Sat. Apr 4th, 2020

“N-95 मास्क और दस्ताने आ जाएं तो उन्हें मेरी कब्र पर भेज देना, ताली और थाली भी बजा देना वहां”

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मध्य प्रदेश में संभावित कोरोना संक्रमित एक डाक्टर।

“एन 95 मास्क और दस्ताने आ जाएं तो कृपया उन्हें मेरी कब्र पर भेज देना। ताली और थाली भी बजा देना वहां! सादर, निराश सरकारी डॉक्टर”- पीड़ा के ये उद्गार हैं हरियाणा की डॉक्टर कामना कक्कड़ के। कामना कक्कड़ ने आज प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और हरियाणा के मंत्री ​अनिल विज को टैग करते हुए अपने ट्विटर हैंडिल पर ये ट्वीट किया है। 

रायपुर छत्तीसगढ़ के अंबेडकर अस्पताल के डॉक्टर अस्पताल में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टरों को पीपीई किट न उपल्बध करवाए जाने से नाराज़ हैं। यहां तक कि उन्हें अस्पताल में सेनेटाइजर के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। इसके लिए स्टाफ ने अस्पताल प्रबंधन से शिकायत की लेकिन उन्हें मास्क तक नहीं उपलब्ध कवाया जा सका। यही हाल उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी का है।

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केजीएमयू में 2 डॉक्टर को COVID-19 की पुष्टि, डॉक्टरों ने काम के बहिष्कार की चेतावनी दी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में दो डॉक्टर कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है जबकि दो अन्य डक्टरों में भी COVID-19 के लक्षण दिखे हैं। इसके बाद केजीएमयू स्टाफ ने पीपीई की कमी के चलते कार्य के बहिष्कार की चेतावनी देते हुए कहा है पहले सुरक्षा किट फिर करेंगे इलाज। बता दें कि केजीएमयू में रोजाना 250-300 संदिग्ध मरीज पहुंच रहे हैं। 

राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट में नर्स की पोस्ट पर कार्यरत और उत्तर प्रदेश नर्सेस एसोसिएशन की महामंत्री शशि सिंह बताती हैं- “ कोई सुविधा नहीं है। एन-95 मास्क तक नहीं है। प्लेन मास्क और प्लेन ग्लव्स एक मिलता है। ये समस्या पूरे उत्तर प्रदेश में है। हमें मजबूर किया जाता है कोरोना और स्वाइन फ्लू के मरीजों को हैंडल करने के लिए कहा जाता है। हमें बोलने से मना किया जा रहा है कि बोलिए मत। ये क्या तरीका है। आप हमसे कोरोना सस्पेक्टेड मरीजों को हैंडिल करवाएंगे और हमें सिर्फ प्लेन मास्क और ग्लव्स देंगे और बोलने भी नहीं देंगे। हम क्यों छुएं। जबकि सब जान रहे हैं कि रिस्क है। क्या ये देश इतना गरीब हो गया है कि हमें पीपीई किट तक नहीं मिल सकती। सबसे पहले ज़रूरी चीजें होनी चाहिए।”

बता दें कि लखनऊ उत्तर प्रदेश के राम मनोहर लोहिया संस्थान में भी लगातार COVID-19 के संदिग्ध मरीज आ रहे हैं लेकिन मेडिकल स्टाफ के लिए सुरक्षा के समुचित इंतजाम न होने के चलते मेडिकल कर्मचारियों ने आंदोलन का मन बना लिया है। उनका स्पष्ट कहना है कि पहले हमें पीपीई किट मुहैया करवाइए तभी हम मरीजों को हाथ लगाएंगे।  

दिल्ली एम्स के डॉक्टर कह रहे हैं कि हमारे पास अपनी सुरक्षा के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। डॉक्टर आदर्श प्रताप के मुताबिक – “कई वार्डों में पीपीई उपकरण जैसे कि गाउन, मास्क, सूट और दस्ताने वगैरह की कमी है।”

नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सर्जरी विभाग के वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. आदर्श प्रताप कहते हैं, “इस कठिन समय में हमें अपनी व्यावसायिक जिम्मेदारी दिखानी होगी।”

बता दें कि डॉक्टर उन डॉक्टर की लिस्ट में शुमार हैं, जो बेहतर सुरक्षा संसाधनों या निजी सुरक्षा उपकरणों की मांग यानि पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) की मांग कर रहे हैं। 

प्रोग्रेसिव मेडिकोज एंड साइंटिस्ट्स फोरम (पीएमएसएफ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और एम्स के पूर्व डॉक्टर डॉ हरजीत सिंह भट्टी कहते हैं – निःसंदेह डॉक्टरों से सबसे पहले संपर्क किया जाता है और हमें सुरक्षित रहने के लिए सुरक्षात्मक उपकरण चाहिए। लखनऊ में एक डॉक्टर की जांच पॉजिटिव मिली है। ऐसा तब हुआ जबकि वह उनकी पूरी टीम पूरी तरह से क्वारंटाइन कर दी गयी थी। मैं डॉक्टरों के लिए जरूरी सक्रिय मानकों में कमी को देखते हुए चिंतित हूं। करीब 7 हजार नर्स और दूसरे सहयोगी स्वास्थ्य कर्मचारी हैं। इनमें टेक्निशियिन, हेल्पर भी शामिल हैं जो मरीजों को स्ट्रेचर आदि लाते-ले जाते हैं। वे भी इंसान हैं और उन्हें भी सुरक्षा चाहिए।”

डॉ. कामना कहती हैं- “जब मेरा लाचार अस्पताल मुझे ​अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी उपकरण मुहैया नहीं करा रहा है तो मैं किसी कोरोना मरीज का इलाज कैसे करूं? ”

इंटर्न डॉक्टरों ने मांगा मास्क तो प्रबंधन ने कहा छुट्टी पर चले जाओ

छत्तीसगढ़, जगदलपुर के मेकाज डिमरापाल में जब इंटर्न डॉक्टरों ने प्रबंधन से मास्क माँगा तो उन्हें छुट्टी पर चले जाने को कहा गया। इस बात से नाराज होकर इंटर्न डॉक्टरों ने काम काज बंद करके हड़ताल कर दिया है। हड़ताली डॉक्टरों ने मेडिकल सुप्रीटेंडेंट को जो शिकायती पत्र भेजा है उसमें कहा गया है कि कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच एन-95 मास्क, हैंड वॉश और सैनिटाइजर की व्यवस्था प्रबंधन को तत्काल करनी चाहिए ताकि ड्यूटी करने वालों के मन में किसी तरह का भय या आशंका न रहे जबकि मेडिकल सुप्रीटेंडेंट ने मामले की गंभीरता को समझे बिना ही टाल दिया।

क्यो ज़रूरी है पीपीई 

चूंकि अभी कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन या प्रॉपर ट्रीटमेंट नहीं ढूंढा जा सका है,अतः ऐसे मामलों में सतर्कता ही एकमात्र उपाय है। कोरोना महामारी से लोगों को बचाने के जीवन रक्षा के लिए डॉक्टरों और उनसे सहयोगी स्टाफ नर्स आदि की जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है।

कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरों के बीच सरकारी अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड बना दिए गए हैं। जहां कोरोना संक्रमण से संभावित लोगों का टेस्ट किया जा रहा है। देश भर के अस्पतालों में डॉक्टरों और नर्सों को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के दिशा निर्देशों पर ट्रेनिंग दी गई है। 

यदि अस्पताल में COVID-19 पोजिटिव का मरीज आता है तो सबसे पहले उसके सैंपल लेने होते हैं। ये नाक और गले से स्वैब स्ट‍िक के सहारे लिए जाते हैं। पहले सैंपल किट की पूरी लेबलिंग की जाती है। उसके बाद संभावित कोरोना पॉजिटिव मरीज से संबंधित सारी डिटेल और उसके परिवार की भी पूरी डिटेल जुटाई जाती है।

लिखा-पढ़ी की सारी तैयारी करने के बाद नर्स पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्ट‍िव एक्व‍िपमेंट किट) पहनकर सैंपल लेती हैं। इस किट में गाउन, बूट, कैप, एन 95 मास्क, ग्लव्स और गॉगल्स होते हैं। उस किट को पहनकर दोनों स्वैब से सैंपल लेकर उसे पोलियो वैक्सीन कैरियर की तर्ज पर तैयार बॉक्स में आइस पैक के साथ रखना होता है।

इटली में COVID-19 से हो चुकी है 23 डॉक्टरों की मौत

केवल इटली में 23 डॉक्टर्स की मौत COVID-19 से हो चुकी है। 

जबकि चीन में भी कई डॉक्टरों की कोरोना से मैत की खबरें आई हैं। 

कोरोना से लड़ने में डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ की अहमियत का अंदाजा इससे लगाइए कि जब 2 दिन पहले क्यूबा से डॉक्टरों का एक दल कोरोना मरीजों के इलाज के लिए इटली पहुँचा तो उनका स्वागत इटली का राष्ट्रगान गाकर किया गया।

कोरोना पॉजिटिव केस होने पर मेडिकल स्टाफ के सामने मरीज के देखभाल की चुनौतियां

पॉजिटिव केस होने पर उसकी केयर के लिए अलग आइसोलेशन रूम में शिफ्ट किया जाता है। उस रूम में पेशेंट को देखने के लिए पीपीई किट पहनकर डॉक्टरों को मेडिकेशन देना होता है तो वहीं नर्सेज को पेशेंट का सारा काम करना होता है। नर्सेज के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी सुरक्षा को देखते हुए पीपीई किट पहनने के बाद कुछ खाना-पीना मुश्किल होता है। ये ड्रेस काफी महंगी होती है लिहाजा इसे एक पूरी शिफ्ट में पहनना होता है, इसके बाद इसे डिस्कार्ड करना होता है।

चीन में जब कोरोना कहर ढा रहा था दुनिया के तमाम देश इस महामारी से लड़ने की तैयारियों में जुटे थे लेकिन भारत की स्थिति इसके बिल्कुल उलट थी। नीरो चैन की वंशी बजा रहा था। 

देश में लगातार कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है और आज की तारीख तक ये बढ़कर 519 तक पहुँच गई है। वहीं दूसरी ओर तमाम मेडिकल संस्थानों के डॉक्टर लगातार पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) की कमी की शिकायतें करते हुए काम का बहिष्कार करने की चेतावनी दे रहे हैं। 

WHO की चेतावनी के बावजूद पीपीई का एक्सपोर्ट करने का कांग्रेस का आरोप     

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पूछा है कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाईजेशन की सलाह के उलट सरकार ने काम क्यों किया। ये खिलवाड़ किन ताकतों की शह पर हुआ ? क्या यह आपराधिक साजिश नहीं है?

राहुल गांधी ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पूछा है कि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाईजेशन की सलाह के उलट सरकार ने काम क्यों किया? राहुल गांधी ने पीएम मोदी से ट्वीट कर पूछा कि आदरणीय प्रधानमंत्री जी, WHO की सलाह, वेंटिलेटर और सर्जिकल मास्क का पर्याप्त स्टाक रखने के विपरीत भारत सरकार ने 19 मार्च को इन सभी चीजों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया।, ये खिलवाड़ किन ताकतों की शह पर हुआ? क्या यह आपराधिक साजिश नहीं है? राहुल गांधी ने इस ट्वीट के साथ उस रिपोर्ट का भी लिंक शेयर किया है जिसमें इस बात का जिक्र किया गया 

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने मोदी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। सुरेजावाला ने ट्वीट के जरिये केंद्र सरकार पर कोरोना की आड़ में काला बाजारी का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने अपने ट्वीट में लिखा, प्रधानमंत्री जी, यह एक माफ नहीं करने लायक अपराध और षड्यंत्र है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि वेंटिलेटर, सर्जिकल/फेस मास्क और मास्क/गाउन बनाने वाले सामान का भंडारण हो।

सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि आप 19 मार्च तक 10 गुना कीमत पर इनके निर्यात करने की इजाजत देते रहे, जबकि एम्स में ये सभी सामान उपलब्ध नहीं हैं। कांग्रेस नेता ने इसके अलावा दो लेटर भी साझा किए जो इन आरोपों से संबंधित थे

WHO की चेतावनी और भारत सरकार

27 फरवरी को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दिशानिर्देश जारी करते हुए बताया था, “दुनियाभर में पीपीई का भंडारण पर्याप्त नहीं है और लगता है कि जल्द ही गाउन और गोगल (चश्में) की आपूर्ति भी कम पड़ जाएगी। गलत जानकारी और भयाक्रांत लोगों की तीव्र खरीदारी और साथ ही कोविड-19 के बढ़ते मामलों के चलते, दुनिया में पीपीई की उपलब्धता कम हो जाएगी।”

 जैसा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों में भी बताया गया है, पीपीई का मतलब है : चिकित्सीय मास्क, गाउन और N-95 मास्क। इसके बावजूद भारत सरकार ने घरेलू पीपीई के निर्यात पर रोक लगाने में 19 मार्च तक का समय लगा दिया। 18 मार्च को जनता कर्फ्यू की अपील करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से अपने घरों की बालकनी से ताली थाली और घंटी बजाकर स्वास्थ्य कर्मचारियों की हौसला अफ़जाई करने को कहा था जबकि इसके एक दिन बाद जाकर भारत सरकार ने देश में निर्मित पीपीई के निर्यात पर रोक लगाई। सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पीपीई की आपूर्ति में संभावित ढिलाई की चेतावनी के तीन सप्ताह बाद ऐसा किया।

सरकार की दलील और हक़ीकत

वहीं सरकार ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक लेटर जारी करते हुए राहुल गांधी के आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि 31 जनवरी को ही निर्यात पर रोक लगा दी गई थी। 

कैरवन की एक रिपोर्ट के मुताबिक -31 जनवरी को भारत में कोविड-19 का पहला मामला सामने आने के बाद, विदेश व्यापार निदेशालय ने सभी पीपीई के निर्यात पर रोक लगा दी थी, लेकिन 8 फरवरी को सरकार ने इस आदेश पर संशोधन कर सर्जिकल मास्क और सभी तरह के दस्तानों के निर्यात की अनुमति दे दी। इसके बाद 25 फरवरी को सरकार ने उपरोक्त रोक को और ढीला करते हुए 8 नए आइटमों के निर्यात की मंजूरी दे दी। यह बिल्कुल साफ है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों के बावजूद भारत सरकार ने पीपीई की मांग का आकलन नहीं किया जिसके परिणाम स्वरूप भारतीय डॉक्टर और नर्स इसकी कीमत चुका रहे हैं और इस संकट का सामना कर रहे हैं।

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था खुद आईसीयू में, कैसे करें कोरोना का मुकाबला 

COVID-19  के खतरे का अंदाजा खुद बिहार एम्स के डॉक्टरों तक को नहीं है सामान्य जन की तो बात ही क्या करें। बता दें कि 21 मार्च को पटना एम्स में एक व्यक्ति की मौत हो गई। पहले अस्पताल प्रशासन ने उसे आइसोलेशन में रखा था, लेकिन मौत के बाद प्रशासन ने उसके शव को वैसे ही सामान्य तरीके से ले जाने दिया, वह भी तब जबकि उसकी कोरोना वायरस की जांच रिपोर्ट तब तक नहीं आई थी। शव मरने वाले के घर मुंगेर चला गया, तब 22 मार्च को सामने आया कि वह कोरोना वायरस से संक्रमित था।

(लेखक सुशील मानव जनचौक के विशेष संवाददाता हैं। और आजकल दिल्ली में रहते हैं।)

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