगा रहे हैं फर्जी मुकदमे लगा रहे हैं। बिना आधार के जिला बदर कर रहे हैं। धारा 107 और 16 में आप गुंडा एक्ट लगा दे रहे हैं। जिला पुलिस प्रशासन को मालूम था कि घर में अकेली दोनों बेटियां है। इसके बाद भी पीट-पीटकर हत्या कर देते हैं। बेशर्म योगी सरकार हो गई है कि इतनी भी क़ानूनी कार्रवाई नहीं कर रही है। हमने होम सेक्रेटरी को चिट्ठी भेजी है। जल्द ही हमारी पार्टी का डेलिगेशन मीट करेगा और हम लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे।”

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अपनी मृतक बेटी की तस्वीर के साथ खड़े कन्हैया


सुधाकर आगे कहते हैं कि “यहां का प्रशासन अपराधियों, माफिया और तस्करों के इशारे पर काम कर रहा है। पूरी तरह से फासिज्म का यह दौर है और इस दौर का मुकाबला किया जाएगा। विपक्षी दलों ने अच्छा रिस्पांस किया है लोग हमारे आन्दोलन को समर्थन दे रहे हैं। किस चीज की जांच कर रहे हैं ? युवती की हत्या कर फांसी के फंदे पर लटका रहे हैं। निशा मामले में जांच से ज्यादा लीपापोती की जा रही है। दो तरह का कानून नहीं चलने दिया जाएगा। सब कुछ प्रशासन और भाजपा के इशारे पर किया जा रहा है। जांच हाईकोर्ट के जज की निगरानी में हो।”  

मिल रही उठवाने की धमकी  

मृतक निशा का छोटा भाई विशाल घर के सामने स्थित मंदिर में पूजा करने गया था विशाल बताते हैं कि “गांव के ही सुनील यादव ने मंदिर में पूजा करने से मना कर दिया। थोड़ी देर बाद मंदिर में अंदर आकर धमकी दे गया। उसने कहा तुमको आठ दिन के अंदर उठवा लेंगे।” इस पर कन्हैया ने बताया कि ” इसकी शिकायत सैयदराजा थाना अध्यक्ष शेषधर पांडेय और एसपी साहब से भी फोन पर की है। पुलिस धमकी देने वाले को खोजते हुए उसके घर भी गई थी। 24 घंटे से अधिक बीत गए अभी कोई रिजल्ट नहीं आया है। पुलिस दूसरी घटना कराके ही दम लेगी क्या….समझ नहीं आ रहा है? धमकी मामले में चन्दौली एसपी ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि “एसएचओ को मैंने निर्देशित किया है, कार्रवाई की भी है शायद। निष्पक्ष जांच के लिए और पीड़ितों की सुरक्षा के लिए पुलिस फोर्स तैनात की गई हैं। जांच को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।”

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अपना ही रिकार्ड तोड़ रहा योगीराज पार्ट टू

अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) की स्टेट सेक्रेटरी कुसुम वर्मा कहती हैं कि “प्रदेश में महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। बिना किसी शिकायत पुलिस घरों के अंदर घुसकर बेटियों को मार रही है। पुलिस को सरकार का पूरा संरक्षण प्राप्त है। सरकार का बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा झूठा है। मनराजपुर हत्याकांड के 20 दिन बाद भी दोषी पुलिस कर्मियों की कोई गिरफ्तारी नहीं की गई। इससे शासन-प्रशासन के मंशा का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसलिए प्रकरण की हाईकोर्ट से निष्पक्ष जांच करायी जानी चाहिए।” मिर्जापुर की ऐपवा नेता जीरा भारती ने कहा कि यूपी पुलिस स्वयं अपराध में लिप्त है। “हाल में सिद्धार्थनगर ललितपुर, चंदौली, गोंडा, आगरा, प्रयागराज की तमाम घटनाओं में पुलिस की संलिप्तता उजागर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में योगीराज-2 में बढ़ते अपराध पिछले सारे रिकार्ड तोड़ रहा है।”

डबल इंजन की सरकार बेटियों की हत्या करा रही है ?

वाराणसी ऐपवा की जिला सचिव स्मिता बागड़े ने कहा कि “80 और 20 की चुनावी राजनीति करके जनता में साम्प्रदयिक जहर भरने वाली भाजपा सरकार का बुलडोजर अब गरीबों और महिलाओं के दमन के लिए घरों में घुस रहा है। योगी सरकार के इस मंसूबे को ऐपवा बर्दाश्त नहीं करेगी।” गाजीपुर की ऐपवा नेता मंजू गोंड ने कहा कि “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नाम पर भाजपा की डबल इंजन की सरकार बेटियों की हत्या करवा रही है। निशा को न्याय दिलाने के लिए आगामी 20 जून को लखनऊ में ऐपवा राज्य स्तरीय धरना देगी। भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष शैलेश कुमार बताया कि “चंदौली पुलिस की लगातार गुंडागर्दी सामने आ रही है। इसे कत्तई बर्दास्त नहीं किया जाएगा। वक्ताओं ने मांग किया कि निशा यादव के हत्या कांड में शामिल दोषी पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी की जाए। इसके अलावा स्थानीय विधायक की मामले में संलिप्तता की जांच करने, मृतका के पिता पर लगाए गए गुंडा एक्ट व जिला बदर की कार्रवाई को वापस लेने, घटना की न्यायिक व सीबीआई से जांच कराने, पीड़ित परिवार को मुआवजा, परिवार में एक सदस्य को नौकरी देने को लेकर आवाज उठाई।”

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निशा ने कथित तौर पर जिस पंखे से लटक कर जान दी थी

सींखचों में हो अपराधी

सकलडीहा ब्लॉक से आए अखिल भारतीय खेत-ग्रामीण मजदूर सभा के जिला कमेटी के सदस्य तूफानी गोंड कहते हैं कि “प्रशासन के लोगों ने मनराजपुर में लड़की की पीटकर हत्या कर दी। प्रशासन के बेशर्म लोग बक्सा का ताला तोड़कर निशा को फंदे पर लटकाकर फरार हो गए। 304 के मुकदमे से कुछ नहीं होगा। आरोपियों पर 302 का मुकदमा हो और जेल भेजा जाए।  प्रशासन का यही हाल रहा तो नागरिक न्याय पाने कहां जाएंगे? कई दिनों से घर नहीं गया हूं। 14 दिनों से यहीं इसी धरना -प्रदर्शन में शामिल हूं”। चकिया के महुअर गांव निवासी व मजदूर सभा के रामबचन पासवान भी यही बात दुहराते हैं और कहते हैं कि ” आरोपी को अब तक सीखचों में होना चाहिए, जो खुलेआम घूम रहा है। मैं चकिया इलाके से 20 से अधिक कॉमरेड को लेकर आया और राज्य सचिव के साथ धरने- प्रदर्शन में शामिल रहा। जब तक आरोपी गिरफ्तार नहीं होते तब तक लड़ाई जारी रहेगी।  

चंदौली में बढ़े हैं लड़कियों-महिलाओं के प्रति अपराध

तीन दिन से लगातार भूख हड़ताल पर बैठे भारतीय किसान यूनियन के वीरेंद्र यादव अर्द्ध मूर्छित अवस्था में धरना स्थल पर लेटे हुए मिले। वे कहते हैं “आरोपी पुलिसकर्मी खुले आम घूम रहे हैं। मांग पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी। विरोध-प्रदर्शन न्याय मिलने तक जारी रहेगा। किसान यूनियन के लोग चैलेंज कर रहे हैं कि प्रशासन निशा यादव को न्याय दे, नहीं तो हम लोग गर्मी के बाद बरसात में भी यहीं बैठे मिलेंगे। धरने में 48 घंटे की भूख हड़ताल पर बैठी सपना का स्वास्थ्य भी बहुत अच्छा नहीं है, हालांकि स्टेट सचिव ने थोड़ी देर बाद खिचड़ी खिलाकर अनशन तोड़वाया। शनिवार को धरनास्थल पर पहले ही दिन आईं रानी मौर्य भी निशा यादव के साथ हुई पुलिसिया बर्बरता से बहुत दुखी हैं। वह कहती हैं कि “इस तरह की घटना का दुहराव नहीं हो, इसके लिए आरोपी पुलिस कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए भेजा जाए। कार्रवाई नहीं होने से चंदौली में महिलाओं और लड़कियों के प्रति अपराध बढ़े हैं।”

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अपनी पार्टी के झंडे के साथ कॉमरेड शशिकांत सिंह

मामले की हो रही लीपापोती, पुलिस पर अस्मत लूटने समेत कई दाग ?

जन अधिकार पार्टी चंदौली के जिला महासचिव भोलानाथ विश्वकर्मा कहते हैं कि “हकीकत सामने है, निशा के मोस्ट मार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण नहीं पता चलता है। जिस तरह की पीएम रिपोर्ट आई है, उससे साफ़ जाहिर होता है कि चन्दौली पुलिस और प्रशासन मामले को उलझा कर लीपापोती में जुटी हुई है। कानून जनता की रखवाली के लिए बनाया गया है। जब पुलिस ही गरीब जनता के साथ गलत करने लगे तो जनता की सुरक्षा के सवाल का क्या होगा? हम लोग निशा को न्याय दिलाने के लिए अपनी पार्टी स्तर से रणनीति बना रहे हैं। भविष्य में चकिया-अकोढ़वा की डॉली मौर्य रेप हत्या और अब निशा यादव की हत्या जैसी घटनाओं का दुहराव न इसके लिए हम सड़क पर उतर कर लड़ेंगे।”  

चंदौली में समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष बलिराम सिंह भी आरोप लगाते हैं, “सैयदराजा इंस्पेक्टर यूपी सिंह हमराहियों के साथ लड़कियों की अस्मत लूटने पहुंचा था। उसे मालूम था कन्हैया की बेटियों के अलावा घर में कोई नहीं है। पुलिस ने एक दिन पहले जब कन्हैया यादव के बड़े बेटे को उठा लिया था। मौका पाकर इंस्पेक्टर यूपी सिंह लड़कियों की इज्जत लूटने के लिए मनराजपुर पहुंचा था। मामला बिगड़ते देख इंस्पेक्टर ने अपने हमराहियों को घर के अंदर बुलाया और दोनों लड़कियों पर लाठियां तोड़नी शुरू कर दी।”

चन्दौली में लूटपाट के लिए मची है होड़

प्रदर्शन में शामिल सीपीआई एमएल चन्दौली जिला सचिव के कॉमरेड शशिकांत सिंह बताते हैं कि ” पुलिस दबिश के नाम पर निशा की हत्या कर देती है। ये जो पूरी घटना है, इसमें सैयदराजा इंस्पेक्टर समेत 40 पुलिसकर्मी शामिल हैं। सभी आरोपियों पर 302 का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया जाए। पूरे उत्तर प्रदेश में हाल ही में चार महिलाओं की हत्या की घटनाएं हुई हैं। पुलिस स्टेट बनाने की योगी की कार्रवाई है। कानून को ताक पर रखने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाजपा का पूरा राज फासीवाद में बदल गया है। कहीं से भी जनता को राहत मिलती नहीं दिख रही है। हम बड़ी जनगोलबंदी कर रहे हैं। पूर्वांचल को घेरना होगा तो घेरेंगे और प्रदेश स्तरीय प्रतिवाद भी कई संगठनों को साथ लेकर राजधानी में करेंगे।”

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एसपी का दावा हकीकत के कितने करीब है ?

पुलिस-प्रशासन पर पुलिसकर्मियों को बचाने और लीपापोती के आरोप पर चंदौली के पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल कहते हैं कि”शासन से 12 मई को सीबीसीआईडी का आदेश आया था। इसके बाद विवेचना और सभी दस्तावेज सीबीसीआईडी के हवाले कर दिया गया था। जांच-पड़ताल के प्वाइंट ऑफ व्यू से हाल ही में सीबीसीआईडी के एडीजी सर भी आए थे। वे भी मौका का मुआयना करके लौटे हैं। सभी जांच चल रही है। जांच सीबीसीआईडी कर रही है। इस जांच पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता, जो भी सिपाही आरोपी हैं उन पर सीबीसीआईडी ही जांच के बाद एक्शन लेगी। कन्हैया और उनके पक्ष के लोगों ने सीबीसीआईडी जांच की मांग की। मैंने इनकी मांग पर जांच के लिए शासन को पत्र लिखा। निशा यादव का पोस्ट मार्टम तीन डोक्टरों की टीम ने किया है। बाकायदा इसकी वीडियोग्राफी हुई है। सब कुछ समय से चल रहा है। इस केस में जिला प्रशासन पूरी तरह से सहयोग कर रहा है। हाल ही में निशा के भाई विशाल को कुछ स्थानीय लोगों द्वारा चार से आठ दिन में उठवाने की धकमी दी गई है। मामला संज्ञान में है। मैंने एसएचओ को निर्देशित किया है, उन्होंने शायद कार्रवाई भी की है। पीड़ित परिवार की सुरक्षा के लिए हमने फोर्स मुहैया कराई है ताकि जांच को किसी प्रकार से प्रभावित नहीं किया जा सके। “

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सैय्यदराजा थाने के पुलिसकर्मी


पुलिस की गुंडई जारी है, अब तक कोई गिरफ्तार क्यों नहीं हुआ ?

चंदौली के सपा जिलाध्यक्ष सत्यनारायण राजभर कहते हैं, “जब नागरिकों की सुरक्षा के झंडाबरदार ही शक के दायरे में आ जाएंगे तो सीधे-सादे ग्रामीण समाज का क्या होगा? पुलिसया जुल्म की शिकार निशा यादव (गुड़िया) की मौत न्याय मांग रही है और योगी सरकार खामोश बैठी है। गंभीर रूप से घायल छोटी बहन गुंजन की हालत नाजुक बनी हुई है।” राजभर यह भी कहते हैं, “कन्हैया की बेटियों ने आखिर सैयदराजा थाना पुलिस का क्या बिगाड़ा था? जांच-पड़ताल कानून के दायरे में करके लौट आना चाहिए था। सत्ता में नंबर बढ़वाने और भाजपा नेताओं को खुश करने के लिए पुलिस ने कन्हैया की बेटियों को इस कदर पीट डाला कि एक की मौत हो गई और दूसरी अस्पताल में जिंदगी व मौत से जूझ रही है। कुछ ही दिन बाद निशा की शादी होनी थी। कन्हैया बालू के कारोबारी थे और वह पुलिस को तय रकम नहीं देते थे। सैयदराजा थाने की पुलिस उनसे चौथ वसूली करना चाहती थी।” “सैयदराजा थाने के इंस्पेक्टर उदय प्रताप सिंह को कन्हैया का तेवर नागवार गुजरता था। पुलिस ने कन्हैया को पहले फर्जी मामले दर्जकर गुंडा एक्ट में निरुद्ध किया और बाद में जान लेने पर उतारू हो गई। पुलिस की दबंगई जारी है, तभी तो इस मामले में अभी तक कोई पुलिसकर्मी गिरफ्तार नहीं हुआ है और हत्या का मामला भी दर्ज नहीं हो सका है।”

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धरना और भूख हड़ताल पर बैठी ऐपवा की महिलाएं

कौन है कन्हैया और क्या है मनराजपुर दबिश कांड

जिला बदर कन्हैया यादव की तलाश में सैयदराजा थाने की पुलिस ने रविवार (01 मई) को उनके घर मनराजपुर में दबिश दी। आरोप है कि दबिश के दौरान कन्हैया यादव की दो बेटियों के साथ पुलिस ने मारपीट की थी। आरोप है कि मारपीट के बाद कन्हैया यादव की बड़ी बेटी निशा की मौत हो गई। निशा की मौत के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस पर हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिसकर्मियों की पिटाई कर दी और ट्रक व एंबुलेंस के शीशे तोड़ दिए थे। हालांकि, घटना के बाद आईजी और डीएम मौके पर पहुंचे और सैयदराजा इंस्पेक्टर को निलंबित कर जांच के निर्देश दिए थे। डीएम ने बताया कि कन्हैया यादव जिला बदर हैं और इस समय बनारस में रह रहे हैं। यहां पर सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर कन्हैया यादव वाराणसी में रह रहे हैं तो पुलिस उनके घर कैसे पहुंची? पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण अज्ञात लिखा गया है। एसपी ने बताया कि मृतका का विसरा सुरक्षित रखा गया है। विसरा को जांच के लिए भेजा जाएगा, जो रिपोर्ट आएगी उसके बाद ही मामले में कार्रवाई की जाएगी। मीडिया में रेप की बात कही जा रही थी, इस संबंध में बता दें कि कोई भी अंदरूनी अंग पर चोट नहीं आई है।

(मनराजपुर, चंदौली से पत्रकार पीके मौर्य की रिपोर्ट।)

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