‘भगोड़ों का साथ-भगोड़ों का लोन माफ’ भाजपा सरकार का मूलमंत्र’

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नई दिल्ली। बैंकों के भारी भरकम एनपीए से डूब रहे सार्वजानिक क्षेत्र के बैंकों के बकाये को केंद्र सरकार द्वारा लगातार बट्टेखाते में डाला जा रहा है, क्योंकि इनमें से बहुतेरे भाजपा सरकार के मित्र हैं। यह आरोप किसी और ने नहीं बल्कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं सांसद राहुल गांधी ने लगाया है। कांग्रेस ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के समय नरेंद्र मोदी सरकार की ‘जनधन गबन’ योजना का पर्दाफाश हुआ है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आज कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले पर देश को जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक लुटेरों द्वारा पैसा लूटो-विदेश जाओ-लोन माफ कराओ ट्रैवल एजेंसी का पर्दाफाश हो गया है। ‘भगोड़ों का साथ-भगोड़ों का लोन माफ’ भाजपा सरकार का मूलमंत्र बन गया है।

दरअसल प्रमुख आरटीआई कार्यकर्ता साकेत गोखले ने 50 शीर्ष विलफुल डिफाल्टर्स (जानबूझ कर ऋण न चुकाने वाला) के बारे में जानकारी हासिल करने और 16 फरवरी तक उनके ऋण की मौजूदा स्थिति के बारे में जानने के लिए एक आरटीआई आवेदन दाखिल किया था। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने स्वीकार किया है कि उसने 50 शीर्ष विलफुल डिफाल्टर्स के 68,607 करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए हैं। इसमें फरार हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी का नाम भी शामिल है।

इसके बाद देश के कई बड़े पूंजीपतियों के 68,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बट्टे खाते में डाले जाने से जुड़ी खबर को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि कुछ हफ्तों पहले संसद में उनके प्रश्न का उत्तर नहीं देकर, इसी सच को छिपाया गया था। कांग्रेस का दावा है कि 24 अप्रैल को आरटीआई के जवाब में रिज़र्व बैंक ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए 50 सबसे बड़े बैंक घोटालेबाजों का 68,607 करोड़ रुपया ‘माफ करने’ की बात स्वीकार की। इनमें भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी, नीरव मोदी, विजय माल्या के साथ स्वदेशी कारोबारी और योगाचार्य बाबा रामदेव के नाम भी शामिल हैं’।

इसी को लेकर गांधी ने ट्वीट किया कि संसद में मैंने एक सीधा सा प्रश्न पूछा था, मुझे देश के 50 सबसे बड़े बैंक चोरों के नाम बताइए। वित्त मंत्री ने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया। अब आरबीआई ने नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और बीजेपी के कई ‘दोस्तों’ का बैंक धोखाधड़ी की सूची में नाम दिया है। यही कारण है कि यह सच संसद से वापस ले लिया गया था। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने 2014 से सितंबर 2019 तक 6.66 लाख करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए। संसद के बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी ने कर्ज अदा नहीं करने वाले 50 सबसे बड़े चूककर्ताओं के नाम पूछे थे। इस पर सरकार ने कहा था कि केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) की वेबसाइट पर सारे नामों को दिया जाता है और ये नाम वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

प्रमुख आरटीआई कार्यकर्ता साकेत गोखले ने कहा है कि उन्होंने यह आरटीआई इसलिए दाखिल किया, क्योंकि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा पिछले बजट सत्र में संसद में 16 फरवरी, 2020 को पूछे गए इस तारांकित प्रश्न का जवाब देने से इंकार कर दिया था। गोखले ने कहा कि जिस तथ्य का खुलासा सरकार ने नहीं किया, उसका खुलासा करते हुए आरबीआई के केंद्रीय सार्वजनिक सूचना अधिकारी अभय कुमार ने शनिवार 24 अप्रैल को यह जवाब उपलब्ध कराया, जिसमें कई चकित करने वाले खुलासे शामिल हैं।

आरबीआई ने कहा कि इस धनराशि (68,607 करोड़ रुपये) बकाया धनराशि शामिल हैं, और तकनीकी रूप से और विवेकपूर्ण तरीके से इस पूरी राशि को 30 सितंबर, 2019 तक माफ कर दिया गया है। गोखले ने कहा कि आरबीआई ने उच्चतम न्यायालय के 16 दिसंबर, 2015 के एक फैसले का जिक्र करते हुए विदेशी उधारीकर्ताओं पर प्रासंगिक जानकारी मुहैया कराने से इंकार कर दिया।50 शीर्ष विलफुल डिफाल्टर्स की इस सूची में चोकसी की भ्रष्टाचार में फंसी कंपनी गीतांजलि जेम्स लिमिटेड शीर्ष पर है, जिसके ऊपर 5,492 करोड़ रुपये की देनदारी है। इसके अतिरिक्त समूह की अन्य कंपनियां, गिली इंडिया लिमिटेड और नक्षत्र ब्रांड्स लिमिटेड हैं, जिन्होंने क्रमश: 1,447 करोड़ रुपये और 1,109 करोड़ रुपये ऋण लिए थे। चोकसी इस समय एंटीगुआ एंड बारबाडोस आईसलैंड का नागरिक है, जबकि उसका भतीजा और एक अन्य भगोड़ा हीरा कारोबारी नीरव मोदी लंदन में है।

इस सूची में दूसरे स्थान पर आरईआर्ठ एग्रो लिमिटेड है, जिसने 4,314 करोड़ रुपये के कर्ज लिए थे। इसके निदेशक संदीप झुनझुनवाला और संजय झुनझुनवाला एक साल से अधिक समय से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में हैं।सूची में अगला नाम भगोड़े हीरा कारोबारी जतिन मेहता की विनसम डायमंड्स एंड ज्वेलरी का है, जिसने 4076 करोड़ रुपये कर्ज ले रखे हैं, और केंद्रीय जांच ब्यूरो विभिन्न बैंक धोखाधड़ी के लिए इसकी जांच कर रही है। दो हजार करोड़ रुपये की श्रेणी में कानपुर स्थित रोटमैक ग्लोबल प्रा.लि. है, जो प्रसिद्ध कोठारी समूह का हिस्सा है, और इसने 2,850 करोड़ रुपये कर्ज ले रखे हैं। इस श्रेणी के अन्य नामों में शामिल हैं, कुदोस केमी, पंजाब (2,326 करोड़ रुपये), बाबा रामदेव और बालकृष्ण के समूह की कंपनी रुचि सोया इंडस्ट्रीज लिमिटेड, इंदौर (2,212 करोड़ रुपये), और जूम डेवलपर्स प्रा.लि., ग्वालियर (2,012 करोड़ रुपये)।

इस सूची में 18 कंपनियां एक हजार करोड़ रुपये कर्ज वाली श्रेणी में हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख नाम हरीश आर. मेहता की अहमदाबाद स्थित फॉरएवर प्रीसियस ज्वेलरी एंड डायमंड्स प्रा.लि. (1962 करोड़ रुपये), और भगोड़ा शराब कारोबारी विजय माल्या की बंद हो चुकी कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड (1,943 करोड़ रुपये) शामिल हैं। इसके अलावा 25 कंपनियां ऐसी हैं, जनके ऊपर एक हजार करोड़ से कर्ज बकाया हैं। ये 605 करोड़ रुपये से लेकर 984 करोड़ रुपये तक के हैं। ये कर्ज या तो व्यक्तिगत तौर पर लिए गए हैं, या समूह की कंपनियों के रूप में।

गोखले ने कहा कि उनमें से अधिकांश ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रमुख राष्ट्रीयकृत बैंकों को चूना लगाया है और उनमें से कई या तो फरार हैं या विभिन्न जांच एजेंसियों की कार्रवाई का सामना कर रहे हैं और कुछ मुकदमे का सामना कर रहे हैं। इस मामले में कोई भी उद्योग बचा नहीं है, क्योंकि ये 50 शीर्ष विलफुल डिफाल्टर्स आईटी, विनिर्माण, बिजली, स्वर्ण-डायमंड ज्वेलरी, फार्मा आदि सहित अर्थव्यवस्था के विविध सेक्टरों में फैले हुए हैं।

देश के 50 बड़े विलफुल डिफाल्टर्स के 68,607 करोड़ रुपए के कर्ज की बड़ी राशि को बट्टा खाते में डालने के आरबीआई के इस कदम से अब मोदी सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष की ओर से भी मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की गई। मंगलवार को कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले को ‘जनधन गबन’ बताया है। 

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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