संसद में बाधा पहुंचा कर राहुल गांधी की बातों पर ही मुहर लगा रही है मोदी सरकार

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नई दिल्ली। देश के संसदीय इतिहास में यह पहली बार है जब सदन को विपक्ष नहीं बल्कि सत्तापक्ष बाधित कर रहा है। सत्तारूढ़ दल के मंत्री और सांसद सदन की कार्यवाही शुरू होते ही हो-हल्ला मचाने लगते हैं और दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित कर दी जाती है। बजट सत्र के दूसरे चरण में संसद का यही नजारा है। चौथे दिन भी सदन की कार्यवाही शुरू होते ही स्थगित कर दी गई। कांग्रेस समेत अधिकांश विपक्षी दल अडानी समूह पर आई हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर बहस और जांच की मांग कर रहे हैं। लेकिन सत्तारूढ़ दल के सदस्य हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर बहस न होने देने के लिए राहुल गांधी की टिप्पणी को मुद्दा बनाते हुए देश को गुमराह करने में लगे हैं।

इस बीच लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को एक पत्र लिखकर सनसनी फैला दी है। बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में चौधरी ने यह आरोप लगाया कि, ‘उनकी मेज पर लगा माइक पिछले तीन दिनों से बंद है।’ और इससे राहुल गांधी के उस बयान की पुष्टि होती है कि ‘भारत में विपक्षी संसद सदस्यों के माइक बंद कर दिए जाते हैं।’

अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को भेजे पत्र में लिखा है कि सदन में ‘सरकार प्रायोजित व्यवधान’ है। चौधरी ने कहा, ‘यह देखकर बहुत दुख होता है कि 13 मार्च, 2023 को सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद से सरकार प्रायोजित व्यवधान जारी है।’ अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ‘मुझे लगता है कि सत्तापक्ष की तरफ से विपक्षी दल के एक सदस्य (राहुल गांधी) की छवि खराब करने की साजिश रची गई है।’ उनका कहना था कि परेशान करने वाली बात यह है कि सरकार के मंत्री सदन में हंगामे की अगुवाई कर रहे हैं।

अभी तक सदन को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी सत्तापक्ष की मानी जाती रही है। सदन में किसी मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव होने पर संसद का बहिष्कार करने या हंगामा करने की स्थिति में संसदीय कार्यमंत्री विपक्षी दलों के नेताओं से मिलकर बीच का रास्ता निकालते थे, सर्वदलीय बैठक होती थी, जिसमें सदन की कार्यवाही चलने पर बात होती थी। लेकिन अब सत्तापक्ष संसद की कार्यवाही को बाधित कर यह अफवाह फैलाने में लगा है कि विपक्ष को संसद और संसदीय परंपराओं की परवाह नहीं है। संघ-बीजेपी सरकार से प्रमुख लोग संसद के अंदर और बाहर इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं मानो सदन को चलाने की जिम्मेदारी विपक्ष की हो। बेशक सदन सत्तापक्ष और विपक्ष के आपसी सहयोग से ही रचनात्मक तरीके से चलता है। लेकिन संघ-बीजेपी सरकार के एजेंडे में सदन को चलाना कम,  सरकारी प्रचार तंत्र बनीं मीडिया के माध्यम से विपक्ष को बदनाम करना ज्यादा है। 

राहुल गांधी ने कैंब्रिज में ‘भारत में लोकतंत्र’ की स्थिति पर जो टिप्पणी की थी, मोदी सरकार एक बार फिर उस पर अमल कर रही है। यह पहली बार नहीं है मोदी सरकार सत्ता में आने के बाद से संसद के अंदर और बाहर लोकतंत्र को कमजोर करने में लगी है। संघ-बीजेपी सरकार देश की संवैधानिक संस्थाओं, विपक्ष और समाज के गरीब, अल्पसंख्यक, महिला, आदिवासी, किसान और छात्रों के अधिकारों को कुचलने में लगी है। ऊपर से मोदी और उनके मंत्रियों का दावा है कि भारत में लोकतंत्र मजबूत हो रहा है।

संघ-बीजेपी सरकार के इस दौर में न केवल विपक्ष को बदनाम किया जा रहा है बल्कि संघ के अलोकतांत्रिक निर्णयों पर सवाल उठाने और जनता के अधिकारों की बात करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, सिविल सोसायटी, यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों पर भी निशाना साध रहे हैं। जजों को अपने पक्ष में करने के लिए कॉलेजियम को बहाना बनाया जा रहा है।

मीडिया में प्रकाशित खबरों के मुताबिक प्नधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट की बैठक में मंत्रियों से कहते हैं कि राहुल गांधी के मुद्दे को उठाइये, इस तरह देखा जाए तो संसद को चलाने में बीजेपी सरकार की कोई दिलचस्पी नहीं है।

अब केंद्रीय मंत्रियों के राहुल गांधी पर दिए गए बयान से बीजेपी-संघ सरकार की मंशा को समझा जा सकता है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर भले ही मौन साधे हों, लेकिन राहुल गांधी के भाषण पर मुखरता का परिचय देते हुए उन्होंने कहा कि, ‘ राहुल गांधी ने देश का अपमान किया है।’

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल तो रक्षा मंत्री से भी आगे निकल गए। उन्होंने कहा कि, ‘राहुल गांधी पर देशद्रोह का केस चलना चाहिए।’

संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने बोले-‘राहुल गांधी ने भारत की संप्रभुता पर सवाल उठाए।’

केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, ‘ राहुल गांधी ने देश को बदनाम किया।’

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि, ‘राहुल गांधी ने एक ऐसे देश में जाकर विदेशी ताकतों का आह्वान किया जिसका इतिहास भारत को गुलाम बनाने का रहा है।’

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि अगर राहुल गांधी कुछ कहते हैं और उनकी वजह से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती हैं तो इस मामले में हम कुछ नहीं कर सकते। लेकिन अगर वे देश का अपमान करेंगे तो एक भारतीय के तौर पर हम चुप नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि राहुल को इस मामले में माफी मांगनी चाहिए।

मोदी के मंत्री राहुल गांधी के भाषण पर तो बयान दे रहे हैं और माफी मांगने की बात कर रहे हैं। लेकिन अडानी समूह में एलआईसी और सार्वजनिक बैंकों के हजारों करोड़ रुपये डूबने पर चुप्पी अख्तियार किए हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि इससे पहले कई मौकों पर पीएम मोदी विदेश जाकर देश के खिलाफ बोले हैं। ऐसे में सवाल ही नहीं उठता है कि राहुल अपने बयान को लेकर माफी मांगें।

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एक ट्वीटर पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें चीन में पीएम मोदी कह रहे हैं-‘पहले लोगों को भारतीय पैदा होने की वजह से शर्मिंदगी होती थी, लेकिन अब गर्व की अनुभूति होती है।’

वहीं दक्षिण कोरिया के दौरे पर पीएम मोदी ने सियोल में अप्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए कहा था, ‘पहले मुझे और तमाम लोगों को शर्म आती थी कि कैसा देश है यह जहां हम पैदा हो गए। जरूर पिछले जन्‍म में कोई पाप किए होंगे, लेकिन अब हमें गर्व है।’

ब्रिटेन में प्रधानमंत्री मोदी कह रहे हैं, “भारतीय डॉक्टर पैसा लेकर दवा लिखते हैं।”

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि जब भी कांग्रेस अडानी मुद्दे को लेकर पार्लियामेंट्री कमेटी बनाने की मांग करती है, तो ध्यान भटकाने के लिए भाजपा सत्र स्थगित करवा देती है। भाजपा को डर है कि कहीं सदन में कोई अडानी का नाम न ले ले।

करीब 16 दिन बाद विदेश से वापस लौटे कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लंदन में दिए अपने भाषण पर संसद के अंदर जवाब देने को तैयार हैं। राहुल गांधी ने कहा कि, सरकार के 4 मंत्रियों ने मेरे ऊपर सदन में आरोप लगाया है तो मेरा हक है कि मैं सदन में अपनी बात रखूं।

कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से तीन दिलचस्प ट्वीट किए गए। ये ट्वीट राहुल गांधी के संसद में पहुंचने की सूचना से संबंधित है।

राहुल गांधी ने कहा कि आज मेरे आने के बाद ही सदन को स्थगित कर दिया गया और मुझे लगता है कि ये मुझे कल भी सदन में बोलने नहीं देंगे। ये पूरा मामला अडानी के मुद्दे से ध्यान भटकाने का है।

बृहस्पतिवार को भी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्ष के सांसदों के साथ सदन के बाहर मानव श्रृंखला बनाई। उन्होंने कहा कि, आज पूरा विपक्ष एकजुट होकर अडानी महाघोटाले में जेपीसी (JPC) की मांग कर रहा है।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि, कभी स्मृति ईरानी 400 रु. के सिलेंडर पर सड़कों पर बैठ जाती थीं, अब चुप हैं। जब चीन ने कानून मंत्री के राज्य में गांव बसा दिया तो वह चुप थे, पर आज वे भी बोले। हम जब भी जेपीसी की बात करते हैं, ये ध्यान भटकाते हैं। यह पहली बार है जब सत्ताधारी दल संसद चलने नहीं दे रहा।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि पीएम मोदी अडानी को बचाने में खुद बहुत कमजोर हो गए हैं।

प्रदीप सिंह https://www.janchowk.com

दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय और जनचौक के राजनीतिक संपादक हैं।

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