Tuesday, October 26, 2021

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किसानों ने ठुकराया केंद्र सरकार का प्रस्ताव

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नई दिल्ली। जिस बात की आशंका जतायी जा रही थी आखिरकार वही हुआ। किसानों ने सरकार द्वारा लाए गए प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा की आम सभा की बैठक में यह फैसला लिया गया। डॉ. दर्शन पाल की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि बैठक में तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को पूरी तरह से रद्द करने और सभी किसानों के लिए सभी फसलों पर लाभदायक एमएसपी के लिए एक कानून बनाने की मांग एक बार फिर दोहरायी गयी।

आपको बता दें कि 10वें दौर की बैठक में सरकार ने किसान कानूनों को डेढ़ वर्ष तक के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव रखा था इसके साथ ही उसका कहना था कि एक कमेटी बनायी जाएगी जिसमें सभी पक्षों के लोग शामिल होंगे और फिर उस कमेटी के नतीजों के बाद ही आगे कोई फैसला लिया जाएगा।

सयुंक्त किसान मोर्चा ने इस मौके पर आंदोलन में अब तक शहीद हुए 147 किसानों को श्रद्धांजलि दी। संगठन का कहना है कि इस जनांदोलन को लड़ते लड़ते ये सभी उनसे बिछड़ गए और उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।

पुलिस प्रशासन के साथ हुई बैठक में पुलिस ने दिल्ली में प्रवेश न करने की बात कही। वहीं किसानों ने दिल्ली की रिंग रोड पर परेड करने की बात दृढ़ता और ज़ोर से रखी।

शांतिपूर्ण चल रहा यह आंदोलन अब देशव्यापी हो चुका है। कर्नाटक में अनेक स्थानों पर वाहन रैलियों के माध्यम से किसान गणतंत्र दिवस के लिए एकजुट हो रहे हैं। केरल में कई जगहों पर किसान ट्रैक्टर मार्च निकाल रहे हैं।

उत्तराखंड के बिलासपुर व रामपुर समेत अन्य जगहों पर किसान ट्रैक्टर मार्च कर दिल्ली की किसान परेड की तैयारी कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में किसान 23 जनवरी को राजभवन का घेराव करेंगे और एक जत्था दिल्ली की तरफ भी रवाना होगा।

नवनिर्माण किसान संगठन के किसान दिल्ली चलो यात्रा, जो कि ओडिशा से चली थी, को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा बार-बार परेशान किया जा रहा है। उन्हें रुट बदलने से लेकर बैठकें न करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। किसानों ने कहा कि हम प्रशासन के इस बर्ताव का विरोध करते हैं।

कोलकाता में 3 दिन का विशाल महापड़ाव 20 जनवरी से 22 जनवरी तक होगा। कल हुए विशाल कार्यक्रम में हज़ारों लोगों ने भाग लिया। आने वाले समय में इसके और भी तेज होने की संभावना है।

मजदूर किसान शक्ति संगठन के नेतृत्व में किसान, मजदूर व आम लोग शाहजहांपुर बॉर्डर पहुंच रहे हैं। कठपुतली और गीतों के माध्यम से नव उदारवादी नीतियों का विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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