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वार्ता के सरकारी प्रस्ताव के बाद किसान आंदोलन का नया कार्यक्रम; भूख हड़ताल, थाली बजाने के साथ दूतावासों पर होगा प्रदर्शन

सरकार ने एक बार फिर किसान नेताओं को पत्र लिख कर वार्ता के लिए आमंत्रण भेजा है। रविवार, 20 दिसंबर को कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव और पीएम किसान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विवेक अग्रवाल ने क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शनपाल को चार पन्नों का एक पत्र लिखा है और उसकी प्रतिलिपि विभिन्न किसान संगठनों के 39 प्रतिनिधियों को भेजी गई है। सरकार की ओर से भेजे गये इस पत्र में किसान संगठनों को इससे पहले भेजे गए प्रस्तावों और उससे पहले सरकार की ओर बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान करने की दिशा में किए गए प्रयासों का हवाला देते हुए सरकार ने उनसे फिर वार्ता शुरू करने की अपील की है और इस संबंध में उनके विचार और वार्ता की तिथि बताने को भी कहा गया है।

इस बीच भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हम किसान समूहों से मिलेंगे जो इन तीनों कृषि कानूनों का समर्थन कर रहे हैं, उनसे पूछेंगे कि वे कैसे इन कानूनों से लाभान्वित हो रहे हैं।

बता दें कि, रविवार को पूरे देश में आंदोलन में शहीद हुए 40 किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए सभाएं आयोजित की गई थीं, वहीं आज गाजीपुर बॉर्डर पर 11 किसान भूख हड़ताल पर बैठ चुके हैं। प्रातः 8:00 बजे से भूख हड़ताल शुरू हो चुकी है। कल ही स्वराज के नेता योगेन्द्र यादव ने कहा था कि सोमवार से सभी प्रदर्शन स्थलों पर 24 घंटे का ‘रिले हंगर स्ट्राइक’ शुरू करेंगे।

वहीं भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा था कि, 11 जगहों पर भूख हड़ताल का निर्णय लिया गया है। भारतीय किसान यूनियन ने कहा कि, जब तक आंदोलन चलेगा तब तक हर रोज़ 11 किसान भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

किसान दिवस पर एक वक्त का अन्न त्यागने की अपील

गौरतलब है कि, बीते कल यानी रविवार 20 दिसंबर को मोदी सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ जारी आंदोलन में अब तक शहीद हुए 40 किसानों को श्रद्धांजलि देने के बाद किसानों ने तीनों कानूनों को वापस लेने की अपनी मांग को दोहराते हुए 23 दिसंबर को एक वक्त का भोजन त्याग करने की घोषणा की है। साथ ही देशवासियों से अपील की है कि वे भी किसानों के समर्थन में 23 तारीख को एक वक्त का अन्न त्याग दें।

इस बीच, संयुक्त मोर्चा के रामपाल सिंह ने बताया, “इस संघर्ष को 3-4 महीने हो चुके हैं, पहले हमने ये संघर्ष पंजाब में लड़ा और अब दिल्ली में लड़ रहे हैं। जब तक ये कृषि कानून वापस नहीं होते हम नहीं जाएंगे।”

27 दिसंबर रविवार को ‘मन की बात’ के दौरान थाली बजाने की अपील

किसान नेताओं की ओर से आगामी 27 दिसंबर को ‘मोदी की मन की बात’ प्रसारण के दौरान देश की जनता से थाली बजाने का भी आह्वान किया गया है।

किसान नेता जगजीत सिंह दल्‍लेवाला ने कहा- “आगामी 27 दिसंबर को जब प्रधानमंत्री मोदी ‘मन की बात’ शुरू करें, सभी देशवासी अपने-अपने घरों में थाली बजाना शुरू करें, जब तक वो बोलते रहें तब तक बजाते रहें।”

वहीं, केरल सरकार ने बजट सत्र से पहले 23 दिसंबर को किसान आंदोलन के समर्थन में तीनों कृषि कानूनों को ख़ारिज करने के लिए विधानसभा की विशेष बैठक बुलाने का निर्णय लिया है।

गौरतलब है कि, अपनी जमीन और देश के भविष्य की रक्षा के लिए आंदोलनरत किसानों में से अब तक 40 किसान शहीद हो गये उन्हें रविवार को पूरे देश ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

एआईकेएससीसी ने कहा कि, दिल्ली में चल रहे धरने में शहीद हुए 40 किसानों की श्रद्धांजलि सभा और 22 राज्यों में, 90 हजार विरोध सभाओं में 50 लाख से ज्यादा लोगों की भागीदारी के साथ बनायी गयी।

त्रिपुरा में श्रद्धांजलि सभा पर हुआ हमला

रविवार को त्रिपुरा की राजधानी अगरतला के खयेरपुर में सीपीएम द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बीजेपी के गुंडों ने आकर पीछे से लाठी-डंडों से हमला कर दिया जिसमें कम से कम तीन लोग ज़ख्मी हो गये और कई वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।

सीपीएम नेता हन्नान मोल्लाह द्वारा जारी वक्तव्य के अनुसार, सभा में ऑल इंडिया किसान सभा, त्रिपुरा के राज्य राज्य सचिव सी के सी सदस्य पवित्र कर और अन्य दो किसान यूनियनों के नेता इस सभा को संबोधित करने के लिए उपस्थित थे जब बीजेपी के गुंडों ने हमला किया। बीजेपी के हमलावरों ने पवित्र कर के घर और गाड़ी को भी क्षतिग्रस्त कर दिया है। इन गुंडों ने सभा में उपस्थित महिलाओं को भी नहीं छोड़ा है। शहीद किसानों के लिए शांतिपूर्ण श्रद्धांजलि सभा में बीजेपी द्वारा किये गये इस आतंकी हमले की सीपीएम ने कड़े शब्दों में निंदा की है और अपराधियों के खिलाफ़ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस हमले के विरोध में सीपीएम ने अगरतला में विरोध मार्च निकाला है।

(पत्रकार नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on December 21, 2020 6:42 pm

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