Saturday, November 27, 2021

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‘फ्रीडम हाउस’ की रिपोर्टः मोदी राज में नागरिकों की स्वतंत्रता में आई गिरावट

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‘भारत में लोगों की स्वतंत्रता पहले से कम हुई है। भारत एक ‘स्वतंत्र’ देश से ‘आंशिक रूप से स्वतंत्र’ देश में बदल गया है।’ उक्त बातें अमेरिकी थिंक टैंक ‘फ्रीडम हाउस’ ने 195 देशों की नागरिक आज़ादी पर अपनी ताजा सालाना रिपोर्ट ‘फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2021’ में कहा है। दरअसल इस रिपोर्ट में ‘पॉलिटिकल फ्रीडम’ और ‘मानवाधिकार’ को लेकर 195 देशों में रिसर्च की गई थी। रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि साल 2014 में भारत में सत्ता परिवर्तन के बाद नागरिकों की स्वतंत्रता में गिरावट आई है।

अमेरिकी संस्था फ्रीडम हाउस हर साल ‘फ्रीडम इन द वर्ल्ड’ नाम से राजनीतिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता पर एक वार्षिक वैश्विक रिपोर्ट जारी करती है। इस रिपोर्ट में पहली जनवरी 2020 से लेकर 31 दिसंबर 2020 तक 25 बिंदुओं को लेकर 195 देशों और 15 प्रदेशों पर शोध किया गया। बड़ी बात यह है कि रिपोर्ट में शामिल 195 देशों में से दो को ही सकारात्मक रेटिंग दी गई।

फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2021 रिपोर्ट 195 देशों और 15 क्षेत्रों में वर्ष 2020 के दौरान स्वतंत्रता की स्थिति का मूल्यांकन करती है। इस रिपोर्ट में दो संकेतकों का प्रयोग किया गया है- राजनीतिक अधिकार (0–40 अंक) और नागरिक स्वतंत्रता (0–60 अंक)। इन अंकों को देशों में व्याप्त स्वतंत्रता की निम्नलिखित स्थितियों के आधार पर प्रदान किया जाता है-
स्वतंत्र (Free), आंशिक रूप से स्वतंत्र (Partly Free), स्वतंत्र नहीं (Not Free)।

‘डेमोक्रेसी अंडर सीज’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की स्थिति में जो तब्दीली आई है, वह वैश्विक बदलाव का ही एक हिस्सा है। रिपोर्ट में भारत को 100 में से 67 नंबर दिए गए हैं, जबकि पिछले वर्ष यानि ‘फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020’ की रिपोर्ट में भारत को 100 में से 71 नंबर दिए गए थे, जबकि उससे पहले यानी ‘फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2019’ रिपोर्ट में भारत को 75 अंक प्राप्त हुए थे।

फ्रीडम हाउस की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2014 के बाद से भारत में मानवाधिकार संगठनों पर दबाव काफी बढ़ गया है। राजद्रोह कानून और मुसलमानों पर हमलों का उल्लेख करते हुए लिखा गया है कि देश में नागरिक स्वतंत्रता की हालत में गिरावट देखी गई है।

रिपोर्ट में भारत के अंक कम करने के पीछे का कारण सरकार और उसकी सहयोगी पार्टियों की ओर से आलोचकों पर शिकंजा कसना बताया गया है। नागरिक स्वतंत्रता की रेटिंग में सबसे बड़े लोकतंत्र भारत को पिछले साल के 60 में से 37 नबंर के मुकाबले इस साल 60 में से 33 नंबर दिए गए हैं, जबकि भारत में राजनीतिक अधिकारों पर दोनों सालों का स्कोर 40 में से 34 ही रहा है।

इस रिपोर्ट में पिछले साल कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए भारत सरकार की ओर से लगाए गए लॉकडाउन की भी चर्चा की गई है। उसमें लिखा है कि सरकार की ओर से पिछले साल लागू किया गया लॉकडाउन ख़तरनाक था। इस दौरान लाखों प्रवासी मजदूरों को पलायन का सामना करना पड़ा।

इससे पहले फ्रीडम हाउस ने ‘फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020′ की अपनी पिछली रिपोर्ट में भारत में नागरिक आज़ादी और राजनीति आज़ादी के परिप्रेक्ष्य में- कश्मीर में शटडाउन, नागरिक रजिस्टर और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के साथ-साथ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों की कार्रवाई को स्वतंत्रता की समाप्ति के मुख्य कारणों के रूप में सूचीबद्ध किया था। फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020’ रिपोर्ट के अनुसार, इन तीन कार्यों ने भारत में विधि के शासन को हिला दिया है और इसकी राजनीतिक प्रणाली के धर्मनिरपेक्ष और समावेशी स्वरूप पर खतरा उत्पन्न कर दिया है।

फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020′ रिपोर्ट में आगे कहा गया है, ‘वर्तमान सरकार ने देश की बहुलता और व्यक्तिगत अधिकारों के लिए अपनी प्रतिबद्धता से खुद को दूर कर लिया है, जिसके बिना लोकतंत्र लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकता है।

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