कई राज्यों में फैला किसान आंदोलन, ममता ने दी देशव्यापी आंदोलन की धमकी

जिस किसान आंदोलन का सरकार अब तक पंजाब के किसानों तक सीमित रहने पर सवाल उठाती आ रही थी वो आंदोलन अंतर्राष्ट्रीय फलक पर भी फैलता हुआ दिख रहा है। कनाडा की राजधानी टोरंटो में भी भारत के किसानों के समर्थन और मोदी सरकार के विरोध में प्रदर्शन हो रहा है। बता दें कि कनाडा में बड़ी संख्या में पंजाब से गए पंजाबी मूल के लोग रहते और काम करते हैं।

इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किसानों की मांगें न माने जाने पर राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन छेड़ने की धमकी दी है। ट्वीटों की एक पूरी श्रृंखला के जरिये बनर्जी ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला है।

एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि “मैं किसानों, उनके जीवन और जीविका को लेकर बहुत चिंतित हूं। केंद्र सरकार को किसी भी हालत में किसान विरोधी बिलों को वापस लेना चाहिए। अगर वे इसे तत्काल नहीं करते हैं तो हम सूबे समेत पूरे देश में आंदोलन छेड़ देंगे। बहुत पहले से ही हम इन किसान विरोधी विधेयकों का विरोध कर रहे हैं”।

उन्होंने कहा कि हम देश की संपत्ति को बीजेपी की निजी संपत्ति में बदलने की इजाजत नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार किसानों की मांगें नहीं मानती है तो उन्हें मजबूरन कुछ और कदम उठाने पड़ेंगे।

देश में भी अब किसान आंदोलन का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के बाद अब छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा और आंध्र प्रदेश में किसान सड़कों पर उतर आया है। गुरुवार की सुबह मथुरा से एक जत्था दिल्ली रवाना हुआ है। इसमें महिलाएं भी शामिल हैं। वहीं आंध्रप्रदेश के विजयवाड़ा में रैली में शामिल कई लेफ्ट विंग नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ये रैली इलेक्ट्रिसिटी रिफॉर्म बिल और कृषि कानून के विरोध में दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में आयोजित की गयी थी। पुलिस द्वारा इफ्टू के जनरल सेक्रेटरी के पोलारी और पीडीएसयू के स्टेट प्रेसिडेंट रविचंद्रन को भी हिरासत में लिया गया है।

वहीं उड़ीसा के भुनेश्वर में अखिल भारतीय किसान संघर्ष कमेटी (AIKSCC) द्वारा कृषि कानून के खिलाफ रैली निकालने पर पुलिस के हमले का शिकार होना पड़ा है।   

महागठबंधन भी आया किसानों के समर्थन में

बिहार में महागठबंधन आज आंदोलनरत किसानों के समर्थन में सड़कों पर उतरा। जिसमें राजद, सीपीआई, सीपीआईएम, माले और कांग्रेस के प्रतिनिधि शामिल हुए। महागठबंधन की ओर से बताया गया है कि जब तक किसानों की मांगें नहीं मानी जाती हैं उनका प्रदर्शन चलता रहेगा।

वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि कृषि कानून के मसले पर सरकार और किसान दो अलग-अलग दिशाओं में खड़े हैं। छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के साथ है। ये तीनों कृषि कानून किसान विरोधी हैं और कार्पोरेट के हित में लाए गये हैं। 

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट करके भाजपा के किसान विरोधी चेहरे को उजागर किया है। जो अब तक किसानों को द्रेशद्रोही और खालिस्तान समर्थक बताते आ रहे थे। साथ ही प्रियंका गांधी ने कहा है कि आज बातचीत में सरकार को किसानों को सुनना होगा। किसान कानून के केंद्र में किसान होगा न कि भाजपा के अरबपति मित्र। 

नहीं बदले सरकार के सुर

लेकिन लगता है अभी केंद्र सरकार के सुर ढीले नहीं पड़े हैं तभी तो केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद सिंह अभी भी कार्पोरेट और नये कृषि कानून की तारीफ के पुल बांधते हुये ट्विटर पर लिख रहे हैं कि “नए कृषि कानून से संबंधित कई भ्रम फैलाए जा रहे हैं जिनमें से एक भ्रम यह है कि इस कानून से बड़े कॉर्पोरेट को फायदा और किसानों को नुकसान होगा बल्कि सच्चाई यह है कि कई राज्यों में किसान सफलतापूर्वक बड़े कॉर्पोरेट के साथ गन्ने, कपास, चाय, कॉफी जैसे उत्पादन प्रोड्यूस कर रहे हैं।”

बता दें कि आज दोपहर से ही 35 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों और सरकार के तीन केंद्रीय मंत्रियों के साथ विज्ञान भवन में वार्ता चल रही है। इससे पहले की वार्ता विफल रही थी। सूत्रों के मुताबिक सरकार उन्हीं कृषि कानूनों में सुधार का आश्वासन देकर किसानों को टालना चाहती है जबकि किसान तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करवाने से कम पर राजी नहीं हो रहे।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on December 3, 2020 4:43 pm

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