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भारत न आने के लिए किसान लिखेंगे ब्रिटेन के पीएम को पत्र

मोदी सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का 26 वां दिन है। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति, एआईकेएससीसी ने आज कहा है कि आंदोलन लगातार मजबूती पकड़ रहा है और कल पूरे देश में दोपहर के भोजन का उपवास रहेगा। एआईकेएससीसी ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार किसानों को ठंड में पीड़ित होने देने के उद्देश्य से उनकी मांग नहीं मान रही है- जानबूझ कर कानून रद्द करने की मांग टाल रही है। सरकार कानून वापसी की किसानों की मांग को बंद कान व बंद दिमाग से सुन रही है।

एआईकेएससीसी के वर्किंग ग्रुप ने कहा है कि कृषि मंत्री का पत्र दिखाता है कि सरकार किसानों की 3 नये खेती के कानून रद्द करने की मांग को हल नहीं करना चाहती। समस्या कानून के उद्देश्य में ही लिखी है, जो कहता है कि कारपोरेट को अब कृषि उत्पाद में व्यापार करने का, किसानों को ठेकों में बांधने का और आवश्यक वस्तु के आवरण से मुक्त खाने के सामग्री को स्टाक कर कालाबाजारी करने की छूट होगी, का कानूनी अधिकार देता है। यह भी लिखा है कि इन सभी कारपोरेट पक्षधर व किसान विरोधी पहलुओं को सरकार बढ़ावा देगी।

एआईकेएससीसी ने कहा है कि आज बांद्रा कुर्ला काम्प्लेक्स में अंबानी व अडानी के मुख्यालय पर भारी विरोध आयोजित हुआ जिसमें 15,000 से ज्यादा किसानों ने भाग लिया।

यहां पहुंचे किसानों की भारी भीड़ को एआईकेएससीसी, महाराष्ट्र व पंजाब के नेताओं ने संबोधित किया।

वहीं, केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों के एक समूह ने आज हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को उस वक्त काले झंडे दिखाए, जब उनका काफिला अंबाला शहर से गुजर रहा था।

मुख्यमंत्री का काफिला जब अग्रसेन चौक को पार कर रहा था, तब किसानों ने काले झंडे दिखाए। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद था।

उधर, केरल में कांग्रेस की अगुवाई में य़ूडीएफ ने किसानों के समर्थन में मार्च निकाला।

मोदी सरकार के कृषि कानूनों खिलाफ देशव्यापी आन्दोलन के बीच इन कानूनों को वापस लिए जाने के समर्थन में कांग्रेस ने देश भर से 2 करोड़ लोगों के हस्ताक्षर इकठ्ठा किया है। 24 दिसम्बर को राहुल गांधी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल इन्हें राष्ट्रपति को देने के लिए जायेगा।

एआईकेएससीसी ने कहा है कि विश्व भर में कारपोरेट छोटे मालिक किसानों की खेती की जमीनें छीन रहे हैं और जल स्रातों पर कब्जा कर रहे हैं ताकि वे इससे ऊर्जा क्षेत्र, रीयल स्टेट और व्यवसायों को बढ़ावा दे सकें। इसकी वजह से किसान विदेशी कम्पनियों और उनकी सेवा करने वाली सरकारों के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। भारत में चल रहे वर्तमान आन्दोलन को इसी वजह से दुनिया भर में समर्थन मिला है और 82 देशों में लोगों ने किसानों के समर्थन में प्रदर्शन किये हैं।

किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता स्वर्ण सिंह पंढेर ने कहा कि सरकार ने यह तय कर लिया है कि वह इन कानूनों को वापस नहीं लेगी और बहुत चालाकी के साथ पत्र जारी कर कहा कि, किसान तीनों कृषि कानूनों में संशोधन चाहते हैं और इस पर चर्चा के लिए उन्हें तारीख और समय दिया जाना चाहिए। जबकि यह एक कदम आगे नहीं, यह धूर्तता है। किसी को लग सकता है कि किसान जिद्दी हैं, पर हकीकत यह है कि हम संशोधन नहीं चाहते, हमारी मांग तीनों कानूनों को वापस लेने की है।

सिंघु बॉर्डर से किसान ने कुलवंत सिंह संधू ने कहा कि, 26 जनवरी के लिए मुख्य अतिथि के रूप में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री भारत आने वाले हैं, हम उन्हें पत्र लिख रहे हैं कि जब तक किसानों की मांग पूरी नहीं होती वे भारत न आएं।

वहीँ, आज केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कई किसान संगठनों के नेताओं से मुलाकात की और दावा किया कि उन नेताओं ने नये कृषि कानूनों का समर्थन किया और इसके लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया है। तोमर की किसान संगठनों के साथ हुई बैठक पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए संधू ने कहा कि वो नकली संगठन बनाकर ला रहे हैं, आरएसएस का अपना किसान संगठन है। उनसे मीटिंग क्यों नहीं हुई? हमें कोई जल्दी नहीं है पंजाब और हरियाणा में हमारी गिनती बढ़ रही है। देश में आंदोलन फैल रहा है।

वहीं, इंडियन किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी राम कुमार वालिया ने आज कृषि मंत्री के साथ बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि कानून ठीक है लेकिन जो भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं उनको दूर करने की जरूरत है, 90% किसानों ने कानून नहीं पढ़ा है।

किसान आंदोलन के समर्थन में केरल की पिनराई विजयन सरकार के मंत्रिमंडल ने 23 दिसंबर को विधानसभा की जो विशेष बैठक बुलाने का निर्णय लिया था, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने उसकी अनुमति देने से इंकार कर दिया है।

(पत्रकार नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on December 22, 2020 9:43 pm

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