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किसानों ने नहीं खाया सरकार का खाना, साथ ही स्पष्ट कर दिया-कानून रद्द करने के अलावा कोई चारा नहीं

किसान नेताओं और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के बीच आज की वार्ता से खबर है कि नेताओं की ओर से संसद का विशेष सत्र बुला कर इन कानूनों को ख़त्म करने की मांग की गई है।

कृषि कानूनों पर सरकार और किसान यूनियनों के नेताओं के बीच जारी चौथे दौर के वार्ता के बीच किसानों ने दिन में ही साफ़ शब्दों में कह दिया था कि कृ​षि कानूनों में संशोधन से बात बनने वाली नहीं है, कृषि कानून रद्द करने के अलावा कोई और चारा नहीं है। किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी के महासचिव श्रवण सिंह पंढेर ने कहा कि ये बिल किसान विरोधी हैं और सरकार को इन्हें वापस लेना होगा।

इस बीच बताया जा रहा है कि चर्चा के बीच हुए लंच ब्रेक के दौरान किसानों ने सरकार द्वारा दिए गए लंच और चाय तक को स्वीकार नहीं किया। किसानों ने लंच के दौरान अपने साथ लाया खाना ही खाया। किसानों ने बताया, “अभी लंच ब्रेक हुआ है। सरकार ने हमें खाने और चाय का ऑफर दिया था लेकिन हमने मना कर दिया और अपने साथ ले जाए गए लंगर के खाने को ही खाया।”

विज्ञान भवन के अंदर की तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कैसे किसान अपने साथ लाए खाने को ही बांटकर खा रहे हैं।

इस बीच निहंग सिखों का जत्था भी सिंघु बॉर्डर आ पहुंचा है किसानों के समर्थन में। उन्होंने कहा है कि सरकार कृषि कानून वापस ले, वरना हम यहीं रहेंगे।

इधर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल द्वारा पद्म विभूषण लौटने के बाद अब शिरोमणि अकाली दल (डेमोक्रेटिक) के प्रमुख और राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींडसा ने कृषि कानूनों के विरोध में पद्म भूषण लौटाने की घोषणा की।

वहीं केंद्र में बीजेपी के सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल ने कहा कि बीजेपी या किसी और को किसी को भी एंटी नेशनल (देशद्रोही) कहने का हक़ नहीं है और जो इन किसानों को देशद्रोही बोल रहे हैं, वे देशद्रोही हैं। किसान अपना पूरा जीवन राष्ट्र को समर्पित कर देता है। बादल ने आगे सवाल करते हुए कहा कि, यहाँ बुजुर्ग महिलाएं हैं, क्या वे देशद्रोही हैं? क्या वे खालिस्तानी लगते हैं? क्या हमारे देश में किसानों को इसी तरह देशद्रोही कह कर बुलाया जायेगा? यह किसानों का अपमान है। इन्हें एंटी नेशनल कहने की आपकी हिम्मत कैसे हुई?

प्रकाश सिंह बादल द्वारा पद्म विभूषण लौटाए जाने के सवाल पर एएनआई से बात करते हुए सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि, उन्होंने अपना पूरा जीवन किसानों की लड़ाई में गुजार दी है और उन्होंने अवार्ड लौटाकर सरकार को कड़ा सन्देश दिया है। किसानों को ये कानून नहीं चाहिए, सरकार इन कानूनों को क्यों जबरदस्ती थोप रही है किसानों पर?

नये कृषि कानूनों का लगातार बचाव करते हुए प्रधानमंत्री मोदी और उनके तमाम मंत्री और समर्थक यह कह रहे थे कि नये कानूनों से किसान को अपनी फसल अपनी मर्जी से जहाँ मन करे वहां बेचने की आज़ादी होगी। किन्तु अब भाजपा शासित मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह कह रहे हैं कि यदि कोई पड़ोसी राज्यों से प्रदेश में आनाज बेचने आया या बेचने की कोशिश भी की तो उसका ट्रक राजसात करवाकर उसे जे़ल भिजवा दिया जाएगा।

(पत्रकार नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on December 3, 2020 7:28 pm

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